जानिए क्या है क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी जो गंभीर रोगों में दे आपका साथ

Critical illness Insurance Policy क्या है ? – जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जीवन में कभी भी कोई भी दुर्घटना या बीमारी कभी भी हमे घेर सकती है खासकर गंभीर बीमारी निश्चित रूप से उन घटनाओं में से एक है जो न सिर्फ भावनात्मक रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी आदमी को तबाह कर रही है ज्यादातर लोग ऐसी समस्या से निपटने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते है इसलिए वे अंत में या तो अपनी सारी जमा पूंजी गवां बैठते है या अपने किसी प्रियजन को, कुछ लोग तो क्रिटिकल इलनेस के चलते इन दोनों को ही खो देते है | ऐसी ही गंभीर बीमारियों को ध्यान में रखकर क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पालिसी को बनाया गया है | क्रिटिकल बीमारियों में रोज तेजी से इजाफा भी हो रहा है जो स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक तौर पर भी नुकसान दायक है |

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स गंभीर बिमारियों के लिए बीमा

जानिए क्या है क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी जो गंभीर रोगों में दे आपका साथ critical illness insurance india hindi

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स बीमा

साधारण हेल्थ इन्सुरेंस के बारे में हम पहले ही बता चुके है | आज हम गंभीर बिमारियों को कवर देने वाले बीमे के बारे में जानेंगे | बीस से पैंसठ वर्ष की उम्र के उन व्यक्तियों के लिए यह क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी बनी है जिनके पॉलिसी पत्र में पहले से निर्देशित बीमारी को बता दिया जाता है। मरीज जब उस बीमारी की वजह से अस्पताल में भरती हो जाता है, तब एक मुश्त रकम (पहले से तय) देनेवाली यह पॉलिसी है। लेकिन ध्यान रहे कि इस पॉलिसी के अंतर्गत एक निश्‍चित तय की गई रकम ही मिलती है। इसके साथ ही निर्देशित किन्हीं खास बीमारियों में, पूरी सम एश्योर्ड रकम की, पहले से तय रकम मिलने की सुविधा इसमें है जो प्रतिशत में होती है । इस पॉलिसी की चार अलग सीढि़याँ हैं। प्रत्येक सीढ़ी की अलग सम एश्योर्ड (रकम) उपलब्ध है—

  • सीढ़ी-1 ——- 5 लाख रु.
  • सीढ़ी-2 ——–10 लाख रु.
  • सीढ़ी-3——– 20 लाख रु.
  • सीढ़ी-4 ——–25 लाख रु. या इससे भी अधिक

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में ये गंभीर बीमारियों के नाम निम्‍नलिखित हैं

  • हार्ट अटैक (माइक्रोकॉर्डियल इनफ्रक्शन)
  • स्ट्रोक (सेरब्रो-वस्कुलर एक्सीडेंट)
  • कैंसर
  • किडनी फेल्युअर
  • अंगो को बदलना ।
  • पैरालिसिस।
  • जलना।
  • दृष्टिहीनता।
  • कोरोनरी आर्टरी।
  • ओपन हार्ट सर्जरी
  • एर्वोटाग्राफ।
  • कोमा।

यह क्रिटिकल इलनेस की सूची पूरी नहीं है। इन्शुरन्स कंपनियां समय-समय पर कई क्रिटिकल बीमारियों को कवर करती हैं जिस वजह से इसमें निरंतर बदलाव आता रहता है ।

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स से जुड़े कुछ तथ्य

  • क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी लेने के बाद शुरू के 10 दिन वेटिंग पीरियड यानी प्रतीक्षा काल होता है।
  • पॉलिसी लेते समय उम्र के 45 वर्ष के बाद डॉक्टरी जाँच अनिवार्य है।
  • युद्ध, प्राकृतिक आपदा, अथवा, आत्महत्या की कोशिश, शराब तथा ड्रग्ज की वजह से हुई बीमारी अथवा दुर्घटना, प्रेग्नेंसी, सिजेरियन ऑपरेशन, गर्भपात, साहसपूर्ण खेल यानी रेसिंग, पैरासेलिंग, स्कूबाडाइविंग, पैराशूटिंग, राक्कालाइबिंग आदि के दौरान यदि क्रिटिकल इलनेस की स्थिति आ जाती है, तब भी क्लेम नहीं मिलता। इसका मुख्य कारण यह है कि इन सभी घटनाओं में जो भी खतरे हैं, उनकी जानकारी पॉलिसीधारक को पहले से पता होती है।
  • क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में रोग का इलाज मान्यता प्राप्त डॉक्टर के द्वारा होना जरुरी है। इलाज की रिपोर्ट में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के द्वारा प्राप्त जाँच की जानकारी के कागजात सबूत के तौर पर जमा करने पड़ते हैं। उपरोक्त जानकारी के आधार पर, बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त अधिकृत डॉक्टरों की मान्यता भी जरूरी है।
  • रोग का इलाज होने के बाद मरीज कम-से-कम 30 दिनों तक जिंदा रहे, यह शर्त भी रखी गई है। ऐसा होने पर ही क्रिटिकल इलनेस राइडर क्लेम का भुगतान किया जाता है।
  • खास बीमारी होने पर मिलनेवाली क्षतिपूर्ति पॉलिसी कैंसर पॉलिसी, डाइबिटीज पॉलिसी, एड्स पॉलिसी, हार्ट पॉलिसी आदि जैसी विशेष बीमारियों के लिए, जब अस्पताल में भरती होना पड़ता है, तब खर्चे की भरपाई मिलती है।
  • ‘इंडियन कैंसर सोसाइटी’ तथा कैंसर पेशंट एड एसोसिएशन द्वारा बनाई गई ‘कैंसर इंश्योरेंस पॉलिसी’—दोनों ही अच्छी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसियाँ हैं। जीवन में एक ही बार अथवा सालाना प्रीमियम भरकर इन पॉलिसियों को लिया जा सकता है। इनके साथ-साथ एड्स इंश्योरेंस पॉलिसी तथा डाइबिटीज पॉलिसी भी उपलब्ध है। जिन्हें इन बीमारियों के होने की आशंका मन में है, उन्हें इन पॉलिसियों को खरीदने में कोई हर्ज नहीं है।
  • क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी सभी कम्पनियों की अलग अलग होती है इनमें बड़ा अंतर हो सकता है की एक प्लान जहां किसी बीमारी की जाँच पर एक रकम देने का ऑफर दे सकता है, वहीं दूसरी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी इलाज के दौरान होने वाले सभी खर्चो पर एकमुश्त रकम दे सकता है | कुछ इन्शुरन्स पॉलिसी अगले पांच साल तक थोड़ी-थोड़ी राशि इलाज पर खर्च करने का विकल्प दे सकता है जो इलाज के कुल खर्च का कुछ प्रतिशत होता है | पालिसी खरीदते वक्त इन सभी बातों पर जरुर ध्यान देना चाहिए | पालिसी का प्रीमियम भी इन सब वजहों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है इसलिए यह अलग हो सकता है |
  • पूरी फॅमिली का क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स पॉलिसी खरीदते समय एक और बात का ख्याल रखे की यह फॅमिली के सभी लोगो को कवर करती है या केवल मुख्य पालिसी धारक को ही कवर करती है |

टॉपअप अथवा सरप्लस कवर देनेवाली इन्शुरन्स पॉलिसी

  • कई बार हम ऐसा सोचते हैं कि ‘हमें किसी बड़ी बीमारी से कभी सामना करना न पड़ेगा’ और हम छोटी रकम की पॉलिसी खरीद लेते हैं। बढ़ती उम्र के साथ मन में विचार आता है कि ‘काश हमने बड़ी रकम की पॉलिसी खरीदी होती!’ ऐसे समय में टॉपअप अथवा सरप्लस मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदी जा सकती है। अपनी पहलेवाली पॉलिसी का चलते रहना आवश्यक है। यदि कभी अस्पताल में भरती होना पड़ा और मूल मेडिक्लेम पॉलिसी में निर्धारित खर्चे से अधिक रकम की जरूरत महसूस हुई, तब टॉपअप मेडिक्लेम पॉलिसी से क्लेम प्राप्त किया जा सकता है।

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स या अन्य किसी भी स्वास्थ्य बीमा के लाभ, मूल्य और शर्ते बदलती रहती है इसलिए हमेशा खरीदने से पहले पूरी तरह इन्हें समझ लें | हमारा उद्देश्य केवल आपको हेल्थ बीमा के कांसेप्ट यानि सिद्धांत को समझाना है जिससे आप इसकी अहमियत को समझे और अपने आप को सुरक्षित करें आप चाहे किसी भी कंपनी का बीमा खरीदे इससे हमारा कोई सरोकार नहीं है |

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