बाँझपन, मासिक धर्म और श्वेत प्रदर की दवा पतंजलि

स्त्री रोगों की दवा पतंजलि : इस लेख में पतंजलि आयुर्वेद में विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए उपलब्ध दवाओ की जानकारी दी गयी है | साथ ही यह भी बताया गया है की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें | इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |

  • श्वेत प्रदर की दवा पतंजलि
  • रक्तप्रदर या मासिकधर्म में अधिक रक्तस्राव दवा पतंजलि
  • महिला बाँझपन दवा पतंजलि
  • Uterine Fibroid/ Ovarian cyst दवा पतंजलि
  • मासिक धर्म की कमी और मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द की दवा पतंजलि
  • गर्भावस्था में गर्भपोषण के लिए दवा पतंजलि
  • बार-बार होने वाले गर्भपात

श्वेतप्रदर ल्यूकोरिया की आयुर्वेदिक दवा पतंजलि

likoria ka ilaj in hindi patanjali श्वेतप्रदर ल्यूकोरिया की आयुर्वेदिक दवा पतंजलि

पतंजलि आयुर्वेदिक दवा

  • दिव्य वसंतकुसमाकर रस – 1 ग्राम
  • दिव्य त्रिवंगा भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गिलोयसत् – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं, प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य स्त्री रसायन वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम

1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य पुष्यानुग चूर्ण – 100 ग्राम

आधा चम्मच प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टे पहले गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य पत्राङ्गासव – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

रक्तप्रदर या मासिकधर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर दवा पतंजलि

  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य कहरवा पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोयसत् – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य अशोकारिष्ट – 450 मिली

चार चम्मच औषधि में चार चम्मच पानी मिलाकर सुबह शाम खाना खाने के बाद सेवन करें |

  • दिव्य स्त्री रसायन वटी – 40 ग्राम

2-2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें। नोट:-लाजवन्ती पञ्चाङ्ग चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर प्रात:, सायं घी में मिलाकर खाएं ।

स्त्री बन्ध्यत्व (महिला बाँझपन) दवा पतंजलि बाबा रामदेव

  • दिव्य शिवलिंगी बीज चूर्ण -100 ग्राम
  • दिव्य पुत्रजीवक गिरी – 200 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर चूर्ण बना लें 1 चौथाई चम्मच प्रात: खाली पेट तथा सायं –भोजन से 1 घण्टा बाद गाय के दूध के साथ सेवन करें।

  • दिव्य स्त्री रसायन वटी – 6O ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम

2-2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें। दिव्य फलघृत 1-1 चम्मच गाय के दूध से प्रात: व सायं लें।

गर्भाशय नलिका ((Tube Block)) रूक जाने का इलाज पतंजली आयुर्वेद में

यदि गर्भाशय नलिका अवरोध की वजह से बन्ध्यत्व हो तो उपरोक्त औषधियों के साथ निम्नलिखित औषधियों के सेवन से विशेष लाभ होता है।

  • काला तिल का चूर्ण – 30 ग्राम
  • गाजर बीज चूर्ण -50 ग्राम
  • सोंठ चूर्ण – 50 ग्राम
  • अजवायन चूर्ण – 25 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य स्त्री रसायन वटी – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 6O ग्राम
  • दिव्य रज:प्रर्वतनी वटी – 40 ग्राम

1–1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य दशमूलारिष्ट – 450 मिली
  • दिव्य पत्रांगासव – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

Uterine Fibroid/ Ovarian cyst का इलाज के लिए दवा पतंजलि

  • दिव्य शिलासिंदूर – 2
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य कहरवा पिष्टी – 5 ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 20 ग्राम
  • दिव्य वृद्धिवाधिका वटी – 20 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य कांचनार गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य स्त्रीरसायन वटी – 60 ग्राम

1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

मासिक धर्म की कमी और मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द के इलाज के लिए पतंजली आयुर्वेद की दवाई

  • दिव्य दशमूल क्वाथ — 200 ग्राम

मासिक धर्म का कम होएं पर 1 चम्मच क्वाथ को लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात: सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य रज:प्रवंतानी वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 40 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य स्त्री रसायन वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य कोचनार गुग्गुलु – 40 ग्राम

1–1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

  • दिव्य पत्रांगासव – 450 मिली
  • दिव्य अशोकारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

गर्भावस्था में गर्भपोषण के लिए दवा पतंजलि

  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 5 ग्राम
  • दिव्य धात्री लौह- 10 ग्राम
  • दिव्य अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 5 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • सोम घृत

1 चम्मच प्रात: एवं सायं दूध के साथ सेवन करें।

गर्भस्राव (बार-बार होने वाले गर्भपात) के उपचार के लिए दवा पतंजलि

  • दिव्य कहरवापिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य स्फटिक भस्म – 4 ग्राम
  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 2 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • ढाक (पलास) के पत्र को (प्रथम मास में 1 पत्र, द्वितीय मास में 2 पत्र, तृतीय मास में 3 पत्र, चतुर्थ मास में 4 पत्र, पंचम मास में 5 पत्र, छ्टे मास में 6 पत्र, सप्तम मास में 7 पत्र, अष्टम मास में 8 पत्र तथा नवम मास में 9 पत्रों को 1 गिलास दूध में पकाकर प्रात: एवं सायं लेना चाहिए। उपरोक्त बताई गई विधि से पकाकर लिए गए ढाक के पत्र से चामत्कारिक लाभ हुआ है। साथ में अन्य सहायक चिकित्सा दें।
  • धतूरे की जड़ को टुकड़े-टुकड़े कर काले ऊनी धागे में बांधकर कमर में पहनने से गर्भस्राव नहीं होता। (गर्भस्राव की आशंका होने तक इसे धारण किए रहें।)

Reference – इस पोस्ट में पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की सारी जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई २०१६ के २५ वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.

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  1. By RAGHVENDRA SINGH PRAJAPATI

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