मलेरिया में क्या खाये क्या ना खाएं, परहेज

मलेरिया में विशेष रूप से लाभ देने वाले पदार्थों पर ज्यादा जोर देने के बजाय इस बात का महत्व ज्यादा है कि मलेरिया के दौरान शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण मिल जाए और इस दौरान लिवर, किडनी तथा पाचन-तंत्र पर ज्यादा जोर भी न पड़े। मलेरिया के दौरान लिए जाने वाले भोजन का उद्देश्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने का होता है। किसी भी बुखार में शरीर से पानी ज्यादा मात्रा में सूख  जाता है, इसलिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे कि पानी, जूस, सूप, नारियल पानी आदि लेने चाहिए |

कृपया नोट करें मलेरिया में खानपान से जुडी ये जानकारी सिर्फ सामान्य मरीजो के लिए है यदि मलेरिया का रोगी किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है जैसे – मधुमेह, ह्रदय रोग या लीवर के रोग आदि तो उसे अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चहिये | #Diet #Food #Meal Tips in #Malaria, Malaria #fever #Patient #Diet #Chart #Plan #Indian.

मलेरिया बुखार के प्रमुख लक्षण : मलेरिया में ठंड के साथ तेज बुखार, बुखार उतरते समय पसीना आना, सिर में दर्द, जी मिचलाना, उलटी भी होती है।

मलेरिया में खान पान : मलेरिया डाइट

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Malaria Diet Plan

  • पहली स्टेज में संतरे का जूस और पानी : मलेरिया में पहली स्टेज में यानी बीमारी का पता लगने के कुछ दिन बाद तक रोगी को संतरे का जूस और भरपूर पानी पीना चाहिए। यह वह अवधि होती है, जब रोगी को तेज बुखार चढ़ता है। यह अवधि एक हफ्ते से लेकर दस दिन तक हो सकती है। मलेरिया बुखार में तरल खाद्य पदार्थो की विशेष भूमिका होती है |
  • दूसरे चरण में फल और अंत में दूध : मलेरिया में दूसरे चरण में यानी जब बुखार में थोड़ी कमी आए तो करीब तीन दिन तक रोगी को केवल फलों पर निर्भर रहना चाहिए। इस दौरान वह ताजा अनानास, पपीता, संतरा, अंगूर, सेब, आम दिन में तीन बार ले सकता है। फलों के इस चरण के अंतिम दिन यानी तीसरे दिन रोगी को दूध भी दिया जाना चाहिए। दूध में प्रोटीन और फैट होती है, जिसकी शरीर की जरूरत होती है।
  • तीसरे चरण में ठोस आहार : मलेरिया में थोड़ा सुधार दिखाई देने लगे तो इस अवस्था में तरल के साथ थोड़ा ठोस आहार भी देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस चरण में रोगी सुबह-सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर ले। नाश्ते में थोड़े-से फल (करीब एक छोटा कटोरा) ले और एक गिलास दूध ले। दोपहर के भोजन में भाप से पकाई सब्जी ले और भूख लगी हो तो एक या दो छोटी रोटियां ले। साथ में एक गिलास मट्ठा भी लेना चाहिए।
  • दोपहर बाद उसे एक गिलास फल का जूस या सूप लेना चाहिए। रात को थोड़ा पनीर, स्प्राउट और एक कटोरा सलाद लेना चाहिए।
  • मलेरिया में दाल-चावल की खिचड़ी, दलिया, साबूदाना, सलाद, अंकुरित बीज, नींबू, गाजर, टमाटर, सहजन, अनानास, पालक, कद्दू ,नारियल पानी, चीकू, पपीता,अंगूर ,जामुन, अमरुद, फलियाँ, मेवे आदि खाएं |
  • मलेरिया में पानी की कमी दूर करने के लिए ग्लूकोज पानी, गन्ना का रस, फलों का रस, शर्बत (चीनी, नमक और पानी के साथ नींबू) आदि का सेवन करें ।
  • प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए दूध, दही, लस्सी, छाछ, मछली (सूप), चिकन सूप, अंडे आदि को खा सकते है |
  • साबूदाना की खीर खिलाएं, प्याज और पुदीना की चटनी बनाकर खिलाएं।
  • कच्चा केला, परवल, बैगन, केले के फूल की सब्जी खाएं।
  • मलेरिया में अमरूद और सेब के रस का सेवन भी बुखार को चढ़ने से रोकता है।
  • काली मिर्च का पाउडर और सेंधा नमक मिलाकर सेब पर लगाकर खाएं |
  • मलेरिया में शरीर में नमक,चीनी और पानी की कमी बिलकुल ना होने दे |

मलेरिया में खानपान से जुड़े कुछ विशेष टिप्स :

  • दालचीनी को पीसकर पाउडर बना लें। इसे एक गिलास पानी में डालकर उबालें। इस मिश्रण में थोड़ा-सा काली मिर्च का पाउडर और शहद मिला लें। इसके बाद मलेरिया में इसका सेवन करें।
  • एक चम्मच पिसा हुआ जीरा लें और उसमें दस ग्राम गुड़ मिला लें। इसके तीन भाग करें और बुखार चढ़ने से पहेल सुबह, दोपर और शाम को सेवन करें।
  • 15 पत्ते तुलसी के, 10 काली मिर्च और दो चम्मच चीनी लें। इन्हें एक कप पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। काढ़े के तीन भाग करते हुए सुबह, दोपहर और शाम को लें।
  • क्वार्टर टाइप मलेरिया ( हर चौथे दिन चढ़ने वाला बुखार) : में चूना और नींबू काफी लाभकारी साबित होते हैं। करीब तीन ग्राम चूना को 60 मिलीलीटर पानी में घोल लें। इसमें एक नींबू का रस मिला दें। इस मिश्रण को बुखार के आने से ठीक पहले सेवन कर लें।
  • मलेरिया में फिटकरी को भी बड़े काम की होती है। इस्तेमाल का तरीका यह है कि एक गर्म प्लेट पर रखकर इसे सेंकें और इसका पाउडर बना लें। मलेरिया के बुखार के हमले से करीब चार घंटे पहले इसका सेवन करें और उसके बाद हर दो घंटे पर लेते रहें।

मलेरिया में परहेज :

  • मलेरिया में कोई विशेष परहेज नहीं होते है केवल जो खानपान कोई ऊर्जा नहीं देते ज्यादा फाइबर वाले खाने जो पचने में मुश्किल हो उनको खाने से बचे |
  • जैसे पूरे छिलके सहित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां (इनका केवल सूप ही पियें ), मोटी त्वचा के फल जो पचने में मुश्किल हो उनको ना खाएं |
  • मलेरिया में ये सब चीजे ना खाएं – जंक फ़ूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, चाट, टिक्की, घी तेल वाले तीखे चटपटे व्यंजन और अन्य कैफीनयुक्त पेय, शराब,चाय, कॉफी, कोला, रिफाइंड और प्रोसेस फूड जैसे मैदा से बने उत्पाद, केक, पेस्ट्री आदि। मीट, लाल मिर्च, सॉस, अचार और मसालेदार पदार्थ। यह भी जरुर पढ़ें – मलेरिया के लक्षण, कारण, बचाव व उपचार

मलेरिया में ध्यान में रखने योग्य बाते :

  • अगर आप मांसाहारी है तो मलेरिया में सिर्फ नॉन वेज सूप पियें मांस ना खाएं |
  • पानी उबालकर गुनगुना ही पियें मलेरिया में ठंडा पानी बिलकुल ना पियें |
  • मलेरिया में यदि बुखार बहुत तेज़ हो रहा हो, तो माथे पर ठंडे पानी की पट्टी बार-बार करें।
  • लौकी लेकर पैर के तलवों तथा हथेलियों पर रगड़ने से ठंडक मिलेगी तथा बुखार कम हो जाएगा।
  • मलेरिया में भोजन थोडा-थोडा करके बार-बार खाएं एक दम से बहुत सारा खाना बिलकुल ना खाएं , किसी भी बीमारी में मरीज का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, इसलिए कम खाएं और बार-बार खाएं |

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