पथरी रोग होने के कारण, लक्षण, बचाव तथा आधुनिक उपचार

पथरी रोग यानी किडनी स्टोन बहुत पीड़ा देने वाली बीमारी होती है। हाल ही में एक रिसर्च में पाया गया है कि आजकल यह समस्या बहुत आम हो गई है। किडनी शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग होता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और आराम तलब जीवन जीने की आदत के चलते किडनी की बीमारियाँ जैसे पथरी रोग में बहुत बढ़ोतरी हुई हैं। ऐसे में किडनी में पथरी को बनने से रोकने के लिए आपको अपनी आदतों में कुछ बदलाव करना बेहद जरूरी है। इस आर्टिकल पथरी रोग के विषय में बहुत विस्तार से जानकारी दी गई है जिसमे निम्नलिखित पॉइंट्स को शामिल किया गया है |

  1. पथरी रोग होने के कारण
  2. लक्षण
  3. पथरी कितनी तरह की होती है
  4. मूत्राशय (ब्लैडर) में पथरी के लक्षण
  5. पथरी से बचने के उपाय
  6. पथरी रोग की जाँच कौन सी होती है
  7. पथरी रोग के मौजूद आधुनिक उपचार

पथरी क्या होती है ?- जब गुर्दे वेस्ट तरल पदार्थो को निकाल पाने में असमर्थ हो जाते है तब ये फालतू तरल  शरीर का तापमान बिगड़ने पर ठोस हो जाते हैं उन्हें पथरी कहते हैं। पथरी के कई आकार और रूप होते हैं। वह रेत के कणों की तरह बारीक होती है। कभी गेहूं के दाने के बराबर और कभी बादाम के आकार के बराबर। पथरी मूत्राशय-वृक्कों और शरीर के अन्य अंगों में बन जाती है। जब पथरी का कोई टुकड़ा निकल कर मूत्र प्रणाली से गुजरता है। तो मूत्र नली को छीलता हुआ बाहर आता है। उस समय असहनीय पीड़ा से रोगी गुजरता है। जब पथरी मूत्राशय में होती है तो पेट में बोझ महसूस होता है। पेशाब आ जाने पर भी ऐसा लगता है जैसे मूत्र अभी बाकी है। मूत्र गाढ़ा ओर काले रंग का हो जाता है।

पथरी का शरीर पर प्रभाव यदि पथरी बड़ी है तो वह गुर्दे के पैल्विस नामक भाग में कई सालों तक पड़ी रह सकती है और सूजन पैदा कर देती है। जब छोटी पथरी अपने स्थान को छोड़ कर मूत्र-प्रणाली में आ जाती है तो गुर्दे का दर्द शुरू हो जाता है । कभी-कभी पथरी मूत्र-प्रणाली में अटक जाती है जिस कारण गुर्दे में (Hydronephrosis or pyo-Nephrosis) बन जाते हैं । यदि दूसरी ओर का गुर्दे स्वस्थ नहीं है तो पथरी का प्रभाव यह भी हो सकता है कि मूत्र बनना बंद हो जाय छोटी पथरी आम तौर पर मूत्र-प्रणाली के द्वारा नीचे आकर सूजन पैदा कर देती है।

पथरी रोग होने के कारण

पथरी रोग होने के कारण, लक्षण, बचाव तथा आधुनिक उपचार Pathri ke karan lakshan bachav baare mein

पथरी रोग

  • पथरी रोग होने के कारण, आहार-विहार, जलवायु-वातावरण के आधार पर अलग-अलग देशों में अलग-अलग होते हैं।
  • ज्यादातर ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति गर्म मौसम या तेज धूप में काम करते हैं और जिनके शरीर से अत्यधिक पसीना निकलने के कारण पानी की कमी हो जाती है, उनको यह रोग अधिक होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर माइल्ड डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। इससे मूत्र में कमी और सघनता हो जाती है, जिससे कैल्शियम आक्जलेट (जो कि मूत्र में ही पाया जाता है।) या कि फास्फेट आदि तत्त्व गुर्दो की तली में जमने लगते हैं। और धीरे-धीरे पथरी का आकार ले लेते हैं।
  • मनुष्य के शरीर में पानी की मात्रा 75-90 फीसदी होती है। शरीर में पानी की कमी से किडनी में मूत्र के अवसान का धीरे-धीरे क्षरण होने लगता है। शरीर में पानी की कमी के चलते पथरी के रोगियों को दर्द बढ़ जाता है।
  • खान-पान सम्बंधी असंतुलन भी पथरी रोग होने का कारण बनती है। सम्पन्न लोगों के भोजन में खनिज-लवण वाले तत्त्व ज्यादा होते हैं। पाचन क्रिया की अनेक कमजोरियों के कारण ये खनिज-लवण पूरी तरह से पच नहीं पाते, घुल नहीं पाते और किडनी की तली में इकट्ठे होते रहते हैं। यही तत्व सख्त होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। इसी को किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) कहते हैं।
  • पानी में खनिजों का जरूरत से ज्यादा मौजूद होना (हार्डवाटर), भोजन में पालक, चाय, ठंडे पेय और खट्टी तासीर के फलों, जैसे-मौसमी, संतरा, नींबू आदि का अधिक सेवन भी पथरी रोग का कारण बन सकता है। रेडिमेड भोजन व मांस का सेवन भी पथरी बनाने का एक कारण होता है।
  • शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी, विटामिन ‘डी’ की अधिकता, अनेक अंग्रेजी दवाइयां, जैसे-एसिडिटी कम करने के लिए ली जाने वाली एंटासिड दवाइयां भी पथरी रोग को जन्म दे सकती हैं।
  • शरीर में अधिक कैल्शियम होने पर भी पथरी होने का कारण बन सकता है अब चाहे यह किसी खानपान के पदार्थ द्वारा बढ़े या कैल्शियम की दवाई तथा कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से बढ़ें |
  • मूत्रमार्ग का संक्रमण या रुकावट, पेशाब का अधिक समय तक शरीर में रुके रहना, किसी रोग के विशेष कारण अथवा वृद्धावस्था या कमजोरी के कारण कई दिनों तक बिस्तर पर पड़े रहना भी पथरी रोग के होने का कारण बन सकता है।
  • मूत्राशय अर्थात् ब्लैडर की पथरी स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा होती है और इसका पता पेशाब करते समय होने वाले तेज़ दर्द से चलता है। मूत्राशय की पथरी अविकसित देशों के गरीब लोगों में अधिक पाई जाती है। इसका कारण उनके आहार में फास्फेट और प्रोटीन की कमी होना है। पथरी के इस प्रकार को मूत्र पथरी कहते हैं।
  • विकसित देशों में गुर्दे से मूत्राशय तक मूत्र पहुंचाने वाली नली यूरेटर की पथरी अधिक पाई जाती है।
  • विकासशील देशों में मूत्राशय की पथरी आमतौर पर अधिक पाई जाती है। स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में पथरी की समस्या तीन गुना अधिक पाई जाती है।

पथरी के प्रकार

पथरी 3 प्रकार की होती है-

  • फोस्फेटिक
  • युरिकऐसिड से बनी
  • औग्जेलेट से बनी
  • इनके अतिरिक्त सिस्टीन और जैन्थीन की बनी हुई पथरी भी होती है। जब कभी गुर्दे में गंदगी हो जाती है तब फोस्फेट, औग्जेलेट और यूरेट-निर्मित एक विशेष प्रकार की पथरी बन जाती है जिसे स्टेगहॉर्न (Stag horn) पथरी कहते हैं।

पथरी रोग होने के लक्षण

  • पथरी रोग 30-50 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों को अधिक होता है। महिलाओं में यह पुरुषों की अपेक्षा अधिक पाया जाता है। पथरी होने पर निम्न लक्षण व्यक्ति में दिखाई देते हैं |
  • गुर्दो में मौजूद पथरी से पेट के किनारे और पीठ में अकसर दर्द महसूस होता है। यह दर्द एक खास मात्रा में लगातार होता रहता है। यह दर्द खिंचाव, तनाव या चुभन की तरह होता है। कभी-कभी यह दर्द एक मरोड़ के रूप में पेट के किनारे से होता हुआ जांघों तक या लिंग के अगले भाग तक पहुंच जाता है। रोगी दर्द से छटपटाता रहता है। ऐसे हालात में उलटी हो सकती है।
  • रोगी पसीने से तर हो जाता है।
  • मूत्र में संक्रमण हो जाता है। इस संक्रमण के कारण बुखार, ठंड लगना, मूत्र में खून या पस का आना आदि लक्षण भी दिखाई देते हैं।
  • जब पथरी किडनी से यूरेटर में प्रवेश करती है तो बहुत तेज़ दर्द होता है। मेडिकल भाषा में इसे यूरिनरी ट्रेक्ट केलकुली कहते हैं और इस दर्द को रीनल कॉलिक।

मूत्राशय (ब्लैडर) में पथरी होने पर कुछ अन्य प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं

  • अधिक पेशाब करने की इच्छा दिन में अधिक होती है। रात में रोगी को बार-बार नहीं उठना पड़ता।
  • पथरी रोग में रोगी मूत्र त्याग के बाद भी बेचैन रहता है।
  • अकसर मूत्र त्याग के अंत में दर्द होता है।
  • किसी मेहनत वाले काम के बाद, शारीरिक श्रम की अधिकता में दर्द बढ़ जाता है।
  • नाभि के आस-पास दबाने पर दर्द होता है।
  • लेटने पर दर्द कम हो जाता है।
  • लिंग के अगले भाग को दबाने से दर्द महसूस होता है।
  • पेशाब करने के बाद में दो-चार बूंद खून आ सकता है।
  • कभी कभी पेशाब करने में कठिनाई महसूस होती है।
  • पथरी रोग में कभी-कभी मूत्र आना बंद हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब मूत्राशय से पथरी मूत्र मार्ग में प्रवेश कर रास्ता रोक देती है।
  • कभी-कभी पथरी होने का कोई लक्षण प्रकट नहीं होता, लेकिन पथरी अंदर-ही-अंदर गुर्दो को धीरे-धीरे खत्म करती जाती है और लक्षण तभी प्रकट होते हैं जब गुर्दे पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं।

पथरी रोग से बचने के उपाय

  • जिन लोगों को पथरी नहीं हुई है उनमें पथरी का निर्माण रोकने के लिए और जो लोग पथरी निकलवा चुके हैं उनमें दोबारा पथरी न बने, इसके लिए। निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए
  • पानी का अधिक मात्रा में सेवन करना-प्रतिदिन तीन लीटर तक पानी पीना ही चाहिए।
  • पेशाब के संक्रमण की रोकथाम के लिए हर महीने मूत्र-परीक्षण करवाते रहना चाहिए।
  • दूध, पनीर जैसी अधिक कैल्शियम वाली चीजों से परहेज करें ।
  • अंडा, मांस, मछली का सेवन बंद कर दें।
  • पथरी रोग में रोगियों को पालक, बैंगन, अमरूद, भिंडी और टमाटर सहित ऐसी सब्जियोंसे परहेज करना चाहिए जिनमें बीज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हों।
  • अल्कोहल युक्त पेय व खट्टे पेयों से भी बचें।
  • चिकित्सकीय परामर्श से पेशाब बढ़ाने वाली औषधियां व मिल्क ऑफ मैग्नेशिया का प्रयोग किया जा सकता है।

पथरी रोग की जाँच

  • एक्स-रे कराने से अधिकांश मामलों में पथरी का पता चल जाता है।
  • किडनी-यूरेनरी ब्लैडर क्षेत्र का (A-P view) में एक्स-रे कराया जाता है।
  • मूत्र की जांच से उसमें मौजूद रक्त कोशिकाओं, जीवाणुओं व पस सेल्स आदि की मौजूदगी से पथरी होने का पता चल जाता है।
  • पथरी रोग में अल्ट्रासाउंड जांच से पथरी की मौजूदगी, आकार व गुर्दो की स्थिति का पता चल जाता है।
  • आई० वी० पी० (Intravenous Pyelography) एक उपयोगी जांच होती है। इससे गुर्दो की कार्यक्षमता, पथरी की सही स्थिति का ठीक से पता चल जाता है। यह एक खास तरह का रंगीन एक्स-रे होता है। इसके लिए पहले रोगी की नस में डाई का एक इंजेक्शन लगाया जाता है। उसके 15 मिनट बाद, आधा घंटे बाद व एक घंटे बाद एक्स-रे लिए जाते हैं। गुर्दो की पथरी की यह बहुउपयोगी जांच होती है।
  • इसके अलावा, मूत्राशय की पथरी के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए एक खास तरह की दूरबीन का भी प्रयोग किया जाता है।

पथरी रोग के उपचार

  • पथरी की चिकित्सा के लिए होमियोपैथी, आयुर्वेद चिकित्सा व ऑपरेशन उपयोगी रहता है। आवश्यकतानुसार चिकित्सा-पद्धति का चुनाव करना चाहिए।

पथरी रोग की शल्य-क्रिया व Lithotripsy

आजकल बड़े शहरों में लिथोट्रिप्टर नामक उपकरण आ गए हैं। यहां एक इंच तक की पथरी लेज़र किरणों द्वारा चूरा बनाकर बिना चीर-फाड़ के निकाल दी जाती है। इसमें खर्चा कुछ अधिक होता है, लेकिन यह इलाज बिना दर्द के होता है। लेकिन जो पथरियां बड़ी व कड़ी होती हैं उनमें ऑपरेशन द्वारा ही निकाला जाता है। 10-15 प्रतिशत मामलों में होमियोपैथिक औषधियों से भी पथरियां नहीं गल पातीं है । ऐसे हालात में भी ऑपरेशन करना पड़ता है।

यदि पथरी मूत्राशय में है तो मूत्र मार्ग (यूरेथ्रा) में दूरबीन डालकर मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) की पथरी निकाल दी जाती है। इसके लिए आवश्यक है कि यूरेथा में कोई संक्रमण, रक्तस्राव या यौन रोग न हो।

पथरी रोग की आहार-चिकित्सा

पथरी रोग होने के कारण, लक्षण, बचाव तथा आधुनिक उपचार Pathri ke karan lakshan bachav baare mein

पथरी रोग की आहार चिकित्सा

गुर्दा पथरी के अधिकांश रोगियों का आहार नियमित कर उपचार किया जा सकता है व दोबारा होने से रोका भी जा सकता है। किडनी की पथरी की आहार चिकित्सा में यह सावधानी रखनी चाहिए कि वैसे खाद्य न खाए जाएं जिनसे किडनी पेशाब की अम्लीयता व क्षारीयता को नियंत्रित न रख पाएं। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ पियें जाएं ताकि पेशाब गाढ़ा न हो सके। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पथरी रोग होने की शिकायत रहती हो, तो उसे रोजाना ककड़ी के बीज खाने चाहिए। कम से कम एक बार में 50 बीज अवश्य खाएं। दोबारा पथरी नहीं होगी। अगर आप पथरी रोग से पीड़ित है, तो रोजाना मूली खाएं । मूली का रस पथरी को घुला देता हैं। मूली के ताजे हरे पत्तों को पीस कर उसमें से 30 ग्राम रस निकाल लें। फिर उसमें भवक्षार मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीएं। काफी लाभ होगा। मूली में गड्ढा करके उसमें शलजम के बीज डाल कर मूली के ऊपर गुथा हुआ आटा लपेट लें। इसके बाद कंडे की आग में भून लें। जब मूली ठीक तरह से पक जाए, तो आग से मूली को निकाल लें। आटे से मूली को अलग कर लें। यह मूली खाएं। अगर रोजाना एक हफ्ते तक यह नुस्खा आजमाते है। तो पथरी के टुकड़े होकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाती है।

पथरी रोग में उचित खानपान की जानकारी के लिए हमने दो आर्टिकल लिखे है उनको पढ़ें तथा उसके अनुसार ही अपना खानपान रखें | पथरी के आयुर्वेदिक उपचार, योगासन की जानकारी हम आगे देंगे |

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