अर्जुन की छाल के फायदे, तासीर तथा आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग

अर्जुन एक सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई 60-80 फुट तक होती है। इसका तना मोटा एवं शाखाएं तने के चारों ओर फैली रहती हैं। इसके पत्ते 10-15 से.मी. लम्बे, 47 से.मी. चौड़े तथा विपरीत क्रम में लगे होते हैं। फूल सफेद तथा फल, 1-2 इंच लम्बे होते हैं। फलों में पंख के आकार के पांच उभार होते हैं। इसकी छाल बाहर से चमकीली सफेद व अन्दर से गहरे गुलाबी रंग की होती है। हालाँकि इस पेड़ के सभी अंगो के औषधीय उपयोग है परंतु अर्जुन की छाल को विशेष रूप से आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तमाल किया जाता है |

शक्ति प्रदायक के रूप में प्रतिष्ठित होने के कारण संस्कृत में इसका नाम ‘अर्जुन’ रखा गया। तना सफेद होने के कारण इसे ‘धवला’ भी कहा गया है। इसे ‘वीरवृक्ष’ के नाम से भी पुकारा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘टरमिनालिया अर्जुना’ है। अर्जुन की छाल की तासीर तीसरे दर्जे की गर्म होती है।

आयुर्वेद के अनुसार अर्जुन पेड़ कषाय, शीतवीर्य, कफ, पित्त, क्षतक्षय, विष, रक्त विकार, मेदोवृद्धि, प्रमेह और व्रण को दूर करने वाला है। अर्जुन की छाल का क्षीर पाक करके देने से हृदय रोग में बहुत लाभ होता है। इससे हृदय की पोषण क्रिया अच्छी होती है, हृदय को आराम और बल मिलता है। दिल की धडकने ठीक होता है। अर्जुन से रक्त भी शुद्ध होता है। रक्त पित्त और जीर्णज्वर में, जब रक्त दूषित होता है तब अर्जुन का प्रयोग किया जाता है। अर्जुन की छाल खून को बगैर दवा लिए प्राकृतिक रूप में पतला करने भी औषधि है। इसके सेवन से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी पैदा नहीं होती है।

अर्जुन के पेड़ के रासायनिक विश्लेषण

अर्जुन की छाल में अनेक प्रकार के रासायनिक घटक पाये जाते हैं। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट लगभग 34 प्रतिशत व सोडियम, मैग्नीशियम व एल्युमिनियम प्रमुख क्षार हैं। कैल्शियम-सोडियम की प्रचुरता के कारण ही यह हृदय की मांसपेशियों में बारीक़ स्तर पर कार्य करता है।

रासायनिक विश्लेषण द्वारा वृक्ष के विभिन्न भागों के संगठन का पता लगाया गया है। इसकी छाल में टैनिन 20-24 प्रतिशत तक पाया गया है। इसके अतिरिक्त छाल में से बीटा-सिटोस्टीरॉल, इलेजिक एसिड तथा एक ट्राईहाड्राक्सी-ट्राइटरपीन मोनो कार्बोक्सिलिक एसिड, अर्जुनिक एसिड पाया गया है। इसके फलों में भी 7-20 प्रतिशत तक टैनिन पाया गया है। पानी में अघुलनशील भाग से अर्जुनिक अम्ल तथा घुलनशील भाग में मैनिटॉल, टैनिन तथा पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम लवण प्राप्त किए गए हैं। पत्तियों में प्रोटीन 10 प्रतिशत, रेशे 7-8 प्रतिशत, अपचायी शर्करा 4.3 प्रतिशत, कुल शर्करा 5.75 प्रतिशत, स्टार्च 17 प्रतिशत तथा खनिज लवण 7 प्रतिशत पाए गए हैं।

अर्जुन की छाल के औषधीय उपयोग

अर्जुन की छाल के फायदे, तासीर तथा आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग arjun ki chaal ke fayde tasir ayurvedik nuskhe

  • अर्जुन छाल को रातभर जल में भिगोकर रखें और प्रात: इसका क्वाथ बनाकर छानकर पीने से रक्तपित्त Blood bile रोग में लाभ होता है।
  • हड्डी टूटने पर : हड्डी टूटने पर, प्लास्टर चढ़ा हो, तो अर्जुन की छाल का बारीक़ चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक कप दूध के साथ कुछ हफ्ते तक सेवन करने से हड्डी जल्द ही जुड़कर मजबूत हो जाती है। हड्डी जहां टूटी हो, वहां पर छाल को घी में पीसकर लेप करें और पट्टी बांधकर रखें। इससे भी हड्डी जल्दी ही जुड़ जाती है।
  • डायबिटीज की बीमारी को नियंत्रित करने में अर्जुन की छाल बड़े काम की औषधि है। लेकिन इसके लिए अर्जुन की छाल के साथ देसी जामुन को समान मात्रा मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को रोज सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लेना डायबिटीज के मरीज के लिए फायदेमंद होता है।
  • चोट लगने से हड्डियों में दर्द तथा नील युक्त चोट की हालत में इसका दूध के साथ सेवन लाभदायक होता है।
  • मानसिक तनाव में इसके अर्जुन का चूर्ण का सेवन राहत देता है।
  • लिवर सिरोसिस में यह स्वास्थ्य वर्द्धक टॉनिक के रूप में काम आता है।
  • इसका क्वाथ छालों, अल्सर आदि को धोने से जल्दी ही ठीक हो जाते है |
  • अर्जुन की ताजी पत्तियों का रस कान दर्द में प्रयोग करने से कान दर्द से राहत मिलती है।
  • अर्जुन के वृक्ष की मुलायम टहनियां मुंह के अल्सर के इलाज में प्रयोग की जाती है।
  • जलने पर : आग से जलने पर होने वाले घाव पर छाल के चूर्ण को लगाने से घाव जल्द ही भर जाता है।
  • शारीरिक बदबू : अर्जुन और जामुन के सूखे पत्तों का चूर्ण उबटन की तरह लगाकर कुछ समय बाद नहाने से अधिक पसीना आने के कारण उत्पन्न शारीरिक दुर्गन्ध दूर होगी।
  • मुंह के छाले : छाल के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर छालों पर लगाएं। इसकी जड़ के चूर्ण में मीठा तेल मिलाकर गरम पानी से कुल्ले करने से भी मुंह के छाले ठीक होते है।
  • कान के दर्द में इसके पत्तों का 3-4 बूंद स्वरस कान में डालने से कान का दर्द मिटता है।
  • मुंह की झाईयाः इसकी छाल पीसकर, शहद मिलाकर लेप करने से मुंह की झाइयां मिटती हैं।
  • टी बी की खांसी : अर्जुन की छाल के चूर्ण में वासा पत्रों के स्वरस की सात भावना देकर 2-3 ग्राम की मात्रा शहद, मिश्री या गोघृत के साथ चटाने से क्षय की खांसी जिसमें कफ में खून आता हो वह ठीक हो जाती है।
  • अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से मोटापे की बीमारी भी नहीं होती है क्योंकि पाचन तंत्र इसके लगातार सेवन से ठीक रहता है।
  • पेशाब को रोकने से पैदा हुए उदावर्त रोग को ठीक करने के लिए अर्जुन की छाल का 40 मिलीलीटर क्वाथ नियमित सुबह शाम नियमित पिलाना चाहिए।
  • रक्तप्रदर : अर्जुन की छाल का 1 चम्मच चूर्ण 1 कप दूध में उबालकर पकायें, आधा शेष रहने पर थोड़ी मात्रा में मिश्री मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें।
  • प्रमेह (गोनोरिया रोग ) : अर्जुन की छाल, नीम की छाल, आमलकी छाल, हल्दी तथा नीलकमल के समभाग 20 ग्राम चूर्ण को 400 मिलीलीटर पानी में पकाकर 100 मिलीलीटर शेष बचे कषाय को शहद के साथ मिलाकर रोजाना सुबह शाम सेवन करने से पित्तज प्रमेह रोग ठीक हो जाता हैं।
  • प्रमेह (गोनोरिया रोग ) में दूसरा नुस्खा – अर्जुन की पत्ती, बेल की पत्ती, जामुन की पत्ती, मृणाली, कृष्णा, श्रीपर्णी की पत्ती, मेहंदी की पत्ती, धाय की पत्ती, इन सभी पत्तियों के स्वरस से अलग-अलग खंड युषों का घी, अम्ल तथा लवण मिलाकर निर्माण करें। ये सभी खड़यूष परम संग्राहिक होते है
  • शुक्रमेह : शुक्रमेह के रोगी को अर्जुन की छाल या सफेद चंदन का क्वाथ नियमित सुबह शाम पिलाने से लाभ पहुंचता है।
  • पेशाब बंद होने पर : मूत्राघात में अर्जुन की छाल का 40 मिलीलीटर क्वाथ बनाकर पिलाना चाहिए।
  • हड्डियाँ टूटने पर : हड्डी टूटने पर प्लास्टर चढ़ा हो तो अर्जुन की छाल का में 3 बार एक कप दूध के हाल को घी में पीसकर लेप करें महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक साथ काश हफ्ते तक सेवन करने से हड्डी मजबूत होती जाती टूटी हड्डी के स्थान पर भी इसकी छाल को घी में पीसकर और पट्टी बांधकर रखें, इससे भी हड्डी जुड़ जाती है।
  • बादी के रोग : अर्जुन की जड़ की छाल का चूर्ण और गंगरन की जड की छाल के बराबर मात्रा में चूर्ण कर 2-2 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण नियमित सुबह शाम देकर ऊपर से दूध पिलाने से बादी के रोग मिटते हैं।
  • रक्त पित्त : अर्जन 2 चम्मच छाल को रात भर पानी में भिगोकर कई सवेरे उसको मसल छानकर या उसका क्वाथ पीने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
  • पुराने बुखार में : इसकी छाल के 1 चम्मच चूर्ण की गुड के साथ फंकी लेने से पुराने से पुराना बुखार मिटता है।

अगले आर्टिकल में हम दिल से जुडी बिमारियों में तथा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए आप कैसे इस औषधीय पेड़ से लाभ उठा सकते है इसकी जानकारी देंगे तथा साथ ही में अर्जुन की छाल से बनाये जाने वाले काढ़े की विधि की जानकारी भी देंगे |

अर्जुन की छाल या इसके पेड़ की लकड़ी आदि काटना गैरकानूनी है, इसलिए इसको किसी वैध दूकान से ही खरीदे अपने आप इसे पाने की कोशिश ना करें |

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