पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां : थायराइड, मोटापा, जोड़ों के दर्द, सर्वाइकल

पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां इस लेख में पतंजलि आयुर्वेद में विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए उपलब्ध दवाओ की जानकारी दी गयी है | साथ ही यह भी बताया गया है की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें | इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |

  • थायराइड
  • मोटापा
  • अस्थिशूल, सन्धिशूल, जोड़ों के दर्द
  • कटिशूल रोग (Cervical spondylosis, Sciatica)
  • अस्थिसुषिरता रोग (Osteoporosis)
  • अर्दित (Facial/Bell’s palsy Treatment)
  • आमवात (Rheumatism)
  • वातरक्त (Gout)

गलगण्ड (घेंघा ) तथा थायराइड की चिकित्सा के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां :

Baba ramdev ayurvedic medicine for typhoid.

Patanjali ayurvedic medicine for Thyroid obesity Osteoporosis पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां : थायराइड, मोटापा, जोड़ों के दर्द , सर्वाइकल पेन

Patanjali ayurvedic medicine

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य मुलेठी क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।

  • दिव्य त्रिकटु चूर्ण – 50 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म 10 ग्राम
  • दिव्य बहेड़ा चूर्ण – 20 ग्राम
  • दिव्य शिलासिन्दूर – 2 ग्राम
  • दिव्य ताम्र भस्म – 1 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि को भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/ मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य कांचनार गुग्गुलु –60 ग्राम
  • दिव्य वृद्धिवाधिका वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम

तीनों में से 1-1 गोली दिन में तीन बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

पढ़े यह भी –

मोटापे रोग की चिकित्सा के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां :

Patanjali Yogpeeth medicines for Obesity

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य कायाकल्प क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य त्रिफला चूर्ण  – 100 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाए और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य मेदोहर वटी – 5O ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के 1 घण्टा पहले सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

  • दिव्य त्रिफला गुग्गुलु – 6O ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 60 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य गोधन अर्क – 20 मिली
  • दिव्य घृतकुमारी स्वरस- 20 मिली

प्रात: व सायं खाली पेट सेवन करें। नोट- मेदोहर दलिया का सेवन करें।

(अस्थिवह-स्रोत की व्याधियां अस्थिवह-स्रोत का मूल- मेद व जघन है। अस्थिवह-स्रोत की व्याधियांसन्धिवात, अधिदन्त, अस्थिभेद, अस्थिशूल, केश, लोम, नख का गिरना इत्यादि।)

अस्थिशूल, सन्धिशूल, जोड़ों के दर्द की चिकित्सा के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां

Patanjali Yogpeeth medicines for Joint pain

  • दिव्य पीड़ान्तक क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य दशमूल क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य महावातविध्वंसन रस – 5 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवालपिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म -10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें। अत्यधिक पीड़ा होने पर 1-2 ग्राम बृहत् वातचिन्तामणि रस पुड़िया में मिला लेने से पीडा में तुरन्त लाभ होता है।

  • दिव्य योगराज गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य पीड़ान्तक वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं रात्रि-भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य वातारि चूर्ण – 100 ग्राम

आधा-आधा चम्मच, भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य पीड़ान्तक तैल – 100 मिली

दिन में 2 से 3 बार दर्द के स्थान पर मालिश करें। पीडान्तक बाम या जैल भी लगा सकते हैं। नोट-रोगी तथा रोग की अवस्थानुसार 1-1 चम्मच अजमोदादि चूर्ण का प्रयोग भी किया जा सकता है।

कटिशूल रोग की चिकित्सा के उपचार के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां 

Patanjali Yogpeeth medicines for Cervical spondylosis, Sciatica Treatment

  • दिव्य दशमूल क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य पीड़ान्तक क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं। (निर्गुण्डी तथा हरसिंगार के 3-4 पत्तों को काढ़े के साथ मिलाकर देने से विशेष लाभ होता है।)

  • दिव्य एकांगवीर रस – 10 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म -5 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं, प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें। अत्यधिक पीड़ा होने पर बृहत् वातचिन्तामणि रस को 1 से 2 ग्राम पुडिया में मिला लेने से पीड़ा में तत्काल लाभ होता है।

  • दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु — 60 ग्राम
  • दिव्य पीड़ान्तक वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन – 40 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें। अधिक पीड़ा होने पर विषतिन्दुक वटी की (1–1 गोली) प्रात: एवं सायं सेवन करने से विशेष लाभ होता है।

  • दिव्य पीड़ान्तक तैल – 100 मिली

पीड़ायुक्त स्थान पर मालिश करें।

अस्थिसुषिरता रोग की चिकित्सा के उपचार के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां 

Patanjali Yogpeeth medicines for Osteoporosis

  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ताशुक्ति – 10 ग्राम
  • दिव्य बृहत् वातचिन्तामणि रस – 1 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य योगराज गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन– 60 ग्राम

1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद दूध से सेवन करें।

  • दिव्य वातारी चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम

आधा या एक चम्मच चूर्ण को गुनगुने जल या दूध के साथ प्रात:, दोपहर व सायं । भोजन के बाद दो या तीन बार सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगंधारिष्ट – 450 मिली 4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

अर्दित के उपचार के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां 

Patanjali Yogpeeth medicines for Facial/Bell’s palsy Treatment

  • दिव्य दशमूल क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य मेधा क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 40 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य एकांगवीर रस – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य महावातविंध्वसन रस – 5 ग्राम
  • दिव्य रसराज रस – 1 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर रख लें। 1 चम्मच की मात्रा में प्रात: नाश्ते एवं रात्रि भोजन से आधा घण्टा पहले शहद/गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन – 40 ग्राम
  • दिव्य त्र्योदशांग गुग्गुल – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वशिला कैप्सूल – 20 कैप्सूल या दिव्य अश्वगन्धा चूर्ण -100 ग्राम

2-2 कैप्सूल या 1-1 चम्मच चूर्ण को दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य पीड़ान्तक तैल – 100 मिली

दिन में 2-3 बार प्रभावित स्थान पर मालिश करें।

  • दिव्य अश्वगंधारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

आमवात के उपचार के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां 

Patanjali Yogpeeth medicines for Rheumatism Treatment

जब आम व वात-दोष एक साथ प्रकुपित होकर शरीर में कोष्ठ, त्रिक प्रदेश और संधियों में प्रविष्ट होकर शोथ, शूल व स्तब्धता (जकड़न) उत्पन्न करते हैं, तब यह आमवात रोग कहलाता है।

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ -100 ग्राम
  • दिव्य पीड़ान्तक क्वाथ – 200 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य अजमोदादि चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य आमवातारि रस – 40 ग्राम

आधा–आधा चम्मच अजमोदादि चूर्ण एवं 2-2 गोली आमवातारि रस प्रातः व सायं उपरोक्त क्वाथ के साथ सेवन करें।

  • दिव्य महावातविध्वंसन रस – 5 ग्राम
  • दिव्य आमवातारि रस – 20 ग्राम
  • दिव्य प्रवालपिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 20 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 20 ग्राम
  • दिव्य बृहत् वातचिन्तामणि रस – 1 से 2 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य सिंहनाद गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 40 ग्राम

1-1 गोली दिन में 2-3 तीन बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं-भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

सप्ताह में एक दिन 1 गिलास गाय के दूध में 20 मिली एरण्ड तैल रात को सोने से पहले सेवन करने से आमवात रोगी को चामत्कारिक लाभ मिलता है। नोट- आमवात रोग में शोथ को कम करने के लिए रूक्ष स्वेद (बालू, एरण्ड बीज, सैंधव नमक, अजवायन मिलाकर पोटली बनाकर) करें। इसके अतिरिक्त पीडान्तक तैल को प्रभावित स्थान पर लगाकर एरण्ड या आक के पत्ते को सेक कर बांधने से विशेष लाभ होता है।

कष्टसाध्य पक्षाघात की चिकित्सा

  • दिव्य रसराज रस – 1-3 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य एकांगवीर रस – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 40 पुड़ियां बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु – 40 ग्राम
  • दिव्य मेधावटी – 4O ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन वटी – 4O ग्राम

1-1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य वातारि चूर्ण – 50 ग्राम

आधा-आधा चम्मच प्रात: एवं सायं दूध के साथ सेवन करें।

वातरक्त के उपचार के लिए उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेद की दवाइयां

 Patanjali Yogpeeth medicines for Gout Treatment

  • दिव्य पीड़ान्तक क्वाथ – 200 ग्राम
  • दिव्य दशमूल क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को 1 चम्मच मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात: सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य गिलोयघन वटी – 60 ग्राम

2-2 गोली प्रात: व साय उपरोक्त क्वाथ के साथ सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु – 6O ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य पीड़ान्तक वटी – 40 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

  • दिव्य वातारि चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य अजमोदादि चूर्णं – 100 ग्राम

आधा-आधा चम्मच भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य महावातविध्वंसन रस – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवालपिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

Reference – इस पोस्ट में पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की सारी जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई २०१६ के २५ वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.

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