जानिए हिचकी आने के कारण तथा रोकने के आसान उपाय

जन साधारण में हिक्का (Hiccups) अर्थात हिचकी को शकुन-अपशकुन के हिसाब से देखा जाता है। जब किसी को हिचकी आती है तो वह कहता है, कोई मुझे याद कर रहा है, इसलिए मुझे हिचकी आ रही है। इसका किसी के याद करने से कोई संबंध नही है। यह एक वायु विकार का रोग है, जब छाती और पेट के बीच की मांसपेशी सिकुड़ने लग जाती है, तो हमारे फेफड़े काफी तेजी से हवा खींचने लगते हैं और सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगती है इस पूरी प्रक्रिया में पेट की हवा ‘हिक-हिक’ आवाज के साथ-साथ हिचकी के रूप में मुंह से निकलती है। हिचकी आने के बहुत से कारण होते है आइये जानते है हिचकी आने के कारण और उपचार | इस पोस्ट में निम्नलिखित विषयों पर जानकारी दी गई है |

  1. हिचकी क्यों आती है
  2. हिचकियां रोकने के घरेलू नुस्खे
  3. हिचकी बंद न हो रही तो क्या करे ? कुछ अन्य उपाय
  4. हिचकी की आयुर्वेदिक दवा
  5. हिचकी में नुकसानदायक चीजें : परहेज

हिचकी क्यों आती है : हिचकी के कारण

जानिए हिचकी आने के कारण और उपचार hichki aane ke karan ayurvedic ilaj

हिचकी आने के कारण

  • दिमाग से एक नाड़ी (नर्व) पेट तक जाती है, जिसे वैगस नर्व कहते हैं। यह नर्व या इसकी कोई शाखा जब पाचन-तंत्र में किसी गड़बड़ी की वजह से बेचैन हो जाती है तो हमें हिचकियां लगती हैं। पाचन-तंत्र में उतार-चढ़ाव के अलावा तेज मसाले, लाल मिर्च, तापमान और उत्तेजना के स्तर में उतार-चढ़ाव भी हिचकी का कारण बनते हैं। अक्सर हिचकी जल्दी ही खत्म हो जाती हैं, मगर कभी-कभी बहुत देर तक परेशान करती हैं।
  • हिचकी लगातार आने के कारण डायफ्राम की मसल्स के अचानक सिकुड़ने की वजह भी हो सकती है |
  • हिचकियों की समस्या श्वास रोग, फेफड़े के रोग, हैजा, आंत्रिक ज्वर और मस्तिष्क के विभिन्न रोगों में भी हो सकती है।
  • अधिक तेल- लाल मिर्च, गर्म मसालों से बने चटपटे, तीखे खाद्य-पदार्थों का सेवन करने से पेट में वायु विकार होने से हिचकियों की उत्पत्ति होती है।
  • जल्दी जल्दी भोजन करने और खाना खाते समय बात करने की खराब आदत से भी हिचकियां हो सकती है |
  • शराब के अधिक सेवन से आंते काफी सेंसेटिव हो जाती है जिससे कम मिर्च मसाले वाले भोजन भी पेट में जलन और हिचकियों की समस्या पैदा कर देते है |
  • कुछ पेन किलर दवा या अन्य दवाइयों के सेवन के दौरान भी पेट काफी सेंसेटिव हो जाता है जो हिचकी उत्पन्न करने का कारण बन जाता है |
  • कुछ रोगों में हिचकियां प्राणघातक भी हो सकती है। निरंतर हिचकियां आने से सांस रूक जाने से पीड़ित व्यक्ति मृत्यु का शिकार भी बन सकता है।

हिचकी रोकने के घरेलू नुस्खे

  • हिचकियां रोकने के उपाय दो नुस्खों पर काम करते हैं। एक तो यह कि वैगस नर्व को किसी अन्य सनसनी (सेंसेशन) का अहसास करवा दिया जाए। इससे वह दिमाग को संदेश देगी कि कोई नया पदार्थ शरीर में आ चुका है, इसलिए अब हिचकी को बंद करने का समय आ गया है। दूसरा तरीका यह है कि खून में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ा दी जाए। इससे शरीर का ध्यान हिचकी से हटकर रक्त से इस गैस को निकालने पर केंद्रित हो जाएगा ।
  • नर्व के सिरे को मीठे का स्वाद चखाएं : हिचकी के इस उपाय में मुंह में एक चम्मच चीनी के दाने भर लिए जाते हैं। इससे मुंह में मौजूद वैगस नर्व के सिरे को मीठी सनसनी का अहसास होता है। चीनी को मुंह में जीभ के पीछे की तरफ रखना चाहिए।
  • शहद : चीनी की जगह थोड़े-से गुनगुने पानी में शहद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। शहद को भी जीभ के पीछे की तरफ रखना चाहिए और फिर धीरे-धीरे पेट में उतार लेना चाहिए।
  • चॉकलेट ड्रिंक : एक चॉकलेट ड्रिक का पाउडर लें और इसकी एक चम्मच मात्रा मुंह में भरकर धीरे-धीरे निगलें । यह भी चीनी जैसा ही असर करेगा।
  • सौंफ : एक चम्मच सौंफ के दाने लें और मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें। इसका असर भी चीनी जैसा ही होगा।
  • हिचकी का समाधान करने के लिए जल्दी-जल्दी और घूंट-घूंट पानी पीने से हिचकी के चक्र में बाधा पहुंचती है, इसलिए जब हिचकियों की समस्या हो तो इस उपाय को आजमाएं। इसी तरह का असर पानी से गरारे करने से होता है।
  • एक चम्मच मूंगफली का मक्खन (पीनट बटर) भी हिचकियों को बंद करने के काम आ सकता है।
  • नींबू के टुकड़े को मुंह में लगाकर चूसें : ताजा नींबू का एक टुकड़ा (स्लाइस) काटें और इसे मुंह में लगाकर चूसें। इससे वैगस नर्व के आवेग में बदलाव हो जाता है और हिचकियां बंद हो जाती है। ताजा नींबू या संतरे का रस भी हिचकी में फायदा करेगा। इसी के साथ एक चम्मच सिरके का सेवन भी हिचकी हटाने में मदद करता है ।
  • नमक के साथ एक कटोरी दही : हिचकी की समस्या के दौरान एक कटोरी दही में थोड़ा नमक मिलाकर लेने से भी फायदा होगा।
  • कागजी नींबू के 10 ग्राम रस में थोड़ा-सा नमक और शहद मिलाकर चाटने से हवा का परिवर्तन होने से हिचकियां बंद होती है।
  • 10 ग्राम प्याज के रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर चाटकर खाने से हिचकियां तुरंत बंद होती है।
  • तुलसी के पतों का 10 ग्राम रस लेकर उसमें 5 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से हिचकियां ठीक होती है।
  • 20 ग्राम राई को 200 ग्राम पानी में उबालकर, छानकर थोड़ा-थोड़ा पीने से हिचकियां बंद हो जाती है।
  • थोड़ी-सी हींग 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाने से हिचकियां बंद होती हैं।
  • मूली के ताजे कोमल पत्ते या मूली के पत्तों का 10 ग्राम रस पीने से हिचकी की बीमारी ठीक होती है।
  • प्याज के 10 ग्राम रस में थोड़ा-सा सेंधा व काला नमक मिलाकर चाटने से हिचकियां बंद हो जाती है।
  • इलायची के पांच दाने 100 ग्राम पानी में उबालकर जल पीने से हिचकियां बंद हो जाती है।
  • इलायची चूसने से भी हिचकियां ठीक होती है।
  • आंवले के 10 ग्राम रस में 3 ग्राम पिपली चूर्ण और 5 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकियों की समस्या ठीक होती है।
  • आंवले का मुरब्बा खाने से भी हिचकियां बंद हो जाती है।
  • काली मिर्च को तवे पर जलाकर उसका धुआं सूंघने से भी हिचकियां बंद हो जाती हैं।
  • खजूर की गुठली के 3 ग्राम चूर्ण में 3 ग्राम पिपली का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ चाटने से भी इस समस्या से आराम मिलता है।
  • गुग्गल को पानी के साथ पीसकर नाभि पर लेप करने से हिचकियां बंद होती है।

हिचकी रोकने के अन्य उपाय

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हिचकी के उपचार

  • दोनों कानों में अपनी उंगलियां डाल लें : कुछ विशेषज्ञ हिचकी की समस्या में अपने हाथों की उंगलियों को दोनों कानों में डालने की सलाह देते हैं। दरअसल, वैगस नर्व की शाखाएं हमारे सुनने के तंत्र तक भी पहुंचती हैं। दोनों कानों में उंगलियां डालने से वैगस नर्व उत्तेजित होकर एक्शन में आ जाती है और कुछ देर में हिचकी बंद हो जाती है, लेकिन ध्यान रहे कि कान में उंगलियां ज्यादा जोर से ना डाले |
  • क्षमतानुसार मुंह और नाक बंद कर लें : हिचकी को गायब करने का एक तरीका यह है कि अपने मुंह और नाक को बंद कर लें। ठीक ऐसी मुद्रा जैसे कि आप किसी पूल में कूदने जा रहे हों। जितनी देर तक सांस रोक सकते हैं, रोके रखें। या तो एक बार में ही हिचकी चली जाएगी, अन्यथा कुछ अंतराल पर फिर से इस उपाय को आजमाएं।
  • कागज के लिफाफे में मुंह डालकर सांस लें : कागज का A4 आकार जितना या इससे बड़ा लिफाफा या बैग लें। अब इसके खुले मुंह में अपना मुंह डालकर सांस लें। जब तक हिचकी बंद न हो जाए, लिफाफे में ही सांस लेते रहें। विशेषज्ञों के अनुसार, जल्द ही इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
  • खास बात : इस और इससे पहले वाले उपाय से रक्त में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर हिचकी को भूलकर कार्बन डाईऑक्साइड से छुटकारा पाने में लग जाता है।

हिचकी की आयुर्वेदिक दवा

यदि हिचकी बंद न हो रही हो और लंबे समय से बार-बार आ रही है तो ये उपाय आजमायें |

  • अग्निमथ (अरणी), एरंड, भारंगी, बला, कूठ और सोंठ सभी वस्तुएं बराबर मात्रा में लेकर जल में उबालकर क्वाथ बनाकर पीने से हिचकी रोग से मुक्ति मिलती है।
  • अतीस 1 ग्राम, पिप्पली चूर्ण 125 मिलीग्राम और मिसरी 500 मिलीग्राम मिलाकर मातुलंग के रस से सेवन करने पर हिचकी विकार ठीक होता है। मातुलुंग रस उपलब्ध न होने पर पानी के साथ सेवन कर सकते हैं।
  • अर्क (आक, मदार) के फूल को लौंग को तेल में गर्म करके हिचकी के रोगी द्वारा निगलकर खाने से हिचकियां बंद हो जाती है।
  • सोंठ, पिपली और आंवला सभी वस्तुएं 10–10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 5 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकियां बंद होती हैं।
  • 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण गोमूत्र के साथ सेवन करने से हिचकी बंद होती है।
  • सोंठ, पीपल, आंवला और मिसरी सभी वनौषधियां 5-5 ग्राम मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, 3 ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकियां जल्दी ही बंद हो जाती हैं।

हिचकी में नुकसानदायक चीजें : परहेज

  • भोजन को आराम से चबा-चबाकर खाएं। जब हम तेजी से भोजन करते हैं तो हम भोजन के टुकड़ों को अच्छे से चबाते नहीं है। यह हिचकी और पेट में गैस पैदा होने के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • पेट पर जरूरत से ज्यादा भार डालने से भी यह समस्या पैदा होती है। एक तरह से हिचकियां होने का यह संदेश है कि अब भोजन को न कहने का वक्त आ गया है, क्योंकि अब शरीर के पाचन-तंत्र को भोजन को पचाने का काम पूरा करना है। इसीलिए कभी भी पेट की जरूरत से ज्यादा भोजन करके न फुलाएं।
  • कुछ मसाले आहार नाल और पेट की लाइनिंग को बेचैन कर देते हैं। इसी के साथ वे पेट में बन रहे एसिड को आहार नली में भी पहुंचाने का काम कर देते हैं। ज्यादा एसिड की यह मात्रा भी इसका कारण बनती है। इसलिए ज्यादा मसालेयुक्त और अम्ल बनाने वाले भोजन से भी परहेज करना चाहिए।
  • धूम्रपान, शराब और कार्बोनेटिड ड्रिक भी इस समस्या का कारण बन सकते हैं, इसलिए धूम्रपान और शराब से तो परहेज ही करना चाहिए, जबकि सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन भी कभी-कभी और कम मात्रा में ही करना चाहिए।
  • खास बात : यदि आपकी हिचकियां इन उपायों से नहीं जा रही है और 48 घंटे से ज्यादा समय तक कायम रहती है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। लगातार हिचकियां आना किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है |
  • हिचकी का 48 घंटे से ज्यादा समय तक बने रहना स्ट्रोक, रसौली, ट्यूमर या वेंघा (थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना) का संकेत हो सकता है। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी (जैसे मल्टीपल स्कलेरॉसिस) या मेटाबॉलिक सिस्टम में गड़बड़ी (जैसे डायबिटीज) का भी संकेत हो सकता है।

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