पीलिया में क्या खाएं और क्या नहीं खाना चाहिए, परहेज

पीलिया (Jaundice) में खान-पान का बहुत महत्त्व होता है क्योंकि किसी भी रोग को जल्द ही ठीक करने में सही उपचार और एक सही आहार दोनों की भूमिका बहुत अहम् होती है इसलिए इस पोस्ट में हम पीलिया में कौन से आहार खाने और कौन से नहीं खाने चाहिए इस जानकारी को विस्तार से बतायेंगे पर सबसे पहले एक नजर पीलिया रोग के एक संक्षिप्त परिचय पर डालते हैं |

हमारे शरीर के रक्त में जब बिलिरुबिन (Bilirubin) की मात्रा 0 मिलीग्राम प्रति 100 मिली लीटर से अधिक हो जाती है, तो त्वचा, नाखून, आंखें व पेशाब पीले रंग की दिखने लगती हैं। इसी अवस्था को पीलिया रोग के नाम से जाना जाता है। यह रोग जिगर की खराबी से पैदा होता है। जब जिगर का पित्त आतों में न पहुंचकर सीधे खून में मिल जाता है, तो सारे शरीर में पीलापन छाने लगता है। पीलिया में त्वचा, जीभ और आंखों का पीला होना, अत्यंत कमजोरी, सिरदर्द, बुखार, मिचली, भूख न लगना, जरूरत से ज्यादा थकान महसूस होना, कब्ज होना और मूत्र का रंग पीला होना आदि लक्षण देखने को मिलते है |

Bilirubin Meaning -बाइलरुबिन (पित) पीले और भूरे रंग का पदार्थ है। बाइलरुबिन का निर्माण लिवर करता है और यह भोजन में मौजूद फैट को तोड़ने के काम आता है। इसके बाद यह मल के रास्ते बाहर निकल जाता है। मल का सामान्य रंग इसी बाइलरुबिन की वजह से होता है। ज्यादा एल्कोहल, मसाले, चिकनाई और अम्लयुक्त भोजन और कुछ दवाइयों से बाइलरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता तो यह बाइलरुबिन रक्त में पहुंच जाता है। जब इसकी मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो त्वचा का रंग भी पीला पड़ जाता है और पीलिया की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा ज्यादा शराब पीने, खून की कमी, वायरस के संक्रमण, खटाई, गर्म और चटपटे तथा पित्त  को बढ़ाने वाले पदार्थ ज्यादा खाने से भी यह रोग होता है। #Food #Meal #healthy #best #Diet Tips During #jaundice. foods #avoided for jaundice. What should #patients #Eat .

पीलिया जॉन्डिस में क्या खाना चाहिए :

Pilia jaundice piliya me kya khana chahiye kya nahi पीलिया में क्या खाएं और क्या नहीं खाना चाहिए, परहेज

पीलिया में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं !

Diet Tips during Jaundice:

  • पीलिया में हलका, आसानी से पचने वाला ताजा भोजन जैसे-चावल, दलिया, खिचड़ी, बाजरे, जौ, गेहूं की चोकर युक्त (छिलके के साथ ) रोटी बिना घी लगाये खाना चाहिए ।
  • पीलिया रोगी के भोजन में प्रोटीन और कार्बोज वाले पदार्थों को खाना चाहिए |
  • साबूदाना की खीर, बार्ली, मूंग, मूंग की खिचड़ी, मसूर, अरहर की पतली दाल खाना चाहिए |
  • कच्चे नारियल का पानी, मूली के पत्तों का रस, ताजा छाछ, मलाई रहित क्रीम निकला दूध, शहद, गन्ना, गन्ने का रस (शुद्धता का ध्यान रखते हुए) लेना चाहिए।
  • बुखार की स्थिति में मीठे फलों का रस ग्लूकोज मिलाकर पिएं।
  • पीलिया में हरी सब्जियों में कच्ची मूली, लौकी, करेला, प्याज, पुदीना, फूल गोभी, पालक, धनिया, धनिये का बीज, मेथी, परवल, गाजर, लहसुन, तुलसी, अंकुरित चने, चुकंदर, पत्ता गोभी खाना चाहिए ।
  • फलों में पपीता, अनानास, आंवला, चीकू, खजूर, अंगूर, अनार, आडू, आंवला, मौसमी, सेब, टमाटर, संतरा, सिंघाड़ा, नीबू को खाना चाहिए ।
  • पीलिया में हमेशा उबला, छना, क्लोरीन या वाटर प्योरीफायर से साफ़ किया हुआ पानी ही पिएं। पीलिया में ज्यादा-से-ज्यादा पानी पीएं। पर यह पानी साफ होना जरूरी है।
  • सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर पिएं।

पीलिया में क्या नहीं खाना चाहिए :

पीलिया, हेपेटाइटिस के दौरान नुकसान करने वाले पदार्थ :

  • पीलिया में तला-भुना, मिर्च-मसाले वाला भोजन बहुत हानिकारक है, इसलिए ऐसी चीजों को कम से कम 20-25 दिन तक तो बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।
  • वसायुक्त भोजन से बीमारी ठीक होने के बाद भी दूर रहना चाहिए।
  • पीलिया में भारी, गरिष्ठ, तेल, मक्खन, चिकनाई वाले पदार्थ, घी-तेल में तला, मिर्च-मसालेदार, अधिक नमकीन, खटाई युक्त अचार, सिरके से बने पदार्थ नहीं खाना चाहिए ।
  • मिठाइयां, बेसन की चीजें, मैदे के व्यंजन, मांस, मीट और अंडे, मछली नहीं खाना चाहिए ।
  • शराब का सेवन तो जहर की तरह काम करेगा, इसलिए शराब को छूना भी नहीं चाहिए।
  • पीलिया में दूषित पानी और दूषित बासी भोजन को भी हर हाल में नहीं खाना चाहिए ।
  • दूध और दूध के उत्पाद भी न लें। मट्ठा और दही लाभकारी है, पर उसमें मलाई या चिकनाई न हो।
  • ठीक होने के बाद भी मक्खन और जैतून के तेल का कम मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।
  • पीलिया में ज्यादा नमक, अचार, मुरब्बा, चटनी, रबड़ी, खोया आदि से भी परहेज रखें |
  • पीलिया में फलों में केला का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • फास्ट फूड जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, मैगी, चाव्मीन, पानी-पूरी, टिक्की भी नहीं खाना चाहिए ।
  • कचालू, अरवी, राई, हींग, गुड़, उड़द की दाल, फलियां और बींस, चीनी आदि से भी परहेज करें।
  • चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक जैसे पेप्सी, कोला या एनर्जी ड्रिंक का भी परहेज रखें |
  • पान, तंबाकू, गुटखा आदि का सेवन न करें।

पीलिया और हेपेटाइटिस के दौरान खानपान के ये उपाय जरुर अजमाए :

  • पीलिया रोगी के लिवर को मजबूती देने के लिए एक आयुर्वेदिक उपाय : सामान्य अवस्था में लिवर की मजबूती के लिए आयुर्वेद में काहू, कुल्फा, कासनी और मकोय को लाभकारी माना गया है। इन चारों को मिलाकर पीने से लिवर को बहुत मजबूती मिलती है। काहू और कुल्फा इन्हीं नामों से पंसारी की दुकान पर मिल जाते हैं, जबकि कासनी अर्क के रूप में बाजार में मिल जाता है। मकोय (मकीय) का भी अर्क बाजार में मिल जाता है। मकोय का पौधा होता है जिसकी पत्तियों का उपयोग पीलिया में बहुत उपयोगी होता है |
  • पीलिया में जौ का पानी : जौ और जौ के पानी में मूत्र को बढ़ाने की क्षमता होती है। जौ का पानी अतिरिक्त बाइलरुबिन को शरीर से बाहर निकाल फेंकता है। एक कप जौ को थोड़े से पानी में लेकर करीब तीन घंटे तक धीमी आच पर पकाना चाहिए। इसके बाद ठंडा करके इस पेय का सेवन करना चाहिए।
  • पीलिया में हर वो चीज काम की है जो आपके लिवर से सारी गंदगी को साफ़ करने की शक्ति रखती हो |
  • पीलिया में आंवला : विटामिन सी से भरपूर आंवला का रस भी लिवर की कोशिकाओं की सफाई करने का काम करता है। आंवले को कच्चा भी खाया जा सकता है। जाने आंवले के बेहतरीन औषधीय गुण
  • आंवले का नुस्खा- 1 : आंवले के रस में थोड़ा-सा गन्ने का रस मिलाकर रोजाना, पीलिया में मरीज को पिलाया जाए तो पीलिया में बहुत राहत मिलती है।
  • आंवले का नुस्खा- 2 : पीलिया में छाछ या मट्ठे के साथ एक चम्मच आंवले का चूर्ण रोजाना तीन बार लें।
  • तुलसी की पत्तियां : लिवर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने में तुलसी की पत्तियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। पीलिया में रोजाना चार-पांच तुलसी की ताजा पत्तियां सुबह के वक्त खाने से पीलिया रोग में विशेष लाभ होता है। तुलसी के फायदे और 25 बेहतरीन औषधीय गुण |
  • पीलिया में मूली का रस भी है बहुत कारगर : मूली के रस में रक्त और लिवर से बाइलरुबिन को बाहर निकालने की क्षमता होती है, लिहाजा पीलिया में मूली बहुत काम की चीज है। मूली के रस में चीनी या मिश्री भी मिला सकते हैं। मूली के रस में इतनी ताक़त होती है कि वह रक्त और लिवर से अत्यधिक बिलरूबिन को निकाल देता है इसलिए पीलिया में दिन में दो से तीन ग्लास मूली का रस ज़रूर पीएं
  • गन्ने का रस : गन्ने का रस पीलिया में बेहद कारगर औषधि की तरह काम करता है। खास बात यह है कि इसके रस में ऊर्जा भी भरपूर होती है, इसलिए यह रोग में शक्ति देने का काम भी करता है। साथ ही यह हवा और पित्त दोष को भी ठीक करता है। आयुर्वेद के अनुसार इन दोषों के कारण ही पीलिया होता है, लेकिन गन्ने के रस को दमा, शुगर और जुकाम के रोगियों को नहीं लेना चाहिए।
  • गन्ने के रस का एक नुस्खा : जौ का सत्तू खाकर ऊपर से एक गिलास गन्ने का रस रोज पीएं तो पीलिया बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • भुने चने और चने की दाल : पीलिया में भुने हुए चने और चने की दाल भी बहुत लाभकारी मानी गई है। चने रूखे होने के कारण पीलिया में फायदेमंद होते हैं। चने की दाल का उपयोग पीलिया में इस प्रकार करना चाहिए – चने की दाल और गुड़ को बराबर मात्रा में लेकर रात भर के लिए पानी में रख दें। अगले दिन इस पानी को पीएं और मिश्रण को चबाकर खाएं। ऐसा तीन-चार दिन तक करें।
  • धनिये के बीज का पानी : धनिया का बीज भी पीलिया की रोकथाम में बढ़िया पाया गया है। धनिए के बीजों को रात में पानी में भिगो दें और सुबह को इस पानी को पी जाएं। धनिये के बीजों के इस पानी में जहरीले पदार्थों को लिवर से बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • नींबू : लिवर को जहरीले पदार्थों से मुक्ति दिलाने में नींबू बहुत ही शक्तिशाली शाक है यह विटामिन सी का अच्छा स्रोत भी होता हैं । इसलिए पानी में ताजा नींबू का रस मिलाकर रोजाना पीने से बहुत लाभ होता है। यदि सही खुराक मिल जाए तो लिवर में खुद का पुनर्निर्माण करने की क्षमता होती है। विटामिन सी, विटामिन बी, खासकर चोलाइन और विटामिन ई लिवर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं।
  • पीलिया में चुकंदर : आयरन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चुकंदर खून को साफ करता है और उसमें हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। पीलिया, हेपेटाइटिस में भी इसका रस कमाल करता है। चुकंदर के फायदे तथा 32 बेहतरीन औषधीय गुण
  • टमाटर : विटामिन सी से भरपूर टमाटर में बहुत ही शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट लाइकोपेन होता है, जो लिवर की कोशिकाओं को नया जीवन देने का काम करता है।
  • आडू : आडू में आयरन, जिंक, मैग्नीशियम, मैगनीज, कैल्शियम, सल्फर और विटामिन ए, बी, सी और ई जैसे तत्व होते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह पेट से जुड़े रोगों जैसे अपच, गैस, बदहजमी, कब्ज, एसिडिटी को भी दूर करता है। पीलिया में बहुत लाभकारी है | इसे जरुर खाना चाहिए |
  • अनानास : इस फल का रस भी लिवर की कोशिकाओं को साफ करने के लिए जाना जाता है। इसे भी खाना चाहिए |
  • लौकी : लौकी पित्त को बाहर निकालती है और शरीर में तनाव को कम करती है। यह पीलिया में भी बहुत फायदा करती है। यह भी अच्छा पीलिया आहार है | हेपेटाइटिस बी के कारण, लक्षण और बचाव
  • सिंघाड़ा : सिंघाड़े में जहरीले तत्वों को मारने की क्षमता होती है, इसलिए यह फल पीलिया के रोगी के लिए बहुत बढ़िया है। पीलिया में सिंघाड़े को कच्चा भी खाया जा सकता है और इसका जूस भी पी सकते है। शरीर से जहरीले तत्वों को निकालने के लिए सिंघाड़ा एक टॉनिक जैसा काम करता है। इसे जरुर खाना चाहिए |
  • फूलगोभी : फूलगोभी में एक फाइटोन्यूट्रिएंट ग्लूकोसीनोलेट होता है, जो लिवर का बढ़िया मित्र है यानी फूलगोभी जहरीले तत्वों से शरीर की रक्षा करती है। सामान्य अवस्था (रोग होने पर नहीं) में लिवर की बेहतरी के लिए फूलगोभी अच्छा आहार है। इसके अतिरिक्त पीलिया में फिटकरी और मूली के पत्तो का रस भी काफी लाभकारी होता है |
  • एक बड़ा चम्मच त्रिफला पाउडर एक ग्लास पानी में डालकर रात में रख दें | सुबह पानी छानकर पी लें, नियमित रूप से १२ दिन तक यह उपचार करें, नींबू के रस को पानी में निचोड़ कर पीने से पेट साफ़ होता है, पीलिया में इसे रोज़ खाली पेट सुबह पीना अच्छा होता है, दोपहर और शाम को भी रस पीएं |
  • गोभी और गाजर का रस निकाल लें. दोनों रस को बराबर मात्रा में मिलाकर ग्लास भरकर मिश्रण तैयार करें. इस रस को एक हफ्ते तक पीलिया में रोगी को पिलाएं |
  • पीलिया में रोगी के लिए पपीता संजीवनी बूटी की तरह है | रोगी को दिन में तीन से चार बार प्लेट भर के कटा हुआ पपीता खिलाएं |
  • नीम की पत्तियों को साफ़ करके उसका रस निकाल लें और पीलिया में रोगी को रोज़ाना दिन में कम से कम दो बार एक बड़ा चम्मच भरकर नीम का रस पिलाएं |
  • लहसुन की पांच कलियों को एक ग्लास दूध में उबाल लें, कलियां निकालकर दूध रोगी को पिला दें और फिर उन कलियों को पीलिया में रोगी को खाने के लिए दे दें |

सवाल : क्या पीलिया में हल्दी और पीली चीजें खाने पर रोक लगा देनी चाहिए?

जवाब : यह पाबंदी सरासर अनुचित है। पीलिया हल्दी और पीली चीजें खाने से नहीं होता। यह तो शरीर में जैव रसायन बिलीरूबिन के बढ़ने से होता है। बिलीरूबिन कई स्थितियों में बढ़ सकता है। सबसे आम कारण जिगर में वायरस संक्रमण होना है, जिसे वायरल हैपेटाइटिस कहते हैं।

इन चीजो का अवश्य ख्याल रखें :

पीलिया में या अन्य स्वस्थ लोगो को भी इस रोग से बचने के लिये खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए | भोजन हमेशा से किसी थाली से ढक कर ही रखें ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सके | गर्मियों में ताजा खाना ही खाएं, खुला खाना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए ,गंदे, सडे-गले व कटे हुये फल भी नहीं खाने चाहिए और पीने का पानी तो बिलकुल  साफ़ और स्वच्छ होना चाहिए | यह भी जरुर पढ़ें – पीलिया कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

पीलिया रोगियों के लिए एक सम्पूर्ण डाइट चार्ट यानि आहार तालिका निश्चित रूप से पीलिया के मरीजो के लिए बहुत ही लाभकारी होती है तथा उनको इस रोग से जल्द ही छुटकारा दिलाने में मदद करेगा क्योकि पीलिया मे क्या खाये इसकी बहुत अहमियत होती है, इस आहार तालिका को जानने के लिए पढ़ें यह पोस्ट =  जानिये पीलिया रोगी का डाइट चार्ट

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