गठिया रोग में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए

गठिया रोग (Arthritis) या संधिशोथ इस बीमारी में रोगी को बहुत दर्द होता है मुड़ने में काफी दिक्कतें आती हैं। सर्दियों में इस रोग का प्रकोप अधिक होता है। गठिया रोग में खानपान की भी बहुत अहमियत होती है क्योंकि यह लंबे समय तक चलने वाला रोग है इसलिए सिर्फ दवाइयों के सहारे आप इस रोग से छुटकारा नहीं पा सकते है तो आइये सबसे पहले गठिया रोग और हड्डियों से जुड़े अन्य रोगों को थोडा समझने का प्रयास करते है | उसके बाद खानपान की जानकारी भी देंगे क्योंकि कई खाघ पदार्थ ऐसे हैं जिसको खाने से गठिया रोग से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

आर्थराइटिस : यह बीमारी हड्डियों के जोड़ों पर होती है। इसे हम गठिया के नाम से भी जानते हैं। इसमें हड्डियों के जोड़ों में सूजन आ जाती है, जिससे रोगी को शरीर के इन हिस्सों में दर्द होता है और चलने-फिरने में समस्या आती है। आर्थराइटिस के 100 से भी ज्यादा प्रकार हैं। इनमें सबसे ज्यादा होने वाली बीमारी ऑस्टियोआर्थराइटिस है।

ऑस्टियोपोरोसिस : यह ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियों के ऊतकों (टिश्यूज) से प्रोटीन मैट्रिक्स का क्षरण (घिसना ) हो जाता है। ऐसा होने पर हड्डियां कड़क और खस्ता हो जाती हैं। इससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। वह भी खासकर मीनोपॉज के बाद, क्योंकि मीनोपॉज के बाद महिलाओं की “ओवरी एस्ट्रोजन हार्मोन” का बनाना बंद कर देती हैं। यह हार्मोन हड्डियों को बनाए रखने में मदद करता है। यह बीमारी शरीर की जरूरत से ज्यादा प्रोटीन या सारा-का-सारा कैल्शियम एनीमल उत्पादों (दूध, मांस, मछली आदि) से लेने से भी होती है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन की वजह से ऐसे अम्ल बनते हैं, जो हड्डियों से कैल्शियम और अन्य मिनरल को खींचते हैं।

रिकेट्स : हड्डियों की एक बीमारी रिकेट्स भी है। यह विटामिन-डी की कमी से होता है। इसमें हड्डियां मुलायम और बेडौल हो जाती हैं। इस रोग के लिए भी खान-पान में वही चीजें लाभदायक है जो गठिया रोग में लाभदायक है | जो हम आगे बताएँगे ..

कारण : गठिया होने के प्रमुख कारणों में मांसाहारी, मिर्च-मसालेदार, शराब पीना, कुपोषण, परिश्रम के बाद या धूप-गर्मी से आने पर तुरंत ठंडा पानी पीना, बढ़ी उम्र, व्यायाम न करना या बहुत अधिक व्यायाम करना, संधियों में यूरिक एसिड का जमा होना आदि होते हैं। आजकल चिकनगुनिया बुखार भी जोड़ो के दर्द और गठिया का कारण बन गया है |

लक्षण : गठिया रोग में जोड़ों में सूजन, जोड़ों में दर्द, बुखार, चक्कर आना, उठने-बैठने में जोड़ों में असहनीय दर्द, चलने-फिरने की लाचारी, थकावट महसूस होना, शरीर की दुर्बलता, भूख न लगना, वजन कम होना, शारीरिक अंगों का विकृत होना आदि देखने को मिलते हैं। #Arthritis #diet #Best #Foods #fruits #vegetables for arthritis #patient #foods to #avoid with #arthritis.

गठिया रोग में क्या खाना चाहिए :

Arthritis gathiya me kya khaye parhej गठिया रोग में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

गठिया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

  • गठिया रोग में संतुलित, आसानी से पचने वाला भोजन जैसे- चोकर युक्त आटे की रोटी, छिलके वाली मूंग की दाल खाएं।
  • गेहूं, जई, मक्का, राई, जौ, बार्ली, बाजरा, कनारी बीज आदि अनाजो का सेवन करें |
  • गठिया रोग में फलो और सब्जियों में सहिजन, बथुआ, मेथी, सरसों का साग, ककड़ी, लौकी, तुरई, पत्ता गोभी, परवल, गाजर, अजमोद,आलू, शकरकंद, अदरक, करेला, लहसुन का सेवन करें।
  • गठिया रोग में सेम और अन्य फलीदार सब्जियों (बींस), चेरी, मशरूम, ओट्स, चौलाई, संतरा, भूरे चावल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेथी, सोंठ, नाशपाती, गेहूं का अंकुर, सूरजमुखी के बीज, कद्दू, अंडा, (सोया मिल्क, सोया बडी, सोया पनीर, टोफू आदि) पपीता, ब्रोकली, लाल शिमला मिर्च, अजवायन, अनानास, अनार, आडू, अंगूर, आम, एलोवेरा, आंवला, सेब, केला, तरबूज, लहसुन, आलूबुखारा, सूखे आलूबुखारे, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी
  • डेयरी पदार्थ जैसे दूध और दूध से बने उत्पाद (दही, पनीर आदि ) कैल्शियम का अच्छा स्रोत है इन्हें आप ले सकते है लेकिन बेहतर यह होगा की आप गठिया रोग में दूध-दही भी कम मात्रा में ही लें। कैल्शियम की पूर्ति फलों और सब्जियों से करें |
  • गठिया रोग में अधिक पानी युक्त फल जैसे खरबूजा, तरबूज, पपीता, खीरा अधिक खाएं।
  • पेठे का जूस, गुड़, अंकुरित अनाज, साबूदाना भी अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें।
  • गठिया रोग में बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली आदि भी खाएं |
  • तेल में- जैतून का तेल, अलसी का तेल, मछली का तेल और borage seed oil.
  • चाय में ग्रीन टी और तुलसी की चाय |
  • गठिया रोग में हींग, शहद, अश्वगंधा और हल्दी भी लाभकारी है |
  • गठिया के रोगी को चौलाई की सब्जी भी फायदा करती है।
  • एक वर्ष पुराने चावल, परवल, करेला, और सहजन की सब्जी का प्रयोग अधिक करें।
  • गठिया रोग में अक्सर मछली के सेवन को लेकर काफी शंका बनी रहती है लेकिन गठिया रोग में हफ्ते में दो बार 120 ग्राम तक मछली खा सकते है जैसे -Salmon, tuna, sardines, herring, anchovies, scallops आदि | Arthritis Foundation इसकी पुष्टि करता है जो अमेरिका की आर्थराइटिस रोगों से जुडी एक प्रमाणिक संस्था है |

गठिया रोग में ये उपाय भी बहुत असरकारक हैं :

  • रोज अमरूद की नई पत्तियां लेकर पीसें। उनमें काला नमक मिलाकर 40 दिन तक खाएं।
  • गठिया रोग में एक छोटा चम्मच हल्दी व इतनी ही मात्रा में अदरक का रस मिलाकर 10-15 मिनट के लिए धीमी आंच पर गर्म करें और दिन में दो बार पिएं।
  • बधुआ को आटे में गूंथकर उसकी चपातियाँ बनाकर खाएं |
  • सौंठ का पाउडर 1-3 ग्राम की मात्रा में भोजन करने के बाद पानी से लें।
  • लहसुन गठिया रोगों के लिए बहुत ताकतवर औषधि है इस कुछ इस तरह प्रयोग करें –
  • लहसुन का नुस्खा 1 : गठिया में सुबह के समय एक चम्मच लहसुन का रस और एक चम्मच शहद या देसी घी मिलाकर 40 दिन तक पीएं। इससे बहुत लाभ होगा।
  • लहसुन का नुस्खा 2 : लहसुन के रस में कपूर या यूकेलिप्टिस का तेल मिलाकर जोड़ों पर मालिश करें।
  • लहसुन का नुस्खा 3 : लहसुन की चार कलियों को रोजाना दूध में उबालकर पीने से भी जोड़ों के दर्द में बहुत आराम आएगा। ऐसा 40 दिन तक करें।
  • गठिया रोग में लौंग के तेल को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करें।
  • अखरोट का तेल रोजाना जोड़ों पर मलने से गठिया में बहुत लाभ होता है।
  • गठिया वाले स्थान पर बिनौले का तेल लगाने से भी लाभ होता है।
  • आम की गुठलियों की गिरी पीसकर सरसों के तेल में पकाएं। छानकर रोज मालिश करें।
  • करेले के रस में राई का तेल मिलाकर मालिश करें।
  • करेले के रस को जोड़ो पर भी लगाएं। यह भी पढ़ें – कमर दर्द के कारण व घरेलू आयुर्वेदिक उपचार
  • हड्डियों की मजबूती के लिए सुबह के वक्त नियमित रूप से धूप सेंकनी चाहिए।
  • ओट्स : ओट्स में मुख्य रूप से जौ, अन्य अनाज और उनके दलिया आते हैं। नुस्खा : जौ के आटे में हल्दी और शक्कर मिलाकर लड्डू बना लें। इन्हें रोजाना इस्तेमाल करें, गठिया की समस्या में बहुत कमी आएगी।
  • गठिया रोग में मेथीदाना को आटे में मिलाकर हलवा बनाकर खाएं | मेथी दाने की तासीर गर्म होती है खासकर सर्दियों में गठिया रोगियों को इसका प्रयोग जरुर करना चाहिए |

गठिया रोग में क्या ना खाएं : परहेज 

  • गठिया रोग में बासी, गरिष्ठ, घी-तेल में तले हुए, चीनी, चिप्स, रेड मीट, अचार, चटनी, पापड़, मिर्च-मसालेदार भोजन न खाएं।
  • केक, पेस्ट्री, कुकी, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक और मैदे से बनी चीजे, डिब्‍बा बंद भोजन, फ्रोजन सब्जियां और जंक फ़ूड, सफेद ब्रेड |
  • शराब, मक्खन, टमाटर, लाल मिर्च, भिंडी, अरवी, उड़द की दाल, राजमा, कटहल, फूल गोभी,अमचूर, चावल, मांस, मसूर की दाल के सेवन से परहेज करें। गठिया रोग में इन सब चीजो का परहेज रखें |
  • गठिया रोग में गैस पैदा करने वाले, बासी, खट्टी व ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए |
  • गठिया रोग में यूरिक एसिड बढ़ाने वाले आहार भी न खाएं।
  • गठिया रोग में रात या शाम के समय दही, छाछ, लस्सी आदि का परहेज रखें |
  • गठिया रोग में खटाई युक्त चीजें कच्चा आम, इमली, सिरका आदि का सेवन न करें।
  • ज्यादा नमक : ज्यादा नमक का सेवन शरीर से कैल्शियम को कम करता है, जिसका नतीजा हड्डियों के नुकसान के रूप में सामने आता है। ज्यादा नमक से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए हड्डी संबंधी समस्याओं में प्रोसेस फूड, केन्ड फूड से परहेज करने के अलावा भोजन में ऊपर से नमक डालने से भी बचना चाहिए।
  • ज्यादा कैफीन (कॉफी, चाय और सोडा ड्रिक) : कॉफी, चाय और सोडा ड्रिक में कैफीन होती है। कैफीन शरीर में कैल्शियम का एब्जाब्शन रोकती है, जिससे हड्डियों को नुकसान हो सकता है। इसलिए शरीर में ज्यादा कैफीन नहीं जानी चाहिए। एक दिन में तीन कप से ज्यादा कॉफी हड्डियों को हानि पहुंचा सकती है। गठिया रोग में इन सब चीजो का परहेज रखें |
  • ज्यादा एल्कोहल : ज्यादा शराब भी हमारी हड्डियों को नुकसान पहुंचाती है।
  • गठिया रोग में मूली और उड़द का सेवन न करें। बुखार हो तो चावल भी न लें।

यह भी पढ़ें 

गठिया रोग में इन बातों का भी रखें ख्याल :

  • बिस्तर पर आराम करें। पीड़ित अंग पर फलालैन का कपड़ा लपेटें।
  • नमक मिले गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ लें, फिर इससे पीड़ित अंग की सिकाई करें।
  • नियमित टहलना, घूमना-फिरना, व्यायाम एवं मालिश करें।
  • सीढ़ियां चढ़ते समय, घूमने-फिरने जाते समय छड़ी का प्रयोग करें।
  • गठिया रोग में ठंडी हवा, नमी वाले स्थान व ठंडे पानी के संपर्क में न रहें।
  • गठिया रोग में घुटने के दर्द में पालथी मार कर न बैठे। अधिक आराम करने की भी आदत न डालें।
  • दर्द निवारक दवाओं की आदत न डालें।

सारा कैल्शियम “एनीमल प्रोटीन” से न लें :

  • यदि हम सारा कैल्शियम या जरूरत से ज्यादा कैल्शियम एनीमल प्रोटीन यानि (दूध, मांस, मछली) से लेंगे तो शरीर को कैल्शियम तो मिलता है, पर हड्डियों से कैल्शियम और जरूरी मिनरल का क्षरण भी होता है, जो ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बनता है। दुनिया भर में एस्कीमो ऐसे मनुष्य हैं, जो सबसे ज्यादा कैल्शियम एनीमल प्रोटीन (मछली) से लेते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी की दर भी दुनिया भर में एस्कीमो में ही ज्यादा है। उधर चीन में लोग कैल्शियम की ज्यादा मात्रा सब्जियों व फलों से लेते हैं, इसलिए वहां ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कम पाई जाती है यानी ज्यादा कैल्शियम हम सब्जियों, अनाजों और फलों से लेंगे तो ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम रहेगा। अच्छा यही है कि गठिया रोग होने पर मांस का सेवन न करें और दूध-दही भी कम मात्रा में ही लें। मछली को सिमित मात्रा में लें, वो मछलियाँ खाएं जो हड्डियों सहित खाई जाती है | कैल्शियम को फलों और सब्जियों से लें |

अन्य सम्बंधित लेख 

Leave a Reply