अंगूर तथा इसके जूस के औषधीय गुणों की जानकारी

फलों का मीठापन “फ्रक्टोज” होता है। फ्रक्टोज फलों में मौजूद मीठापन या आम भाषा में इसे चीनी कह सकते है। यह अंगूरों में अधिक मिलती है। सामान्यतया अंगूर में 10% से 30% शर्करा (चीनी) होती है। यह स्वादिष्ट, पोषक और आसानी से पचनेवाला फल है। इसकी कई किस्में है जो आकार, रंग, सुगंध और स्वाद में अलग-अलग होती हैं। यह हरे, काले, लाल और बैंगनी रंगों में पाया जाता है।

ताजा अंगूर कच्चे हरे, काले होते है सूखने पर इन्हीं को किशमिश, मुनक्का कहते हैं। अंगूर नहीं मिलने पर किशमिश, मुनक्का का प्रयोग इस की जगह किया जा सकता है इससे समान लाभ होगा। किशमिश में दूध के समान ही गुण होते है इसलिए जिन बिमारियों में दूध का परहेज हो वहां किशमिश सेवन करके दूध की कमी को पूरा किया जा सकता है | बीमारी ठीक होने के बाद अंगूर खाने से मरीज की कमजोरी दूर होती है। अंगूरों को नियमित रूप से खाते रहने पर रोग-प्रतिरोधक् क्षमता बढ़ती है। मन खुश रहता है, भूख अच्छी लगती है।

अंगूर में शर्करा की मात्रा अधिक होने के कारण, जो कि पूर्णतया ग्लूकोज से बनती है, यह बहुत उपयोगी फल है। इसकी विभिन्न किस्मों में ग्लूकोज की मात्रा 15 से 25 प्रतिशत तक रहती है। ग्लूकोज दरअसल पहले से पचा हुआ आहार (ऊर्जा) होती है और यह रक्त में जल्दी ही घुलनशील है। यह थोड़े समय में ही शरीर को ऊर्जा देता है।

अंगूर में मौजूद लाभकारी तत्व – हलके हरे अंगूरों में प्रति 100 ग्राम में लगभग आद्रता 79.2, प्रोटीन/वसा 0.3, खनिज 0.6, रेशा 2.9 और कार्बोहाइड्रेट 16.5 प्रतिशत रहता है। इसके प्रति 100 ग्राम गूदे में कैल्शियम 20 मि.ग्रा. फ़ॉस्फोरस 30 मि.ग्रा. लौह 0.5 मि.ग्रा. और विटामिन ‘सी’ 1 मि.ग्रा. रहता है। इसका कैलोरिक मूल्य 71 है।

अंगूर के औषधीय गुण

अंगूर की जानकारी अंगूर का जूस angoor ke baare mein jankari grape angur khane ke fayde jankari labh

अंगूर के फायदे

  • अंगूर के लाभ एक-दो दिन में नहीं दिखाई देते हैं इसके शरीर पर फायदे चार सप्ताह के बाद ही दिखने शुरू होते हैं। छठे सप्ताह के अंत तक काफी परिवर्तन दिखाई देगा।
  • कब्ज : अंगूर कब्ज से राहत पहुँचाने में यह बहुत लाभकारी है। यह पेट और आँत को साफ करके पुरानी कब्ज को भी दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन कम-से-कम 350 ग्राम अंगूर सेवन करना चाहिए। सेंधा नमक तथा कालीमिर्च के पाउडर के साथ अंगूर खाने से भी कब्ज दूर होता है। ताजे अंगूर न मिलने पर किशमिश को पानी में भिगोकर उपयोग में लाया जा सकता है।
  • शिशुओं का कब्ज़ दूर करने के लिये रोजाना दो चम्मच अंगूर का जूस सुबह-शाम पिलायें।
  • छोटे बच्चों को भी 50 से 100 ग्राम अंगूर-जूस पिलाया जा सकता है।
  • बदहजमी : बदहजमी में यह उपयोगी है। यह थोड़े समय में ही बदहजमी को दूर करता है तथा पेट की जलन यानि एसिडिटी को भी ठीक करता है और गर्मी में राहत पहुँचाता है। अंगूर व अनार का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से भी एसिडिटी में आराम मिलता है
  • हृदय रोग : यह हृदय रोग में बहुत लाभकारी है। यह हृदय को स्वस्थ रखता है और हृदय-शूल और हृदय संबंधी विकारों में उपयोगी है। क्योंकि यह रक्त को जमने से रोकता है, जिन लोगों को कम बी.पी की शिकायत होती है, उनके लिए काले अंगूरों का जूस फायदेमंद होता है।
  • मरीज को यदि कुछ दिनों तक केवल अंगूर ही दिए जाएँ तो इस रोग को शीघ्रता से नियंत्रित किया जा सकता है। हार्ट अटैक में अंगूरों का जूस बहुत उपयोगी होता है। यह हृदय के दर्द और तेज धड़कन को कम कर हार्ट अटैक से बचा सकता है।
  • सिरदर्द (आधा सीसी) : पके अंगूरों का जूस माइग्रेन यानी आधा सीसी के उपचार के लिए बहुत उपयोगी है |
  • किडनी की बीमारी : अंगूर में आद्रता और पोटैशियम लवण की मात्रा अधिक होने से यह पेशाब बढ़ाने वाला होता है ज्यादा पेशाब से कई हानिकारक तत्व शरीर से निकल जाते है जैसे की पथरी इसमें अल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड की मात्रा कम होने से किडनी की बीमारियों में इसका महत्व बढ़ गया है। अंगूर के पत्तों के शर्बत का भी प्रयोग करें यह पथरी ठीक करने के लिए अच्छी औषधि है।
  • शराब की आदत : यह शराब की आदत छुड़ाने के लिए बहुत प्रभावी उपचार है; क्योंकि इससे उसका शुद्ध रूप मिलता है। शराब पीने वालों के उपचार में केवल अंगूर की खुराक देनी चाहिए।
  • अंगूरों का जूस पीने या खाने से शरीर में खून बढ़ता है त्वचा मुलायम और चमकदार होती है। चेहरे पर निखार आता है। आँखों की रोशनी भी बढ़ती है।
  • अंगूरों का सेवन इन सभी रोगों में लाभकारी है – कैंसर, क्षय (B.), पायोरिया, ऐपेण्डीसाइटिस, बच्चों का सूखा रोग, सन्धिवात, फिट्स, खून की कमी, गठिया, बुखार, जुकाम, सिरदर्द, बेहोशी के दौरे, कमजोरी, चक्कर आना, आमाशय में घाव, गाँठे, उपदंश (Syphilis), बार-बार मूत्र-त्याग, और दुर्बलता में | यह भी पढ़ें – गाजर के फायदे और 20 बेहतरीन औषधीय गुण
  • खून की कमी (Anaemia)- अंगूर में आयरन भरपूर मात्रा में होता है इसलिए खून की कमी में विशेष रूप से फायदेमंद है एनीमिया में ताजे अंगूर पूरे मौसम खाने से खून की कमी दूर हो जाती है | खून की कमी होने पर अंगूर से बढ़कर अन्य कोई दवा नहीं है।
  • लाल, काले अंगूरों में एन्टी-आक्सीडेंट्स की संख्या बहुत अधिक होती है। इसलिए गहरे काले अंगूरों के खाने से कैंसर व हृदय रोग कम होते हैं। हरे रंग के अंगूरों में एन्टीऑक्सीडेन्ट्स की संख्या काले अंगूरों की अपेक्षा कम होती है। इसलिए कैंसर व हृदय रोगों को दूर करने में काले अंगूर अधिक लाभदायक हैं।
  • सूखी खाँसी ठीक करने के लिए- आँवला, छोटी पीपल, कालीमिर्च तथा मुनक्का समान मात्रा में लेकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम शहद के साथ लें। इससे सूखी खाँसी दूर होती है।
  • कमजोरी दूर करने और अच्छी सेहत के लिए रोजाना 100 ग्राम अंगूर या 20 ग्राम किशमिश दूध के साथ खाना अच्छा रहता है।
  • बच्चों के दाँत निकलने के समय अंगूरों का दो-दो चम्मच जूस रोजाना पिलाते रहने से दाँत आसानी से और जल्दी निकल आते हैं और बच्चा रोता नहीं है। यह भी पढ़ें – शहद के फायदे और इसके 35 घरेलू नुस्खे
  • अंगूर में स्वाद के लिए चाहें तो शहद भी मिला सकते हैं।
  • जिनको दूध पीने से गैस बनती है या बदहजमी होती है उनको दूध व मुनक्का एक साथ लेने चाहिए |
  • पेशाब में जलन रहती हो और खुलकर पेशाब नहीं आता हो तो 50 ग्राम मुनक्के रात को पानी में भिगो दें और सुबह मसलकर, छानकर भुने जीरे के पाउडर के साथ पिएं इससे पेशाब की जलन दूर होकर पेशाब खुलकर आता है।
  • शरीर में सुस्ती रहती होतो 20 ग्राम मुनक्का गर्म दूध के साथ सुबह लें।
  • गर्भावस्था में सुबह थोड़े से अंगूर खाने से होने वाला बच्चा, स्वस्थ होगा। जिन महिलाओं के गर्भाशय कमजोर हों, उन्हें अंगूर का सेवन रोजाना करना चाहिए। इससे गर्भाशय की कमजोरी दूर हो जाती है।
  • चेहरे के सौंदर्य बढ़ाने तथा झुर्रियाँ दूर करने के लिए अंगूरों का रस चेहरे पर रुई के फोहे से लगाकर दस मिनट बाद धोयें। इससे त्वचा रोमकूप साफ हो जायेंगे। यदि त्वचा शुष्क, रूखी हो तो दो भाग अंगूरों का रस, एक भाग गुलाबजल मिलाकर लगाने से त्वचा कोमल हो जाती है। अंगूरों का रस लगायें भी और इसे खायें भी | दो महीनो तक ऐसा करने से चेहरे की झुर्रियाँ दूर होकर चेहरा तेजमय हो जाएगा।
  • दमा : डॉ. ओल्डफील्ड के अनुसार, अंगूरों का जूस दमे के उपचार में उपयोगी है। उनके अनुसार यदि दमे के रोगी को अंगूरों के बगीचे में रखा जाए तो शीघ्र स्वास्थ्य-लाभ होगा।
  • मिरगी : मिरगी में यह बहुत लाभकारी है। लगभग 500 ग्राम ताजा अंगूरों का जूस दो या तीन महीने दिन में तीन बार सेवन करने से बहुत लाभ पहुँचता है।

अंगूर के बीज के फायदे

  • अंगूर के बीज का तेल अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है और शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
  • अंगूर के बीज का तेल पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है यह मधुमेह और मोटापे के रोगियों के लिए लो फैट तेल का अच्छा विकल्प है |
  • अंगूर का बीज दांतों के ऊपरी परत को खराब होने से भी रोकते है, दांतों को मजबूत बनाए रखते है तथा दांतों को सड़ने से बचाता है |
  • अंगूरों के बीजो का तेल बालों और त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक होता है |
  • अंगूर ऐसे खाएं – शुरुवात में रोजाना एक समय में 100 ग्राम अंगूर खाने चाहिए। फिर उसकी मात्रा बढ़ाकर चार-पाँच दिनों में एक से दो किलोग्राम अंगूर आसानी से खाये जा सकते हैं। बच्चो को उनकी रूची के अनुसार देने चाहिए |
  • अंगूर खाना एकदम बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि इसकी मात्रा धीरे धीरे कम करते जाना चाहिए इस तरह खाने से रोग दूर होकर शरीर हमेशा स्वस्थ बना रहेगा।

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