अर्जुन छाल के आयुर्वेदिक नुस्खे कोलेस्ट्रॉल और दिल की बिमारियों के लिए

आचार्य बाणभट्ट ने सबसे पहले हृदय रोग यानि दिल की बिमारियों में अर्जुन पेड़ के औषधीय गुणों की खोज की थी । उसके बाद से इस पर बराबर शोध होते रहे और अब यह हृदय रोगों की महौषधि बन गया है। बहुत पुराने जमाने से ही अर्जुन छाल को हृदय रोग उपचार की प्रमुख औषधि के रूप में जाना जाता रहा है । सभी प्रकार के हृदय रोगों की चिकित्सा में अर्जुन वृक्ष की छाल को अत्यन्त गुणकारी औषधि तत्व के रूप में स्वीकारा गया है। इसे हृदय की मांसपेशियों को बल प्रदान करने वाला तथा हृदय के स्पंदन को नियमित करने वाला माना जाता है। इसका प्रभाव स्थाई होता है, यह मान्यता भी है। अर्जुन की छाल के इस्तेमाल से डायबिटीज और मोटापे को कंट्रोल किया जा सकता है |

अर्जुन छाल का सेवन करने वालों में कोलेस्ट्रॉल के अतिरिक्त रक्त शर्करा, कैटाकोलामिन के बढ़े हुए स्तर में कमी पाई गई। एंजाइना के दर्द से प्रभावित रोगियों के दर्द में धीरे-धीरे कमी दर्ज की गई। इसके सेवन से वजन में कमी तथा रक्तचाप पर नियंत्रण पाया गया। अर्जुन वृक्ष की छाल में  उपस्थित वसा, अम्ल, प्रोस्टोग्लैडिन के निर्माण में सहायक होती है। इसलिए इसके सेवन से रक्त में ‘प्रोस्टोग्लैडिन ई-2’ की मात्रा बढ़ जाती है। यह शरीर की रक्त वाहिनियों को फैला देता है, जिससे हृदय में आक्सीजन युक्त रक्त का संचार बढ़ जाता है। इससे एंजाइना के दर्द में लाभ होता है। खनिज लवणों की उपस्थिति रक्तावरोध दूर करने में सहायक होती है। इसका सेवन करने से एल.डी.एल. कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम तथा एच.डी.एल. कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। अर्जुन का सेवन लिपिड चयापचय को ठीक कर हृदय रोग दूर करने में सहायक होता है। हृदयाघात से बचाव या हृदय रोग से मुक्ति के लिए इसकी छाल का प्रतिदिन सेवन लाभप्रद है। साथ ही इसके सेवन से शारीरिक शक्ति व स्फूर्ति बढ़ती है। अर्जुन के पेड़ से तैयार  उपलब्ध आयुर्वेदिक दवा ये है – अर्जुनारिष्ट, अर्जुन घृत, ककुभादि चूर्ण आदि।

आयुर्वेदिक मतानुसार अर्जुन कषाय, तिक्त, शीतवीर्य, लघु, व्रणशोधक, हृदयरोग विनाशक, कफ, पित्त, तृष्णा, प्रमेह, पाण्डु रोग, रक्त विकार, दाह, स्वेदाधिक्य नाशक है। मेदे की बढ़ोतरी में भी यह प्रभावी है।

यूनानी मतानुसार अर्जुन की छाल की तासीर तीसरे दर्जे की गर्म होती है। टूटी हड्डियों, घावों में भी यह उपयोगी है। इसके अतिरिक्त पौष्टिक, कामोद्दीपक, कफ निवारक के गुण भी इसमें पाए जाते हैं।

सेवन की सही मात्रा – अर्जुन छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम गुड़, शहद या दूध के साथ दिन में 2 या 3 बार । छाल का काढ़ा 50 से 100 मिलीलीटर। पत्तों का रस 10 से 20 मिलीलीटर।

दिल की बिमारियों और कोलेस्ट्रॉल के लिए अर्जुन छाल के आयुर्वेदिक नुस्खे

अर्जुन छाल के आयुर्वेदिक नुस्खे कोलेस्ट्रॉल और दिल की बिमारियों के लिए arjun ki chhal for heart blockage cholesterol

 

  • अर्जुन की छाल का रस 50 ग्राम, यदि गीली छाल न मिले तो 50 ग्राम सूखी छाल लेकर 4 लिटर पानी में पकायें। जब चौथाई शेष रह जाये तो क्वाथ को छान लें, फिर 50 ग्राम गौघृत को कढ़ाई में छोड़े, फिर इसमें अर्जुन की छाल का कल्क 50 ग्राम और पकाया हुआ रस तथा दुग्धादि द्रव पदार्थ को मिला धीमी आंच पर पका लें। घृत मात्र शेष रह जाने पर ठंडा कर छान लें। अब इसमें 50 ग्राम शहद और 75 ग्राम कंद या मिश्री मिलाकर कांच या चीनी मिट्टी के पात्र में रखे। इस घी को 6 ग्राम सुबह शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें। यह घृत हृदय को बलवान बनाता है तथा इसके रोगों को दूर करता है यह हृदय की शिथिलता, तेज धड़कन, सूजन या हृदय बढ़ जाने आदि तमाम हृदय रोगों में अत्यंत प्रभावकारी योग है। हार्ट अटैक हो चुकने पर 40 मिलीलीटर यह काढ़ा सुबह तथा रात दोनों समय सेवन करें। यह काढ़ा हृदय शक्तिवर्धक (Heart or Cardiac tonic) है। पूर्ण लाभ के लिए गाय के दूध में काढ़ा बना लेना आवश्यक है। यह लेने से दिल की धड़कन तेज होना, हृदय में पीड़ा (एन्जाइना) घबराहट होना आदि दूर होते हैं।
  • हृदय रोगों में अर्जुन छाल का कपड़छान चूर्ण का प्रभाव इन्जेक्शन से भी अधिक होता है। जीभ पर रखकर चूसते ही रोग कम होने लगता है। इसे सारबिट्रेट गोली के स्थान पर प्रयोग करने पर उतना ही लाभकारी पाया गया। हृदय की अधिक धड़कनें और नाड़ी की गति बहुत कमजोर हो जाने पर इसको रोगी की जीभ पर रखने मात्र से नाडी में तुरंत शक्ति महसूस होने लगती है। इस दवा का लाभ स्थायी होता है और यह दवा किसी प्रकार की हानि नही पहचाती तथा एलोपैथिक की प्रसिद्ध दवा Digitalis से भी अधिक लाभप्रद है। यह उच्च रक्तचाप में लाभप्रद है। उच्च रक्तचाप के कारण याद हृदय पर सूजन हो गयी हो तो उसको भी दूर करता है।
  • 250 ग्राम दूध में 250 ग्राम पानी मिलाकर उसमें 10- 12 ग्राम अर्जुन छाल डाल दे। औटाने पर जब आधा (250 ग्राम) रह जाए तब छानकर, मिश्री मिलाकर पी जाएं। मिश्री के साथ 5 ग्राम छोटी इलायची को पीस कर भी पी सकते है। यदि आप पहले से ही तैयार आयुवेदिक दवा का प्रयोग करना चाहते है तो अर्जुनारिष्ठ का प्रयोग भी कर सकते है। अर्जुनारिष्ठ को बराबर के पानी में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने का परामर्श दिया जाता है।
  • अर्जुन की छाल को पानी में उबालकर इसकी चाय बनाकर पीने से दिल की बीमारियों से बचाव होता है। इसके अलावा ये चाय आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मददगार होती है।
  • हृदय की धड़कन बढ़ना : दिल की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे, तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से जल्दी ही धड़कन सामान्य हो जाती है। आवश्यक होने पर यही प्रयोग बार-बार दोहराया जा सकता है।
  • अर्जुन की छाल 20 ग्राम एक पाव दूध एक पाव पानी में उबाले जब पानी जल जाय तब दूध को छानकर उसमें शक्कर मिलाकर पीने से दिल मजबूत होता है |
  • सूखी अर्जुन की छाल 1 पाव असगंध 50 ग्राम ब्राम्ही बूटी 25 ग्राम, तुलसी की पत्ती 25 ग्राम सतईसव गोल 25 ग्राम और एक पाव शक्कर मिलाकर चूर्ण करें उसको 10 ग्राम सबह-शाम जल से खाने से हृदय बहुत मजबूत होता है।
  • अर्जुन क्षीर‘ बनाने की विधि – अर्जुन की छाल को दूध में उबालकर पुराना गुड़ अथवा शहद मिलाकर देने से हृदय की शिथिलता दूर होती है। अर्जुन वृक्ष की छाल 1 15 ग्राम लें, उसको पानी से धोकर, कूटकर, गाय का दूध 16 तोला और 16 तोला पानी मिलाकर मन्द-मन्द आंच पर पकाएं। जब सब जलकर केवल दूध ही बाकी रहे तब छानकर उसमें आधा तोला मिश्री तथा 5 नग छोटी इलायची के बीज का चूर्ण मिलाकर पिलाएं। इसे ‘अर्जुन क्षीर’ कहते हैं।
  • विभिन्न हृदय रोगों में लाभकारी उपाय : अर्जुन की मोटी छाल का बारीक चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में मलाई निकाले एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करते रहने से हृदय के सभी रोगों में लाभ मिलता है, हृदय को बल मिलता है और कमजोरी दूर होती है। हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य होती है।
  • गेहूं का आटा 20 ग्राम लेकर 30 ग्राम गाय के घी में भून लें, गुलाबी हो जाने पर अर्जुन छाल का चूर्ण 3 ग्राम और मिश्री 40 ग्राम तथा खौलता हुआ जल 100 ग्राम डालकर पकायें, जब हलुवा तैयार हो जाये तब सुबह इसका सेवन करें। इसका रोजाना सेवन करने से हृदय की पीड़ा, घबराहट, धड़कन बढ़ जाना आदि शिकायतें दूर हो जाती है।
  • अर्जुन छाल क्षीरपाक विधि : अर्जुन की ताजा छाल को छाया में सूखाकर चूर्ण बनाकर रख लें। 250 ग्राम दूध में 250 ग्राम (बराबर वजन) पानी मिलाकर हल्की आंच पर रख दें और उसमें उपरोक्त तीन ग्राम (एक चाय का चम्मच हल्का भरा) अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें। जब उबलते-उबलते पानी सूखकर आधा रह जाये तब उतार लें। अब इसे छानकर रोगी द्वारा पीने से कई हृदय की बिमारियों से बचाव होता है। अर्जुन की छाल के फायदे, तासीर तथा आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग
  • डायबिटीज के मरीज अर्जुन की छाल को सूखे हुए जामुन के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और इस चूर्ण का सेवन रोज रात में सोने से पहले करें। इससे आपके शरीर में इंसुलिन के बनने की प्रक्रिया भी सामान्य हो जाएगी।
  • अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर इसका नियमित सेवन करने से मोटापा भी कम होता है |

अर्जुन की छाल का काढ़ा कैसे बनाये ?

  • अर्जुन का मोटा चूर्ण- 10 ग्राम
  • उबला और ठंडा दूध- 80 मिलीलीटर
  • पानी- 320 मिलीलीटर
  • चौड़े मुंह वाले बर्तन में अर्जुन की छाल का चूर्ण लें और उसमें दूध डाल लें।
  • एक स्केल की मदद से इसकी हाइट नाप लें।
  • इसमें 320 मिलीलीटर पानी डाल दें।
  • इसे धीमी आंच पर उबाल लें।
  • इसे चलाते रहे।
  • इसे पूर्णतः उबालें और 80 मिलीलीटर तक ले आयें।
  • इसे कपडे से छान लें और आपका उपाय तैयार है।
  • दिन में दो बार खाने से पहले 10-20 मिलीलीटर लें।

आचार्य बालकृष्ण जी से जानिए अर्जुन की छाल से चाय तथा काढ़ा बनाने की विधि

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