पैरालिसिस (लकवे) के मरीज को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

पक्षाघात, (Paralysis) पैरालिसिस यानी लकवा, यूं तो कई प्रकार के होते हैं, पर मुख्यतः इन्हें दो भागों में बांटा जाता है। एक हाइपोकैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस और दूसरा हाइपरकैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस । बाकी ज्यादातर पैरालिसिस अटैक इन्हीं दोनों के अंतर्गत आते हैं। हाइपो और हाइपर का वर्गीकरण ब्लड शुगर स्तर के घटने-बढ़ने और पोटेशियम नामक खनिज लवण (मिनरल) के आधार पर किया गया है, क्योंकि मांसपेशियों की ठीक कार्यप्रणाली और ब्लड शुगर के संतुलित स्तर के लिए पोटेशियम एक जरूरी तत्व होता है। लकवे का रोग शरीर के स्नायुओं और नर्वस सिस्टम, मस्तिष्क का रोग है। लकवा आने से बहुत पहले ही मस्तिष्क कमजोर पड़ जाता है। शरीर के स्नायु जगह-जगह कमजोर एवं शक्तिहीन हो जाते हैं। इससे आँख तथा कान आदि इंद्रियों की कार्यक्षमता मंद पड़ जाती है। इस रोग मरीज पूरी तरह से या आंशिक रूप से अपंग हो जाता है |

पैरालिसिस के मरीज के लिए सही भोजन का सेवन इस बीमारी से बाहर निकालने में काफी उपयोगी साबित हो सकता है | हाइपोकैलेमिक पैरालिसिस में शरीर को ज्यादा पोटेशियम की जरूरत होती है, मगर कार्बोहाइड्रेट की कम आवश्यकता होती है। हाइपरकैलेमिक पैरालिसिस में शरीर में ज्यादा पोटेशियम का जाना नुकसानदायक होता है, जबकि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से लाभ होता है। प्रोटीन दोनों ही प्रकार के पैरालिसिस में शरीर को पर्याप्त मात्रा में चाहिए। इस पोस्ट में हाइपो-कैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस के मरीजो को क्या खाना चाहिए तथा किन चीजो से परहेज रखना चाहिए यह बताया गया है, इससे अगले आर्टिकल में हम हाइपर-कैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस के मरीजो के लिए उचित खानपान बतायेंगे |

इस आर्टिकल के चार भाग हैं |

  1. पैरालिसिस के मरीज को क्या खाना चाहिए |
  2. लकवे के मरीज को क्या नहीं खाना चाहिए यानि परहेज |
  3. पैरालिसिस के मरीज की स्थिति में सुधार के लिए टिप्स |
  4. पैरालिसिस के विभिन्न प्रकार |

हाइपोकैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस में क्या खाएं

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पैरालिसिस (लकवे) के मरीज का भोजन

  • शरीर को अच्छी मात्रा में तरल पदार्थ दें : हाइपो लकवे के मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन से बचने के लिए ऐसा करना जरूरी है, क्योंकि व्यक्ति को इस रोग में प्रोटीन और पोटेशियम की ज्यादा जरूरत पड़ती है। तरल पदार्थों में पानी सबसे बढ़िया है। ज्यादा-से-ज्यादा पानी पीएं। इसके बाद ग्रीन टी का नंबर है। रोजाना दो कप तक कॉफी भी पी सकते है।
  • पोटेशियम के धनी, कम कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ लें : हाइपोकेपीपी में शरीर को पोटेशियम मिलना जरूरी है। इसलिए उन पदार्थों को भोजन में शामिल करें, जिनमें पोटेशियम होता है। फलों में केला, संतरा, आम, आडू, सूखे खुबानी, आलूबुखारा, खरबूजा, सेब, अंगूर, स्ट्रॉबेरी एवोकैडो; सब्जियों में सोयाबीन और अन्य सफेद बीन, पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों, छिलका समेत आलू, शकरकंद और मशरूम (विशेषकर सफेद), गाजर में काफी पोटेशियम होता है। इसके अलावा मछली, दूध, दही और किशमिश में भी अच्छी मात्रा में पोटेशियम होता है। पोटेशियम के धनी पदार्थों के साथ समस्या यह है कि इनमें कार्बोहाइड्रेट भी होता है और हाइपोकेपीपी में शरीर में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट का पहुंचना नुकसानदायक होता है। हमें शरीर को पोटेशियम देने का प्रयास तो करना है, मगर ज्यादा कार्बोहाइड्रेट को रोकना भी है। ऐसा करने के दो तरीके हैं :-
  • (1) पोटेशियम के धनी पदार्थों को नियंत्रित मात्रा में ही खाया जाए।
  • (2) उन पदार्थों को लें, जो पोटेशियम के तो धनी हैं और साथ ही उनमें कार्बोहाइड्रेट भी कम है।
  • ज्यादा पोटेशियम और कम कार्ब वाले पदार्थ ये हैं :-
  • सब्जियों में : ब्रोकोली, मशरूम, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक, कद्दू, टमाटर, हाथीचक (आर्टीचोक), ब्रूशेल्स स्प्राउट, सरसों, शलजम्।
  • फलों में : कीवी, एवोकैडो और आम।
  • मांसाहार में : मांस, मछली
  • इनके अलावा मूंगफली, एस्परगस (शतावरी), ब्लैक टी से भी हमें ज्यादा पोटेशियम और कम कार्बोहाइड्रेट मिलता है। इनके साथ ही बाकी पोटेशियम के धनी पदार्थ भी लें, मगर कम मात्रा में लें, जिससे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट शरीर में न जाए। जैसे दूध में खूब पोटेशियम है और यह शरीर के लिए जरूरी भी है, मगर यह एक कार्बोहाइड्रेट भी है। इसलिए दूध का सेवन करें, पर मलाई निकले दूध को नियंत्रित मात्रा में ही लें।
  • खास बात : पोटेशियम शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बनाने में मदद करता है। यह मांसपेशियों का सुचारू संचालन तय करता है। यह नर्व और मांसपेशियों के बीच संवाद में मदद करता है और पोषक तत्वों व खराब तत्वों को कोशिकाओं के अंदर और बाहर ले जाता है। मांसपेशियों के लिए पोटेशियम की इतनी अहमियत के कारण ही यह लकवा के रोग में बहुत महत्त्वपूर्ण खनिज लवण हो जाता है।
  • पैरालिसिस के रोगी को अनाजो में चोकर युक्त आटे की रोटी, पुराना चावल, दलिया, बाजरा, उड़द, मूंग की दाल सेवन करवाएं ।
  • फलों में अंजीर, अंगूर, आम, सीताफल, सेब, नाशपाती, पपीता खाएं।
  • सब्जियों में परवल, लौकी, तुरई, करेला, बैगन, अदरक, टिंडा, प्याज, बथुआ, मेथी सेवन करें।
  • गर्म दूध, दही, छाछ, मक्खन, सोंठ मिला गुड़, छुहारा आदि खाएं।
  • मक्खन के साथ लहसुन की 5-6 कलियां चबाकर सुबह-शाम खाएं।
  • लहसुन की 5-6 कलियां पीसकर एक गिलास दूध के साथ रोजाना पिएं।
  • पैरालिसिस की बीमारी में संतुलित प्रोटीन का शरीर में जाना बहुत जरूरी है। हर बार के भोजन में प्रोटीन की शरीर में अच्छी मात्रा जानी चाहिए। प्रोटीन के धनी खाने वाली चीजें ये हैं- मीट, मछली, अंडा, चिकन, पनीर, टोफू, सभी प्रकार के बींस (फलीदार सब्जियां), दूध और उसके उत्पाद, सभी प्रकार के नट्स (बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली आदि), हरी पत्तेदार सब्जियां, अनाज और दालें |
  • यहां भी हमें यह ध्यान रखना होगा कि शरीर में प्रोटीन तो खूब जाए, पर कार्बोहाइड्रेट कम जाए। यदि हम अनाज और दालों से ही सारी प्रोटीन लेंगे तो हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट भी काफी मात्रा में जाएगा, जो पैरालिसिस में नुकसानदायक रहेगा। हमें उन पदार्थों को प्राथमिकता देनी होगी, जो प्रोटीन के धनी हैं। मगर उनमें कार्बोहाइड्रेट कम है। प्रोटीन के धनी, मगर कम कार्ब वाले पदार्थ ये हैं – मांस, मछली, झींगा, अंडा, बादाम, अखरोट, पिस्ता, काजू, कद्दू और सूरजमुखी के बीज, मूंगफली का मक्खन, टोफू, हरी सोयाबीन, चना, भीगे छोले की चटनी या काबुली चने की चटनी, काली बीन, किसी पेय पदार्थ में प्रोटीन मिला हुआ पाउडर, पनीर, दही, अलसी के बीज।

पैरालिसिस में क्या नहीं खाना चाहिए : परहेज  

  • ज्यादा नमक हानिकारक है : शरीर में ज्यादा सोडियम हाइपोकेपीपी में नुकसान करता है, इसलिए नमक से दूर ही रहें। खाने की चीजों में ऊपर से नमक बिल्कुल न छिड़कें। साथ ही पकाने के दौरान भी भोज्य पदार्थों में हल्का नमक ही रखें। आलू के चिप्स, सॉस, सोया सॉस, अचार, जैतून, नमकीन बिस्कुट, नमक के पॉपकॉर्न, पिज्जा, सूप, डिब्बाबंद सूप, पैकेज्ड फूड, जैसे हैम्बर्गर आदि से दूर ही रहें। यह भी पढ़ें – हाइपर कैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस में क्या खाना चाहिए तथा क्या नहीं
  • ज्यादा चीनी नुकसानदायक है, क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट है, जो हाइपोकेपीपी में शरीर को कम ही चाहिए। इसके तहत चीनी, सिरप, शहद, जैम, जैली, स्वीट रोल्स, डॉगनट, आइसक्रीम, कैंडी, कुकीज, सॉफ्ट ड्रिक, पुडिंग, आइस क्रीम, केक, पेस्ट्री आदि आते हैं, जिनसे पैरालिसिस के रोगी को दूर रहना चाहिए।
  • ज्यादा चिकनाई वाला और ज्यादा तला भोजन भी नुकसानदायक होगा।
  • भारी, गरिष्ठ, तेल-घी में तली-भुनी मिर्च-मसालेदार चीजें भोजन में न लें।
  • नया चावल, बेसन, चीनी, नमक, गुड़, भैंस का दूध का सेवन न करें।
  • नशीले व उत्तेजक पदार्थों से परहेज करें।
  • अमचूर, इमली की खटाई से परहेज करें।
  • आलू, भिंडी, तरबूज, उडद दाल, अरहर की दाल, बासी खाना, रतालू, कद्दू, मटर, अरवी न खाएं।

पैरालिसिस के मरीज को जल्दी ठीक करने के लिए ये उपाय भी करें

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पैरालिसिस

  • लकवा पीड़ित रोगी को सहारा देकर चलने-फिरने का व्यायाम कराएं।
  • पैरालिसिस रोगी को फिजियोथेरापिस्ट की सलाह से एक्सरसाइज नियमित रूप से करवाएं |
  • हाथ-पैर धोने और नहलाने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें।
  • 500 मिली लीटर सरसों के तेल में पिसी हुई लहसुन 200 ग्राम मिलाकर अच्छी तरह एक उबाल दें। फिर ठंडा कर छान लें। इससे रोजाना पीड़ित अंग की मालिश करें। मालिश के लिए आप महानारायण तेल भी ले सकते हैं। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए। स्नायुओं पर हल्के हाथ से पर्याप्त समय तक मालिश करनी चाहिए।
  • नाक के नथुनों में रोज सुबह-शाम अखरोट का तेल लगाएं।
  • नहाने के बाद रुएंदार तौलिए से शरीर को रगड़कर गर्म कपड़े पहनाएं।
  • पर्याप्त पानी पीना : लकवे के रोगी को नींबू के रस से मिश्रित सादे पानी को थोड़ा-थोड़ा करके भरपूर मात्रा में पीना चाहिए। लंबी अवधि तक पेट को एनिमा द्वारा साफ करते रहना चाहिए, इससे शरीर पूरी तरह साफ हो जाएगा।
  • धूप सेंकना : पैरालिसिस के रोगी को प्रतिदिन करवट बदल-बदलकर 10 से 40 मिनट तक सूर्य स्नान करना चाहिए। धूप सेकते समय सिर और आँखों को कपड़े से ढक लेना चाहिए।
  • रंग चिकित्सा : रोज पीले रंग की बोतल में पानी भरकर उसे बारह घंटे सूरज की रौशनी में रखें और उसके बाद आधे घंटे में वह पानी पीएँ। शरीर के लकवा ग्रस्त हिस्से पर पहले एक घंटे तक लाल प्रकाश और बाद में दो घंटे तक नीला प्रकाश डालना चाहिए |
  • पैरालिसिस के रोगियों के लिए प्राणायाम सबसे अच्छा योगासन है।
  • नींद, विश्राम और शिथिलीकरण : कम से कम आठ घंटे की नींद लें क्योंकि शरीर के लिए विश्राम जरूरी है। शिथिलीकरण के लिए शवासन एक उपयोगी आसन है। यह भी जरुर पढ़ें – लकवा (पैरालिसिस) होने के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार

पैरालिसिस (लकवे ) के विभिन्न प्रकार

  • अर्धांग का लकवा -(Hemiplegia)
  • एकांग का लकवा- (Monoplegia)
  • पूर्णांग का लकवा -(Quadriplegia, Diplegia)
  • निम्नांग का लकवा- (Paraplegia)
  • संकल्प लकवा- (Parkinson’s Disease)
  • मेरुमज्जा प्रदाहजन्य लकवा -(Myelitis)
  • बाल लकवा -(Infantile Paralysis)
  • गले का लकवा -(Vocal Cords Paralysis)
  • जीभ का लकवा -(Bulbar Paralysis or Aphasia)
  • मुंह का लकवा -(Facial Paralysis)
  • उँगलियों का लकवा -(Writer’s Paralysis)
  • पेशी क्षय जन्य लकवा -(Wasting of Muscles Paralysis)
  • डिप्थीरिया जन्य लकवा -(Post diptheritic Paralysis)
  • हिस्टीरिया जन्य लकवा -(Hysterical Paralysis)
  • पारद दोष जन्य लकवा -(Mercurial Paralysis)
  • सीसा जन्य लकवा -(Lead Palsy)
  • गठिया जन्य लकवा- (Rheumatic Paralysis)
  • आंशिकत्वक शून्यता -(Partial Paralysis)
  • हाथ के ऊपरी भाग का लकवा -(Erb’s Paralysis)
  • रक्तचापधिक्य जन्य लकवा – (Hypertensive Haemorrhage Paralysis)

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