डायबिटीज से जुड़े सवाल और उनके जवाब

डायबिटीज से जुड़े सवाल तथा शंकाए अकसर मधुमेही तथा उसके परिवार के अन्य सदस्यों में हमेशा बनी रहती है जिनका उत्तर देने का प्रयास इस पोस्ट में किया गया है | क्या आप जानते है भारत में पिछले पांच वर्षों के दौरान मधुमेह पीड़ितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़ोतरी 80 लाख नए मरीजो की है, यह बात वर्ष 2017 में भारत के परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कही है | इससे आप इस बीमारी के फैलाव का अंदाजा लगा सकते है | आम लोगो तथा मधुमेह से पीड़ित रोगियों दोनों को इस बीमारी के प्रति जागरूक होना चाहिए जिसको ध्यान में रखते हुए हम समय समय पर आर्टिकल लिखते रहते है |

दरअसल डायबिटीज को काबू करने के लिए कई पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है जो केवल आप सही जानकारी के माध्यम से ही कर सकते आपके चिकित्सक केवल आपको दवा ही दे सकते है जो मधुमेह के उपचार में 30 प्रतिशत से ज्यादा महत्त्व नहीं रखता है, इसका सीधा अर्थ यह है की 70 % इलाज केवल आपके हाथ में ही है। जैसे उचित खान-पान के साथ चिकित्सक की सलाह से दवा ली जानी चाहिए। नियमित सैर करने से भी लाभ मिलता है। इस पोस्ट में डायबिटीज से पीड़ित लोगो के कुछ सवाल शामिल किये गए है जो निश्चित रूप से मधुमेह के प्रति आपकी जानकारी में इजाफा करेंगे और हो सकता है की इनमे से किसी प्रश्न का उत्तर आप भी लंबे समय ढूंड रहे हो | तो आइये जानते हैं – Diabetes Frequently Asked Questions and their answers.

डायबिटीज से जुड़े सवाल और उनके उत्तर

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डायबिटीज सवाल-जवाब

डायबिटीज से जुड़े सवाल (1) : कौन सी शारीरिक अवस्थाएं ऐसी है जिनमें डायबिटीज का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है।

  • जवाब : गर्भावस्था, सर्जरी, बचपन ये तीन खास शारीरिक अवस्थायें हैं जिनमें डायबिटीज का प्रभाव ज्यादा  होता है मतलब इस दौरान सामान्य लोगो की अपेक्षा मधुमेही को ज्यादा खतरा होता है |

डायबिटीज से जुड़े सवाल (2) : क्या डायबिटीज के रोगी की सर्जरी (Operation) हो सकती है?

  • जवाब : हाँ, हो सकती है, कोई भी और किसी भी प्रकार की सर्जरी अब हो सकती है सिर्फ उसके लिये डायबिटीज नियंत्रण में होना चाहिये और नियंत्रण न हो तो करना पड़ता है। पहले डायबिटिक व्यक्ति की सर्जरी करना बहुत कठिन व जोखिम भरा काम होता था, अब इन्सुलिन व मुंह से ली जाने वाली डायबिटीज विरोधी दवाओं के कारण किसी भी प्रकार (नियोजित व एमर्जेन्सी ) सर्जरी असंभव नहीं रही है |

डायबिटीज से जुड़े सवाल (3) : क्या डायबिटिक बच्चों का उपचार करना कठिन होता है ?

  • जवाब : दवाइयों के इलाज के साथ ही बच्चो को मधुमेह के साथ सही जीवन शैली का पालन करवाना महत्वपूर्ण और चुनौती भरा काम होता है। डायबिटिक बच्चे के माता पिता को डॉक्टरों के मार्गदर्शन में उपचार शुरू करना चाहिये। इस प्रकार के डायबिटीज में इन्सुलिन, आहार व्यायाम, जाँच, जीवन में सन्तुलन रखना, व डायबिटीज का ज्ञान आवश्यक है। डायबिटिक बच्चे में डायबिटीज संबंधी कोई भी प्रभाव दिखाई देने पर उसे अस्पताल में दिखाना ही ठीक होता है। इसमें सबसे बड़ा जोखिम अल्पग्लुकोज यानि शूगर की कमी हो जाने का होता है इस तरफ ध्यान देना चाहिये।

डायबिटीज से जुड़े सवाल (4): क्या डायबिटीज संक्रामक रोग है?

  • जवाब : डायबिटीज छूत का रोग नहीं है। छूत का रोग स्पर्श व सहवास से होते है। डायबिटीज वैसा रोग नहीं है। पर बहुत सारे लोगो के लिए “अनुवांशिक” यानि (पीढ़ी दर पीढ़ी फैलने वाला रोग) जरुर हो सकता है |

डायबिटीज से जुड़े सवाल (5): क्या डायबिटीज कैंसर जैसा नया रोग है?

  • जवाब : नहीं, इतिहास से यह स्पष्ट है कि डायबिटीज नया न होकर पुराना रोग ही है सिर्फ आज तक अधूरे इलाज, परीक्षण, लोगों की कम जानकारी, इन कारणों से पता नहीं चलता था परन्तु अब चिकित्सीय सुविधायें सुलभ होने से और लोगों की डायबिटीज में जागरूकता बढ़ने से इस रोग की पहचान जल्दी होती है |

डायबिटीज से जुड़े सवाल (6): क्या डायबिटीज पूर्णत: ठीक हो सकता है ?

  • जवाब : आधुनिक चिकित्सा से अनुसार डायबिटीज पूर्णत: ठीक हो इसकी संभावना कम ही होती है यानि कि नहीं ही होती है। केवल डायबिटीज को नियंत्रण में रखकर सुख से जीवन जिया जा सकता है। कुछ पुरानी चिकित्सीय पद्धतियों में जरुर इस रोग को जड़ से खत्म करने का दावा किया जाता है पर इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है ना ही दावा करने वाले लोगो ने इसको कभी प्रमाणित किया है |

मधुमेह के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन लेता हूँ। मुझे अकसर घबराहट पसीना जी मिचलाना, सिरदर्द  और थकान की शिकायत रहती हैं/ कभी-कभी आँखों के आगे अंधेरा सा छा जाता है। इलाज बताएँ?

  • संभवत: इंसुलिन लेने के कारण आपके रक्त में शुगर का स्तर गिर जाता है, जिससे ऐसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। शुगर का स्तर अधिक गिरने पर गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। अत: रक्त में शुगर के स्तर के अनुसार ही इंसुलिन की मात्रा नियंत्रित करनी होगी। खाली पेट व खाने के दो घंटे बाद शुगर के स्तर की जाँच करवाएँ उसके अनुसार ही इंसुलिन लें।

भूख बहुत लगती हैं। कमजोरी और आलस्य भी रहता हैं। कोई काम करने की इच्छा नहीं होती और नींद भी बहुत आती है |

  • रक्त में शुगर के स्तर की जाँच करवाएँ क्योंकि ये लक्षण मधुमेह के हो सकते हैं। एनीमिया या पेट में कीड़े होने की बीमारी के कारण भी ऐसे ही लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। अत: पूरी जाँच के बाद ही इलाज संभव है।

मधुमेह का मरीज हूँ, पिछले एक माह से दाएँ हाथ में कुहनी तक बहुत दर्द रहता हैं और सोते समय हाथ सुन्न हो जाता हैं। ऐसा क्यों होता है ?

  • मधुमेह के कारण अकसर तंत्रिकाओं में सूजन आ जाती है, जिसे ‘न्यूराइटिस’ कहते हैं। इस समस्या को विशेष जाँच द्वारा ही प्रमाणित किया जा सकता है। मधुमेह विशेषज्ञ से संपर्क करें और सरवाइकल स्पांडिलाइटिस के लिए गरदन का एक्स-रे भी करवा लें, क्योंकि इस रोग में भी उपर्युक्त लक्षण हो सकते हैं।

मैं कई सालों से डायबिटीज से पीड़ित हूँ मेरे पूरे शरीर पर फुंसियाँ हो जाती है, जिनसे कई बार खून भी निकलता है तथा मुझे कमजोरी भी बहुत रहती हैं |

  • रक्त में शुगर के स्तर की जाँच करवाएँ। व्यक्तिगत सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि शुगर का स्तर अधिक हो तो पहले उस पर नियंत्रण पाना जरूरी है। रक्त में संक्रमण होने की स्थिति में भी शरीर पर फुसियाँ हो सकती हैं।

रक्त में शुगर का कितना स्तर होने पर कोई व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित माना जाता है ?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यदि दिन के किसी भी समय रक्त में शुगर का स्तर 200 मिलीग्राम या उससे अधिक है या बारह घंटे तक कुछ न खाने के बाद सुबह रक्त में शुगर का स्तर 120 मिलीग्राम से अधिक है तो व्यक्ति को मधुमेह से पीड़ित मानना चाहिए। मधुमेह पीड़ित व्यक्ति में खाने के दो घंटे बाद रक्त में शुगर का स्तर 140 मिलीग्राम से अधिक होता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं- अत्यधिक प्यास लगना, अधिक मूत्र-त्याग की इच्छा, अधिक खाने के बावजूद वजन कम होना इत्यादि। दूसरे प्रकार के मधुमेह में वजन तो कम नहीं होता; परंतु हृदय, गुरदा, आँख व तंत्रिका संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

क्या बच्चे भी मधुमेह का शिकार हो सकते हैं? क्या बच्चों में इसके लक्षण बड़े लोगो से अलग होते हैं ?

  • मधुमेह के लगभग पाँच प्रतिशत मरीजों में उसके लक्षण पंद्रह वर्ष की उम्र से पहले ही उभरते हैं। इसका मुख्य कारण जीन से संबद्ध होता है यानी वंशानुगत होता है। हो जाने पर भी कम उम्र में ही मधुमेह हो जाता है। किसी वायरस के संक्रमण से यदि इन्सुलिन पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाये तो भी कम उम्र में ही बच्चो को मधुमेह हो सकता है | इसके लक्षणों में अधिक मूत्र-त्याग की इच्छा, अधिक भूख व प्यास के साथ वजन में कमी व आँख की रोशनी में कमी प्रमुख हैं। ये लक्षण सिर्फ पच्चीस प्रतिशत मधुमेह पीड़ित बच्चों में पाए जाते हैं। अन्य पीड़ित बच्चों में अधिक गंभीर लक्षण, जैसे-डायबिटिक कोमा (अचेतन अवस्था) या फेफड़े और मस्तिष्क की झिल्ली का संक्रमण पाया जाता है। कुछ बच्चों में अधिक थकान, फोड़े-फुसियाँ व बिस्तर में पेशाब निकल जाने की शिकायत भी होती है।

मधुमेह का उच्च रक्तचाप से क्या संबंध हैं?

  • हमारे देश में लगभग पचास प्रतिशत मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप भी पाया जाता है। ये दोनों ही रोग हृदय व धमनी रोग के प्रमुख कारण हैं; लेकिन यदि दोनों रोग साथ-साथ हों तो हृदय, गुरदा, आँख, मस्तिष्क व रक्त धमनियों पर अधिक गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। इसके कारण पक्षाघात, हृदयाघात, अकस्मात् मौत, आँख के परदे की बीमारियाँ इत्यादि हो सकती हैं।

मधुमेह का दुष्प्रभाव शरीर के किन अंगों पर अधिक पड़ता हैं? इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • मधुमेह का दुष्प्रभाव शरीर के लगभग सभी अंगों पर पड़ता है, लेकिन इनमें त्वचा, आँख, तंत्रिकाएँ गुरदा, हृदय, मस्तिष्क व पैर तक रक्त ले जानेवाली धमनियाँ प्रमुख हैं। यदि मधुमेह को नियंत्रित रखा जाए तो इन दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचाव हो सकता है। इसके लिए नियमित रक्त और आँखों की जाँच आवश्यक होती है।

मधुमेह से पीड़ित हूँ। रक्त में शुगर का स्तर गिरने के प्रमुख लक्षण क्या हैं ?

  • सामान्यत: जब रक्त में शुगर का स्तर 50-60 मिलीग्राम से कम हो जाता है तो कई लक्षण प्रकट होने लगते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में घबराहट, एक विशेष प्रकार का डर, पसीना आना, चिंता, बदन में कपकपी, ज्यादा भूख का अनुभव, जी मिचलाना, सिरदर्द, थकान, शिथिलता, मिरगी की तरह के झटके, बेहोशी और हृदयगति में वृद्धि है। यदि दौरे के समय मरीज किसी मशीन पर काम कर रहा हो या वाहन चला रहा हो तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। धमनी में इंजेक्शन के द्वारा या फिर मुँह से ग्लूकोज लेने पर मरीज की स्थिति में सुधार होता है।

मधुमेह के किन मरीजो को इन्सुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है ?

  • तीस वर्ष की उम्र से कम के मधुमेह पीड़ित मरीज को अक्सर इंसुलिन देनी पड़ती है, क्योंकि मधुमेह मुँह से लेने वाली दवाओं से नियंत्रित नहीं होता। इसका कारण है इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएँ पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं। यदि मधुमेह विकसित अवस्था में हो और दवाओं से नियंत्रित न हो रहा हो तो निमोनिया या दूसरी बीमारियों के संक्रमण, ऑपरेशन, घाव न भरने और डायबिटिक कोमा की स्थिति में इंसुलिन का इंजेक्शन लेना आवश्यक होता है।
  • डायबिटीज सवाल -जवाब तथा मधुमेह से जुडी जिज्ञासाएँ और उनके समाधान भाग -2

मै पिछले तीस सालों से मधुमेह से पीड़ित हूँ मेरे दोनों पैरो में कमजोरी आती जा रही है तथा तलवों में सूई चुभने जैसा एहसास होता है। चलते-चलते मेरे पैर भी लड़खड़ाने लगते है |

  • मधुमेह के कारण पैदा होने वाली तंत्रिकाओं की जटिलताओं से ऐसे लक्षण उभरते हैं। चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘पेरीफ्रल न्यूरोपैथी’ कहते हैं। इसे कुछ जाँचों द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है। मधुमेह को नियंत्रित रखें और रोजाना हलका व्यायाम भी करें। अपने चिकित्सक की सलाह से जी.एल.ए. नामक कैप्सूल दिन में दो बार लिया जा सकता है। तंत्रिका विशेषज्ञ की सलाह लें

मुझे रेटिनोपैथी नामक रोग से ग्रस्त बताया गया। कृपया इस विषय में जानकारी दें।

  • रेटिनोपैथी मधुमेह से उत्पन्न एक जटिल समस्या है। युवावस्था में मधुमेह से पीड़ित होने वालों में दस वर्षों के बाद और अधेड़ावस्था में बीस से पच्चीस वर्षों बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। इस जटिलता का निदान सरलता से हो जाता है और लेजर व फोटोकोएगुलेशन विधि द्वारा इसका इलाज भी संभव है। रक्त में वसा का स्तर नियंत्रित करना आवश्यक होता है। मधुमेह के मरीजों को हर छह या आठ माह बाद आँखों के डाक्टर से अपनी आँखों की जाँच अवश्य करा लेनी चाहिए।

डायबिटीज के लिये उपाय क्या है? या डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के क्या उपाय है?

  • डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के सरल उपाय यह है कि शरीर में ग्लुकोज/शूगर की पूर्ति व इन्सुलिन का स्त्राव इनमें संतुलन बना रहे ऐसे आहार व औषधियों की योजना बनाना | यह सन्तुलन तीन प्रकार से कर सकते हैं –
  • जब शरीर में इन्सुलिन की कमी महसूस हो तब बाहर से इन्जेक्शन के द्वारा इन्सुलिन कमी की पूर्ति की जाती है। यह इन्सुलिन की मात्रा व्यक्ति के आहार, खून का पतलापन देखकर निश्चित की जाती है। इसका टाइप-1 डायबिटीज में इसका विशेष महत्व होता है।
  • (2) टाईप- 2 डायबिटीज में Pancreas को उत्तेजित कर इंसुलिन के प्रवाह को बढ़ाने के लिये गोलियों का उपयोग किया जाता है। गोलियों से इन्सुलिन का स्त्राव बढ़ता है और खून की शूगर को नियंत्रित किया जाता है। रक्त में शूगर की मात्रा की जाँच करके ही गोलियों की मात्रा निश्चित की जाती है। मधुमेह के लक्षण : पुरुषों तथा महिलाओं में पूर्व मधुमेह के संकेत
  • (3) एकदम सामान्य प्रकार के डायबिटीज में इन्सुलिन व गोलियों की आवश्यकत नहीं है। केवल आहार नियंत्रण करने से भी खून में शूगर का नियंत्रण रखने से प्राकृतिक इन्सुलिन का स्त्राव उचित मात्रा में होता है और डायबिटीज नियंत्रित रखा जाता है। 60% डायबिटिक लोग केवल आहार डायबिटीज को नियंत्रित रखकर सुख से जी सकते हैं।
  • डायबिटीज रोग में आहार नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण बात है। डायबिटीज अन्य रोगों से एकदम अलग है क्योंकि डायबिटीज में डॉक्टर से ज्याद रोगी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। डॉक्टर केवल सलाह देने का कार्य करता है शेष सब उस व्यक्ति को ही करना होता है।

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