पेलाग्रा रोग में क्या खाना चाहिए तथा यह किस विटामिन की कमी से होता है ?

पेलाग्रा (Pellagra) नाम का रोग शरीर में विटामिन बी-3 (vitamin B-3) की कमी से होता है। विटामिन बी-3 को नियासिन (Niacin) भी कहते हैं। इस आर्टिकल में हम पेलाग्रा बीमारी के प्रमुख कारण, लक्षण, बचाव, इस बीमारी में रोगी को क्या खाना चाहिए तथा खाने पीने की किन चीजो का परहेज करना चाहिए यह बतायेंगे |

पेलाग्रा रोग के कारण : आंतों की कुछ बीमारियों और ज्यादा शराब के सेवन से भी यह रोग हो जाता है। कई बार शरीर में विटामिन बी-3 सही मात्रा में जाता है, मगर शरीर की अन्य समस्याओं (जैसे डायरिया, लिवर में गड़बड़ी, टीबी, आंतों में गड़बड़ी, हाजमे से जुडी कोई बीमारी या ज्यादा शराब पीने के कारण पेलाग्रा की बीमारी हो जाती है। कुछ दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी यह बीमारी हो सकती है | ट्रिप्टोफान (Tryptophan) नाम के अमीनो एसिड की कमी से भी पेलैग्रा की समस्या उठ खड़ी होती है।

विटामिन बी-3 नियासिन क्या करता है

विटामिन बी-3 व्यक्ति के भार को संतुलित रखने में सहायक होता है | निकोटिनिक अम्ल (नियासिन)—यह भी “B’ कॉम्पलेक्स ग्रुप का सदस्य है। यह मुख्यत: दूध एवं अनाजों में पाया जाता है | इसका मुख्य कार्य प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय में सहायता देना है |

पेलाग्रा रोग (Pellagra) के लक्षण

  • पेलाग्रा में कमजोरी, फूली सूजी हुई त्वचा, वजन कम होना, भूख कम लगना, चिडचिडापन, याद रखने की क्षमता कम होना, सिरदर्द, मानसिक तनाव, नींद में कमी, उलटी दस्त तथा डायरिया हो जाता है।
  • पेलाग्रा के रोगी को धूप के संपर्क में रहने पर त्वचा पहले लाल और फिर काली हो जाती है। उसमें चकत्ते पड़ जाते हैं, जी मिचलाता है, सुस्ती रहती है, थकान और तनाव भी होता है, तेज लाइट सहन नहीं होती और गर्दन में आगे की तरफ त्वचा में चकत्ते (दाने, पपड़ियाँ ) पड़ जाते हैं।
  • पेलाग्रा रोग में त्वचा पर खुजली, लाल दाने जिन्हें खुजलाने पर गहरे घाव बन जाते है | बाद में होंठ, जीभ और मसूड़ों में भी घाव बनने लगते हैं खासकर निचले पैर, चेहरे और गर्दन पर |
  • पेलाग्रा की बीमारी होने पर जीभ पर भी चकत्ते पड़ जाते है | 4-5 वर्ष तक बिना इलाज के रहने पर मृत्यु भी हो सकती है। नहीं तो आदमी पागल भी हो सकता है |

पेलाग्रा रोग किस विटामिन की कमी से होता है यह हम उपर पहले ही बता चुके है तो आइये अब जानते है की विटामिन बी-3 की कमी को किस तरह के भोजन से पूरा किया जा सकता है | साथ ही यह भी जानेंगे की पेलाग्रा रोग में क्या नहीं खाना चाहिए |

पेलाग्रा रोग में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

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पेलाग्रा रोग में भोजन

  • विटामिन बी-3 की कमी पूरी करने को ये पदार्थ लें :- साबुत अनाज (साबुत अनाजों का आटा, जौ और अन्य अनाजों का दलिया, ब्राउन राइस, ब्राउन ब्रेड आदि) और दालों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। चपातियाँ गेंहू के चोकर यानि छिलके सहित खाएं | पेलाग्रा रोगी के भोजन में साबुत अनाजो का होना बहुत जरुरी है |
  • दूध और इसके उत्पाद : पेलाग्रा रोग में दूध, दही, पनीर, सोया दूध आदि भी भरपूर मात्रा में लें ।
  • मांसाहार : यदि आप मांसाहारी हैं तो पेलाग्रा रोग में जल्दी ठीक होने के लिए मांस, मछली, खरगोश, लीन मीट, अंडे का सेवन करें।
  • पेलाग्रा में फल-सब्जियां : आलू, टमाटर, बींस (फलीदार सब्जियां), सोयाबीन, खमीर, खट्टे फल, अनार, और हरी पत्ते दार सब्जियों का सेवन करें। मौसम के हिसाब से रोज एक फल खाएं।
  • अन्य : मूंगफली, बीज, सूखे मेवे, बादाम जैसे नट्स का सेवन करें।
  • एक कप कॉफ़ी पीने से लगभग तीन मिली ग्राम नियासिन मिल जाता है लेकिन इसमें केफीन भी होती है इसलिए पेलाग्रा रोगियों को एक कप से अधिक इसका सेवन ना करें |
  • पेलाग्रा रोगियों के खानपान से नियासिन की कमी पूरी ना हो तो आप “Niacin Supplements” भी ले सकते है इसके कैप्सूल का डब्बा तीन-चार सौ रूपये में बाज़ार से मिल जाता है | लेकिन मधुमेह, मोतियाबिंद या किसी भी लीवर की बीमारी या पेप्टिक अल्सर वाले मरीजो को नियासिन लेने से पहले चिकित्सक से सलाह जरुर लेनी चाहिए |
  • पेलाग्रा रोग में धूप से बचकर रहें तथा रोग की स्थिति में आराम करना बहुत जरूरी है।

पेलाग्रा में नुकसानदायक पदार्थ

  • पेलाग्रा की बीमारी में शराब का सेवन ठीक नहीं : ज्यादा शराब पीने वाले लोगों में विटामिन की खास तौर से कमी हो जाती है, इसलिए ज्यादा शराब के आदी लोगों में विटामिन बी-3 की भी कमी हो जाती है।
  • केवल मक्का पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए : एशिया और अफ्रीका में कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां लोग अपने भोजन के लिए मुख्यतः मक्का और इसके उत्पादों पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे लोगों में भी विटामिन बी-3 की कमी देखी गई है जो पेलाग्रा रोग का कारण बनती है ।
  • पेलाग्रा रोग को बढ़ाने में जंक फूड पर निर्भरता भी है एक कारण : आजकल के अनेक जंक फूड जैसे कॉर्न चिप्स, क्रैकर्स, सोडा ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक में इस्तेमाल होने वाले उच्च फ्रक्टोजयुक्त कॉर्न सिरप, फूड बार आदि में भी मक्का का भरपूर इस्तेमाल होता है। अनेक लोग रोजाना केवल इन्हीं चीजों से अपना पेट भर लेते हैं यानी अन्य जरूरी पोषक तत्व उनके शरीर में नहीं जा पाते। ऐसे लोगों में भी विटामिन बी-3 की कमी बनी रह सकती है।

पेलाग्रा रोग से बचने के लिए कितनी नियासिन लेनी चाहिए

  • नियासिन को ‘नियासिनामाइड’ तथा ‘निकोटिनिक अम्ल भी कहते हैं। इस विटामिन की दैनिक जरुरत कैलोरी पर निर्भर करती है I CMR ने 6mg/1000k-cal के अनुसार इसकी दैनिक मात्रा बताई है।
  • जैसा की हमने बताया था की नियासिन की कमी से पेलाग्रा रोग हो जाता है तथा यह एक ऐसा रोग है जिस में चमड़ा फट जाता है | ICMR के विशेषज्ञों ने साधारण क्रियाशील, मध्यम क्रियाशील तथा अधिक क्रियाशील पुरूष के लिए क्रमशः16, 18, 21 mg/day इस विटामिन की आवश्यकता बतायी है।
  • साधारण, मध्यम तथा अधिक क्रियाशील स्त्री के लिए क्रमशः 12, 14, 16 mg/day नियासिन की आवश्यकता होती है।
  • गर्भवती स्त्री के लिए +2mg/day, तथा धात्री माता के लिए + 4 mg/day नियासिन की जरूरत होती हैं। 13-18 वर्ष की बालिका के लिए 14 mg प्रतिदिन नियासिन चाहिए।
  • 6 माह के शिशु के लिए 710 ug/kg. शरीर भार तथा 6-12 माह शिशु के लिए 650 ug/kgशरीर भार के अनुसार नियासिन की दैनिक प्रस्तावित मात्रा की सिफारिश की गई हैं। यदि इस मात्रा से कम नियासिन लिया जाता है तो पेलाग्रा रोग होने की संभावना हो सकती है |

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