प्राथमिक चिकित्सा का महत्त्व तथा फर्स्ट ऐड बॉक्स में क्या-क्या होना चाहिए

सभी के लिए प्राथमिक चिकित्सा (first aid) की जानकारी बहुत जरुरी होती है, क्योंकि हमारे जीवन में अचानक दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। कब क्या हो जाए, इसका हमें पता नहीं होता है। जिनके विषय में हम सोच नहीं पाते वे घटनाएँ हमारे साथ हो जाती हैं। जैसे कहीं सही-सलामत जा रहे हैं, अचानक दुर्घटना हो जाना, अचानक ही बुखार आ जाना, जलना, घूमते-फिरते समय किसी जहरीले जानवर द्वारा काट लिया जाना, किसी जंगली जानवर द्वारा चोट लगना, किसी ऊँची जगह से गिर जाना, अचानक ही कान, नाक या आँख में कोई वस्तु गिर जाती है।

इस प्रकार की घटनाओं में रोगी को तुरंत मिलनेवाली सहायता को ‘प्राथमिक चिकित्सा’ (फर्स्ट एड) कहते हैं। यदि दुर्घटना घर में होती है तो उसकी प्राथमिक चिकित्सा घर में ही कुछ विशेष साधनों द्वारा की जा सकती है। डॉक्टर के पहुंचने से पहले दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को दी जाने वाली चिकित्सा सहायता ही “प्राथमिक चिकित्सा’ कहलाती है। प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ यह नहीं है कि वह डॉक्टरी चिकित्सा की आवश्यकता को समाप्त कर देता है परन्तु इसके उद्देश्य डॉक्टरी चिकित्सा से अलग है, जो इस प्रकार है |

प्राथमिक चिकित्सक के मुख्य उद्देश्य

प्राथमिक चिकित्सा का महत्त्व तथा फर्स्ट ऐड बॉक्स में क्या-क्या होना चाहिए First Aid box kit list prathmik chikitsa mahttav

प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड )

  • सर्वप्रथम चिकित्सा : चिकित्सक का यह महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि सबसे पहले रक्तस्राव रोकने की कोशिश करे जिससे शरीर से अधिक रक्त निकलकर घायल की स्थिति अधिक गम्भीर न होने पाए तथा डॉक्टर के आने तक अपनी चिकित्सा जारी रखें। यदि संयोगवश घायल की मृत्यु भी हो चुकी हो तो उसे मृत्यु का निर्णय देने का अधिकार नहीं है। यह बात उसे अच्छी तरह समझनी चाहिए तथा कृत्रिम श्वास आदि की भी चिकित्सा करते रहना चाहिए।
  • सुरक्षित स्थान में लिटाना : घायल यदि असुरक्षित स्थान में हो जैसे-नाली में या बीच सड़क पर, रसोई में, आने-जाने के रास्ते में तो वहां से किसी सुरक्षित व हवादार स्थान में लिटा देना चाहिए। पेशेंट को धूप से बचाना चाहिए एवं आराम देने का प्रयत्न करना चाहिए। भीड़ जमा नहीं होने देनी चाहिए।
  • कृत्रिम श्वास दिलाना : यदि घायल को सांस न आ रही हो तो उपरोक्त चिकित्सा के बाद तुरन्त कृत्रिम सांस दिलवानी चाहिए।
  • उलटी कराना : यदि घायल ने कोई तेजाब या जहर पी लिया हो तो तुरन्त उसे उलटी कराने का उपाय कराना चाहिए। (होंठ, मुंह या हाथ जले होने से जलाने वाले एसिड का अनुमान किया जा सकता है ।
  • हड्डी टूटने की चिकित्सा : यदि घायल के किसी अंग की हड़ी टूटने की आशंका हो तो उस अंग को हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए, बल्कि जिस स्थिति में वह अधिक दर्द का अनुभव न करे, उसे उसी स्थिति में रखना चाहिए, जिससे वहां पर अन्य कोई खराबी या हड्डी अपने स्थान से हटने आदि की स्थिति पैदा न हो।
  • जहर की चिकित्सा : जीव-जन्तु के काटने से विष फैलने की स्थिति में काटे हुए स्थान पर दोनों और कास कर बंद बाँध देना चाहिए जिससे जहर शरीर में ना फैले |
  • डूबे व्यक्ति की चिकित्सा : पानी में डूबे हुए व्यक्ति के पेट में पानी भर जाने से उसकी हालत बिगड़ जाती है, अतः उसके मुंह से कीचड़ आदि निकालकर उल्टा करके उसके पेट का पानी निकालने का प्रयत्न करना चाहिए। यदि श्वास बन्द हो तो कृत्रिम श्वास देनी चाहिए।

प्राथमिक उपचार कब दिया जाता है

  • तुरन्त सहायता : प्राथमिक चिकित्सा का सबसे पहला काम दुर्घटना होते ही तुरन्त कुछ ऐसी आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करना है जिसमें दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की घबराहट दूर की जा सके तथा उसकी स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।
  • जीवन रक्षा करना : प्राथमिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है व्यक्ति की जीवन रक्षा करना। उदाहरण के लिए यदि किसी दुर्घटना के फलस्वरूप शरीर के किसी भाग से रक्तस्राव हो रहा है तो डॉक्टर की उपलब्धि तक सम्भव है की उसके शरीर से इतना रक्त निकल जाए की बाद में डॉक्टर उसे बचाने में असमर्थ हो जाए। ऐसी स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा उसके मृत्यु के संकट को काफी सीमा तक टाला जा सकता है।
  • अस्थाई चिकित्सा : प्राथमिक चिकित्सा केवल उस समय तक के लिए अस्थाई चिकित्सा होती है जिस समय तक डॉक्टरी चिकित्सा आरम्भ नहीं की जाती है। डॉक्टरी चिकित्सा आरम्भ होते ही प्राथमिक चिकित्सा रोक दी जाती है ताकि डॉक्टर घायल व्यक्ति को उचित चिकित्सा दे सके, अत: इसे अस्थाई चिकित्सा ही समझना चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा में फर्स्ट एड बॉक्स की अहमियत

घर में हम सभी को एक फर्स्ट एड बॉक्स रखना चाहिए। जिसमें कुछ आवश्यक चीजें रखी जानी चाहिए; जैसे- एक कैंची, पट्टी या टेप, एक रुई का पैकेट, स्प्रिट की छोटी शीशी या डिटॉल, चिमटी, इसके अलावा उसमें कुछ साधारण दवाइयाँ भी होनी चाहिए; जैसे-पैरासीटामोल की गोली, दर्द निवारक मलहम, एक एंटीसेप्टिक मलहम, डिस्प्रिन आदि।

फर्स्ट एड बॉक्स ऐसी जगह मौजूद होना चाहिए जहाँ हम सभी काम करते हैं; जैसे-किसी फैक्टरी या कारखाने में, बस में, स्कूल में और प्रत्येक घर में तो यह बहुत जरूरी है। जब भी किसी दुघर्टनाग्रस्त व्यक्ति को प्राथमिक सहायता दी जाए तो कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। दुर्घटनाग्रस्त पुरुष, महिला या बच्चे के शरीर से खून तो नहीं निकल रहा है। शरीर में यदि घाव हो गए हैं तो कहाँ-कहाँ, रोगी की श्वास सही चल रही है या नहीं, शरीर का कोई भाग कुचल तो नहीं गया, या शरीर की कोई हड्डी तो नहीं टूटी है। फर्स्ट एड बॉक्स में क्या क्या होना चाहिए आइए, इसके बारे में जाने ये सब उपकरण तथा दवाइयां आधुनिक है जो आसानी से आपको केमिस्ट की शॉप पर मिल जाएगी | परम्परागत चिकित्सा में फर्स्ट ऐड के लिए किन-किन घरेलू चीजो का प्रयोग किया जा सकता है इस विषय पर आगे आने वाले लेख में जानकारी दी जाएगी |

फर्स्ट एड किट लिस्ट – उपकरण (Aid Box Equipments)

  • पतली व चौड़ी पट्टियाँ (Broad and small bandages)
  • जलरोधक बैंडेज Waterproof bandaging
  • बटरफ्लाई क्लोसुरे स्ट्रिप्सButterfly closure strips
  • बैंड एड (Band Aid)
  • साफ रूई रोल (Sterilised Cotton)
  • कैंची (Scissors)
  • सेफ्टी पिन (Safty pin)
  • चिमटियाँ (tweezers)
  • ब्रुश (Brush)
  • फीता (Tape)
  • लकड़ी की खपचियाँ (Splints)
  • विभिन्न नाप के पैड (Pads of different sizes)
  • सूई (Needle)
  • थर्मामीटर (Thermometer)
  • औषधि मापक शीशे का गिलास (Graduated medicine glass)

दवाइयाँ (Medicines)

  • डिटॉल (Dettol)
  • टिंचर आयोडीन (Tincher iodine)
  • आयोडेक्स (Iodex)
  • वॉलिनी या मूव (Volini or Moove)
  • जैतून का तेल (Olive oil)
  • बरनोल (Burnol)
  • सुँघने वाला लवण (Smelling salt)
  • मीठा सोडा (Soda bircarb)
  • लाल दवाई (Potassium Paramangnet)
  • नीली दवाई (Johnson’s violet)
  • गम पेंट (Gum paint)
  • सैफ्रोमाइसिन (Safromycine)
  • दर्दनाशक दवा (Painkiller)
  • जॉनसन बैन्डेज़ (Johnson’s Bandage)
  • अमृतधारा – हैजा, उल्टी व दस्त के लिए।
  • आयोडेक्स – हड्डियों के दर्द के लिए।
  • बरनॉल- जले, कटे पर लगाने के लिए।
  • पुदीन हरा- भोजन न पचने पर
  • ORS – उलटी दस्त होने पर
  • Metoclopramide टेबलेट – उल्टी के लिए
  • बोरिक पॉउडर : आंख सेकने, घाव धोने के लिए।
  • कोडोपायरिन – विभिन्न दर्द के लिए।
  • सिबाजॉल मलहम : चोट व घाव पर लगाने के लिए।
  • बीटाडीन- Betadine फोड़े फुंसी या घाव के लिए
  • ग्लूकोज- गर्मी शान्त करने के लिए
  • फिटकरी- रक्त का बहना रोकने के लिए

आगे आने वाले आर्टिकल्स में हम फर्स्ट ऐड यानि प्राथमिक चिकित्सा को अलग-अलग तरह की चोट या दुर्घटना के अनुसार क्या और कैसे उपचार किया जाए इस विषय पर विस्तार से बतायेंगे |

प्राथमिक चिकित्सा से जुड़े कुछ सवाल और हमारे एक्सपर्ट के जवाब

क्या चोट लगने पर हर बार ही टेटनस का टीका लगवाना चाहिए?

  • नहीं। अगर पहले समय से टेटनस-रोधी टीके लगे हुए हैं तो हर बार यह टीका लगवाने की कोई जरूरत नहीं होती। यदि पहले टीके न लगे हों, तो तुरंत टेटनस-टॉक्सॉयड (टी.टी) का टीका लगवाना जरूरी है। घाव बहुत गंदा हो और टेटनस होने का जोखिम अधिक हो तो डॉक्टरी सलाह होने पर टेटनस-रोधी सिरम का टीका भी अवश्य ले लेना चाहिए। टीटी के पहले टीके के 6 सप्ताह बाद दूसरा और 6 महीने बाद तीसरा टीका लगवाना भी जरूरी है। फिर हर 10 साल बाद टी.टी का बुस्टर टीका लगवाते रहना काफी है।

नकसीर छूटने पर खून बंद करने के लिए क्या प्राथमिक चिकित्सा करनी चाहिए?

  • आराम से बैठ जाएँ और सिर आगे की ओर झुका लें। 10-15 मिनट तक नाक अंगुलियों से भींचे रखें। खून रुकने पर नाक पर दबाव ना बनाएं । अगर खून बंद न हो, तो दोनों नासिकाओं में वैक्सीन से भीगी रुई भर दें। 10-15 मिनट तक नाक दबाए रखें। अब भी नकसीर न रुके तो डॉक्टर से मिलें।

क्या किसी के जहर खा-पी लेने पर उलटी कराना उचित है?

  • जहर लेनेवाला यदि होश में है, तो पता करें कि उसने क्या लिया है। यदि मिट्टी का तेल, पेट्रोल, तेजाब लिया है तो उलटी कराना गलत होगा। कोई दूसरा जहर है तो तुरंत उलटी कराएं। उसे गर्म पानी में नमक घोलकर पिलाएं या उसके गले में उंगली डालें ताकि जहर शरीर में जज्ब होने से पहले ही निकल जाए।

कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार के रूप में क्या करना चाहिए?

  • इसकी प्राथमिक चिकित्सा के लिए घाव को तुरंत चलते पानी और साबुन से अच्छी तरह धो देना चाहिए। झाड़-फूक करने से भी रेबीज का वायरस नहीं मरता। अगर डॉक्टर सलाह दे तो नियम से रेबीज-रोधी टीके लगवाने चाहिए। अधिक जानकारी के लिए यह पढ़ें –  रेबीज के कारण, लक्षण, बचाव, फर्स्ट ऐड और वैक्सीन इलाज

मधुमक्खी के काटने पर क्या प्राथमिक चिकित्सा करनी चाहिए?

  • डंक को चाकू से खुरच दें। उसे दबाकर निकालने की कोशिश न करें। दबाने से डंक त्वचा में अधिक अंदर तक घुसता चला जा सकता है। जहां डंक लगा है, ठीक वहां सोडा या नीली दवा लगाएं। इससे मधुमक्खी का विष ठंडा हो जाएगा। अगर आपको डंक के प्रति एलर्जी है, तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लें।

अगर शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो क्या करना चाहिए?

  • जले हुए अंग को तुरंत पानी में डुबो लें। इससे त्वचा को ठंडक मिलेगी, दर्द से छुटकारा मिलेगा और नुकसान कम होगा। अगर शरीर का कोई छोटा हिस्सा जला है और सिर्फ हल्की लाली है, तो घर पर ही वैस्लीन का लेप लगा दें। बड़ा हिस्सा जल जाए तो चाहे वह सतही हो, किसी बर्न विशेषज्ञ या सर्जन से राय लें। जले अंग पर घी, मलहम, या मिट्टी न लगाएं।

शरीर के किसी हिस्से के जलने से छाले पड़ जाए। तो क्या करना चाहिए?

  • न तो छाले फोड़े, न ही सुई से उन्हें पिचकाने की कोशिश करें। उन्हें साफ-सुथरा रखें और उन पर कोई ऐंटिसेप्टिक ओयेटमेंट जैसे नियोस्पोरिन, सिल्वर सल्फाडायजिन, क्लोरहैक्सीडीन या यूसीडिन लगा लें। छाला फूट जाए तो उस पर ऐंटिसेप्टिक ओयेटमेंट लगाएं और उसे पट्टी से ढक कर रखें।

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