अंजीर के फायदे तथा औषधीय गुण – Health Benefits of Figs

अंजीर (Fig) एक सूखा लेकिन अन्दर से बारीक-बारीक अनगिनत बीजों वाला फल होता है। अंजीर एक ऐसा सूखा मेवा है जिसका उपयोग अन्य मेवों की तरह पकवानों में तो लगभग नहीं के बराबर होता है, लेकिन औषधि के रूप में इसका उपयोग सफलतापूर्वक किया जाता है इसलिए अंजीर के कई फायदे होते है। यह मीठे स्वाद और थोड़ी हीक वाला, भारी, स्निग्ध, रस में मीठा, वात और रक्तपित्त को खत्म करने वाला, रुचिकारी, रक्तविकार और कब्ज को ठीक करने वाला है। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार इसकी जड़ पौष्टिक और सफेद दाग व दाद दूर करने वाली है और फल सूजन दूर करने वाला, पथरी गलाने वाला, पेट व तिल्ली के विकार खत्म करने वाला होता है। अफगानिस्तान के काबुल में अंजीर की अधिक पैदावार होती है। हमारे देश में बैंगलोर, सूरत, कश्मीर, उत्तर-प्रदेश, नासिक तथा मैसूर में यह ज्यादा पैदा होता है। इसके पत्ते और शाखाओं पर रोएं होते हैं तथा कच्चे फल हरे और पकने पर लाल आसमानी रंग के हो जाते हैं। सूखे अंजीर हमेशा उपलब्ध होते हैं। कच्चे फल की सब्जी बनती है। इसके बीजों से तेल निकाला जाता है। दुकानों पर बेचने के लिए अंजीर को सुखाने की प्रक्रिया में धूल, गंदगी आदि अशुद्धियाँ इसमें मिल जाती हैं। अतः देख-भालकर खरीदें। उपयोग के पहले इसे अच्छी तरह धोकर साफ भी कर लें।

रंग : अंजीर रंग लाल और काला मिश्रित होता है। स्वाद : यह खाने में मीठा होता है। स्वरूप : अंजीर एक विदेशी पेड़ का फल है जो गूलर के समान होता है। यह जंगलों में अक्सर पाया जाता है। आमतौर पर लोग इसे बनगूलर के नाम से भी पुकारते हैं। अंजीर की तासीर : यह गर्म प्रकृति का होता है। दोषों को दूर करने वाला : अंजीर के हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए बादाम का उपयोग किया जाता है। अंजीर को कैसे खायें  : आप एक बार में पांच अंजीर तक ले सकते हैं। वैज्ञानिक विश्लेषण तो इसमें 50 से 70 प्रतिशत तक शर्करा मौजूद रहने की बात प्रमाणित करता है। आयुर्वेद चिकित्सकों का मत है कि यदि सूखा अंजीर दूध के साथ लिया जाए तो इसकी पौष्टिकता कई गुना बढ़ जाती है। अन्य मेवों की तरह सूखे अंजीर में ताजे अंजीर की अपेक्षा ज्यादा पौष्टिक तत्त्व पाए जाते हैं। आइए, इसके भी औषधीय गुणों का परिचय पा लिया जाए।

अंजीर के औषधीय गुण

अंजीर के फायदे तथा औषधीय गुण - Health Benefits of Figs anjir ke fayde gun labh

अंजीर

  • खांसी- एक अंजीर के चार टुकड़े करके खूब चबा-चबा कर सुबह-शाम खाने से कफ वाली खांसी ठीक होती है।
  • कब्ज- एक अंजीर के चार टुकड़े करके एक कप या एक गिलास दूध में डाल कर थोड़ी देर तक उबाल कर दूध को औटाएं। रात को सोते समय अंजीर के टुकड़े चबाते हुए, गुनगुने दूध को घूंट-घूंट कर पीएं। इस प्रयोग से कब्ज ठीक होती है और सुबह शौच खुल कर होता है। यह प्रयोग जितने दिन करना चाहें कर सकते हैं, क्योंकि यह नुस्खा कब्ज़ दूर करने के साथ ही यह पौष्टिकता भी देता है।
  • 3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात में सोने से पहले खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है। माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
  • स्थायी रूप से रहने वाली कब्ज अंजीर खाते रहने से दूर हो जाती है। अंजीर के 2 से 4 फल खाने से पेट साफ़ होता हैं।
  • खाना खाते समय अंजीर के साथ शहद का प्रयोग करने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती है।
  • सफेद दाग- सफेद दाग शुरू होते ही अंजीर के पत्तों के रस में इसकी जड़ घिस कर लेप तैयार कर सफेद दाग पर लगाने से उसका बढ़ना बन्द हो जाता है और धीरे-धीरे दाग मिट जाता है।
  • अंजीर और दूध के फायदे – एक अंजीर के चार टुकड़े कर लें। इसके साथ एक अखरोट और दो पिस्ते पीस कर एक कप दूध में मिला लें। रात को पानी में डालकर गलाए हुए एक बादाम का छिलका हटा कर, पत्थर पर पानी के साथ घिस कर इसके लेप को भी दूध में मिला लें। सबको मिला कर सुबह को खाली पेट चबाते हुए पी जाएं। यह प्रयोग कम से कम 40 दिन करके लाभ देखें। यह प्रयोग दिमागी ताकत, शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए अच्छा है।
  • अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर यह पानी पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी ठीक हो जाती है।
  • बवासीर के रोगी के लिए अंजीर एक वरदान के समान है। दो अंजीर 4-4 टुकड़े करके शाम को पानी में डाल दें और सुबह पानी से निकाल कर इन टुकड़ों को खूब चबाचबा कर खाली पेट खा लें। इसी प्रकार सुबह को भिगोकर शाम को खायें। 8-10 दिन तक यह प्रयोग करने पर रोगी को बहुत लाभ होता है। जब तक जरूरी हो तब तक सेवन करते रहें । कब्ज के रोगी के लिए भी यह प्रयोग बहुत लाभप्रद है। इस प्रयोग के साथ एक प्रयोग और भी करें। सूखे पके अंजीर, मुनक्का, छोटी हरड़ और मिश्री- चारों को बराबर मात्रा में लेकर पीस कर 5-5 ग्राम की गोलियाँ बना कर सुखा कर शीशी में रख लें। यह 11 गोली, भिगोये हुए अंजीर के साथ सुबह-शाम खाएं। पाईल्स ठीक करने के लिए दोनों प्रयोग बहुत लाभकारी हैं।
  • गांठ व फुंसी – हरे या सूखे अंजीर पीस कर पानी में डालकर औटाएं। गाढ़ा लेप बनाकर गुनगुना गर्म गांठ या फोड़े पर लगाने से सूजन दूर होती है।
  • घाव व फुंसी- सूखे अंजीर दूध में पीसकर पुल्टिस बनाकर घाव या फोड़े पर बांधने से लाभ होता है।
  • दमा :- दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को जल्दी ही आराम भी मिलता है।
  • अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग में भी लाभ मिलता है।
  • प्यास की अधिकता :- बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
  • मुंह के छाले :- अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
  • प्रदर रोग :- अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाते हैं।
  • दांतों का दर्द :- अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं।
  • अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े खत्म होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।
  • पेशाब का अधिक आना :- 3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह समस्या दूर होती है।
  • त्वचा के विभिन्न रोग :- कच्चे अंजीर का दूध सभी त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
  • अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं।
  • अंजीर के पत्तों का रस श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) पर सुबह और शाम को लगाने से लाभ होता है। अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।
  • गले के भीतर की सूजन :- सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।
  • शरीर की गर्मी :- पका हुआ अंजीर लेकर, छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं। इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें। इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है।
  • जुकाम :- पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।
  • फेफड़ों के रोग :- फेफड़ों के रोगों में पांच अंजीर एक गिलास पानी में उबालकर छानकर सुबह-शाम पीना चाहिए।
  • मसूढ़ों से खून का आना :- अंजीर को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से बदबू आना भी बंद हो जाती है।
  • तिल्ली (प्लीहा) के रोग में :- अंजीर 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली रोग ठीक हो जाता है।
  • खांसी :- अंजीर का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है। बादाम खाने के फायदे तथा बादाम के बेहतरीन औषधीय गुण
  • 2 अंजीर के फलों को पुदीने के साथ खाने से सीने पर जमा हुआ कफ धीरे-धीरे निकल जाएगा।
  • खून बढ़ाने के लिए सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची के दानों की बुकनी, केसर, चिरौंजी, पिस्ते और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से कमजोर शक्ति वालों के खून में वृद्धि होती है।
  • एक सूखा अंजीर और 5-10 बादाम को दूध में डालकर उबालें। इसमें थोड़ी चीनी डालकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून साफ होता है, गर्मी शांत होती है, पेट साफ होता है, कब्ज़ मिटती है और शरीर बलवान बनता है।
  • मुंहासे :- कच्चे अंजीर का दूध मुंहासों पर 3 बार लगाएं।

अंजीर गर्मी दूर करते हैं।

  • जिन लोगों को गरमी अधिक सताती है, ऐसे पित्त प्रधान लोगों के लिए ओस पीये हुए अंजीर बहुत लाभदायक हैं। ये रक्तवर्द्धक और शरीर पर ठण्डा असर करने वाले समझे जाते हैं । दो-चार ताजे पके अंजीरों को थोड़ी-सी खाण्ड के साथ मिलाकर ओस में रखा रहने देकर सुबह खाया जाता है, इससे शरीर की गरमी दूर होती है। अंजीर पाक का प्रयोग खून को साफ़ करता है और शरीर की गरमी को खत्म करता है। अंजीर के पत्तों को मोटा-मोटा कूटकर रात भर पानी में भिगो दें। सुबह मसल और छानकर इसको पीने से प्यास और उलटियां शान्त होती हैं। अंजीरों का शर्बत गरमियों में रोज़ ख़ाली पेट पीने से प्यास और गरमी अधिक नहीं सताती । अंजीर के पके फलों को पानी में घोलने से शर्बत बन जाता है।

अंजीर के रासायनिक संघटन

  • इसका रासायनिक संघटन इस प्रकार है- आर्द्रता- 8%, प्रोटीन- 0.03,खनिज 0.6.कार्बोहाइड्रेट- 17.1, कैल्शियम- 0.06, फास्फोरस- 0.03%पाया जाता है। लौह-1.2 मि.ग्रा., कैरोटीन 270 इ.यु., निकोटिनिक अम्ल-0.6मि.ग्रा., राइबोफ्लेविन 50 मि.ग्रा.ए एस्कोर्बिक एसिड-2 मि.ग्रा. प्रति 100 ग्राम होते हैं। ताजे फलों में 13-20% और सूखे फलों में 42-02, शर्करा होती है। बीजों में 30% स्थिर तेल होता है।

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