आक के पत्ते, फूल, दूध, तेल तथा जड़ के बेहतरीन औषधीय गुण जानिए

महर्षि चरक ने लिखा है, “आक में ऐसी आग है जो व्यक्ति के रोग को जलाती नहीं सुखाती है। आक किसी भी जगह अपने आप उगने वाली औषधीय वनस्पति है। इस वनस्पति को पशु पक्षी भी नहीं खाते हैं। आक के गुणों से बहुत कम व्यक्ति परिचित हैं। जनसाधारण में आक को मदार, अकौआ के नाम से जाना जाता है। आक का पेड़ गर्मियों में हरा-भरा दिखाई देता है, जबकि वर्षा होते ही सूखने लगता है। इसमें से सफेद मुलायम रूई निकलती है। रूई से ढके काले रंग के बीज उड़कर यहां-वहां फैल जाते हैं और बारिश का पानी पाकर फिर से नए पौधे को जन्म देते हैं। इस पौधे की जड़, दूध, फूल और आक के पत्ते का दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। सफेद और लाल दो रंगों में आक पैदा होता है। आक को काटने पर उसमें से सफेद रंग का दूध-सा द्रव्य निकलता है। आक का हर अंग दवा है जो शरीर के सभी रोगों में उपयोगी है।

आयुर्वेदिक मतानुसार आक का रस कटु, तिक्त, लघु, उष्ण प्रकृति, वात-कफ दूर करने वाला, कान-दर्द, दांत-दर्द, कृमि, अर्श, खांसी, कब्ज़, उदर रोग, त्वचा रोग, वात रोग, शोथ नाशक होता है। आक का प्रयोग पेट के विभिन्न रोगों, फेफड़ों के विकारों, चमड़ी के रोगों तथा श्वास-रोगों के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा, फोड़े-फुसियों में आक के दूध को नीम की पत्तियों के साथ प्रयोग करने से बहुत लाभ होता है। आक के पत्ते तथा जड़ की भस्म शरीर के साथ प्रयोग करने से बहुत लाभ होता है। आक के पत्ते तथा जड़ की भस्म शरीर के अंगों को ऊर्जा प्रदान करती है, जो गुणकारी टॉनिक भी नहीं दे सकता। यदि किसी कारणवश हाथ-पैरों में दर्द हो रहा हो तो आक के फूलों को पानी में औटाकर उनसे धोने से सारा दर्द ठीक हो जाता है। खोजों से पता चला है कि आक के फूलों से दमा तथा टी.बी. की बीमारियों की दवाएं बनाई जा सकती हैं। इसमें ऐसा रसायन है जो कफ को खत्म करता है। सूखी तथा कफ वाली दोनों प्रकार की पुरानी से पुरानी खांसी को यह उखाड़ फेंकता है।

वैज्ञानिक मतानुसार आक के रासायनिक तत्त्वों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसकी जड़ और तने में एमाईरिन (Amyrin), गिग्नटिओल (Giganteol) तथा केलोट्रोपिओल (Calotropiol) के अलावा अल्प मात्रा में मदार ऐल्बन, फ्लेबल क्षार भी मिलता है। दूध में ट्रिप्सिन, उस्कैरिन, केलोट्रोपिन तथा केलोटोक्सिन तत्त्व मिलते हैं।

आक के प्रयोग में सावधानी

आक का पौधा थोडा जहरीला होता है, इसके गलत सेवन से गंभीर परिणाम हो सकते है। आयुर्वेद संहिताओं में भी इसकी गणना उप विषों (आंशिक जहर) में की गई है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उल्दी दस्त होकर पानी की कमी से मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है। आक का दूध यदि आंख में चला जाए तो आंख की रोशनी भी जा सकती है। अतः प्रयोग करते समय अपनी आंखों को बचा के रखे। यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, जानकार व्यक्ति की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इसका प्रयोग हो सकता है। जैसे भांग, अफीम आदि का आयुर्वेद से लेकर आधुनिक ऐल्योपेथी की दवाइयों में आज अभूत बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है |

आक के पत्ते, फूल के लाभ तथा आयुर्वेदिक नुस्खे

आक के पत्ते, फूल, दूध, तेल तथा जड़ के बेहतरीन औषधीय गुण जानिए aakde madar Patta phool jad ke fayde

  • सबसे पहले तो आपको यह समझ लेना भी जरूरी है कि आक के पत्ते, फूल, फल, शाखा या जड़ अपने प्राकृतिक रूप में प्रयोग नहीं किए जाते हैं क्योंकि इनमें जहर का अंश अधिक होता है। इसलिए इन सबका भस्म या शोधी हुई दवा अकेले भी प्रयोग में नहीं लाई जाती, बल्कि अन्य दवाओं में लाभकारी सीमा तक अंश मिलाकर दी जाती है ।
  • आक के नरम फूलों को यदि तकिये में भरकर सिरहाने लगाया जाए तो जुकाम कभी नहीं होता। मतलब यह कि आक के फूलों की रूई जुकाम की बेजोड़ दवा है। इसके फूलों को रूई की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है। गांवों में तो लोग इसकी रूई को बंडी/ फतूही में भर कर पहनते हैं। कहते हैं कि यह छाती को गरम रखती है। इसके पहनने से निमोनिया नहीं होता व बच्चों की पसलियां चलने की बीमारी खत्म हो जाती है।
  • जुकाम या नजला – आक के फूलों को पानी में उबालकर, पानी छानकर जरा-सी शक्कर मिलाकर पीने से सारा जुकाम निकल जाता है और तबियत ठीक हो जाती है।
  • आक के पेड़ की छाल पानी में औटाकर शहद डालकर पीने से काफी लाभ होता है।
  • एक चम्मच अजवायन, दो माशे आक के फूलों की भस्म तथा 5 ग्राम गुड़ एक साथ लेने से जुकाम निकल जाता है।
  • आधा चम्मच सोंठ और थोड़ी-सी आक के पेड़ की छाल की चाय पीने से काफी लाभ होता है।
  • अदरक, कालीमिर्च, लौंग, आक की भस्म और तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से काफी लाभ होता है।
  • लहसुन की पत्तियों को आग में भूनकर भस्म तैयार कर लें। फिर दो चुटकी भस्म में 2 रत्ती आक की पत्तियों की भस्म मिलाकर शहद से चाटें।
  • खांसी- चार मुनक्कों के बीज निकालकर तवे पर भून लें। फिर इसमें 2 ग्राम आक के फूल तथा पांच दाने कालीमिर्च के मिलाकर चटनी पीस लें। सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से हर प्रकार की खांसी चली जाता है।
  • अजीर्ण (बदहज़मी) मूली के दो चम्मच रस में आक की छाल को जलाकर उसकी एक रत्ती भस्म मिलाकर सेवन करें।
  • दो कलियां लहसुन, एक चम्मच नींबू का रस, एक टुकड़ा अदरक, जरा-सा धनिया, चार दाने कालीमिर्च तथा आधा चम्मच जीरा-सबको पीसकर चटनी बना लें। इस चटनी में एक रत्ती आक की भस्म मिला लें। इसमें से थोड़ी-सी चटनी भोजन के साथ सेवन करें। इस चटनी से अजीर्ण रोग दूर हो जाता है।
  • भुना हुआ जीरा आधा चम्मच, चार कालीमिर्च, 2 रत्ती आक के फूल की भस्म तथा जरा-सा काला नमक-सबको पीसकर चूर्ण बनाकर सेवन करें। यह चूर्ण आठ दिन तक सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से अजीर्ण रोग सदा के लिए खत्म हो जाता है।
  • पानी में 2 लौंग, 2 हरड़ तथा एक रत्ती आक के फूल उबालकर छान लें। फिर उसमें जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
  • अजवायन 200 ग्राम, हीरा हींग 5 ग्राम, नमक 20 ग्राम, आक के सूखे फूल 3 ग्राम-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से तीन ग्राम चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें। यह चूर्ण गैस, अफरा, पेट दर्द, अजीर्ण तथा अपच के लिए बहुत लाभकारी है।
  • दस्त – 10 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम धनिये के दाने तथा 10 ग्राम जीरा पीसकर चूर्ण बना लें। तीनों चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में आक के फूलों की भस्म में मिला लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें।
  • आक की छाल का चूर्ण देशी घी में मिलाकर पेट पर मलें।
  • कच्ची बेल को भूनकर उसका गूदा निकाल लें। उसमें एक रत्ती आक की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
  • आक के फूल तथा सूखे आंवले को पानी में भिगो दें फिर निथार कर दो-दो चम्मच पानी सुबह-शाम पीने से दस्त बंद हो जाते हैं।
  • आक की भस्म एक रत्ती जीरे के चूर्ण के साथ लेने से हर प्रकार के दस्त रुक जाते हैं।
  • आक के फूलों का पानी दो चम्मच की मात्रा में पीने से दस्त शान्त हो जाते हैं।
  • वमन या उल्टी– पीपल का चूर्ण एक माशा, बिजौरा नींबू का रस एक माशा, आक के फूल की भस्म एक रत्ती तथा शहद एक चम्मच-सबको मिलाकर उंगली से चाटने से उलटी ठीक हो जाती है।
  • पीपल की छाल तथा आक के फूल दोनों को जलाकर राख बना लें। इसमें से 2 रत्ती राख नींबू-पानी में डालकर पी जाएं।
  • केवल आक का थोड़ा-सा फूल सुखाकर चूसने से उलटी रूक जाती है।
  • कब्ज – रात को पानी में आक के थोड़े से फूल भिगो दें। सुबह को पानी में उनको मथकर पानी छान लें। फिर इस पानी में जरा-सी अजवायन और हींग मिलाकर पी जाएं। लगभग एक सप्ताह तक बराबर पीने से कब्ज जाता रहता है।
  • छोटी हरड़ को घी में भूनकर चूर्ण बना लें। रात को सोने से पूर्व एक चुटकी हरड़ के चूर्ण में एक रत्ती आक के फूलों की भस्म मिलाकर ताजे पानी से सेवन करें।
  • टमाटर के एक कप रस में आक के पत्ते की भस्म एक रत्ती को मात्रा में मिलाकर सेवन करें। सुबह-शाम भोजन के बाद तीन-चार केले खाकर ऊपर से आक के पत्ते की भस्म 2 रत्ती की मात्रा में सेवन करें।
  • अम्लपित्त (एसिडिटी )- आंवले का रस आधा चम्मच, आक के फूलों की भस्म 2 रत्ती, भुना हुआ जीरा आधा चम्मच तथा थोड़ी-सी मिश्री-सबकी चटनी बनाकर दो खुराक करें। सुबह-शाम सेवन करने से कुछ ही दिनों में अम्ल पित्त खत्म हो जाती है।
  • काले चनों में एक ग्राम आक के फूलों की भस्म मिलाकर चबा-चबाकर खाने से अमल-पित्त का रोग चला जाता है।
  • दो चम्मच मूली के रस में 2 ग्राम आक के पत्ते की राख मिलाकर सेवन करें।
  • नारियल के पानी में 2 ग्राम आक के फूलों की भस्म मिलाकर सेवन करें।
  • चितकबरे दाग- त्रिफला चूर्ण एक चम्मच, आक की भस्म दो रत्ती, शहद तीन चम्मच-यह एक खुराक है। दिनभर में तीन खुराक दवा का सेवन करें।
  • शहद में दो रत्ती आक के फूलों की भस्म मिलाकर सेवन करें।
  • एक चम्मच तुलसी का रस और एक रत्ती आक के पत्ते की भस्म शहद में मिलाकर चाटें।
  • घी में 2 रत्ती आक के पत्तों की भस्म, दो चम्मच पीपल की छाल का चर्ण तथा 4 रत्ती कपूर मिलाकर शरीर पर मलें।
  • फोड़े-फुंसी – नीम के तेल में आक के थोड़े से फूल डालकर तेल को गरम कर लें। फिर तेल को छानकर फुसियों पर लगाएं। फोड़ा फूट जाएगा। मवाद निकलने के बाद फोड़ा सूख जाएगा।
  • उड़द की दाल में 5-6 ग्राम आक के फूल मिलाकर पीस लें। फिर घी लगाकर फोड़े पर इसकी पुल्टिस बांधे।
  • खुजली : आक के पत्ते 10 सूखे हुए, सरसों के तेल में उबालकर जला लें। फिर तेल को छानकर ठंडा होने पर इसमें कपूर की 4 टिकियों का चूर्ण अच्छी तरह मिलाकर शीशी में भर लें। खाज-खुजली वाले अंगों पर यह तेल 3 बार लगाएं।
  • दमा : आक की जड़ एवं पत्तों का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर एक चौथाई मात्रा में काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ एक हफ्ते तक सेवन करने से दमे में बहुत लाभ होगा।
  • सूजन और दर्द : पीड़ित अंग पर अरंडी का तेल लगाकर आक का गर्म पत्ता बांधे।
  • वात रोगों में : तिल के तेल में आक की जड़ को पका लें। छानकर तेल को इस पीड़ित अंगों पर मलें।
  • आक के दूध की दो-तीन बूंदें बताशे में डालकर, यवक्षार मिलाकर खाने से अर्श रोग में बहुत लाभ होता है।
  • आक का दूध मलने से संधिशोथ, आमवात का दर्द तुरंत नष्ट होता है।
  • आक के फूलों का लौंग के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द नष्ट होता है। इसका सेवन सूर्योदय से पहले करना चाहिए।
  • 5-6 आक के सूखे फूलों को पीसकर, दूध में मिलाकर तीन-चार सप्ताह तक सेवन करने से पथरी की बीमारी में बहुत लाभ होता है।
  • सूखे आक के फूलों के भीतर की 4-5 लौंग प्रतिदिन खाने से पाचन शक्ति तेज होती है |
  • सफेद आक के फूलों की माला बनाकर प्रतिदिन पहनने से उच्च रक्तचाप सामान्य स्थिति में पहुंच जाता है।
  • आक के फूलों को कूट-पीसकर बांधने से एड़ी का दर्द ठीक होता है।
  • आक के फूलों को तिल के तेल में तलकर सेवन करने से रक्त गुल्म रोग में बहुत लाभ होता है।
  • आक के दूध में हल्दी को पीसकर इसका चेहरे पर लेप करने से चेहरे के दाग-धब्बे और मुंहासे नष्ट होते हैं तथा सौंदर्य विकसित होता है। आक का दूध के एक बूँद ही काफी होगा |

 

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