अमरबेल के फायदे तथा घरेलू नुस्खे बालों के लिए

अमरबेल में कई ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जिनका उपयोग कई रोगों को आसानी से ठीक करने में  किया जा सकता है। यह बेल लगभग देश के सभी राज्यों में पाई जाती है। अमर बेल एक पराश्रयी लता है, बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उसी से प्राप्त कर लेती है। इस बेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक, नहीं के बराबर होते हैं। बेल पर सर्दियों में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। और यह प्रायः बबूल, बेर आदि के पेड़ो पर लिपटी रहती है। इसके बीज राई के समान हलके पीले रंग के होते हैं। यह बेल वसन्त और ग्रीष्म ऋतु में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती।

विभिन्न भाषाओं में नाम संस्कृत आकाशवल्ली। हिंदी अमर बेल, आकाश बेल। मराठी और गुजराती अमरबेल । बंगाली आलोक लता। अंग्रेजी डोडर (Dodder) । लैटिन कस्कुटा रिफ्लेक्सा (Cuscuta Reflexa)।

विभिन्न रोगों में प्रयोग

आयुर्वेदिक मतानुसार अमर बेल कड़वी, ग्राही, कसैली, रेशेदार, भारी, वात, पित्त, कफ नाशक, अग्निकारक, शीतल प्रकृति वाली, हृदय के लिए हितकारी, रक्त शोधक, यकृत और तिल्ली के दोषों से उत्पन्न रोगों को दूर करने वाली, शोथ, बालों के रोग, पेट के कृमि, चर्म रोग दूर करती है। बालों से जुड़े कई  रोगों में खासतौर से अमरबेल का प्रयोग किया जाता है |

अमरबेल के फायदे बालों के लिए

अमरबेल के फायदे तथा घरेलू नुस्खे बालों के लिए amarbel ke fayde labh nuskhe upay gun balon

अमर बेल फोटो | पेड़ पर लिपटी हुई लता

  • गलत खान-पान, प्रदूषण, तनाव और केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से कम उम्र में ही युवक-युवतियों के बाल झड़ने लगे हैं। हजारों-लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी गंजेपन की समस्या दूर नहीं हो रही है तो एक बार अमरबेल का प्रयोग करके देंखे आप निराश नहीं होंगे |
  • गंजापन : बालों के झड़ने से पैदा हुए गंजापन दूर करने के लिए गंजे हुए स्थान पर अमर बेल का पानी में घिसकर तैयार किया लेप नियमित रूप से दिन में 2 बार 4-5 हफ्ते तक लगाएं, इससे अवश्य फायदा होगा। यदि आपके बाल जड़ो से नहीं टूटे होंगे तो |
  • बालों के रोग : अमर बेल का काढ़ा सिर के बालों में नियमित रूप से लगाकर एक घंटे बाद उन्हें धोने से बाल बढ़ते हैं और काले होने लगते हैं।
  • अमरबेल को तिल या शीशम के तेल में पका लें। इसे सिर पर लगाने से बालों की जड़ें मजबूत बनती हैं। इससे गंजेपन में भी लाभ होता है।
  • लगभग 50 ग्राम अमरबेल को पीसकर एक लीटर पानी में पका लें। इससे बालों को धोने से बाल में चमक आती है | इससे बालों का झड़ना और रूसी खत्म होती है। रोज अमर बेल को पीसकर बालों को धोने से जल्दी फायदा होता है। अमर बेल जूं को और जूं अण्डे शीध्र नष्ट करने में सक्षम है।

अमर बेल का तेल बनाने की विधि :

  • सबसे पहले अमरबेल की कच्ची-कच्ची (अच्छी तरह रस से भरी हुई) लताएं तोड़ लें। फिर उसे कूट लें। फिर 250 ग्राम तिल या नारियल तेल को कड़ाही में लें और आंच पर चढ़ा दें। इसमें अमरबेल को कूटकर किए गए कल्क को डाल दें। आच को बढ़ा दें और तेल को अच्छी तरह गरम होने दें। तेल अच्छी तरह गरम होने पर इसमें सन-सन की आवाज आनी शुरू हो जाती है। बीच-बीच में इसे थोड़ा हिलाते भी रहें। जब तेल में से सन-सन की आवाज आनी बंद हो जाए एवं अमरबेल के अवशेष जल कर काले हो जाएं, तब इसे आच से उतार कर ठंडा कर लें। फिर इसे बोतल में रखकर व्यवहार में लाएं।

अन्य रोगों के लिए अमर बेल के नुस्खे

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नजदीक से अमरबेल की फोटो

  • अमरबेल का काढ़ा घाव धोने के लिए टिंक्चर यानि किसी एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है | तथा यह घाव को पकने नहीं देता है | बरसात के मौसम में पैर के उंगलियों के बीच घाव या गारिया होने पर अमरबेल पौधे का रस दिन में 5-6 बार लगाया जाए तो आराम मिल जाता है |
  • खुजली : अमर बेल को पीसकर बनाए गए लेप को शरीर के खुजली वाले अंगों पर लगाने से आराम मिलता है।
  • पेट के कीड़े : अमर बेल और मुनक्कों को समान मात्रा में लेकर पानी में उबालें। काढ़ा तैयार होने पर छानकर 3 चम्मच रोजाना सोते समय दें।
  • बच्चों की लम्बाई ना बढ़ने पर : जो बच्चे नाटे कद के रह गए हों, उन्हें आम के पेड़ पर चिपकी हई अमर बेल निकाल कर सुखाएं और उसका चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ कुछ महीनो तक नियमित खिलाएं। इससे कद बढ़ने में मदद मिलेगी |
  • पेट के रोग : अमर बेल के बीजों को पानी में पीसकर बनाए गए लेप को पेट पर लगाकर कपड़े से बांधने से गैस की तकलीफ, डकारें आना, आपान वायु न निकलना, पेट दर्द एवं मरोड़ जैसे कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • घाव भरने में : अमर बेल का चूर्ण, सोंठ का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर आधी मात्रा में घी मिलाएं और तैयार लेप को घाव पर लगाएं।
  • सुजाक व उपदंश रोग में : अमर बेल का रस 2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से कुछ ही हफ्तों में इस रोग में पूर्ण आराम मिलता है।
  • लीवर से जुड़े रोगों में : यकृत की कठोरता, उसका आकार बढ़ जाना जैसी तकलीफों में अमर बेल का काढ़ा 3 चम्मच की मात्रा में दिन में, 3 बार कुछ हफ्ते तक पीना चाहिए।
  • रक्त विकार में : अमर बेल का काढ़ा शहद के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करें खून की खराबी दूर होगी |
  • रक्त विकार में इसकी कोमल ताजी फलियों के साथ तुलसी की चार-पांच पत्तियां चबा-चबाकर खानी चाहिए।
  • गठिया जोंड़ों के दर्द में अमर बेल – अमर बेल को पीसकर इसका पेस्ट बना लें। गठिया जोड़ों के दर्द वाले अंगों पर लेप लगाकर पट्टी कर दें। अमर बेल पेस्ट गठिया जोड़ों का दर्द सूजन ठीक करने में लाभकारी है। अमरबेल का काढ़ा बनाकर स्नान करने से भी गठिया के दर्द में लाभ होता है |
  • अमरबेल के 10-20 मिलीलीटर रस को पानी के साथ रोजाना सुबह सुबह पीने से तंत्रिका तंत्र [Nervous System ] ठीक रहता है तथा दिमाग में तरावट बनी रहती है |
  • अमरबेल के 10 मिली स्वरस में 5 ग्राम पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर पीने से बवासीर रोग में विशेष लाभ होता है |

अमरबेल से हरे पेड़ों को नुकसान होता है इसलिए इसको जानबूझकर किसी पेड़ या पौधे पर इसको नहीं डालना चाहिए क्योंकि यह बेल देखते ही देखते पूरे पेड़ पर इस कदर फैल जाती है कि पेड़ पूरी तरह इसके आगोश में आ जाता है। इसी कारण से प्रत्येक वर्ष सैकड़ों पेड़ क्षेत्र के इस बेल के कारण सूख रहे हैं। यदि आपको अमरबेल का प्रयोग दवा के लिए करना है तो अपने लिए पहले से ही मौजूद बेल को ढूंढे, इसे अपने आस-पास पैदा करने की कोशिश ना करें |

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