कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण, लक्षण और नियंत्रण के उपाय

आजकल आनन-फानन में तैयार होने वाले फास्ट फूड, वसायुक्त खाद्य पदार्थ, अत्यधिक मीठी वस्तुओं और डिब्बाबंद खाद्य सामग्रियों के प्रयोग, आरामदायक रहन-सहन, धूम्रपान, शराब सेवन, काम का अत्यधिक बोझ, तनाव और अन्य मानसिक परेशानियों के कारण रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ रही है। हाल के वर्षों में वायरल इन्फेक्शंस थ्योरी भी आई है, जिसके तहत यह माना जा रहा है कि दिल की बीमारियाँ विषाणुओं के संक्रमण के कारण भी हो सकती है, जिसके कारण हृदय की नसों में कोलेस्टेरॉल का जमाव जल्दी हो जाता है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि कई मरीजों में दिल की बीमारी पैदा करने के कोई कारण मौजूद नहीं होने के बावजूद उन्हें दिल की बीमारी हो जाती है। जैसे गावों में रहने वाले और खेती बाड़ी करने वाले मेहनतकश लोग जिनको ह्रदय रोग या कोलेस्टेरॉल की बीमारी बिलकुल नहीं होनी चाहिए पर आजकल उनमे भी बड़ी मात्रा में लोग इन बीमारियों से पीड़ित होने लगे है | कोलेस्टेरॉल दो तरह का होता है :

  • लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (एलडीएल)
  • हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (एचडीएल)

एलडीएल सेहत के लिए बुरा होता है, जबकि एचडीएल अच्छा होता है। ldl cholesterol कितना होना चाहिए, कोलेस्ट्रॉल रेंज या कोलेस्ट्रॉल का सही स्तर क्या है इसको इस टेबल की सहायता से समझें |

cholesterol kya hai kaise kam kare कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण, लक्षण और नियंत्रण के उपाय

कोलेस्ट्रॉल मापने की टेबल

कोलेस्ट्रॉल के लक्षण

  • हाई ब्लड प्रेशर, थकान, मोटापा, सीढियाँ चढने पर साँस और दिल की धडकन ज्यादा बढ़ना, पैदल चलने पर सांस फूलना, पैरों में दर्द |ये सभी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण हो सकते है सही जानकारी खून की जाँच करवाकर ही पता चल सकती है |

कोलेस्ट्रॉल कैसे कम करें और बचाव के उपाय  

  • जैसा की हम हमेशा अपने ज्यादातर लेख में कहते है की खाने और पीने की सही आदते और सटीक सयोंजन आपको लगभग 98% बीमारियों से बचा सकता है, और बीमारी होने की दशा में सही खानपान आपको 50 % तक जल्द ही ठीक करने में मदद कर सकता है, इसलिए हमारा अधिक जोर सही खानपान और रोगों से बचाव के उपायों पर ज्यादा होता है | इसमें 2% वो बीमारियाँ है जो अनुवांशिक या दुर्घटना से होती है उसपर आपका कोई नियन्त्रण नहीं हो सकता है | याद रखें अगर आप एक बार बड़ी बीमारियों के कुचक्र में फंस गए तो घरेलू नुस्खे भी अधिक सहायता नहीं कर पाएंगे और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली इलाज कम और व्यापार ज्यादा है, जिसमे डॉक्टर, हॉस्पिटल से लेकर दवा बनाने वाली कम्पनियां तक शामिल है | इस प्रकार की बाजारवादी चिकित्सा अक्सर मरीज को एक बीमारी से निकालती है और दूसरी बीमारी में प्रवेश करवा देती है और ये सिलसिला उसके जीवित रहने तक चलता रहता है | इसलिए सही खानपान, नियमित जीवन शैली, हल्का व्यायाम को अपना व्यवहार बनाएं | तो आइये जानते है कोलेस्ट्रॉल से बचाव के तरीके |
  • कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने पर मरीज को मक्खन, घी, आइसक्रीम, चॉकलेट एवं मिठाई से परहेज करना चाहिए। अंडे, मांस, मछली और डेयरी उत्पाद कोलेस्ट्रॉल के प्रमुख स्रोत हैं |
  • ईसबगोल भी हृदय रोगियों को बहुत फायदा पहुँचाता है। आम तौर पर लोग इसे कब्ज दूर करने के लिए सेवन करते हैं। यह घुलनशील रेशों का अच्छा स्रोत है और कोलेस्ट्रॉल घटाता है। एक माह तक रोजाना 15 ग्राम ईसबगोल का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल में 15 प्रतिशत तक कमी की जा सकती है।
  • फल, साग-सब्जियों तथा सलाद का सेवन लाभदायक रहता है। चकोतरा फल बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाने में बहुत मददगार होता है।
  • इसके अलावा नियमित व्यायाम और रहन-सहन के तौर-तरीके में सुधार करने से भी कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।
  • जिन लोगों को दिल के दौरे पड़ चुके हैं वे अगर कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें तो उनकी बीमारी के बढ़ने की आशंका कम होगी। कोलेस्ट्रॉल के जमाव का जितना जल्दी पता चले उतना ही अच्छा है। इसलिए 30 साल की उम्र से ही व्यक्ति को नियमित तौर पर कोलेस्ट्रॉल की जाँच करानी चाहिए, क्योंकि इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल के जमने का पता चलने पर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
  • नियमित योग एवं व्यायाम करने तथा कम वसायुक्त और अधिक रेशेदार आहार खाने पर एक साल में ही कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम-से-कम 20 प्रतिशत घट जाता है |
  • नियमित व्यायाम से हृदय की कार्य-क्षमता बढ़ती है। इससे रक्त में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है |
  • मरीज में कोलेस्ट्रॉल के जमाव के लक्षण प्रकट होने पर सबसे पहले मरीज के शरीर के रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा की जाँच की जाती है।
  • मधुमेह के रोगियों को कोलेस्ट्रॉल होने की संभावना अधिक होती है |
  • अधिक वसायुक्त आहार, अंडे का पीला भाग, धूम्रपान एवं मांसाहारी भोजन हृदय के लिए नुकसानदायक होते हैं, क्योंकि ये रक्त में कोलेस्ट्रॉल’ के स्तर को बढ़ाते हैं।
  • हृदय रोगी के आहार में रोजाना 65 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट तथा 30 प्रतिशत प्रोटीन शामिल करना अच्छा रहता है। हृदय रोगी को फुल क्रीम दूध से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है।
  • मेथी, प्याज, दालचीनी, सोयाबीन और दालें, अदरक, धनिये का पानी, लौकी का जूस और लहसुन हृदय के लिए हितकर हैं। इनसे कोलेस्ट्रॉल और रक्त कणों का चिपचिपापन घटता है तथा रक्तचाप में सुधार होता है। लहसुन के नियमित सेवन से 10 प्रतिशत तक कोलेस्ट्रॉल घटाया जा सकता है। यह भी पढ़ें – लौकी जूस के बेहतरीन 29 औषधीय गुण
  • आहार में अधिक एंटी-ऑक्सीडेंट्स लेना चाहिए। ये विटामिन ‘सी’, ‘ई’ और बीटा कैरोटिन में मौजूद होते हैं। जैसे निम्बू, एलोवेरा, आंवला, संतरा आदि | यह भी पढ़ें –जाने आंवले के बेहतरीन औषधीय गुण
  • आम तौर पर बादाम को हृदय रोग में नुकसानदायक माना जाता है; लेकिन ऐसा नहीं है। बादाम इस रोग में लाभकारी है।
  • हृदय रोगियों को दूधवाली चाय से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसमें कैलोरी अधिक होती है। ऐसे रोगियों के लिए बिना दूध व चीनी की चाय ठीक रहती है, क्योंकि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। दिन भर में ऐसी दो-तीन कप चाय पीना लाभदायक रहता है। खासतौर से ग्रीन टी ज्यादा लाभदायक होती है | यह भी पढ़ें-  जानिए चाय पीने के फायदे और नुकसान
  • वैसे तो सही जीवनशैली अपनाकर बिना कोई दवा लिए कुछ हफ्तों के अंदर ही कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित न होने की स्थिति में दवाइयों का सहारा लिया जाता है। कुछ समय पहले तक उपलब्ध कई दवाइयों के अनेक साइड इफ़ेक्ट थे, लेकिन आज ऐसी दवाइयाँ उपलब्ध हो गई हैं, जिनका बहुत कम साइड इफ़ेक्ट है और जो बहुत ही कारगर भी हैं। आप इसके लिए आयुर्वेद को  अजमा सकते है आयुर्वेद में भी बहुत लाभकारी दवाई उपलब्ध है | यह भी पढ़ें- जाने दवाइयों के सेवन से जुडी सावधानियां और Medicine Side Effects
  • रक्त-धमनी में काफी मात्रा में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाने पर बाईपास या एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज को जीवनदान दिया जा सकता है। लेकिन इन उपायों से भी कोलेस्टेरॉल जमाव की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता है। यह प्रक्रिया बाईपास या बैलूनिंग के बाद भी जारी रह सकती है।

कोलेस्टेरॉल क्या है ?

  • कोलेस्टेरॉल आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चित रसायन है। हर डॉक्टर अपने मरीजों को कोलेस्टेरॉल से बचे रहने का सुझाव जरुर देते हैं। हृदय रोगियों के लिए तो कोलेस्टेरॉल किसी मुसीबत के समान है। दरअसल दिल की बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाने वाला कोलेस्ट्रॉल अपने आप में बुरा नहीं है। यह हमारे शरीर के लिए अनिवार्य है। कोलेस्टेरॉल हमारे बहुत काम आता है। उदाहरण के लिए, कोलेस्ट्रॉल के बिना पुरुषत्व और नारीत्व संबंधी हारमोन नहीं बनते। बच्चों के रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल कोशिका निर्माण के काम आता है और यह इस उम्र में आवश्यक होता है। लेकिन जवान हो जाने पर व्यक्ति में कोशिका का निर्माण कम हो जाता है, इसलिए शरीर का अतिरिक्त कोलेस्टेरॉल नसों में जमा होना शुरू हो जाता है। हमारा शरीर खाने में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को सोखने के अलावा अपने आप से भी इसको बनाता है। हमारे शरीर में लीवर कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करता है। शरीर में कोलेस्टेरॉल की मात्रा बढ़ने पर रक्त में भी इसका स्तर बढ़ता जाता है। बस यही सबसे बड़ी समस्या है |
  • हृदय की बीमारियों का एक बड़ा कारण हृदय की रक्त-धमनियों या नसों में कोलेस्ट्रॉल का जमाव होना है जिससे खून और ऑक्सीजन शरीर के दूसरे अंगो खासकर दिमाग तक नहीं पहुच पाता है । दिल को रक्त एवं ऑक्सीजन पहुँचानेवाली रक्त-धमनियों में कोलेस्टेरॉल जमने के कारण एंजाइना एवं दिल के दौरे की जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। कोलेस्ट्रॉल रक्त में अघुलनशील होता है, इसलिए रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा अधिक होने पर वह रक्त-नलियों में जमा हो जाता है, जिससे रक्त-प्रवाह में रुकावट आती है। कोलेस्टेरॉल हृदय की रक्त-धमनियों के अलावा मस्तिष्क, किडनी, हाथ-पैर तथा शरीर के अन्य अंगों की रक्त-धमनियों में जमा होकर उनमें रक्त-प्रवाह बाधित कर सकता है।
  • जिस तरह से कोलेस्ट्रॉल हृदय की रक्त-धमनियों में जमा होकर दिल के दौरे की स्थिति उत्पन्न कर सकता है, उसी तरह यह अन्य अंगों की धमनियों में जमा होकर उन अंगों को बेकार कर सकता है। दिमाग की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के जमा होने पर ब्रेन अटैक एवं लकवा जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं, जबकि हाथ-पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के जमने से गैंगरीन हो सकती है। पेट की मुख्य धमनी और पैरों में
  • रक्त की आपूर्ति करनेवाली उसकी शाखाओं में रुकावट आने से लेरिक सिंड्रोम नामक खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है।
  • हमारे देश में कुल आबादी में से करीब 15 प्रतिशत लोग कोलेस्ट्रॉल के जमाव की समस्या से पीड़ित हैं। कम उम्र के लोगों में दिल के दौरे का प्रमुख कारण आनुवंशिक कारणों के अलावा ज्यादा कोलेस्टेरॉल एवं अधिक रक्तचाप भी शामिल हैं। रक्त-धमनियों में कोलेस्टेरॉल का जमाव कम उम्र, करीब 30 साल की उम्र, में ही आरंभ हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ नसों में कोलेस्ट्रॉल के व्यक्ति में इसके लक्षण दिखने लगते है। जमाव ज्यादा होने पर दिल के दौरे या एंजाइना जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।
  • अपने अगले लेखो में हम कोलेस्ट्रॉल कम करने के आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे तथा योगासन तथा व्यायाम की जानकारी देंगे | आज ही हमारा ब्लॉग अपने ईमेल द्वारा सब्सक्राब करें और भविष्य में हमारे नए प्रकाशित पोस्ट की जानकारी पाते रहें और सेहतमंद बने रहे |

सवाल : क्या वनस्पति घी का प्रयोग स्वास्थ्य की दृष्टि से उपयुक्त है?

जवाब : बिल्कुल नहीं! वनस्पति घी का निर्माण वनस्पति तेल के हाइड्रोजनीकरण से होता है। इस से तेल ठोस होकर घी की शक्ल ले लेता है। इस प्रक्रिया में ट्रांस फैटी एसिड बन जाते हैं जो सेहत पर बुरा असर डालते हैं। वनस्पति घी के इस्तेमाल से खून में नुकसानदेह एलडीएल कोलेस्टेरॉल बढ़ने लगता है। धमनियों के अंदर चर्बी जमने से दिल पर बुरा असर पड़ता है।

सवाल : खाना पकाने के लिए कौन-सा तेल सबसे अच्छा है?

जवाब : बेहतर है कि कोई एक तेल की बजाय कई तेल अदल-बदलकर इस्तेमाल करें। कुछ चीजें सूरजमुखी या तिल के तेल में, कुछ मूंगफली या सरसों के तेल में, और कुछ शुद्ध घी में बनाएं। इससे शरीर में विभिन्न वसीय अमलों की अनुपात संतुलित बने रहने में मदद मिलेगी और कोलेस्टेरॉल के नुकसानदेह घटक बढ़ने नहीं पाएंगे।

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