त्वचा जलने पर घरेलू उपाय तथा फ़ौरन राहत के लिए प्राथमिक उपचार

घर में प्रायः जलने या झुलस जाने की दुर्घटनाएं होना एक साधारण बात है क्योंकि रसोईघर में काम करते हुए किसी के साथ भी ऐसी दुर्घटना हो सकती है | रसोईघर में थोड़ी-सी लापरवाही गर्म चाय, दूध, गर्म तेल किसी को भी जला सकती है। स्टोव, चूल्हे से सब्जी व दूध किसी कपड़े से उतारते हुए कपड़े में आग लग सकती है। आग से हाथ भी जल सकता है। घर में माचिस से खेलते बच्चे अंजाने में अपने हाथ-पांव भी जला सकते हैं। घर में दौड़ते बच्चे किसी समय गर्म चाय व दूध से जल सकते हैं। इसलिए जलने पर फ़ौरन राहत के लिए सभी को प्राथमिक चिकित्सा तथा घरेलू नुस्खो की जानकारी अवश्य होनी चाहिए । इस पोस्ट में जलने पर प्राथमिक चिकित्सा के उपाय तथा कुछ घरेलू नुस्खे बताए गए है जो छोटी-मोटी जलने की घटना के उपचार में मददगार है लेकिन अधिक जलने पर कोई भी घरेलू नुस्खा ना अजमाए फ़ौरन किसी डॉक्टर को दिखाएं |

जलना : जब शरीर का कोई अंग सीधे आग, गर्म धातु या बिजली के सम्पर्क में आ जाता है, तब त्वचा या मांस जल जाता है या फफोले पड़ जाते हैं। झुलसनाः उबलते हुए तरल पदार्थ शरीर पर गिर जाने से त्वचा जलती नहीं, बल्कि झुलस जाती है जिससे त्वचा लाल हो जाती है। जलने व झुलसने दोनों ही स्थिति में बहुत तेज जलन व दर्द होता है।

जलन मुख्य तीन प्रकार की होती है—

  • प्रथम डिग्री का जलना (फर्स्ट डिग्री बर्न)- इसमें त्वचा का ऊपरी सतही भाग सम्मिलित होता है। त्वचा का रंग लाल हो जाता है।
  • द्वितीय डिग्री का जलना (सेकेंड डिग्री बर्न)-त्वचा की सतही परत निकल जाती है और जली हुई सतह पर फफोले पड़ जाते हैं।
  • तीसरी डिग्री का जलना (थर्ड डिग्री बर्न)-त्वचा पूरी तरह जल जाती है। नसें, मांसपेशियाँ और हड़ियाँ जैसे आंतरिक अंग ताप की तीव्रता के कारण झुलस जाते हैं।

जलने पर प्राथमिक उपचार

त्वचा जलने पर घरेलू उपाय तथा फ़ौरन राहत के लिए प्राथमिक उपचार jalne par kya kare gharelu upchar

त्वचा जलने पर प्राथमिक उपचार

  • फर्स्ट डिग्री बर्न : इसे मामूली जल जाना भी कह सकते हैं। इसमें त्वचा लाल हो जाती है, परन्तु फफोले नहीं पड़ते। जैसा कि प्रायः रोटी सेकते समय भाप या तवे पर उंगली छू जाने से हो जाता है। उपचार – तुरंत कच्चा पिसा आलू, देशी घी, हींग का पानी या गुंदा हुआ जरा सा आटा लगा देना चाहिए। थोड़ी देर में जलन शान्त हो जाएगी।
  • सेकेंड डिग्री बर्न : इस प्रकार की जलन में तुरन्त छाले, फफोले पड़ जाते हैं। प्राथमिक उपचार – सबसे विशेष बात यह है कि फफोलों को फोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि फफोले अन्दर से घाव की रक्षा करते हैं। इस पर न तो पानी डालिए न ही कोई तैलीय पदार्थ लगाइए। बरनॉल या कच्चा पिसा हुआ आलू लगाइए या नारियल का तेल व चूने का पानी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगा ले इससे आराम मिलेगा।आधे लीटर पानी में 10 ग्राम खाने वाला सोडा मिलाकर कपड़ा भिगोकर घाव या फफोलों पर रखिए।
  • थर्ड डिग्री बर्न : विषम जलन बहुत भयंकर व कष्टदाई होती है। इसमें शरीर के स्नायु तन्तु जल जाते हैं। (जले हुए स्थान के) चेहरा, हाथ या पेट जल जाने पर स्थिति बहुत नाजुक हो जाती है। उपचार – यह स्थिति इतनी गम्भीर होती है कि प्रायः घरेलू उपचार से घायल को आराम देना कठिन होता है। रोगी दर्द से बहुत छटपटाता है, अतः तुरन्त डॉक्टरी सहायता प्राप्त करनी चाहिए। जब तक डॉक्टरी सहायता उपलब्ध न हो तो ये प्राथमिक उपचार किए जाने चाहिए।
  • रूई से सोडियम बाईकार्बोनेट के घोल को लगाना चाहिए।
  • रोगी को पानी में आधी चम्मच नमक डालकर पिलाना चाहिए।
  • अधिक घबराहट की स्थिति में ग्लूकोज का गाढ़ा बर्फ मिला ठंडा पानी पिलाइए ।
  • रसायन से जलने पर दाग पर ठंडा पानी डालना चाहिए।
  • यदि छाले पड़ गये हों, तो उन्हें फोड़ना नहीं चाहिए।
  • बेहोश होने पर ‘स्मेलिंग साल्ट’ (Ammonia Inhalants) सुंघाकर होश में लाइए।

त्वचा जलने पर इलाज के घरेलू नुस्खे

  • शरीर का जो भाग आग से जल गया हो, उस पर केले का गूदा फेंटकर कपड़े पर मरहम की तरह बिछाकर कपड़ा जले भाग पर चिपका दें। जलन फौरन शांत होगी और फफोला नहीं पड़ेगा।
  • जलने पर प्रभावित अंग पर आलू पीसकर लेप करने से बड़ा आराम मिलता है।
  • सिरके में थोड़ा पानी मिलाकर उसमें साफ टुकड़ा कपड़े का भिगोकर जले हुए। स्थान पर रखे दें। फौरन जलन शांत हो जाएगी।
  • जलने पर उस स्थान पर तुरन्त प्याज पीसकर लगा दें, आराम मिलेगा।
  • हरी मटर पीसकर जले स्थान पर लगाएं।
  • जल गए स्थान पर गाय का घी साफ रुई के फोहे से लगाएं ।
  • त्वचा जलने पर बड़ी हरड़ का छिलका, सफेद जीरा, शहद, मोम और राल को बराबर मात्रा में लेकर, सबको अच्छी तरह पीसकर गाय के घी के साथ मिलाकर लोशन बनाएं। आग से जलने पर इस लोशन को लगाने से फफोले नहीं बनते। यदि फफोले बन गए हों तो जल्दी ठीक हो जाते हैं। आग से जलने पर गाजर को पीसकर लेप करने पर तेज जलन और दर्द शांत होती है।
  • एलोवेरा का छिलका उतारकर, पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करने से जलन ठीक होती है। रोगी के फफोले भी नहीं बनते।
  • चाय के उबले हुए पानी को ठंडा करके किसी साफ कपड़े के टुकड़े व रुई से जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द ठीक होती है।
  • दूध, चाय या पानी से जलने पर तुरंत सरसों का तेल लगाकर नमक लगा दें, इससे छाले नहीं पड़ेंगे और पीड़ा भी शांत होगी। यह उपाय बहुत फायदेमंद है।
  • अमलतास के पत्तों को जल के छींटे मारकर सिल पर पीसकर जले हुए भाग पर लेप करने से जलन ठीक होती है।
  • मेथी के दानों को पानी के साथ पीसकर जले हुए भाग पर लेप करने से आग की जलन ठीक होती है।
  • जलने पर तिलों को सिल पर पीसकर जले हुए भाग पर लेप करने से जलन और दर्द ठीक होती है। तिलों को पीसते समय पानी के छींटे मारने चाहिए। इससे लेप अच्छा बनता है।
  • जलने पर बथुए के पत्तों को पानी के छींटे मारकर जले हुए अंगों पर लेप करने से बहुत जल्दी जलन और दर्द ठीक होती है।
  • जल जाने पर फफोले बन जाने पर नीम या चंदन का तेल लगाने से फफोले जल्दी ठीक होता है। जीवाणुओं के संक्रमण से सुरक्षा होती है।
  • चने को दही के साथ पीसकर, बर्फ पर ठंडा करके जले भाग पर लगाने से जल्दी ही जलन व दर्द से राहत मिलती है।
  • मेहंदी के पत्तों को पीसकर जले हुए भाग पर लगाने से बहुत आराम मिलता है। दही या शहद भी जलने पर लाभ करता है |
  • जलने पर यदि खाल पलट गई है और घाव बन गए हैं तो चूने के पानी से साफ करके रतनजोत लगाना शुरू कर दें, इससे घाव जल्दी ही भर जाते हैं। जलने से घाव बन जाए तो नारियल का तेल लगाकर मेहंदी पाउडर बुरक दें। घाव को पानी से भीगने न दें। इससे कुछ ही दिनों में घाव भर जाता है और घाव में ठंडक महसूस होती है।
  • जलने पर यदि घाव बन गए हैं तो उनपर एलोवेरा के गूदे में हल्दी मिलाकर बाँध सकते हैं।

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