पेशाब में खून आने के कारण, लक्षण तथा आयुर्वेदिक इलाज

पेशाब में खून आना यह किसी बीमारी की तरफ इशारा करता है | बच्चों से ले कर बड़ी उम्र के लोगो तक यह बीमारी और इसके लक्षण पाए जाते हैं. यह किडनी, मूत्रनलिका, मूत्राशय में पैदा रोगों की वजह से मुख्य रूप से होता है | इसके अलावा शरीर में अन्य कई प्रणालियों के विकार से भी ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते है |

पेशाब में खून की मौजूदगी के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसका रंग लाल ही हो. दरअसल यह तो पेशाब में खून की मात्रा पर निर्भर करता है | यदि रक्तस्राव कम मात्रा में हो तो यह पेशाब में घुल कर दिखाई नहीं देगा | यदि रक्त की मात्रा अधिक हो तो पेशाब का रंग लाल दिखाई पड़ेगा, इसलिए कई बार ऐसा भी होता है कि पेशाब में किसी बीमारी की वजह से रक्त मौजूद हो, मगर वह महसूस नहीं होता और बीमारी बढ़ती चली जाती है | ऐसे में अन्य लक्षणों से बीमारी का पता लगाना जरूरी हो जाता है | कई बार पेशाब का रंग सामान्य होता है, मगर उस में खून के थक्के नजर आते हैं |

यदि पेशाब का रंग चमकीला लाल हो तो यह मूत्राशय या उस के नीचे के मूत्रमार्ग से संबंधित बीमारी की ओर इशारा करता है, जबकि गहरा लाल रंग किडनी एवं मूत्रनलिका के रोग का संकेत है, यदि पेशाब की शुरुवात में ही रक्त की कुछ बूंदें निकलें और उसके बाद बचा हुआ पेशाब सामान्य हो तो यह मूत्रमार्ग (urethra) के लक्षण होते है।

यदि पेशाब के अंत में कुछ खून निकलता हो तो इस का मतलब है कि ब्लैडर में कोई खराबी है | पूरे पेशाब में रक्त मिला होना गुर्दो की बीमारी के लक्षण होते है ।

कुछ व्यक्तियों को अधिक मेहनत वाला काम करने करने के बाद पेशाब में खून आता है. यह मूत्र प्रणाली में मौजूद पथरी की वजह से होता है |

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पेशाब में खून आने के कारण, लक्षण तथा आयुर्वेदिक उपचार pesab me khun blood aana karan ilaj

गुर्दो या किडनी के रोग

  • गुर्दो या किडनी के विभिन्न रोगों के कारण अकसर पेशाब में खून आने लगता है. इन में से कुछ प्रमुख रोग इस प्रकार है जैसे किडनी में चोट लगना :- दुर्घटना या अन्य कारणों से यदि पेट के बाहरी भाग में, जहां किडनी मौजूद होती हैं, चोट लग जाती है तो यह तेज रक्तस्राव को जन्म दे सकती है | अकसर यह गहरी चोट लग जाने पर ही होता है| मगर किडनी किसी कारणवश यदि रोगग्रस्त हो कर कमजोर हो गए हों तो मामूली चोट लगने पर भी पेशाब में खून आ सकता है | इस वजह से मरीज के पेट के बाहरी हिस्से पर खरोंच या चोट के निशान दिखाई पड़ सकते हैं और वह जगह दर्द करती है |
  • पेशाब में खून के थक्के आने का कारण :- आमतौर पर पेशाब में खून की मौजूदगी पहली बार में ही दिखाई पड़ती है, मगर कभी-कभी रक्तस्राव कुछ घंटों बाद होता है, यह तब होता है जब मूत्रमार्ग में रक्त के थक्के जम जाते हैं और वे बाहर नहीं निकल पाते है |

किडनी में पथरी

  • यह गुर्दो (किडनी) की सबसे आम बीमारी है जो रक्तस्राव को भी जन्म देती है | किडनी की गड़बड़ी के कारण खून सही तरह से छन नहीं पाता है तो पेशाब में खून आने की बीमारी हो जाती है। अकसर यह तीस से पचास वर्ष की उम्र के लोगों में होती है. इसके प्रमुख लक्षण है दर्द जो पेट और पीठ के दोनों बाहरी हिस्सों में किसी भी ओर हो सकता है |
  • दर्द अकसर सुबह होता है जो मरीज की नींद में खलल पैदा कर देता है |
  • दर्द इतना तेज होता है कि मरीज को किसी भी स्थिति में राहत नहीं मिलती |
  • दर्द कुछ देर रुक कर फिर से शुरू हो जाता है इसके अलावा उलटी होना, ठंड लगना, पेशाब में रुकावट जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं |
  • दर्द बढ़ कर जांघों एवं जननांगों तक भी पहुंच सकता है, कूदने या व्यायाम करने से दर्द की मात्रा बढ़ जाती है |
  • पेशाब में खून के अलावा मवाद भी मिला हो सकता है. यह इस बात की ओर संकेत करता है कि बीमारी बहुत समय से है जिस की वजह से किडनी में संक्रमण हो गया है |

किडनी में संक्रमण

  • वैसे तो गुर्दो यानि किडनियों में होने वाला कोई भी संक्रमण रक्तस्राव को जन्म दे सकता है, मगर प्रमुख कारण टी.बी का संक्रमण है जो गुर्दो में हो जाता है. यह बीस से चालीस वर्ष की आयु वर्ग के पुरुषों में पाई जाने वाली बीमारी है, हालांकि स्त्रियां भी इस से अछूती नहीं हैं | अकसर यह एक ही गुर्दे पर असर करती है | बीमारी की शुरुआत पेशाब की मात्रा में बढ़ोतरी के साथ होती है |

पेशाब में खून आने के अन्य कारण इस प्रकार हैं-

  • पुरुषों में पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) की सूजन होना, मूत्र नलिका का संक्रमण (इंफैक्शन)
  • सूजाक रोग होने पर।
  • कैंसर होना (गुर्दो में)।
  • किडनी या मूत्र मार्ग में कोई घाव हो जाना।
  • महिलाओं में खूनी बवासीर होने पर या मासिक स्राव बंद हो जाने पर |
  • पेशाब की नली में कैथेटर डालने पर।
  • चेचक, बुखार, मलेरिया, दिमागी बुखार आदि के कारण।
  • लम्बे समय तक गर्म दवाएं लेने के कारण।
  • गुर्दो में इंफैक्शन होने से।
  • सिस्टाइटिस जैसी बीमारी के कारण भी पेशाब में खून आने की बीमारी हो सकती है |

पेशाब में खून आने के लक्षण

  • यदि ब्लैडर से रक्त आ रहा होगा तो पहले पेशाब निकलेगा, फिर रक्त निकलेगा।
  • पेशाब करते समय दर्द होगा, रक्त थक्केदार निकलेगा और आसानी से नहीं निकल पाएगा।
  • यदि मूत्र नली (यूरेश्रा) से रक्त निकल रहा होगा तो पहले रक्त गिरेगा फिर पेशाब। कभी-कभी पेशाब के बिना सिर्फ रक्त ही गिरता है।
  • यदि यह रक्त गुर्दो से निकलकर आ रहा होगा तो पेशाब के साथ मिलकर निकलेगा और थक्केदार होगा।
  • महिलाओं में पीरियड्स के समय पेशाब में रक्त मिलकर आ सकता है, लेकिन यह कोई बीमारी नहीं होती है ।

पेशाब में खून आने की जांच

  • सी० टी० स्कैनिंग, अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग, इन्ट्रावीनस पाइलो ग्राफी, सिस्टोस्कोपी आदि जांच, पेशाब में खून के आने की सही स्थिति को जानने के लिए ठीक रहती है।

पेशाब में खून आने पर आयुर्वेदिक उपचार

  • इस तरह के रोगों का उपचार किसी कुशल चिकित्सक के पास करवाना चाहिए चाहे वो आधुनिक चिकित्सक प्रणाली का उपचार हो या आयुर्वेद का, लेकिन फिर भी हम कुछ आयुर्वेदिक इलाज यहाँ नीचे बता रहे है |
  • मञ्जिष्ठादि चूर्ण 4 से 6 माशे सुबह-शाम ताजा या गरम पानी के सा सेवन करने से पेशाब में खून आना बन्द होकर रोग ठीक हो जाता है।
  • सारिवाद्यासव 20 से 25 ग्राम तक पानी में मिलाकर भोजन के बाद सुबह शाम सेवन करने से पेशाब साफ आने लगता है। साथ ही जलन, दर्द एवं पथरी की शिकायतें भी दूर होती है।
  • मूत्रल कषाय 45 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से इस रोग का इलाज होता है।
  • त्रिफला क्वाथ 45 ग्राम सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से पेशाब साफ आने लगता है।
  • चन्दनासव 10 ग्राम से 20 ग्राम की मात्रा में बराबर पानी के साथ मिलाकर भोजन के बाद सुबह शाम सेवन करने से पेशाब साफ और खुलकर आता है।

पेशाब में खून आने की दवा के लिए घरेलू नुस्खें :

  • सफेद जीरा आधे से 2 माशे की मात्रा में मिश्री के साथ पानी में मिलाकर रोजाना दो-तीन बार देने से लाभ हो जाता है।
  • कचनार के फूलो का क्वाथ सुबह-शाम सेवन करने से पेशाब रक्त आना, रक्त प्रदर, रक्तातिसार सब ठीक होते हैं।
  • हरी दूब (दूर्वा) की स्वरस 15 ग्राम रोजाना दो-तीन बार मिश्री के शर्बत में मिलाकर पिलाने से खून में पेशाब आने की बीमारी ठीक हो जाती है।

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