विटामिन सी की कमी के लक्षण तथा रोगों की जानकारी

विटामिन ‘C’ यानि एस्कॉर्बिक एसिड शरीर के लिए बहुत जरुरी एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, विटामिन सी रक्त में लाल कणों को बनाने में बहुत महत्वपूर्ण कार्य करता है। विटामिन सी कोलेजन, कार्निटाइन, हार्मोन और अमीनो एसिड बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है | शरीर में विटामिन सी की कमी हो जाने से कोशिकाएं तथा रक्त कोशिकाओं की दीवारें फटने लगती हैं और रोगी कई रोगों के संक्रमण का शिकार हो जाता है। विटामिन सी को ही एस्कोर्बिक एसिड कहा जाता है। यह पानी में घुलनशील होता है। विटामिन सी को टूटे-फूटे अंगों को जोड़ने के लिए सीमेंट जैसा समझा जा सकता है। विटामिन सी की कमी से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है। विटामिन सी रक्त में लाल कणों को बढ़ाने में सहायक होता है। अर्टिकेरिया, फीवर, त्वचा के दाने में विटामिन सी देने से लाभ होता है। विषैले जंतुओ के काट लेने पर विटामिन सी से तुरंत राहत मिलती है तथा जलन और दर्द दूर हो जाते हैं। बुखार हो तो विटामिन सी का इंजेक्शन देते ही बुखार उतर जाता है। प्रोस्टेट ग्लैण्ड का संक्रमण विटामिन सी से शांत हो जाता है।

आंख, नाक, कान और गले के रोगों एवं विकारों के लिए विटामिन सी का प्रयोग गुणकारी प्रभाव रखता है। विटामिन सी की कमी से अस्थियों के सिरों में से रक्तस्राव होने लगता है। कभी-कभी हड्डियों के यह अंतिम छोर अलग हो जाते हैं।

विटामिन सी (C) की कमी से होने वाली बीमारियाँ 

विटामिन सी की कमी के लक्षण तथा रोगों की जानकारी vitamin c ki kami se kya hota hai rog

विटामिन सी की कमी हो जाने से शरीर में ये बीमारियाँ हो सकती हैं जो विटामिन सी की कमी पूरी करने से  दूर भी हो जाती हैं।

  • रोग-पतले दस्त लग जाना,
  • दस्त में खून आना,
  • आंतों में छूत का रोग लग जाना,
  • आंतों में वायु रोग होना,
  • आमाशय में व्रण होना,
  • पाण्डु रोग, पीलिया,
  • दिल कमजोर हो जाना,
  • नाड़ी तीव्र हो जाना,
  • रक्तस्राव होना,
  • रक्ताल्पता,
  • खून की कमी,
  • रक्त में लाल कणों का अभाव,
  • न्यूमोनिया,
  • सर्दी खांसी, ज्वर, नजला, जुकाम, फ्लू, नाक से खून आना
  • सांस अवरोधक, सांस तीव्र हो जाना, सांस ठीक गति से न आना,
  • ब्रोन्काइटिस, सूखी खांसी, फेफड़ों से रक्तस्राव होना, जल जाना, त्वचा रोग, चकत्ते पड़ जाना, त्वचा पर शरीर पर नील के निशान |
  • पित्ती उछलना, आर्टिकेरिया, विसर्प या सुर्खबाद, घाव, फोड़े, फुसिया, कारबंकल जैसे जहरीले घाव,
  • जोड़ो की सूजन, जोड़ों का मुलायम अथवा नर्म हो जाना,
  • कुहनी की संधिया छोटी हो जाना,
  • रूखे बाल तथा बालों का झड़ना |
  • कमजोरी, चिड़चिड़ापन, वजन कम होना
  • नाड़ी दुर्बलता, नाड़ीशोथ, हाथ-पावों में वात की वेदनायें,
  • गर्भावस्था प्रसूतावस्था की कमजोरी, मासिक धर्म कम आना, मासिक धर्म कष्ट से आना,
  • बच्चों का पक्षाघात, बच्चों का पीलिया, बच्चों की सुस्ती,
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का अभाव हो जाना,
  • स्कर्वी रोग, रक्ताल्पता, रक्त में लाल कणों का अभाव, संक्रमण, अपचन, अफारा,
  • मसूढ़ों के रोग, पायरिया, चर्म रोग, श्वेत प्रदर, आलस्य आदि रोग विटामिन सी की कमी से होते हैं। जो इसकी पूर्ति हो जाने पर ठीक भी हो जाते हैं।
  • कई देशो में न्यूमोनिया, सरसाम तथा लाल ज्वर जैसे खतरनाक संक्रमण युक्त रोगों में विटामिन सी रोगी को देना अति आवश्यक समझा जाता है।
  • कनपेड़े अर्थात् मम्पस रोगों में रोगी को विटामिन सी पानी में घोलकर पिलाते रहने से सूजन, दर्द तथा ज्वर धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है।
  • काली खांसी में विटामिन सी आशातीत लाभ प्रदान करता है।
  • जोड़ों का शोथ के दर्द में विटामिन सी लाभप्रद हो जाता है।
  • मोतियाबिंद के रोगी को विटामिन सी देने से मोतिया रुक जाता है।
  • गर्भावस्था में विटामिन सी का प्रयोग करने से सूजन समाप्त हो जाती है।
  • विटामिन सी की कमी से रोगी निश्चित ही स्कर्वी रोग का शिकार हो जाता है।
  • गर्भपात को रोकने के लिए विटामिन सी का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
  • विटामिन सी की कमी से त्वचा लटक जाती है तथा चेहरे एवं शरीर पर झुर्रिया पड़ जाती हैं। लकवा, पक्षाघात तथा पोलियो जैसे रोग भी इसी वजह से होते हैं जिन्हें विटामिन सी प्रयोग करके ठीक किया जा सकता है।
  • चेहरे पर खतरनाक दाग-धब्बे विटामिन सी का प्रयोग से ठीक हो जाते हैं।
  • कंजेस्टिट हार्ट फेल्यूर रोग में विटामिन सी को प्रयोग करने से अधिक पेशाब आकर शरीर की सूजन तथा हृदय की तकलीफ सहित अन्य कई बीमारियाँ खत्म हो जाती हैं।
  • शरीर के किसी भी अंग से रक्तस्राव को रोकने में विटामिन सी सहायता प्रदान करता है। विटामिन सी की कमी से आमाशय में घाव हो जाते हैं।
  • टीबी रोग में विटामिन सी का प्रयोग लाभ करता है।
  • टूटी हड्डी जोड़ने के लिए ऑपरेशन के बाद विटामिन सी की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है।
  • शिशुओं और बच्चों में, हड्डियों की वृद्धि रूक सकती है।
  • संखिया के प्रभाव से होने वाले फेफड़े का रक्तस्राव विटामिन सी के प्रयोग से रुक जाता है। विटामिन सी की कमी से पायरिया रोग होता है। जो विटामिन सी का प्रयोग करने पर ठीक हो जाता है।
  • यदि थोड़ा काम करते ही रोगी थक जाता है तो यह शरीर में विटामिन सी की कमी का संकेत है।
  • सांस से जुड़े रोगों का होना ही साबित करता है कि रोगी के शरीर में लंबे समय से विटामिन सी की कमी होती चली आ रही है।
  • विटामिन सी कम होने से शरीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाता है।
  • विटामिन सी के प्रयोग से शरीर की रक्तवाहिनियां लचीली हो जाती हैं और उनकी कठोरता समाप्त हो जाती है।
  • विटामिन सी वृहदों में भी चुस्ती-फुर्ती और शक्ति का संचार करने में मददगार होता है।
  • विटामिन सी के प्रयोग से हर प्रकार की एलर्जी में लाभ होता है।
  • चलते-चलते थक जाना, रोगों में वेदना होना, ऐंठन होना, विटामिन सी की कमी को दर्शाता है।
  • विटामिन सी कम होने से घाव भरने में देरी लगती है।
  • विटामिन सी के प्रयोग से नासूर जैसे खतरनाक घाव भी ठीक होने लगते हैं।
  • आग में जल जाने के बाद विटामिन सी का प्रयोग प्रारंभ होते ही जलन एवं दर्द में धीरे-धीरे लाभ होने लगता है।
  • विटामिन सी की टिकियां कारबंकल जैसे खतरनाक घावों पर पीसकर भर देने से जल्दी ही ठीक होने लगते हैं।
  • विटामिन ए की तरह ही विटामिन सी का भी आंख के रोगों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।

एक स्वस्थ शरीर के लिए 25 से 30 मिलीग्राम विटामिन सी पर्याप्त होता है। शिशुओं को विटामिन सी की पूर्ति करनी हो तो संतरा, आंवला, मौसमी का रस पिलाना ही काफी होता है। आंवला विटामिन सी के लिए सबसे उत्तम स्रोत होता है। सूखे और ताजे दोनों आंवले में यह विटामिन समान रूप से मिलता है। संधिवात, संधिशोथ तथा आमवात में विटामिन सी गुणकारी उत्तम प्रभाव पैदा करता है। यदि विटामिन सी की अत्यधिक कमी हो तो जल्दी लाभ के लिए इंजेक्शन का प्रयोग करना ज्यादा फायदेमंद होता है। एक वर्ष से डेढ़ वर्ष तक के बच्चों को यह रोजाना 50 मिलीग्राम तक की मात्रा में देना जरुरी होता है। अपने अगले आर्टिकल में हम विटामिन सी के स्रोत बताएँगे |

diseases and symptoms of vitamin C deficiency.

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