पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य पेय, दिव्य धारा, पीड़ान्तक वटी, कांतिलेप

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद – इस पोस्ट में पतंजलि दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित निम्नलिखित उत्पातो (products) के लाभ तथा सेवन विधि बताई गई है |

  • दिव्य कायाकल्प तेल
  • दिव्य केश तैल
  • दिव्य पीड़ान्तक तैल
  • दिव्य उदरकल्प चूर्ण
  • दिव्य गैसहर चूर्ण
  • दिव्य वातारि चूर्ण
  • दिव्य अश्मरीहर रस
  • दिव्य पीड़ान्तक वटी
  • दिव्य श्वासारि रस
  • दिव्य आंवला रस
  • धृतकुमारी स्वरस (एलोवेरा जूस)
  • दिव्य कांतिलेप
  • दिव्य अमृत रसायन (अवलेह)
  • पतंजलि दृष्टि (Eye Drop)
  • दिव्य धारा
  • दिव्य पेय (Herbal Tea)

दिव्य कायाकल्प तेल के फायदे :

patanjali products list Eye Drop Herbal Tea पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : कायाकल्प तेल, दिव्य धारा, दिव्य पेय

Patanjali Products

मुख्य गुण-धर्म : – 1. यह तैल दाद, खाज, खुजली, चमला (एग्जीमा), श्वेतकुष्ठ, सोराइसिस, शीतपित्त, चकत्ते, स्किन एलर्जी, सन बर्निग आदि समस्त चर्मरोगों में तुरन्त लाभ देता है। हाथ पैरों का फटना, जलने, कटने व घाव आदि पर भी लगाने से सद्य: प्रभावकारी, यह कायाकल्प तैल प्रत्येक घर में सदैव रखने योग्य दिव्य औषध है।

उपयोग-विधि : रोगग्रस्त स्थान पर दिन में 2-3 बार लगाएँ।

दिव्य केश तेल के फायदे

मुख्य घटक : भृंगराज, ब्राह्मी, आँवला, श्वेत चन्दन, दारुहल्दी, कमल, अनन्तमूल, कोतकी, जटामसी, नील, रतनजोत, श्वेत रती, प्रियंगु, लोध्र, नागकोशर, नागरमोथा, बला, तिल तैल आदि।

  • यह बालों के लिए अमृत समान है। यह तेल असमय बालों का सफेद होना, झड़ना, रूसी, गंजापन आदि को रोकता है। इसको लगाने से बाल स्वस्थ व घने होते हैं।
  • अनेक दिव्य जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बना हुआ यह तैल आँखों को शक्ति तथा दिमाग को शीतलता व ताकत देता है। सिर दर्द व सब प्रकार के शिरो विकारों में लाभ प्रदान करता है।

उपयोग-विधि : इस तेल को बालों की जड़ों में लगाकर अच्छी तरह मालिश करें।

दिव्य पीड़ान्तक तेल के फायदे

मुख्य घटक : वत्सनाभ, मधुयष्टि, पिप्पलीमूल, सेंधा नमक, वच, गजपीपल, जटामांसी, नागकेशर, कुष्पीलु, मालकांगनी, गन्धप्रसारणी, रास्ना, निर्मुण्डी, लहसुन, गोदुग्ध, दही, गोमूत्र, दशमूल, जीवक, मेदा, वृद्धि, काकोली, क्षीरकाकोली, तिल तैल आदि।

मुख्य गुण-धर्म : जोड़ों का दर्द, कमरदर्द, घुटनों का दर्द, सर्वाइकल स्पॉडलाइटिस, स्लिप्पडिस्क आदि सभी प्रकार की वेदना व शोथ में लाभप्रद है।

उपयोग विधि : पीड़ायुक्त स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करें। यह तैल केवल बाह्य प्रयोगार्थ ही (For External Use Only) है। मालिश सदा हृदय की और उचित बल का प्रयोग करते हुए धीरे-धीरे करनी चाहिए।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य उदरकल्प चूर्ण के फायदे

मुख्य घटक : मुलेठी, सौंफ, सनाय, रेवंदचीनी, गुलाब फूल, छोटी हरड, मिश्री आदि।

मुख्य गुण-धर्म : यह पित्तसायंक, मृदुविरेचक और सौम्य औषध है। इस चूर्ण के सेवन से पेट साफ होकर कब्ज दूर होता है। इसके सेवन से आँतों में किसी प्रकार की जलन या विकार उत्पन्न नहीं होते। यह जठराग्नि को प्रदीप्त कर ऑव का पाचन करता है।

 सेवनविधि व मात्रा : –2 से 4 ग्राम तक रात्रि को सोते समय गुनगुने जल या गुनगुने दूध के साथ लें। इसमें मिश्री है। अत: मधुमेह के रोगी सेवन न करें। यह मृदु होने से बच्चों के लिए भी हानिरहित विरेचक है।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य गैसहर चूर्ण के फायदे

  • मुख्य गुण-धर्म : इस चूर्ण के सेवन से भोजन का पाचन होता है तथा अम्लपित आदि रोगों में लाभ होता है।
  • भोजन के बाद पेट भारी होना, अफारा होना, दर्द, भोजन में अरुचि आदि रोगों में तुरन्त लाभ प्रदान करता है।

सेवनविधि तथा मात्रा : भोजनोपरान्त आधा चम्मच गुनगुने जल से सेवन करें। पेट में दर्द, अफारा, बेचैनी आदि की अवस्था में किसी भी समय आधा चम्मच गुनगुने पानी से लें।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य चूर्ण के फायदे

  • मुख्य घटक : गुलाब फूल, सोंठ, सैंधा नमक, सनायपती, छोटी हरड़, कालादाना, सौंफ आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : – यह चूर्ण कब्ज को दूर करता है तथा आँतों में जमे मल को साफ कर बाहर निकालता है। आँतों को क्रियाशील बनाता है, जिससे आँतों के अन्दर की परत मल को पुन: जमने नहीं देती।
  • यह चूर्ण उदरशूल, आध्मान, अरुचि आदि विकारों में लाभप्रद है।

सेवनविधि तथा मात्रा : 1 चम्मच या आवश्यकतानुसार रात को सोते समय गुनगुने पानी से लें।

दिव्य वातारि चूर्ण के फायदे

मुख्य घटक : सोंठ, अश्वगन्धा, सुरंजान मीठी, कुटकी, मेथी आदि।

  • इस चूर्ण के सेवन से सब प्रकार के वातरोग, आमवात, संधिशूल, सर्वाङ्ग वेदना आदि विकारों में लाभ होता है।
  • यह शूलनाशक तथा प्रकुपित वायु का शमन कर आमवात, गृध्रसी, पीठ व कमर दर्द आदि को दूर करता है।

सेवनविधि व मात्रा :

दो से चार ग्राम तक गुनगुने पानी या दूध के साथ सुबह शाम भोजन के बाद सेवन करें।

 पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य अश्मरीहर रस के फायदे

  • मुख्य घटक : यवक्षार, मूलीक्षार, श्वेत पर्पटी, हजरलयहूद आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : यह रस (पाउडर) मूत्रल है। इसके सेवन से जमा हुआ कैल्शियम घुलकर शरीर के बाहर निकल आता है, जिससे उसके कारण उत्पन्न वेदनाओं से मुक्ति मिलती है। यह गुर्दे की शोथ व पीड़ा को भी दूर करता है। जिनको बार-बार पथरी बनने की शिकायत होती है, कुछ समय तक इसके सेवन से हमेशा के लिए पथरी बननी बन्द हो जाती है।
  • इस औषध के सेवन से मूत्रदाह का शमन होता है तथा शरीर में एकत्र विजातीय तत्व (टॉक्सिन्स) शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

सेवनविधि व मात्रा : 1 से 2 ग्राम अश्मरीहर रस प्रात: खाली पेट तथा दोपहर खाने को 5-6 घण्टे बाद अश्मरीहर क्वाथ से लें। इस अश्मरीहर रस को काढ़े के बिना भी सामान्य जल के साथ लिया जा सकता है।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य पीड़ान्तक वटी के फायदे

मुख्य घटक : अजवायन, निर्मुण्डी, सुरंजन मीठी, अश्वगन्धा, रास्ना, मोथा, महावातविध्वंसन रस, योगराज गुग्गुलु, मण्ड्र भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म आदि।

मुख्य गुण-धर्म : जोडों का दर्द, गठिया, कमरदर्द, सर्वाइकल स्पोण्डिलाइटिस, सियाटिका आदि में अत्यन्त लाभप्रद है। यह समस्त शारीरिक पीड़ाओं में शीघ्र तथा स्थाई लाभ देता है।

सेवनविधि व मात्रा : 1-1 या 2-2 गोली दो बार दूध या गुनगुने जल के साथ भोजनोपरान्त लें।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य श्वासारि रस के फायदे

  • मुख्य घटक : मधुयष्टि, रुदन्ती फल आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : श्वासारि रस का सेवन करने से फेफड़ों के ऊतकों में अधिक क्रियाशीलता आती है। श्वसननलिका-शोथ तथा फुफ्फुस-शोथ दूर होता है, जिससे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन फेफड़ों को मिलती है और ब्रोन्काइटिस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
  • इसके सेवन से फेफड़ों में जमा हुआ कफ सरलता से बाहर निकल जाता है।
  • इसके सेवन से फेफड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है तथा कफ, नजला, जुकाम, दमा, बार-बार छींकें आना, सिर में भारीपन, साइनस आदि रोगों में । विशेष लाभ होता है। यह फेफड़ों को पोषण देने वाला एक उत्तम टॉनिक है।
  • सेवनविधि व मात्रा : 500 मिग्रा से 1 ग्राम तक दिन में 2 या तीन बार भोजन से पहले शहद से या गुनगुने पानी से लें। इसको भोजन के बाद भी लिया जा सकता है। यदि श्वास की तीव्रता अधिक हो तो 50 ग्राम श्वासारि रस में अभ्रक भस्म 10 ग्राम, प्रवालपिष्टी 10 ग्राम मिलाकर सबकी 60 पुड़िया बनाकर 1-1 पुड़िया दिन में 2 या 3 बार शहद के साथ सेवन करें।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य आंवला रस के फायदे

  • बालों का असमय सफेद होना, ग्रोथ कम होना, झड़ना व गंजापन आदि समस्त केश रोगों के लिए साथ ही ऑखों का चश्मा हटाने व समस्त नेत्र रोगों के लिए यह रस सर्वोत्तम है। इसके नित्य प्रयोग से पाचनतन्त्र, श्वसनतन्त्र, उत्सर्जनतन्त्र एवं प्रजननतन्त्र संतुलित एवं स्वस्थ होता है।
  • वयावस्था-जन्य विकारों से शरीर की रक्षा करता है। आँवला रस उत्तम रसायन तथा वृष्य (वीर्यवर्धक) है। इसका प्रयोग स्वस्थ पुरुष के स्वास्थ्य को बनाये रखने तथा रोगी के रोग के निवारण हेतु किया जाता है। आयुर्वेद में ऑवला फल को अमृत तुल्य कहा गया है।
  • आँवला रस वय:स्थापक है। अत: मानव शरीर को रोगों से मुक्त रखता है। आँवला शीतवीर्य होने से पित्त के विकारों में शीघ्र ही लाभ पहुँचाता है। यह तीनों (वात, पित्त, कफ) दोषों को सम करके रोगों का निवारण करता है। इसके लागातार सेवन करते रहने से चेहरे की कान्ति तथा वर्ण की वृद्धि होती है।
  • सेवनविधि व मात्रा : प्रात: उठते ही 25 से 50 मिली रस गुनगुने या सामान्य जल में मिलाकर सेवन करें। आँवला या एलोवेरा रस को एक साथ मिलाकर सेवन करने से गैस आदि रोगों में विशेष लाभ होता है। आँवला रस सायं को खाने के बाद भी सेवन कर सकते हैं।

धृतकुमारी स्वरस (एलोवेरा जूस) के फायदे

  • यह रस पाचन तन्त्र को सदा स्वस्थ रखने, गैस, कब्ज, जोड़ों का दर्द, कैंसर, कोलाइटिस, यौनरोग, धातुरोग, श्वेतप्रदर व रक्तप्रदर आदि समस्त स्त्रीरोगों के लिए यह अत्यन्त लाभकारी है।
  • एलोवेरा एवं आँवला का स्वरस यदि प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में खाली पेट व सायकाल खाने के बाद पिया जाय तो व्यक्ति लम्बे समय तक निरोगी जीवन जी सकता है।
  • सेवनविधि व मात्रा : प्रात: 25 से 50 मिली एलोवेरा स्वरस को पीकर ऊपर से गुनगुना पानी पी लें। सायं को भी खाने के बाद जल में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। घृतकुमारी रस को आँवला रस व ज्वारे के रस के साथ भी लिया जा सकता है।

दिव्य कांतिलेप के फायदे

  • मुख्य घटक : मेंहदी बीज (पत्र), आमाहल्दी, हल्दी, मंजीठ, जायफल, सफेद चन्दन, सुगन्धबाला, स्फटिकभस्म, समुद्रफेन, कत्था, कपूर आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : – यह लेप त्वचा पर आई हुई सभी समस्याओं जैसे-कील-मुँहासे, चेहरे पर झुर्रियों का पड़ना, निस्तेजता, कान्तिहीनता, कालापन आदि विकारों में शीघ्र लाभकारी है।
  • इसका चेहरे पर निरन्तर लेप करने पर यह लेप त्वचागत सभी विकारों को अवशोषित कर लेता है, जिससे रोगग्रस्त त्वचा पुन: स्वस्थ हो जाती है, चेहरे का प्राकृतिक सौन्दर्य फिर से निखरता है और मुख पर ओज, तेज व कान्ति आती है।
  • सेवनविधि व मात्रा : लगभग एक चम्मच पाउडर लेकर पानी, गुलाब जल या कच्चा दूध मिलाकर लेप (पेस्ट) बना लें। इस लेप को चेहरे पर 3-4 घण्टे तक लगा रहने दें, बाद में गुनगुने पानी से धो लें।

दिव्य अमृत रसायन (अवलेह) के फायदे

  • मुख्य घटक : दालचीनी, आंवला, पिष्टी, केसर, बादाम, ब्रह्मी, शतावर, कौंच बीज, प्रवाल पिष्टी आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : यह मस्तिष्क को पूर्ण पोषण देने वाला अत्यन्त लाभप्रद रसायन है। यह मेधावर्धक (बुद्धिवर्धक), शीतल, शरीर को सम्पूर्ण अंगों को शक्ति, पुष्टि व आरोग्य प्रदान करता है।
  • शरीर को पुष्ट करके बल, कान्ति को बढ़ाने वाला, नेत्रों के लिए हितकारी, शीतल रसायन जो गर्मी की ऋतु में विशेष रूप से सेवनीय है।
  • यह विद्यार्थियों व बुद्धिजीवियों के लिए एक उत्तम टॉनिक है।
  • सेवनविधि व मात्रा : 1 से 2 चम्मच अर्थात् 10 से 20 ग्राम प्रात:-सायं दूध के साथ या रोटी आदि के साथ चटनी की तरह भी प्रयोग कर सकते हैं।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : पतंजलि दृष्टि (Eye Drop) के फायदे

  • मुख्य गुण-धर्म- नियमित रूप से 2-2 बूंद औषध को ऑखों में डालने से मोतियाबिन्द ठीक हो जाता है। ग्लूकोमा के रोगी का ऑख का दबाव कम हो जाने से धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। कम उम्र में आँखों पर दूर या नजदीक का चश्मा, आँखों की एलर्जी, काला या सफेद मोतियाबिन्द (ग्लूकोमा व कैटरैक्ट), डबल विजन, कलर विजन, रेटिनाइटिस पिग्मेंटोसा, रतौंधी व यूवीआइटिस (UVeitis) आदि समस्त नेत्र रोगों से बचने व इन समस्त नेत्र रोगों से छुटकारा पाने के लिए यह एक उत्तम अनुभूत औषध है।
  • सेवनविधि व मात्राः 1 से 2 बूंद प्रात:-सायं आँख में डालें। बच्चों को गुलाब जल में मिलाकर डाल सकते हैं।
  • 5 मिली गुलाब जल में 5 बूंद दृष्टि आई ड्रॉप डालकर रख लें और इसे बच्चों एवं कोमल प्रकृति के व्यक्ति प्रयोग कर सकते हैं।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद : दिव्य धारा के फायदे

  • मुख्य घटक : पुदीना , कर्पुर, अजवायन, लौंग तेल आदि |
  • गुण-धर्म व सेवनविधि : 5 से 10 बूंद दिव्य धारा को सौंफ आदि के अर्क में मिलाकर 15-15 मिनट में देने से हैजे में लाभ होता है। जब रोग में लाभ होने लगे तो समय भी उसी तरह बढ़ा दें अर्थात् आधे-आधे घण्टे, एक-एक घण्टे, दो-दो घण्टे पश्चात् देने लगें। इससे हैजे में निश्चित लाभ हो जाता है।
  • यह सिरदर्द, दांतदर्द, कान दर्द, नकसीर में लाभदायक है।
  • सिरदर्द में माथे पर इसकी 3-4 बूंद लगाकर मालिश करने तथा सूंघने से सिरदर्द में तुरन्त राहत मिल जाती है।
  • दाँतदर्द होने पर रूई में लगाकर पीड़ायुक्त स्थान पर लगा दें।
  • उदरशूल, आध्मान आदि उदर-विकारों में खाँड, बताशा या गुनगुने जल में 3-4 बूंद डालकर सेवन करें। दमा व श्वास में रूमाल पर दिव्यधारा लगाकर सूघने व छाती पर लगाने से विशेष लाभ होता है। श्वास रोग बढ़ने की वजह से यदि श्वास न ले पा रहे हों तो आधे से एक लीटर गुनगुने जल में 4-5 बूंद दिव्य धारा डालकर वाष्प लेने से तुरन्त लाभ मिलेगा।

पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद :  दिव्य पेय (Herbal Tea) के फायदे

  • मुख्य घटक : एला (इलायची), तेजपत्र, दालचीनी, लवंग, चन्दन, जावित्री, जायफल, कालीमिर्च, | चन्दन, चव्य, सोंठ, नागरमोथा, तेजपात, सौंफ, अर्जुन छाल आदि।
  • मुख्य गुण-धर्म : यह मादकता रहित मधुर स्वादयुक्त आयुर्वेदिक पेय है, जो चाय का उत्तम विकल्प है।
  • इस पेय के सेवन से शरीर में रोगप्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है, जिससे कफ आदि रोग शरीर को आक्रान्त नहीं कर पाते। किसी असावधानी वश रोग शरीर में आ भी गया हो तो शीघ्र छुटकारा मिल जाता है।
  • इसके सेवन से मन्दाग्नि दूर होती है। मस्तिष्क को शान्ति व शक्ति प्राप्त होती है तथा | शरीर की शक्ति में भी वृद्धि होती है।
  • इस पेय का सेवन cholesterol को कम करता है तथा हृदय रोगों से बचाता है।
  • यह दिव्य पेय पाचन तंत्र को शक्ति प्रदान करता है। सबसे उत्तम बात तो यह है कि यह दूध में उपस्थित स्नेहत्व को नष्ट नहीं करती तथा निकोटिन रहित है, जबकि बाजार में उपलब्ध चाय में निकोटिन होती है तथा उसके सेवन से गैस, कब्ज व एसीडिटी जैसे रोग सहज ही पैदा हो जाते हैं।
  • इस पेय की उपयोग-विधि सामान्य चाय की तरह है। मात्रा भी सामान्य चाय की तरह ही है, बल्कि उससे भी कम मात्रा में डालना उचित है। इसे दूध में डालकर सामान्य चाय की अपेक्षा अधिक देर तक पकाएँ। इससे जड़ी-बूटियों का अधिक लाभ मिलेगा। आवश्यकतानुसार चीनी मिलाकर पिएं।

Reference – इस पोस्ट में पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की समस्त जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई २०१६ के २५ वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और दवाओ की जानकारी के लिए है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए |

अन्य सम्बंधित पोस्ट 



शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.