गर्भावस्था के लक्षण : जानिए प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह में शुरुआती लक्षण क्या होते है ?

गर्भावस्था के लक्षण क्या है ? इस सवाल को लेकर अकसर नवयुवतियों तथा पहली बार गर्भधारण करने वाली स्त्रियों में बहुत उलझन रहती है क्योंकि प्रेगनेंसी के लक्षण और आम बिमारियों में होने वाले लक्षणों में काफी कुछ समानता होती है इसलिए इस आर्टिकल में हमने इन्ही सब शंकाओ को दूर करने का प्रयास किया है | कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के बहुत कम लक्षण दिखते हैं, जबकि कुछ में लगभग सभी लक्षण दिखाई पड़ते हैं, लेकिन इसके लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे बहुत से तरीके हैं, जिनसे आप इन लक्षणों के प्रभाव को कम कर सकती हैं। यदि मासिक धर्म नहीं आया हो और नीचे बताए गए कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो आपके गर्भवती होने की पूरी-पूरी संभावना है। आप घर पर ही गर्भवती होने की जाँच कर सकती हैं। सामान्य रूप से गर्भावस्था 13 से 50 वर्ष तक की उम्र में होती है तथा अमूमन प्रेगनेंसी को  40 हफ़्तों में गिना जाता है। गर्भावस्था की पहचान तथा लक्षण अवधि के अनुसार दो तरह से की जाती है। 1.)  प्रथम 5 महीनों के संकेत एवं लक्षण, और द्वितीय 4 महीनो के संकेत एवं लक्षण । यहाँ हम शुरू के महीने में होने वाले लक्षणों के बारे में बतायेंगे |

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण : गर्भावस्था का पहला महिना  

गर्भावस्था के लक्षण : जानिए प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह के शुरुआती लक्षण क्या है pregnancy symptoms in hindi

प्रेगनेंसी के लक्षण

गर्भावस्था के लक्षण : मासिक धर्म का न आना

  • आपके गर्भवती होने का सबसे पहला लक्षण मासिक धर्म का रुकना है। अधिकांश दवा की दुकानों पर, घर पर प्रेगनेंसी की जाँच करने की किट (Pregnancy Test Kit /Strips) उपलब्ध होती है। उससे आप घर पर ही गर्भ ठहरने की जाँच कर सकती हैं। हालाँकि यह परीक्षण शत-प्रतिशत सही नहीं होता और यदि यह परीक्षण मासिक धर्म रुकने के आखिरी दिन किया गया हो तो इससे गर्भ ठहरने का पता नहीं चलता है। इन परीक्षणों से एच.सी.जी नामक हारमोन की मात्रा का पता लगाया जाता है, जो गर्भावस्था के दिनों में काफी हद तक बढ़ जाते हैं। मासिक धर्म रुकने के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिनका जिक्र इस आर्टिकल में सबसे नीचे किया गया है।

गर्भावस्था के लक्षण : मॉनिंग सिकनेस (सुबह उठने के बाद खराब सेहत का अनुभव )

  • गर्भावस्था के दौरान लगभग 50 फीसदी महिलाएँ इससे प्रभावित होती हैं। गर्भवती होने की पहली निशानी यह भी मानी जाती है, परंतु यह लक्षण भी गर्भवती होने के एक माह से पहले नहीं दिखता है। इसमे महिला को मितली आने से उलटी होने के लक्षण हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में यह शिकायत सिर्फ सुबह ही होती है, जबकि कुछ महिलाएँ पूरे दिन उलटी का अनुभव करती हैं। अधिक उलटी होने से पानी की कमी और एसिडिटी हो सकती है। ज्यादातर महिलाओं में गर्भावस्था के ये लक्षण 8 से 10 हफ्ते तक रहते हैं। इस समय महिला का हारमोन स्तर सबसे ऊँचा होता है और ये लक्षण दूसरी तिमाही तक गायब हो जाते हैं। इस समय बार-बार उलटी आने की वजह से पानी की कमी हो सकती है। इसलिए यदि दो से अधिक बार उलटी होती है तो इस स्थिति को असामान्य समझकर तुरन्त डॉक्टर की सलाह लेना ठीक रहता है ।

गर्भावस्था के लक्षण : ब्रैस्ट सोरनेस (स्तनों की सूजन)

  • मासिक धर्म के अलावा गर्भावस्था के दौरान भी स्तन ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। मासिक धर्म के दौरान भी गर्भावस्था के सारे हारमोन उपस्थित रहते हैं, परंतु इनकी मात्रा बहुत कम होती है। इसलिए गर्भावस्था के अलावा मासिक धर्म के दौरान भी स्तनों में हल्की सूजन, दर्द का अनुभव कर सकती हैं | स्तनों के आकार में वृद्धि होती है, वे नरम होने लगते हैं। इनमे से कुछ लक्षण पहली तिमाही के बाद काफी कम हो जाता है और दूसरी तिमाही तक पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। साथी ही प्रेगनेंसी होने पर निप्पल का रंग गहरा हो जाता है तथा स्तनों में शिराओं का जाल बढ़ने लगता है और इनमें गाँठे पड़ने जैसा अनुभव होने लगता है |

गर्भावस्था के लक्षण : सिर दर्द

  • इस दौरान शरीर में हो रहे परिवर्तनों के कारण सिर दर्द होना गर्भावस्था के लक्षण में आता है। हालाँकि सिर्फ सिर दर्द होना गर्भवती होने का लक्षण नहीं माना जाता। सिर दर्द होने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ठीक इसी प्रकार से योनि स्राव योनि में खुश्की या जलन युक्त स्राव किसी संक्रमण या यौन रोग का लक्षण भी हो सकता है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान बिना खुजली या जलन के स्राव आ सकता है। यह स्राव श्लेष्मल के निर्माण के कारण होता है, जो सर्विक्स के पास बनता है ताकि यह आपके गर्भस्थ शिशु को किसी प्रकार के संक्रमण और नुकसानदेह चीजों से बचा सके।

गर्भावस्था के लक्षण : थकान

  • इस दौरान शरीर में हॉर्मोनों के परिवर्तन और खास तौर से प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन के स्तर में वृद्धि होने के कारण थकान और कमजोरी महसूस होती है | दिन की शुरुआत काफी बोझिल होती है। यहाँ तक कि आप पूरी तरह थकान से चूर महसूस कर सकती हैं। इसके अलावा आपके शरीर द्वारा बच्चे रचना और पोषण में लगाया गया प्रयास आपकी थकान बढ़ा सकता है। जैसे ही आप गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में प्रवेश करेंगी, आपकी थकान की समस्या दूर हो जाएगी।

गर्भावस्था के लक्षण : रक्तस्राव (ब्लीडिंग)

  • कुछ महिलाओं को छोटे-छोटे लाल, गुलाबी या लाल रंग लिये भूरे रंग के धब्बे आने की शिकायत होती है। यह इस बात का परिचायक है कि निषेचित अंडा निषेचन के लगभग छह दिन के बाद गर्भाशय में जा चुका है। यदि रक्तस्राव के दौरान दर्द या पीड़ा का अनुभव होता हो तो तुरंत डॉक्टर को बुलाएँ, क्योंकि यह गर्भपात का लक्षण भी हो सकता है।

गर्भावस्था के लक्षण : महक और भोजन के प्रति अधिक संवेदनशीलता

  • यदि आपको अपनी पसंद की कोई सुगंध गर्भावस्था के दौरान ज्यादा अच्छी लगने लगे या कुछ भोज्य पदार्थों से पूरी तरह चिढ़ हो जाए तो यह सामान्य है, ये गर्भावस्था के लक्षण में शामिल होता है ये दोनों लक्षण शरीर में तेजी से बढ़ते इस्ट्रोजन के कारण हो सकता है, जो पूरी गर्भावस्था के दौरान जारी रह सकता है या पहले भी समाप्त हो सकता है।

गर्भावस्था के लक्षण : बार-बार पेशाब का आना

  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त और अन्य तरल पदार्थों की मात्रा काफी बढ़ जाती है, इसलिए यह अतिरिक्त तरल पदार्थ गुरदों से छनकर ब्लाडर में आता है, जिससे बार-बार पेशाब जाने की जरूरत पड़ सकती है। यह क्रिया रात की तुलना में दिन में अधिक बार होती है, क्योंकि खड़े होने की स्थिति में बढ़ते गर्भाशय का भार मूत्राशय (urinary bladder) पर पड़ता है। मूत्राशय की श्लेष्मिक झिल्लियों की भरे होने से भी अधिक बार यूरिन करने की जरुरत महसूस होती है। बार-बार पेशाब करने की वजह से स्त्री को असुविधा और पीड़ा का अनुभव होता है। यह लक्षण गर्भावस्था की पहली तिमाही में छठे सप्ताह से शुरू होकर पूरी गर्भावस्था के दौरान रह सकता है।

गर्भावस्था के लक्षण : भूख पर असर

  • प्रेगनेंसी में खाने पीने के आदतों तथा खाना खाने कुल मात्रा में परिवर्तन होने लगता है आपको कोई एक व्यंजन को बार-बार खाने इच्छा होने लगेगी | मुंह का स्वाद बदलने की वजह से तेज, तीखा, खट्टा खाने का मन करता है |

गर्भावस्था के लक्षण : कब्ज की शिकायत

  • गर्भावस्था के लक्षण कब्ज होना भी शामिल है |

ये भी होते है गर्भावस्था के लक्षण  

  • गर्भावस्था के लक्षण में मूड बदलना, स्वभाव में चिडचिडापन, कमर में नीचे की तरफ दर्द होना, योनि एवं ग्रीवा का रंग नीला होना, सांस लेने में भारीपन, पेट में ऐंठन, सूंघने की क्षमता का बढ़ जाना, सुबह उठने के बाद शरीर के तापमान में बढ़ोतरी, बुखार जैसा महसूस होना, पैरों पर सूजन और अंत में खुद स्त्री अंतर्ज्ञान (या थर्ड सेन्स ) भी है जो कुदरती तौर पर उसको गर्भवती होने का अहसास दिलाने लगता है |

मासिक धर्म/ पीरियड रुकने के कारण

  • गर्भ ठहरना मासिक धर्म रुकने का सबसे सामान्य कारण है। लेकिन यह बिलकुल जरुरी नहीं है की पीरियड ना आने का कारण गर्भवती होना होता है |
  • बच्चे का स्तनपान कराने के दौरान भी मासिक धर्म रुक सकता है और इस समय आप दोबारा गर्भवती हो सकती हैं।
  • कुछ चिकित्सकीय कारणों से मासिक धर्म रुक सकता है। स्वस्थ होने के बाद यह सामान्य हो जाता है। यदि आपको ऐसी कोई बीमारी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • अत्यधिक व्यायाम करने से (खासकर मैराथन धावक को) मासिक धर्म रुक सकता है।
  • संतुलित व्यायाम करने पर यह सामान्य स्थिति में पहुँच सकता है। शरीर का कम वजन और खान-पान की ख़राब आदतों से भी मासिक धर्म में रुकावट आ सकती है।
  • गर्भ निरोधक गोलियाँ – अकसर महिलाओं में मासिक धर्म को पूरी तरह रोक देती हैं। यहाँ तक कि गोलियों का सेवन बंद करने के तीन से छह महीने बाद तक भी महिलाएँ मासिक धर्म की नियमितता में रुकावट महसूस करती हैं।
  • जैसे-जैसे महिलाएँ रजोनिवृति के करीब पहुँचती हैं उनका मासिक धर्म अनियमित होने लगता है और कभी-कभी पूरी तरह बंद हो जाता है।

सवाल : संतान न होने पर पति-पत्नी को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

जवाब : पति-पत्नी अगर एक साल से गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं और उनकी मंशा पूरी न हुई हो तो उचित यही है कि वे समय गंवाए बगैर किसी इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लें। जांच के लिए पति और पत्नी दोनों साथ-साथ में ही जाएं, चूंकि समस्या किसी में भी हो सकती है।

सवाल : संतान न होने पर क्या सिर्फ स्त्री की डॉक्टरी जांच करा लेना काफी है?

जवाब : नहीं। संतान न होने पर पति-पत्नी दोनों को ही जांच के लिए साथ-साथ जाना चाहिए। दोनों के संतान बीजों के मिलने से ही नया जीवन अंकुरित होता है। संतान न होने के मायने है कि दोनों में से किसी एक या दोनों को ही डॉक्टरी उपचार की जरूरत है। इनफर्टिलिटी की समस्या स्त्री-पुरुष में समान रूप से पाई जाती है।

सवाल : क्या गर्भ-निरोधक कंडोम के प्रति एलर्जी विकसित हो सकती है?

जवाब : हां। जिस लेटेक्स रबड़ से कंडोम बनाया जाता है, उसके प्रति एलर्जी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। पर ऐसे मामले कम ही दंपतियों को परेशान करते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि कंडोम के रंग का इसमें कोई हाथ है, यह सच नहीं हैं । ऐसे में कोई और गर्भ-निरोधक अपनाने में ही समझदारी है।

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