भोजन अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे जरुरी चीज होती है, लेकिन क्या आपको पता है हर मौसम में एक जैसा खाना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। आयुर्वेद में किस ऋतु में क्या खाएँ तथा किन चीजो से परहेज रखे इसको लेकर काफी विस्तृत जानकारी दी गई है, जिसे हम समय-समय पर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करते रहते है | हर मौसम की जरूरत के हिसाब से खाने का अंदाज और खाने का स्वाद भी बदलना चाहिए। बदलते मौसम के साथ अपनी डाइट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, तभी आप फिट रह सकते हैं। हर मौसम का अपना स्वभाव होता है जिसके अनुसार हम कपड़े पहनते हैं और रहन-सहन में बदलाव करते हैं। ठीक इसी तरह मौसम के बदलते ही हमारे खाने-पीने का अंदाज़ भी बदल जाना चाहिए |
पूरी दुनिया में स्वास्थ्य व पोषण की दृष्टि से सबसे अधिक ताजा भोजन बनाकर खाने की प्रथा केवल भारत में ही है। गेहूं का सर्वोत्तम उपयोग ताजी रोटी के रूप में भारत में ही किया गया है नहीं तो पूरी दुनिया में बासी डबलरोटी या नूडल्स बनाकर खाने की ही प्रथा है। तीन प्रकार का सात्विक, राजसिक एवं तामसिक भोजन जैसा वैज्ञानिक वर्गीकरण, भोजन में छ: रसों का ज्ञान और कहीं नहीं है। स्वास्थ्य की दृष्टि से, दिन के समयानुसार, ऋतु के अनुसार, भोजन का विस्तृत वर्णन कहीं नहीं है। तो आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि किस मौसम के अनुरूप क्या खाएं और क्या नहीं।
वर्षा ऋतु में खाद्य पदार्थों में खट्टापन आ जाता है। शरद् ऋतु शरीर को मध्यम शक्ति देती है तथा खाद्य पदार्थों में नमकीन स्वाद होता है। हेमंत ऋतु में चंद्रमा अधिक तेज होता है तथा सूर्य धूमिल पड़ जाता है, इस समय भोजन में मीठा स्वाद होता है और शरीर में अधिक शक्ति होती है। यह शक्ति ग्रीष्मकाल तथा वर्षा ऋतु में कम हो जाती है। शीत ऋतु में शक्ति अधिक होती है। शिशिर ऋतु में कड़वे स्वाद के साथ वायु तथा आकाश प्रभावी होते हैं। वसंत ऋतु में अधिक वायु और पृथ्वी का तत्त्व होता है तथा शरीर में कड़ा स्वाद प्रभावी होता है। ग्रीष्म ऋतु में प्रकृति में वायु तथा तेजस अधिक होता है। इसमें स्वाद तीखा होता है। वर्षा ऋतु में पृथ्वी तथा तेजस प्रकृति में प्रभावी होते हैं, साथ ही खट्टा स्वाद प्रमुख होता है। शरऋतु में जल तथा तेजस अधिक होते हैं। और नमकीन स्वाद प्रभावी होता है। हेमंत ऋतु में पृथ्वी तथा जल महाभूत प्रकृति में अधिक होते हैं। इस ऋतु में मीठा स्वाद प्रभावी होता है।
इसलिए व्यक्ति को असंतुलित दोषों को दूर करने और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए ऋतु के अनुसार यह भोजन-पद्धति अपनानी चाहिए |
क्रप्या नोट करें – इस आर्टिकल में समय (मौसम) को हिंदी केलेंडर के हिसाब से बताया गया है क्योंकि आयुर्वेद में वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर इन छह ऋतुओं के अनुसार ही खानपान को बताया गया है | यहाँ जो महीने दिए गये है वो अंग्रेजी केलेंडर के हिसाब से है जो छह ऋतुओं पर पूरी तरह सटीक नहीं बैठते है | इसलिए मौसम का अनुमान अपने विवेक से लें क्योंकिकई राज्यों में यह अलग-अलग भी हो सकते है | जैसे जून का महिना केरल में तेज मानसून का माह होता है लेकिन उत्तरी भारत में इस महीने में लू चलती है |
किस ऋतु में क्या खाएँ और क्या नहीं खाएं

शिशिर ऋतु में क्या खाएँ (फरवरी-मार्च)
- सब्जियाँ: लौकी, पत्तागोभी, भिंडी, कद्दू तथा टमाटर
- अनाज : नया चावल, नया ज्वार तथा गेहूँ
- फलीवाले अन्न : काला चना तथा मूंग ।
- कंद-मूल : कंद, गाजर, अदरक, आलू
- मांस : चिकन, मछली, मटन तथा झींगा
- फल : सेब, गरी, अंगूर, नारंगी तथा अनन्नास
- दूध के पदार्थ : मक्खन, पनीर, मट्ठा, क्रीम, घी तथा दूध
- अन्य खाद्य पदार्थ : काजू, पिस्ता, तिल, चीनी तथा मिठाइयाँ
- पानी : हलका गरम
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ – वर्जित खाद्य पदार्थ
- सब्जियाँ : करेला, बैंगन, सूखी मेथी, सूरजमुखी
- अनाज : नया-पुराना जौ तथा पुरानी ज्वार
- दाल : सेम, सूखी मूंग दाल तथा मटर
- कंद-मूल : लहसुन, कमलगट्टा तथा मूली
- मांस : केंकड़े तला व सूखा मांस
- फल : जामुन
- अन्य खाद्य पदार्थ : जीरा, तला भोजन, सरसों तथा लाल मिर्च
- पानी : ठंडा पानी।
वसंत ऋतु में क्या खाएँ (अप्रैल-मई) में स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थ :
- सब्जियाँ: बैंगन, करेला, मेथी, चौलाई तथा पालक
- अनाज: जौ, ज्वार, पुराना चावल तथा गेहूँ
- दाल : चना, हरे अनाज, हॉर्स ग्राम, येलो ग्राम
- कंद-मूल : गाजर, लहसुन, प्याज, मूली तथा हलदी
- मांस : केंकड़ा, चिकन, मछली, तली मछली, कबाब, झींगा
- वसंत ऋतु के फल : कोला, पपीता तथा पेठा
- दूध के पदार्थ : मट्ठा
- अन्य खाद्य पदार्थ : धनिया के दाने, जीरा, हींग, शहद, अजमोद तथा मिर्च
- पानी : अदरक का पानी, चंदन पानी और शहद का मिश्रण।
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ : वर्जित खाद्य पदार्थ
- सब्जी : भिंडी
- अनाज : नए अनाज तथा नया चावल
- दालें : काला चना
- कंद-मूल : तूबा, कमल ककड़ी, साबूदाना, अरवी
- मांस : बड़ी मछली
- फल : सेब, चुकंदर, काजू, ककड़ी, शरीफा, नारंगी, पिस्ता, अमरूद, आडू, स्ट्रॉबेरी तथा प्लेंटेन
- दुग्ध पदार्थ : क्रीम, पनीर, गाय का दूध तथा खोया
- पानी : ठंडा पानी तथा मिठाइयाँ
ग्रीष्म ऋतु में क्या खाएँ (जून-जुलाई) में उपयुक्त खाद्य पदार्थ
- सब्जियाँ: लौकी, फूलगोभी, भिंडी तथा परवल
- अनाज : आधा पका चावल, नया चावल तथा लाल चावल
- दालें : काला तथा हरा चना
- कंद-मूल : चुकंदर, आलू, साबूदाना तथा अरवी
- मांस : चिकन मांस
- फल : सेब, केला, शरीफा, ककड़ी, सूखा नारियल (गिरी)
- दूध के पदार्थ : मक्खन, क्रीम, दही, घी तथा दूध
- पानी : कपूर पानी, खस तथा गुलाब जल।
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ वर्जित खाद्य पदार्थ
- सब्जियाँ: बैंगन, करेला, मेथी, शिमला मिर्च
- अनाज : जौ तथा मक्का
- अन्न : फलियाँ सेम, हॉर्स ग्रेन
- कंद-मूल : लहसुन
- मांस : सूखा मटन, तला मटन तथा मछली
- पानी : बर्फ का ठंडा पानी।
वर्षा ऋतु में क्या खाएँ (अगस्त-सितंबर) : वर्षा ऋतु में खान पान
- सब्जियाँ: बैंगन, लौकी, भिंडी तथा परवल
- अनाज : आधा उबला चावल, ज्वार, भुने अन्न तथा गेहूं
- दालें : काला चना, मूंग
- कंदमूल : लहसुन, अदरक, प्याज तथा अरवी
- मांस : चिकन तथा मटन
- वर्षा ऋतु के फल : सूखा नारियल, अंगूर, नींबू तथा आम
- दुग्ध पदार्थ : दही, मट्ठा, घी तथा दूध
- अन्य : हींग, धनिया, जीरा, गुड़, मिर्च तथा सेंधा नमक
- पानी : गरम पानी।
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ : अनुपयुक्त आहार
- सब्जियाँ: करेला, बंदगोभी, सुखी सब्जियाँ तथा पालक
- अनाज : जौ, मक्का तथा बाजरा
- दालें : सूखा चना तथा चना दाल
- कंद-मूल : गाजर, चेसनट (अखरोट की जाति का एक फल), अरवी, कमल ककड़ी, साबूदाना, आलू
- मांस : सूखा मटन तथा मछली
- फल : ककड़ी, जामुन, खरबूज तथा तरबूज
- दुग्ध पदार्थ : भैंस का दूध, पनीर, जलेबी, मिठाई
- अन्य : तले भोजन, शरबत तथा स्क्वैश
- पानी : ठंडा तथा बिना उबाला पानी।
शरद ऋतु में क्या खाएँ (अक्तूबर-नवंबर) में उपयुक्त आहार
- सब्जियाँ: चौलाई, लौकी, करेला, बंदगोभी, मेथी, भिंडी तथा पालक
- अनाज : चावल, लाल नमक, ज्वार तथा गेहूं
- दालें : सेम, बाकला, मूंग तथा मटर
- कंद-मूल : बीन्स, आलू, शकरकंद, साबूदाना, सिंघाड़ा तथा अरवी
- मांस : चिकन तथा मटन
- शीत ऋतु के फल : सेब, केला, अंजीर, आँवला, अंगूर, जामुन, अनार, चीकू
- दुग्ध पदार्थ : मक्खन, घी, खोया, आइसक्रीम तथा दूध
- अन्य : धनिया के दाने तथा पत्ते, शहद, पुराना घी
- पानी : ठंडा पानी, खस का पानी तथा मटके का पानी
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ : वर्जित भोज्य पदार्थ
- सब्जियाँ : सूखी सब्जियाँ
- अनाज : मक्का
- दालें : काला चना, हॉर्स ग्राम तथा राजमा
- मांस : केकड़ा, बड़ी मछली, सूखी मछली तथा झींगा
- फल : चेरी, नींबू, आडू, अनन्नास, कच्चा आम, स्ट्रॉबेरी
- दुग्ध पदार्थ : मट्ठा, दही, मट्ठे की कढ़ी
- अन्य : हींग, मिर्च, चना मसाला, पुदीना, कालीमिर्च, अचार तथा सूरजमुखी का तेल
- पानी : हलका गरम पानी तथा रात में रखा गया पानी।
हेमंत ऋतु में क्या खाएँ (दिसंबर-जनवरी) में स्वास्थ्यकर आहार
- सब्जियाँ: लौकी, बंदगोभी, मेथी, भिंडी, कद्दू तथा पालक
- अनाज : चावल, मक्का तथा गेहूँ
- अन्न (फली) : चौलाई, काला चना तथा मूंग
- कंद-मूल : चुकंदर, गाजर, अदरक, कमलगट्टा, प्याज, शकरकंद
- मांस : चिकन, मछली, मटन तथा झींगा।
- फल : सेब, केला, अंगूर, नारंगी, अनन्नास
- दुग्ध पदार्थ : मक्खन, मट्ठा, पनीर, दही, घी, खोवा तथा दूध
- अन्य : लौंग, पिस्ता, अखरोट, तिल, चीनी तथा मिठाइयाँ
- पानी : हलका गरम।
इस ऋतु में क्या नहीं खाएँ : वर्जित भोजन
- सब्जियाँ: बैंगन, करेला, सूखी मेथी
- अनाज : जौ, पुराने अनाज तथा ज्वार
- फलीवाले अनाज : काला चना, हॉर्स ग्राम तथा राजमा
- कंद-मूल : लहसुन, मूली तथा शलगम
- मांस : सूखा मांस, तला मांस, छोटी मछलियाँ
- फल : जामुन
- अन्य : दालचीनी, जीरा, सरसों, पोस्तदाना
- पानी : ठंडा पानी
पूरे वर्ष के खान-पान को संतुलित करने के लिए उपर्युक्त भोजन तालिका का पालन करें और किस ऋतु में क्या खाएँ तथा वर्जित खाद्य पदार्थ का ध्यान रखें ।
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