सवाल : बेरियाट्रिक सर्जरी के कितने सालो बाद प्रेगनेंसी प्लान करनी चाहिए

बेरियाट्रिक सर्जरी क्या है ? – कई बार मोटापे की समस्या इतनी ज्यादा बेकाबू हो जाती है की सर्जरी के अतिरिक्त कोई अन्य दूसरा विकल्प नहीं बचता है ऐसे में, मोटापे को कम करने का मॉडर्न साइंस ने एक नया तरीका खोज निकाला है। लिमिट से बाहर मोटापे को कम करने के लिए इन दिनों बेरियाट्रिक सर्जरी का काफी चलन है |

इस सर्जरी के बाद खाना काफी देर से पचता है। साथ ही भूख जगाने वाला ‘ग्रेहलीन’ हार्मोन भी बनना बंदहो जाता है। इससे बॉडी में जमा चर्बी एनर्जी के रूप में खर्च होने लगता है और पीड़ित व्यक्ति तेजी से पतला होना शुरू हो जाता है। 2-3 फीसदी लोगों में कुछ कॉम्पिलिकेशन आने पर फॉलो अप सर्जरी भी करानी पड़ सकती हैं। जो महिलाएं बेरियाट्रिक सर्जरी करवाती है उन्हें अक्सर गर्भ धारण करने से सम्बंधित कई शंकाए होती है तथा उनके मन में कई सवाल उठते रहते है इन्ही सब सवालो के जवाब इस आर्टिकल में दिए गए है | इन सभी प्रश्नों के उत्तर डॉ. विनय थापर (जनरल तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जन) द्वारा दिए गये हैं |

बेरियाट्रिक सर्जरी तथा गर्भावस्था

जानिए बेरियाट्रिक सर्जरी के कितने सालो बाद प्रेगनेंसी प्लान करनी चाहिए Pregnancy after bariatric surgery in hindi

बेरियाट्रिक सर्जरी तथा प्रेगनेंसी

  • सवाल :- कौन से मोटे रोगी बेरियाट्रिक सर्जरी के लिए उपयुक्त होते है?
  • जवाब :- मोटापे की गणना बॉडी मास इन्डैक्स (बी एम आई) के प्रयोग से होती है। ऐसे रोगी जिनका बी.एम.आई. कम से कम 5 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मीटर हो अथवा ऐसे रोगी जो मधुमेह, हायपरलिपिडिमियां आदि से भी पीड़ित हों तथा जिनका बी. एम.आई. कम से कम 33.5 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मीटर हो, उनका वज़न कम करने के लिये बेरियाट्रिक सर्जरी एक विकल्प है।
  • क्या बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है?
  • विशिष्ट रूप से यदि महिला द्वारा वजन कम करने की कोई विधि अपनाई गई है तो प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है। बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद तेज गति से वज़न में गिरावट सामान्य बात है। इसके परिणाम स्वरूप पोलीसिस्टिक ओवरी सिन्ड्रोम में सुधार होता है तथा अण्डोत्सर्जन में कमी तथा अनियमित माहमारी में विपरीत बदलाव आता है जिससे प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी होती है। फिर भी बेरियाट्रिक सर्जरी को प्रजनन-अक्षमता के उपचार के रूप में नहीं मानना चाहिये।
  • बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद गर्भवती होने के लिये सही समय क्या है?
  • महिलाओं को सर्जरी होने के 1 से 2 साल के बाद ही प्रेगनेंसी के विषय में सोचना चाहिए, नहीं तो अस्थिर वजन से बच्चे पर खराब असर हो सकता है |  बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद गर्भवती होने के लिये महिला को 12-24 महीनों तक इन्तजार करना चाहिये जिससे माँ के वज़न में हुई तेज कमी से भ्रूण प्रभावित न हो तथा महिला भी अपना वजन कम करने का लक्ष्य पूरी तरह से पा सके। इस दौरान गर्भ निरोध आवश्यक है। मौखिम गर्भनिरोधकों के साथ परिवर्तनशील अवशोषण तथा असफलतायें जुड़ी रहती है, इसलिये अवरोध तथा इन्जेक्शन से दिये जाने वाले गर्भनिरोधक को प्राथमिकता दी जाती है। इसके लिये आप अपने डॉक्टर से परामर्श करें ।
  • यदि कोई महिला बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद गर्भवती होती है तो किस प्रकार की सावधानियां आवश्यक हैं?
  • जो महिला बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद गर्भवती हुई है उसके प्रोटीन, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, विटामिन बी, तथा विटामिन डी के स्तरों की निगरानी आवश्यक है क्योंकि ये सर्वाधिक सामान्य पोषण कमियाँ हैं, विशेष रूप से गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी के बाद। जिन महिलाओं ने बेरियाट्रिक सर्जरी करायी है, उनकी गर्भावस्था के प्रारम्भ में सूक्ष्म पोषकों की कमियों का समुचित मूल्यांकन करना चाहिये तथा यदि कोई। कमी पायी जाती है तो उसका उपचार प्रारम्भ करना चाहिये। यदि कोई कमी नहीं पायी गयी है तो प्रत्येक तीन माह में उस महिला की पूरी रक्त गणना तथा आयरन, फेरिटिन तथा । विटामिन डी स्तरों का परिमापन किया जाना चाहिये। जिन महिलाओं ने बेरियाट्रिक सर्जरी कराई है उनमें गेस्ट्रोइन्टेस्टाइनल समस्याएं जैसे जी मिचलाना, उलटी आना तथा उदरीय दर्द, जो कि गर्भावस्था में सामान्यतः होते हैं, का पूरी तरह आकलन किया जाना चाहिए क्योंकि ये लक्षण सर्जरी के कारण भी हो सकते हैं। बेरियाट्रिक सर्जन से जल्द परामर्श करना यह निर्धारित करने के लिये महत्त्वपूर्ण है कि कहीं ये लक्षण सर्जरी के कारण तो नहीं हैं। बेरियाट्रिक सर्जरी के कारण प्रसव तथा डिलेवरी का प्रबन्धन प्रभावित नहीं होना चाहिये। हालांकि बेरियाट्रिक सर्जरी कराने वाली महिलाओं की सीज़ेरियन डिलेवरी में अधिक खर्च आता है, परन्तु यह सीजेरियन डिलेवरी का कोई संकेत नहीं है। यदि रोगी ने वज़न कम करने के लिए गहन और व्यापक उदर सर्जरी करायी है तो प्रसव के पूर्व बेरियाट्रिक सर्जन से परामर्श अवश्य किया जाना चाहिए।
  • क्या मोटापे से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है?  
  • जी हाँ, मोटापा प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है। मोटापे से पैदा हुआ हॉर्मोन संबंधी असन्तुलन के परिणामस्वरूप कुछ रोगियों के अण्डोत्सर्जन में कमी हो जाती है। उनमें से कई महिलाओं को तो अण्डोत्सर्जन होता ही नहीं है। ऐसी मोटी महिलायें, जो गर्भवती नहीं होती, उनमें डायबिटीज मेलिक्टस (जेस्टेशनल) अथवा प्री-एक्लेम्पसिया विकसित होने की अधिक संभावना होती है, जिसके फलस्वरूप शल्य क्रिया द्वारा डिलेवरी तथा संक्रमण के कारण मरणशीलता अधिक होती है।

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