पुरुषो तथा महिलाओं में यौन रोग (एसटीडी) के लक्षण, कारण तथा बचाव

यौन रोग अंग्रेजी में इसे Sexually Transmitted Disease (STD) कहा जाता है इसको साधारण रोग मानकर नजरअंदज नहीं करना चाहिए। यह देखा गया है कि यौन रोगियों में एड्स विषाणु संक्रमण अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक होता है। दोनों तरह की बीमारियों में कुछ समानता भी है, जैसे-यौनजनित रोग तथा एड्स, यौन संपर्क द्वारा अधिक फैलते हैं। इसलिए यदि एड्स रोग पर नियंत्रण पाना है तो यौन रोगों के प्रसार को रोकना चाहिए ।

यौन रोग और एड्स

अब सवाल यह उठता है कि यौन रोगियों को एड्स संक्रमण का खतरा अधिक मात्रा में क्यों होता है? इसका प्रमुख कारण तो यह है कि यौन रोगियों (चाहे वह स्त्री हो या पुरुष) के यौन-अंगों में छाले या घाव हो जाते हैं, जिससे यौन संबंध के दौरान क्षतिग्रस्त रक्तवाहिकाओं के द्वारा ये बीमारी के विषाणु खून में पहुँच जाते हैं एवं स्वस्थ स्त्री या पुरुष रोगग्रस्त हो जाते हैं।

भारत में यौन रोगियों की संख्या बहुत अधिक है। एक अनुमान से यहाँ लगभग 5 प्रतिशत आबादी विभिन्न तरह के यौन रोगों से पीड़ित है। इसका मतलब यह हुआ कि लगभग पाँच करोड़ से ऊपर रोगियों को कोई-न-कोई यौनजनित बीमारी है। हमारे देश में यौन रोगों को छिपाने की आदत भी बहुत ज्यादा है। ज्यादातर यौन रोग दवाइयों से ठीक हो जाते हैं, लेकिन शर्म और सच सामने आ जाने के डर से लोग इन रोगों को छिपाए रखते हैं और इलाज भी नहीं कराते है ।

एसटीडी रोग अथवा यौन रोग क्या है?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि जो बीमारियाँ यौन संपर्क द्वारा होती हैं, उन्हें यौनजनित रोग या अंग्रेजी में एसटीडी रोग कहते हैं। ये रोग कई तरह के होते हैं और जानकारी के आभाव में यौन सहभागी दूसरे स्वस्थ लोगो में इसे फैलाते रहते  हैं। एसटीडी रोग के जीवाणु रोगी की जननेंद्रियों में या रक्त में उपस्थित होते हैं और सहवास के दौरान अन्य साथी के जननांगों में पहुँचकर रोग पैदा करते हैं। कुछ रोग बेक्टेरिया या विषाणु द्वारा भी फैलते हैं। कुछ यौन रोग ऐसे होते हैं जिनके लक्षण दिखने लगते हैं और हम उसका इलाज करवा लेते हैं लेकिन कई यौन रोग ऐसे भी होते हैं जिनके लक्षण दिखाई नहीं देते, और धीरे-धीरे ये बढ़ जाते हैं कई बार तो ये घातक भी हो जाते हैं | एसटीडी रोगसे सबसे ज्यादा प्रभावित संख्या उन मेहनतकश लोगों की है, जो रोजगार के सिलसिले में अक्सर दूसरे राज्यों में जाते हैं और अमर्यादित यौन सम्बंधो के चलते यौन एसटीडी रोग की गिरफ्त में आ जाते हैं।

पुरुषो तथा महिलाओं में यौन रोग (एसटीडी) के लक्षण, कारण तथा बचाव yon rog Gupt Rog STD ke karan laxan ilaj

Sexually Transmitted Disease

यौन रोग (एसटीडी रोग) के लक्षण पुरुषों में

  • लिंग से मवाद का बहना।
  • गुप्त भागों में या आस-पास घाव या दाने, छाले, फोड़े-फुसी होना।
  • लिंग में खुजली या सूजन होना।
  • पेशाब के दौरान जलन या दर्द होना।
  • लाल जख्म या मुलायम त्वचा के रंग वाले मस्से

यौन रोग (एसटीडी रोग) के लक्षण महिलाओं में

  • योनि से गाढ़ा सफेद बदबूदार पानी बहना।
  • गुप्त भागों में या आस-पास घाव या फोड़े-फुसी होना।
  • योनिमार्ग के आस-पास खुजली या जलन होना।
  • यौन संपर्क के दौरान दर्द या रक्त निकलना।
  • पेशाब के दौरान जलन या दर्द होना।
  • गर्भवती महिला को समय से पूर्व प्रसव, गर्भाशय में बच्चे की झिल्ली का समय से पहले फटना और प्रसव के बाद मूत्र मार्ग में संक्रमण, एसटीडी के लक्षण होते हैं।
  • कई बार यौन रोग से पीड़ित व्यक्ति बिलकुल स्वस्थ दिखाई देते हैं। कुछ यौन रोगों में कोई भी लक्षण प्रकट नहीं होते, खास तौर से स्त्रियों में।

यौन रोगों (एस टी डी रोग) का शरीर पर खराब प्रभाव

  • यौन रोगों से पुरुषों में कमजोरी, मानसिक परेशानी हो सकती है।
  • महिलाओं में बार-बार गर्भ का गिरना, मृत शिशु का जन्म लेना या शिशु में पैदाइशी दोष जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
  • निश्चित समय पर यौन रोग का इलाज न होने पर यौन रोग एच.आई.वी./एड्स संक्रमण का जोखिम बढ़ाते हैं। और जैसा के आप जानते ही होंगे की अभी तक एच.आई.वी./एड्स का कोई इलाज नहीं है। सिफलिस (आतशक) या अन्य यौन रोग (एड्स और हेपेटाइटिस B & C ऐसे ही रोग होते हैं।

प्रमुख यौन रोग (गुप्त रोग ) और उनके लक्षण  

सुजाक (गनोरिया)-

  • यह रोग गोनोकॉकस नामक जीवाणु द्वारा होता है। संक्रमित व्यक्ति से यौन-संपर्क के 2 से 5 दिन बाद पेशाब के रास्ते में जलन और दर्द होता है। पेशाब बार-बार आता है और तकलीफ से पेशाब उतरता है। मूत्र मार्ग से लसलसा स्राव भी निकलता है जो गाढ़ा, हलके हरे-पीले रंग का होता है। यदि रोग का इलाज न किया जाए तो 10 से 14 दिन के अंदर रोग और भी अंदर तक बढ़ जाता है। वैसे सही इलाज से यह रोग जल्दी ठीक हो जाता है। इसलिए इस बीमारी जल्दी जाँच एवं इलाज शुरू करना चाहिए। कई पुरुषों में सुजाक के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते तथा कुछ पुरुषों में संक्रमण के बाद दो से पांच दिनों के भीतर कुछ संकेत या लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कभी कभी लक्षण दिखाई देने में 30 दिन भी लग जाते हैं। इनके लक्षण हैं- पेशाब करते समय जलन, लिंग से सफेद, पीला या हरा स्राव। कभी-कभी सुजाक वाले व्यक्ति को अंडग्रंथि में दर्द होता है या वह सूज जाता है। महिलाओं में सुजाक के लक्षण काफी कम होते हैं। आरंभ में महिला को पेशाब करते समय दर्द या जलन होती है, योनि से अधिक मात्रा में स्राव निकलता है या मासिक धर्म के बीच योनि से खून निकलता है।
  • इस बीमारी के इलाज में एंटीबायोटिक दवाएँ और दर्दनाशक दवाएँ दी जाती हैं।

शेंक्रायड

  • यह भी एक तरह का जीवाणु अथवा बैक्टीरिया द्वारा फैलनेवाला यौनजन्य रोग है। इसके कारण जननांगों पर छाले पड़ जाते हैं। रोगग्रसित व्यक्ति से यौन संपर्क के लगभग एक सप्ताह पश्चात् इस तरह के यौन रोग के लक्षण मिलना आरंभ होते हैं। इसके लक्षण मिलते ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

ट्रायकोमोनियासिस-

  • यह बीमारी भी यौन-संपकों से स्वस्थ व्यक्तियों में हो जाती है। बीमारी का कारण ट्राइकेमोनास वेंजाइनेलिस नामक एककोशीय परजीवी होता है। भारत में यह रोग बहुत ज्यादा होता है। यह भी एक तकलीफदेह यौन रोग है। स्त्रियों में संक्रमण के पश्चात् योनि में सूजन आ जाती है तथा योनि-मार्ग से मवादयुक्त स्त्राव भी निकलता है। इसी तरह पुरुषों में भी मूत्रमार्ग में सूजन तथा मवादयुक्त तरल पदार्थ निकलता है तथा प्रभावित यौन अंग लाल हो जाते है, साथ ही खुजलाहट, दर्द एवं जलन भी होती है। जाँघों की लसिका ग्रंथियों में सूजन भी आ सकती है। इस रोग में भी इलाज से फायदा हो जाता है, लेकिन यदि इलाज न किया जाए तो कई समस्याए जैसे पेशाब के रास्ते का सँकरा हो जाना तथा पेशाब करने में तकलीफ आदि पैदा हो जाती हैं।

कैंडिडोसिस-

  • यह एक सामान्य यौनरोग है, जो विशेषकर औरतों को होता है। गर्भनिरोधक गोलियों एवं अधिक मात्रा में जीवाणुरोधी दवाओं के उपयोग से भी रोग होता है। इसके अलावा यौन-संबंधों से भी रोग हो जाता है। इसके कारण श्वेत प्रदर भी होता है और योनिस्त्राव होता रहता है। इस रोग में स्त्रियों में यौनि-मार्ग से गाढ़ा सफेद द्रव निकलता है एवं बहुत अधिक खुजलाहट होती है। योनिस्राव में बदबू आती है और इससे कई बार कपड़े तक गंदे हो जाते हैं। कैंडिडा संक्रमण जब पुरुषों में होता है तो कई बार जलन होती है एवं लिंग में छाले भी पड़ जाते हैं। कुछ मामलों में शिश्न के अगले भाग पर फफोले पड़ते हैं। इस रोग का भी प्रभावी इलाज संभव है। इसलिए तुरंत इलाज लेना चाहिए।

ग्रेन्यूलोमा इंग्वायनेल-

  • इस बीमारी में यौन अंगों, जाँघों एवं जाँघों के बीच का हिस्सा प्रभावित होता है। यह रोग पिछड़े देशों में अधिक पाया जाता है। रोग जीवाणुओं द्वारा होता है, जिसे डोनोवान् बॉडीज कहते हैं। रोग में जननेंद्रिय अथवा जाँघों के ऊपर अथवा उनके बीच में लाल रंग के उभार या गाँठे दिखती हैं। ये उभार दर्द रहित होते हैं। बाद में फैल जाते हैं और फूट भी जाते हैं, इनमें दर्द नहीं होता है, लेकिन इनमें मवाद बहता रहता है। फिर इसके बाद अन्य जटिलताएँ पैदा होती हैं, जैसे-छाले बन जाना, मूत्रमार्ग का सँकरा हो जाना, लसिका ग्रंथियों में सूजन आना इत्यादि।

यौनजनित परिसर्प

  • यह एक विषाणु द्वारा उत्पन्न रोग है, जो यौन–संसर्ग के माध्यम से फैलता है। एड्स के बहुत से मरीजों में भी यह रोग देखने को मिलता है। इस यौन रोग और एड्स का भी गहरा संबंध है। इसमें अंगूर के गुच्छे जैसे छाले शिश्न पर होते हैं। स्त्रियों में कई बार ये अंदर योनिमार्ग में होते हैं, जिससे कई बार बीमारी का पता नहीं चल पाता। ये छाले बाद में फूट जाते हैं। इस समय दर्द भी होता है। जंघाओं की लसिका ग्रंथियों में सूजन भी आ जाती है। यदि इलाज न किया जाए तो महिलाओं में रोग गंभीर स्थिति में पहुँच जाता है। हर्षीज सिप्लेक्स नामक विषाणु या वाइरस भी लगभग इसी तरह की बीमारी उत्पन्न करता है।

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस

  • ह्यूमन पेपिलोमा वायरस यानी कि एचपीवी एक सामान्य यौन संचारित रोग है। कंडोम का इस्तेमाल भी इससे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाता। शारीरिक संबंध बनाने वाले तकरीबन 50 प्रतिशत लोगों को इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना होती है।

सिफलिस यौन रोग

  • यह एक बहुत पुराना यौन रोग है जो दुनिया भर के देशों में पाया जाता है। यह रोग ट्रेपेनेमा पेलीडम नामक स्पाइरो कीट्स से होता है तथा प्रमुख रूप से यौन सम्बंधो द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। लेकिन दूषित खून चढ़ाने से भी यह रोग एक मरीज से दूसरे मरीज में फैल जाता है। यह रोग अनुवांशिक भी हो सकता है यानि यदि माँ को है तो उसके बच्चों को भी सिफलिस की बीमारी हो सकती है। इसे पैतृक सिफलिस कहते हैं। आजकल सभी गर्भवती महिला की जाँच सिफलिस का संक्रमण जानने के लिए की जाती है, ताकि उसका इलाज किया जा सके और होनेवाले बच्चे को इस रोग से बचाया जा सके।
  • इस यौन रोग की तीन अवस्थाएँ होती हैं- प्राथमिक, दूसरी एवं तीसरी । रोगाणु के प्रवेश के औसतन 25 दिन बाद यौनांग पर अंडे जैसा फफोला बनता है। इसकी बाहरी सतह टूटने से यह एक छाले का रूप ले लेता है। छाले को प्राथमिक शैकर भी कहते हैं। इससे खून नहीं आता और सामान्य तौर पर दर्द भी नहीं होता। 95 प्रतिशत यौन रोगियों में घाव शिश्न के ऊपर बनता है, लेकिन समलिंगी रोगियों में यह गुदा के किनारे पर होता है। इसके अलावा यह ओटों अथवा जीभ पर भी हो सकता है। स्त्रियों में योनि द्वार के आस-पास बनता है। रोग की दूसरी अवस्था में 80 प्रतिशत मरीजों में त्वचा के रोग भी हो जाते हैं। कुछ मरीजों में लीवर, दिमाग की झिल्लियों में भी रोग फैल जाता है। इसके साथ ही बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द इत्यादि लक्षण पैदा होते हैं। पूरे शरीर की त्वचा में विभिन्न तरह की फुसियाँ भी उभरती हैं। ये फुसियाँ गुलाबी अथवा तांबे जैसे रंग की होती हैं। इनमें खुजलाहट नहीं होती। रोग की दूसरी अवस्था अधिक संक्रामक मानी जाती है। इस अवस्था में शरीर की प्राय: सभी लसिका ग्रंथियों में सूजन आ जाती है। रोग की तीसरी स्टेज में शरीर के विभिन्न भागों पर ठोस गांठे बनने लगती है, जिन्हें गुम्मा कहते हैं। ये अनियमित आकार ही होती हैं। तथा सिफलिस पुरुष अथवा स्त्री के प्राय: सभी अंगों-संस्थानों में फैल जाती हैं। उदाहरण के लिए यह दिल एवं रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों, पाचन संस्थान, अस्थि तंत्र, तंत्रिकातंत्र को प्रभावित कर इनके कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है, यहाँ तक कि रोगी पागल हो सकता है। उसको लकवा हो सकता है, उसकी हृदय गति रुक सकती है। इस तरह यह अत्यंत खतरनाक रोग है।
  • एसटीडी रोग : कारण, लक्षण, बचाव तथा एसटीडी रोगों की सूची

यौन रोगों से बचाव के टिप्स

यौन रोगों की रोकथाम के लिए प्रमुख तौर पर निम्न बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए—

  • यौन संबंधों के बारे में सभी लोगों को पूरी जानकारी होनी चाहिए, साथ ही उन्हें यौन रोगों के बारे में जानकारी देकर मर्यादित यौन संबंध रखने की सलाह देना।
  • वेश्यावृत्ति न करें या कई यौन साथी न रखें।
  • अनजान व्यक्ति से यौन संपर्क ना रखे |
  • कंडोम के प्रयोग को बढ़ावा देना। यौन रोग से बचने के लिए कंडोम जरुरी अस्त्र है।
  • ऐसे लोग जो अपना यौन रोग छुपाते हैं, उन्हें यौनजनित रोगों के अस्पताल में इलाज करवाना चाहिए यह छुपाने से रोग ठीक नहीं होगा । और ऐसे लोग अन्य स्वस्थ लोगो को भी संक्रमित करते रहते है |
  • आजकल सरकारी अस्पतालों में यौन रोगों का पूरा इलाज फ्री में किया जाता है। इसकी जाँच मुफ्त में की जाती है।
  • यौन रोगों का इलाज झोला छाप डॉक्टर या नीम हकीमों से बिलकुल ना करवाएँ। उनके पास रोग को पहचानने की सुविधा नहीं होती है | इसलिए उनके पास सभी यौन रोगों के लिए एक तरह की दवा ही उपलब्ध होती है जो ज्यादातर मामलो में काम नहीं करती है |

अन्य सम्बंधित पोस्ट

Leave a Reply