प्रोस्टेट की बीमारी में क्या खाएं तथा क्या ना खाएं

पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) की सूजन यह ग्रंथि ठोस, अखरोट के आकार का अंग है। यह पुरुष की मूत्र नलिका के प्रथम भाग के करीब रहता है। यह मूत्राशय के नीचे और रेक्टम के सामने स्थित है। शुक्राणुओं का कुछ अंश इसमें निर्मित होता है। जन्म के समय इसका वजन केवल कुछ ग्राम होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसका आकार भी बढ़ता जाता है। प्रोस्टेट सूजन का मुख्य कारण मूत्राशय में जीवाणु के फैलने से सूजन का होना होता है। इससे डायसूरिया नामक रोग हो जाता है और अधिक पेशाब होने लगता है। इससे बुखार हो सकता है यूरिनेशन में दर्द, जलन और खुजली होती है तथा अधिक उम्र में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। पचास साल की उम्र के बाद पुरुषों को प्रोस्टेट हेल्थ पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए, अन्यथा इस मामले में बरती गई लापरवाही कैंसर का भी कारण बन सकती है। प्रोस्टेट कैंसर का इलाज आमतौर पर सर्जरी द्वारा किया जाता है। इसके बाद मरीज़ सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर को यदि ब्रेस्ट कैंसर की तरह अगर शुरुआत में ही इसकी पहचान कर ली जाए तो उपचार के बाद मरीज़ पूर्णत: स्वस्थ हो जाता है। इस के होने के प्रमुख कारण हैं – आनुवंशिकता, रेड मीट और फैट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन और मोटापा | अनेक पुरुषों में एक उम्र ( 50 या 60) के बाद तीन तरह की प्रोस्टेट समस्याएं खास तौर से उभर आती हैं। इनमें से एक है प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया (बीपीएच), जिसमें प्रोस्टेट बढ़ जाता है। दूसरी समस्या है प्रोस्टेटाइटिस, जिसमें प्रोस्टेट में इन्फ्लेमेटरी इन्फेक्शन हो जाता है। तीसरी समस्या प्रोस्टेट कैंसर की आती है। इनमें से पहली समस्या बहुत आम है और डॉक्टर इसे उम्र के साथ सामान्य समस्या मानते हैं। Diet for Prostate patient.

प्रोस्टेट में क्या खाना चाहिए  

  • विटामिन सी से भरपूर सब्जियां : विटामिन सी की धनी सब्जियों का सेवन प्रोस्टेट के बढ़ने के खतरे को कम करता है। विटामिन सी टमाटर के अलावा शिमला मिर्च, बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली, मटर में खूब होता है। इसलिए इन्हें अपने भोजन में शामिल करें। इनमें आइसोथियोसाइनेट नाम का फाइटोकेमिकल भी पाया जाता है, जो प्रोस्टेट की समस्या में मददगार बनता है। इन सब्जियों में कई एंटी ऑक्सीटेंड भी होते हैं, जो प्रोस्टेट की समस्या कम करते हैं।
  • जिंक के धनी पदार्थ करेंगे आपकी मदद : बढ़े प्रोस्टेट की समस्या में जिंक के मददगार होने की वजह से विशेषज्ञ जिंक के धनी पदार्थों को भी भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं। जिंक हमें इन चीजों से मिल सकता है- सी फूड से, अनाज में गेहूं के अंकुर से, सब्जियों में हरी पत्तेदार सब्जियों और मशरूम से। सूरजमुखी और अलसी के बीज से। नट्स में काजू और बादाम, अखरोट,अलसी, दाल में चना, राजमा – मूंग दाल से।
प्रोस्टेट की बीमारी में क्या खाएं तथा क्या ना खाएं prostate problem me kya khaye aur parhej

प्रोस्टेट रोग में भोजन

  • विटामिन ई, सेलेनियम की वजह से अनाज जरूर लें : प्रोस्टेट में सूजन-जलन और कैंसर के खतरे को विटामिन ई भी कम करता है। हरी पत्तेदार सब्जियों, दूध, मक्खन, फूलगोभी, टमाटर, आलू, बादन साबुत अनाज और गेहूं के अंकुर में यह विटामिन प्रमुखता से मिलता है। हरी पत्तेदार सब्जियों, फूलगोभी, टमाटर, बादाम को हम पहले ही बता चुके हैं, इसलिए बचे पदार्थ साबुत अनाज, गेहूं का ज्वार और लो फैट दूध को भी अपने भोजन में जरूर शामिल करें। साबुत अनाज में सेलेनियम नाम का एंटी ऑक्सीडेंट भी होता है, जो प्रोस्टेट की समस्या को सुलझाने में मदद करता है। इसलिए अपने भोजन में ओट्स, ब्राउन राइस, गेहूं का अंकुर, भुने अनाज, गेहूं का चोकर भी शामिल करें।
  • हफ्ते में दो बार मछली का सेवन भी करेगा फायदा : मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैट प्रोस्टेट कैंसर और किसी भी प्रकार के ट्यूमर के बनने की आशंका को कम करता है। हफ्ते में दो सर्विग ( दो बार) सामन, टूना या मैक्केरेल मछली का सेवन करना चाहिए ।
  • सोया उत्पाद : प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सोया उत्पादों को भी काम का माना जाता है। सोया उत्पादों (सोयाबीन, टोफू, सोया मिल्क आदि) में फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं, जो टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन के उत्पादन को कम करने का काम करते हैं। यही हार्मोन प्रोस्टेट कैंसर की वृद्धि को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके अलावा फाइटोएस्ट्रोजन प्रोस्टेट ट्यूमर के चारों ओर बनने वाली रक्त नलिकाओं की वृद्धि को भी रोकने का काम करते हैं।
  • टमाटर और तरबूज : प्रोस्टेट की समस्या वाले व्यक्ति को अपने भोजन में टमाटर और तरबूज की जरूर शामिल करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, नियंत्रित मात्रा में नियमित रूप से टमाटर, तरबूज का सेवन प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बहुत कम कर देता है। ऐसा टमाटर, तरबूज में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट लाइकोपेन की वजह से होता है, जो कैंसर के खिलाफ काम करने के लिए जाना जाता है।
  • कद्दू के बीज : जर्मनी में प्रोस्टेट के बढ़ने और पेशाब में दिक्कत की समस्या का इलाज कद्दू के बीज से किया जाता है। कद्दू के बीज में डाइयूरिटिक (मूत्रवर्धक और मूत्र के बहाव को तेज करने की प्रवृति) गुण होता है। साथ ही इसमें भरपूर जिंक होता है, जो शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र की मरम्मत करता है और उसे मजबूत बनाता है। इन बीजों को इनका खोल हटाकर सादा खाना ही सबसे अच्छा है। कद्दू के बीजों की चाय भी बनाई जा सकती है। इसके लिए मुट्ठी भर ताजा बीजों को कूटकर एक छोटे-से जार में डाल देते हैं। फिर जार को उबले हुए पानी से भर देते हैं और इस मिश्रण को ठंडा होने देते हैं। उसके बाद मिश्रण को छानकर पी लेते हैं। रोजाना एक बार ऐसी चाय पीने से काफी लाभ होता है। कद्दू के बीज में बीटा सिटीस्टीरॉल नाम का रसायन भी होता है।
  • बढ़े प्रोस्टेट की समस्या कम करते हैं भुट्टे के बाल : कई देशों में बढ़े प्रोस्टेट की समस्या को कम करने के लिए मक्के के भुट्टे के बालों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके इस्तेमाल का तरीका यह है कि ताजा भुट्टे से अच्छी मात्रा में (भट्टे के करीब छह खोल से) बालों को उतार लें। इन्हें करीब (एक पाव) 250 मिली लीटर पानी में डालकर 10 मिनट तक उबालें । उसके बाद मिश्रण को छान लें। हफ्ते में कम-से-कम तीन कप का सेवन करें।
  • बहुत फायदा करती है सा पामेटो की बेरी : एक पेड़ होता है साँ पामेटी (Saw palmetto) इस पर बेरी जैसा फल लगता है। इस बेरी का सत्व प्रोस्टेट की समस्याओं को दूर करने के लिए दवाइयों में खूब इस्तेमाल होता है। यह पेड़ भारत में तो नहीं पाया जाता, लेकिन इसकी बेरी का सत्व बड़े शहरों के स्टोरों पर मिल जाता है। यह पेशाब के बहाव में काफी सुधार लाता है और प्रोस्टेट के बढ़ने के लक्षणों को कम करता है।
  • बिच्छू बूटी : एक पौधा होता है स्टिगिंग नेटल (stinging nettle), जिसे हिंदी में बिच्छू बूटी कहते हैं। प्रोस्टेट के मामले में इसका उपयोग अनेक वर्षों से यूरोप में किया जा रहा है। स्टिगिंग नेटल टेस्टोस्टेरोन हार्मोन से संबंधित प्रोटीन को जुड़ने से रोकने में मदद करता है। इस नेटल के सत्व का इस्तेमाल भी दवाइयों में होता है। इसके कैप्सूल भी आते हैं। डॉक्टर की सलाह से इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह भी पढ़ें – Prostate ग्रंथि कैंसर की पहचान, कारण तथा आधुनिक उपचार

ये भी जरूर आजमाएं

  • आठ से दस गिलास पानी रोज पीएं।
  • हर साल प्रोस्टेट की जांच कराएं जितनी जल्दी समस्या पता चलेगी, उतनी जल्दी काबू पाना आसान होगा ।

प्रोस्टेट में परहेज :  क्या नहीं खाना चाहिए

  • फैट और चिकनाई वाला भोजन कम-से-कम करें।
  • रेड मीट का सेवन से भी जरुर परहेज करें |
  • डिब्बा बंद टमाटर, सॉस, या अन्य डिब्बा बंद खाद्य पदार्थो से दूर रहें |
  • जंक फ़ूड, चिप्स, अधिक चीनी, मैदा आदि का परहेज करें |
  • ज्यादा शराब पीना भी नुकसानदायक होगा। कई अध्ययनों में पता चला है कि बियर शरीर में पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाले प्रोलेक्टिन हार्मोन का स्तर बढ़ा देती है, जिसका परिणाम अंततः प्रोस्टेट के बढ़ने के रूप में सामने आता है।
  • अधिक कैल्शियम वाले खाने से परहेज रखें | कम मात्रा में दही ले सकते हैं |
  • प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या में कैफीन (चाय, कॉफी, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक आदि) का सेवन भी नुकसान करेगा।
  • बहुत ज्यादा तीखे, मसालेदार भोजन से भी बचना चाहिए ।

सवाल : बढ़े हुए प्रोस्टेट का दूरबीन से ऑपरेशन कराने का क्या लाभ है?

जवाब : दूरबीन से किए जाने वाले ‘ट्रांस यूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ प्रोस्टेट (टी.यू.आर.पी.) ऑपरेशन में मूत्र नली के रास्ते ही गदूद को काटकर निकाल दिया जाता है। बाहर से कोई चीर-फाड़ नहीं करनी पड़ती, जिससे कोई जख्म भी नहीं बनता। दूसरे-तीसरे दिन ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। ऑपरेशन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और जल्दी जीवन धुरी पर लौट जाता है।

सवाल : क्या प्रोस्टेट में सुबह उठकर जल-क्रिया करना सब के लिए स्वास्थ्यकारी है?

जवाब : यह सच है कि सुबह उठते ही डेढ़-दो लीटर गुनगुना पानी पीने की यौगिक क्रिया कब्ज को दूर करने का सहज उपाय है। लेकिन आंखों में यदि काला मोतिया (ग्लूकोमा) है, हार्ट फेलयर में है या किसी पुरुष का प्रोस्टेट बढ़ा हुआ है, तो जल-क्रिया करना ठीक नहीं। ग्लूकोमा होने पर आँखों पर दाब अचानक बढ़ सकता है, हार्ट फेलयर में शरीर में पानी बढ़ सकता है और प्रोस्टेट बढ़े होने पर गुर्दो पर उलट दाब पड़ सकता है।

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4 Comments

  1. Jamshed Alam
  2. रतन सिंह बक्शी .

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