ल्यूकोडर्मा, सफ़ेद दाग तथा विटिलिगो से जुड़े 13 सवाल और उनके जवाब

ल्यूकोडर्मा (सफेद दाग) एक त्वचा से जुड़ा हुआ रोग है जिसमें त्वचा पर सफेद दाग पैदा हो जाते हें जो गहरे रंग वाली चमड़ी पर होते हैं यह सफेद दाग कई आकार के तथा शरीर के कई अंगों में होते हैं जब त्वचा में रंगा कोशिकाए नष्ट हो जाती हैं या बनती ही नहीं हैं तब त्वचा पर सफेद दाग पैदा हो जाते हैं । सफेद दाग की बीमारी के विषय पर हमने पहले भी कई आर्टिकल पब्लिश किये है इस पोस्ट में हम कुछ सवाल-जवाब लेकर आये है जो आप लोगो द्वारा ही पूछे गये है उम्मीद करते है की जो हमारे पाठक किसी कारण वश कमेंट के जरिये सवाल नहीं भी पूछ पाते है उन सबको इससे लाभ मिलेगा |

ल्यूकोडर्मा (सफेद दागों) से जुड़े सवाल और हमारे एक्सपर्ट के जवाब

Vitiligo Leucoderma safed dag myths FAQ ल्यूकोडर्मा, सफ़ेद दाग तथा विटिलिगो से जुड़े 13 सवाल और उनके जवाब

Vitiligo and Leucoderma Q & A

  • सवाल : क्या ल्यूकोडर्मा छूने से फैलने वाला रोग है ?
  • जवाब : नहीं, ऐसा कोई जोखिम बिलकुल नहीं होता। लेकिन फैमिली हिस्ट्री, यानी अगर माता या पिता को सफेद दाग रहे हैं तो बच्चों में इसके होने की आशंका रहती है। हालांकि ऐसे मामले 2 से 4 फीसदी ही होते हैं। सफेद दाग किसी को छूने, किस करने या फिजिकल रिलेशन बनाने से नहीं फैलता। प्राइवेट पार्ट पर सफेद दाग हो तो भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है और न ही पार्टनर को यह बीमारी लगती है।
  • ल्यूकोडर्मा का इलाज क्या है ?
  • कई दवाएँ हैं : कुछ खाने की, कुछ लगाने की। इनमें सोरालेन, कोर्टिकोस्टीरॉयड और लेवामिसोल प्रमुख हैं। अनुभवी त्वचा-विशेषज्ञ इनके ठीक तालमेल से शुरू के आधे से ज्यादा मामलों को आराम दिलवा सकता है। बिलकुल शुरू में और लगकर इलाज कराने से लाभ की काफी संभावना रहती है।
  • लेजर तकनीक से ल्यूकोडर्मा का स्थाई इलाजक्या है ?
  • लेजर तकनीक से त्वचा के प्रभावित हिस्से की सबसे पतली चमड़ी को हटाया जाता है और उस स्थान पर रंगों की कोशिका छोड़ दी जाती है। छह हफ्ते बाद इसे हटा दिया जाता है। चार हफ्ते में त्वचा में वास्तविक रंग आने शुरू हो जाते हैं। पूरे इलाज में दो से चार महीना का समय लगता है।
  • ल्यूकोडर्मा के इलाज की Punch and Sprite Grafting तकनीक क्या है ?
  • इसमें रोगी के शरीर से ही त्वचा के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर सफेद दाग वाले स्थान पर कुछ-कुछ दूरी पर लगा दिए जाते हैं। कुछ समय के बाद ये त्वचा के टुकड़े सक्रिय होने लगते हैं तथा ल्यूकोडर्मा वाले स्थान को कवर कर लेते हैं। ये सामान्य त्वचा से मिलकर उसी के रंग में रंग जाते हैं।लेकिन ये सब ऊपरी उपचार ही है, जब तक शरीर में सफेद दाग होने के कारणों का निवारण नहीं किया जायेगा ये दाग बार-बार किसी नयी जगह पर उभर आते है |
  • ल्यूकोडर्मा के इलाज के लिए किस डॉक्टर के पास जाएं ?
  • इलाज के लिए आपको विटिलाइगो स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए। ये भी Dermatologist या Skin Specialist ही होते हैं, लेकिन इनका सफेद दाग के इलाज करने का अनुभव दूसरे त्वचा रोग चिकित्सक की तुलना में अधिक होता है। इसे ऐसे कहा जा सकता है की सभी Vitiligo Expert स्किन स्पेशलिस्ट होता है, लेकिन हर स्किन स्पेशलिस्ट विटिलाइगो या ल्यूकोडर्मा एक्सपर्ट नहीं होता है ।
  • आयुर्वेद में ल्यूकोडर्मा या सफेद दागो का क्या उपचार है ?
  • आयुर्वेद में पंचकर्म के जरिए सबसे पहले शरीर को रोग रहित किया जाता है। इसके अलावा ल्यूकोडर्मा के इलाज हेतू बाकुची बीज, खदिर (कत्था), दारुहरिद्रा, करंज, आरग्यवध (अमलतास) आदि जड़ी बूटियों के जरिए भी खून को साफ किया जाता है। इसके अलावा कुछ मेडिसिन भी दी जाती हैं जैसे कि गंधक रसायन, रस माणिक्य, मंजिष्ठादी क्वाथ, खदिरादी वटी आदि। ल्यूकोडर्मा के उपचार में त्रिफला भी काफी असरदार है।
  • क्या ये ल्यूकोडर्मा कैंसर का कारण बन सकते है ?
  • नहीं, यह कैंसर की वजह नहीं बनता और इसमें जान को भी कोई खतरा नहीं होता है।
  • क्या अल्बीनिज़म और ल्यूकोडर्मा एक ही हैं ?
  • कुछ लोगों का पूरा शरीर उजला होता है क्योंकि उनके शरीर में रंग बनाने वाले कण जन्म से ही पूरी तरह नदारद होते हैं। इन्हें अल्बीनो और उनकी बीमारी को अल्बीनिज़म कहा जाता है। यह बीमारी वंशानुगत और लाइलाज है, जबकि सफेद दाग ल्यूकोडर्मा का इलाज मुमकिन है।
  • सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) क्या है ?
  • ल्यूकोडर्मा , सफेद दाग या विटिलिगो ये एक ही बीमारी से सम्बंधित नाम है हालंकि इनके बीच थोडा फर्क जरुर है लेकिन वो मेडिकल एक्सपर्ट के लिए ही जानना जरुरी होता है एक मरीज के लिए इनमे कोई फर्क नहीं है | सफेद दाग से कई तरह के अंध विश्वाश भी जुड़े हुए है लेकिन यह केवल एक त्वचा का विकार है। इसमें त्वचा कहीं-कहीं अपना प्राकृतिक रंग खो देती है, उसे रंग देने वाली कोशिकाएँ किसी कारण वश खत्म हो जाती हैं। इससे चमड़ी जगह-जगह पर सफेद दिखने लगती है। यह क्यों होता है ? इस विषय पर कुछ ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता। शरीर की इम्यून-प्रणाली ही बिगड़ जाती है और जिसका असर रंग-कोशिकाओं पर पड़ता है। लेकिन शरीर के किसी खास हिस्से में ऐसा होने के दूसरे भी बहुत से कारण होते हैं। जैसे “दबाव” जो स्त्रियाँ पेट पर कसकर साड़ी बाँधती हैं, उनके पेट पर इस प्रकार के सफेद दाग उभर आते हैं। चोट के बाद भी कई बार ऐसा हो जाता है और जलने के बाद भी। कुछ रसायन भी त्वचा का सामान्य रंग छीन लेते हैं। रबड़ के निर्माण में काम आनेवाला एक रसायन भी यह काम कर सकता है। रबड़ की चप्पलें, दस्ताने और दूसरी चीजें कई बार सफेद दाग डाल देती हैं। माथे की बिंदिया को चिपकाने वाला रसायन से भी सफेद दाग हो जाते है ।
  • तो क्या ल्यूकोडर्मा एक तरह का कच्चा कोढ़ नहीं है ?
  • बिलकुल नहीं, इसका कोढ़ से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। यह सिरोसिस (Psoraisis) भी नहीं है। सिरोसिस में स्किन पर लाल धब्बे बनते हैं, न कि सफेद। यह तो कुछ वैद्य हकीमों का अंधा प्रचार है, इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है ।
  • जिन मरीजों में ल्यूकोडर्मा का इलाज नाकामयाब रह जाता है, क्या उन्हें दूसरे भी कोई रोग होने का डर रहता है ?
  • नहीं, सिर्फ एक सावधानी बरतनी होती है कि धूप में लंबे समय तक रहना पड़े तो इन सफेद बिना रंग के क्षेत्रों को सूरज की रौशनी से बचाकर रखें। लंबे समय तक सूर्य की रोशनी में रहने से यह रंगविहीन त्वचा झुलस सकती है।
  • कुछ नीम-हकीम ल्यूकोडर्मा के शर्तिया इलाज की बात करते हैं, इनके बारे में आपकी क्या राय है ?
  • यदि कोई इतना ही शर्तिया इलाज होता, तो देश में तो कम से कम ल्यूकोडर्मा न ही देखने को मिलता। कुछ मामलों में यदि चमत्कार हो भी जाए, तो उसे इलाज की बजाय रोग के अपने अनिश्चित व्यवहार का ही एक करिश्मा मानिए | कुछ लोगों में यह रोग लंबे समय तक रहने के बाद अपने से भी ठीक हो जाता है।
  • ल्यूकोडर्मा के अलावा किन-किन रोगों में सफेद दाग उभर सकते हैं ?
  • ठंडे प्रदेशों में पहाड़ों पर रहने वाले बच्चों में गाल पर हलके रंग के दाग पड़ जाते हैं। ये चंद साल रहकर किशोर अवस्था में अपने से दूर हो जाते हैं। एक तरह की फहूँद में भी शरीर पर जगह-जगह सफेद दाग जैसे दिखने लगते हैं। फिर, कुष्ठ रोग में भी ऐसा हो सकता है कि कहीं सफेद दाग दिखाई दे जिसे छूने या सुई चुभोने पर भी कुछ पता न चले।

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