जानिए वात रोग में क्या खाना चाहिए तथा वात असंतुलन में परहेज

वात रोग में आहार – बढ़ा हुआ वात अत्यधिक चिंता, बेचैनी, नींद में कमी तथा अन्य स्नायु रोग को पैदा करता है | आयुर्वेद संतुलित आहार को बढ़ावा देता है आयुर्वेद में षट्रस (छह स्वादों) यानी मीठा, कड़वा, सख्त, खट्टा, तीखा तथा नमकीन बताए गए हैं। वात को नमक, मीठे तथा खट्टे से संतुलित किया जाता है। कफ को तीखे, कड़वे तथा सख्त स्वाद से नियंत्रित किया जाता है। प्रत्येक दोष में पहला स्वाद दोष के साथ संतुलन में ज्यादा होता है।

वात-विकार के कुछ उदाहरण यहाँ दिए जा रहे हैं, जिससे आप आसानी से वात दोष और वात रोग में आहार की अहमियत समझ सकेंगे। माना किसी कारणवश आपको काफी देर रात तक जागना पड़ता है तो इससे वात-असन्तुलन पैदा होता है। इस असन्तुलन से बचने के लिए, आपको आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सन्तुलित गरम और वसायुक्त आहार खाने चाहिएँ। सुबह जागने पर गरम पानी पीना न भूलें, जिससे कब्ज न हो सके क्योंकि अक्सर अनिद्रा के बाद कब्ज की शिकायत होती है। भोजन में अजवायन, अदरक, मेथी और जीरे का प्रयोग करें, अजवायन, अदरक और तुलसी की चाय पिएँ।

यह भी सम्भव है कि कोई ऐसी स्थिति बने जिसमें एक से अधिक कारण किसी दोष के प्रकार्यों में बाधा उत्पन्न कर दें। उदाहरण के लिए, अगर आपको घंटों व्यापार सम्बन्धी यात्रा करनी पड़े और अपने कार्य को पूरा करने के लिए आप इतने व्यस्त रहे कि आपको गरम भोजन कर पाने तक का समय भी न मिले, और साथ ही, मौसम बहुत वातिक हो और आपका होटल एक बड़े शहर के शोर-भरे मुख्य मार्ग पर स्थित हो, तो इसका अर्थ है कि आपके पास वात असन्तुलित करने के लिए सारा सामान उपलब्ध है। स्पष्टतः अगर आप वात-प्रधान व्यक्ति है, तो इसका प्रभाव बढ़ जाएगा। किसी दोष में आए असन्तुलन की तेजी व्यक्ति की शक्ति, और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है। इस समस्या के हल में लगने वाला समय, उन उपायों पर ही निर्भर करेगा जो आप अपनाएँगे। जिसमे सही आहार का चयन सबसे महत्त्वपूर्ण बात है तो आइये जानते है वात असंतुलित होने पर क्या खाएं और किन चीजो से परहेज रखें |

वातनाशक भोजन :  वात रोग में डाइट

vata dosha diet Parhej जानिए वात रोग में क्या खाना चाहिए तथा वात रोग में परहेज

असंतुलित वात में उचित आहार

  • दूध, क्रीम तथा मक्खन
  • हलके गरम सूप तथा गरम पेय
  • मिठाइयाँ तथा गरम खाद्य
  • गेहूँ या चावल
  • चाय, अदरक की चाय
  • बड़ी इलायची, सौंफ, दालचीनी
  • गरम पानी
  • गरम प्रकृतिवाले अनाज
  • सोते समय गरम दूध
  • तिल का पेस्ट
  • लस्सी, जीरा, अदरक तथा नमक का मिश्रण
  • आम का गूदा
  • सोया के बीज और लहसुन दो ऐसे पदार्थ हैं जो असंतुलित वात और कफ को ठीक करते हैं। अपने भोजन में इनका प्रयोग करें, या इन्हें औषधि की तरह लें। लेकिन आगे दी गई मात्रा से अधिक मत लीजिए। 4 छोटा चम्मच सोया के बीज प्रतिदिन। 2-3 मध्यम आकार की लहसुन की कलियाँ। सोया के तेल का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसकी मात्रा एक से तीन बूंद प्रतिदिन है।
  • आधा छोटा चम्मच मेथी दाना प्रतिदिन, भी वात और कफ-विकार के लिए एक उपयुक्त औषधि है।
  • वात चूर्ण, यानी अजमोदादि चूर्ण को नाश्ते, दोपहर के भोजन तथा रात के भोजन के समय अपने खाद्य पदार्थों पर छिड़ककर प्रयोग में लाएँ।
  • दूध, गरमियों में ठंडे पेय, ठंडे अनाज, सेब के रस के साथ नाश्ता, अन्न, सब्जियाँ, फलियाँ, सलाद, कम नमक, गरम दूध, घी (यदि कोलेस्टरोल अधिक हो तो परहेज करें)
  • वात रोग में सूप, घी, काला चना, तिल, धनिया से बनी काँजी, कच्चे नारियल का पानी, दही, अरंडी, मूँग, बैंगन, गोक्षुर, पान के पत्ते, मिसरी, पिप्पली खाने चाहिए ये सब वात नाशक भोजन हैं।
  • वात दोष से पीडि़त कई लोग दोपहर में थकान महसूस करते हैं। धनिया तथा अश्वगंधा से बनी चाय इनके लिए उत्तम है। मीठा लेना भी अच्छा है।
  • सामान्यतः वात पीडि़त के लिए तीखा भोजन अच्छा नहीं होता, परंतु मिर्च-मसालेदार भोजन उनके लिए उपयुक्त है, क्योंकि उसमें तेल होता है।
  • वात रोग में दालचीनी, इलायची, सौंफ तथा अदरक भूख को सामान्य करते हैं।
  • वात रोग में मीठे तथा दुग्ध पदार्थ वात व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हैं। इसलिए थकान महसूस होने पर ये चीजें लेनी चाहिए।
  • सब्जियों या अनाज का सूप पीना अच्छा रहता है।
  • सामान्यतः वात पीडि़तों के लिए सभी मीठे फल बहुत अच्छे होते हैं, जैसे आम और अंगूर। सेब सख्त फल है, जिसे इस्तेमाल से पहले गरम करने की आवश्यकता होती है।
  • तिल के तेल का इस्तेमाल सर्वोत्तम होता है, यह वात को शांत करता है। आयुर्वेद में इस तेल का काफी महत्त्व है, क्योंकि यह एक शक्तिशाली वात विरोधी पदार्थ है।
  • सब्जियों को तेल में तलना चाहिए। सलाद में भी कुछ तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • वात रोग में भोजन के बाद गरम पानी पीना सर्वोत्तम होता है, वह पाचक होता है।
  • नमकीन, खट्टा, मीठा, गरम भोजन, वसा, मक्खन तथा आसानी से पचनेवाला भोजन।
  • वात रोग में सूखा, ठंडा तथा सूक्ष्मता के गुण होते हैं, इसलिए तैलीय, गरम और भारी भोजन लेना चाहिए।
  • वात दोषवाले लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है। इसलिए साधारण नमक के साथ अदरक का रस या अदरक या जीरा पाउडर के साथ मट्ठा लेना चाहिए।
  • घी भूख बढ़ानेवाला पदार्थ है। यहाँ उल्लिखित भोजन वात रोगी के लिए उपयुक्त है। आयुर्वैदिक चिकित्सक द्वारा इसे बदला भी जा सकता है।

वात रोग में उपयुक्त जड़ी-बूटियाँ तथा मसाले :

  • मसाले तथा मीठे पदार्थ वात पीडि़तों को अधिक पसंद आते हैं। उन्हें हींग, सौंफ, तुलसी, कालीमिर्च, इलायची, हरा धनिया, दालचीनी तथा लौंग का सेवन करना चाहिए।

वात रोग में परहेज

  • सूखा तथा नमकीन भोजन, क्योंकि वह भारी होता है
  • कम मात्रा में बीज तथा मेवे
  • कच्चे केले
  • सख्त भोजन
  • हलका तथा ठंडा भोजन
  • कच्ची सब्जियाँ
  • ठंडी हवा तथा ठंडी जलवायु।
  • नमकीन सूखे खाद्य पदार्थ तथा नाश्ते का सामान वात पीडि़तों के लिए उचित नहीं है।
  • तैलीय मेवे वात को शांत करने के लिए दिए जा सकते हैं, परंतु उन्हें नियंत्रित मात्रा में ही लेना चाहिए।
  • वात रोग में कॉफी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, क्योंकि उसमें तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने वाला कैफीन होता है।
  • सभी ठंडे, कम कैलोरीवाले तथा हलके खाद्य पदार्थ वात को उत्तेजित करते हैं।
  • ठंडा पानी तथा आइसक्रीम वात पीडि़त व्यक्ति के लिए अत्यंत खतरनाक हैं।
  • गरमियों में हम शीतल पेय लेते हैं। ये वात को उत्तेजित करते हैं। इसलिए वात रोग में इनसे परहेज करना चाहिए।
  • सभी मसालों को न्यूनतम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, खासकर सख्त तथा कड़वी चीजें, जैसे—धनिया, हलदी तथा मेथी।
  • मेवे तथा बीज : बादाम सर्वोत्तम हैं, परंतु सभी मेवों तथा बीजों का प्रयोग संयमित मात्रा में करना चाहिए।
  • वात रोग में फल : केला, बेर, नारियल, खजूर, अंजीर, अंगूर, मीठे फल उपयुक्त हैं; लेकिन आम (पके), खरबूज, नारंगी, पपीता, अनन्नास, सेब, अनार, नाशपाती (उबालने के बाद लेना बेहतर होगा), सभी सूखे फल तथा कच्चे फल नहीं लेने चाहिए।
  • वात रोग में सब्जियाँ : शतावर, चुकंदर, गाजर, ककड़ी, हरी फलियाँ, लहसुन, प्याज, मूली, शकरकंद तथा शलगम वात रोगी के लिए स्वास्थ्यकर हैं। परंतु अंकुरित सब्जियाँ, बंदगोभी, फूलगोभी, बैंगन, पत्तेदार हरी सब्जियाँ, कच्ची सब्जियाँ, टमाटर, आलू तथा मटर (तेल में पकाने के बाद स्वीकृत) आदि वर्जित हैं।
  • शरीर को गरम रखना चाहिए, क्योंकि वात के गुण ठंडे होते हैं। वात पीडि़तों के लिए गरम भोजन फायदेमंद होता है।
  • चावल को मक्खन तथा दाल के साथ लेना चाहिए। सोते समय गरम दूध पीना वात पीडि़त व्यक्तियों के लिए अच्छा है।
  • वात रोग में रात को देर से नहीं सोना चाहिए, क्योंकि इससे सुबह में ताजगी नहीं रहेगी।
  • वात को कम करने के लिए दोपहर में भोजन के बाद मट्ठा ले सकते हैं, इसे जीरा तथा सूखे या गीले अदरक तथा साधारण नमक के साथ लेना सर्वोत्तम रहता है। यह भी पढ़ें – कफ तथा पित्त नाशक आहार -Pitt & kapha Balancing Diet
  • मीठा आम भी वात प्रकृति के व्यक्तियों के लिए अच्छा है।
  • वातशामक चूर्ण, जैसे—अजमोदादि या रसना को आहार में शामिल किया जा सकता है।
  • अनाज : पका जौ, आटा, चावल, ज्वार। इसके अलावा वात रोग में सभी प्रकार के दुग्ध पदार्थ ले सकते हैं।
  • मांस : चिकन तथा मछली एवं लाल मांस से वात रोग में से परहेज रखें |
  • फलीदार अनाज : मूँग, मसूर व छोटी फली से वात रोग में से परहेज रखें |
  • तेल : तिल का तेल सर्वोत्तम है। अन्य तेलों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • वातशामक प्रक्रियाओं में स्वेदन, शरीर की मालिश, तेल एनीमा), काढ़ा एनीमा, नसया, टब स्नान व नींद शामिल हैं।

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2 Comments

  1. Subhash Bajaj

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