पुरुषो को होने वाले रोगों का इलाज पतंजलि आयुर्वेद

जानिए पुरुषो के रोगों के इलाज पतंजलि आयुर्वेद में उपलब्ध औषधियों के बारे में | साथ ही यह जानिए की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें | सन 2006 में पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना हुई थी आज पूरी दुनिया भारत के प्राचीन ज्ञान योग एवं आयुर्वेद का लोहा मानती है | वर्तमान में पतंजलि आयुर्वेद औषधियों और विभिन्न खाद्य पदार्थों का उत्पादन करती है। बीते कुछ समय में पतंजलि के आयुर्वेदिक उत्पादों ने भारतीय बाज़ार में काफी लोकप्रियता अर्जित की है और आज इसके उत्पादों ने घर-घर में अपनी पहचान बना ली है और अपने उत्पादों और दवाओ की जानकारी कई पुस्तको के माध्यम से सार्वजानिक पटल पर भी रखा है, इन्ही में से एक पुस्तक की जानकारी हम अपनी वेबसाइट पर समय-समय पर प्रकाशित करते रहते है | इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |

  • पुरुष बांझपन
  • पेशाब में जलन
  • पथरी, किडनी स्टोन
  • किडनी रोग
  • नपुंसकता
  • सफेद पानी
  • थैलेसीमिया

पुरुषो के विभिन्न रोगों के इलाज पतंजलि आयुर्वेद में

 पुरुषो के रोगों का इलाज पतंजलि आयुर्वेद patanjali medicine infertility increase sperm count

Patanjali Ayurvedic medicine For Men

मूत्रक्कृच्छ्, पेशाब में जलन ( Dysuria ) का इलाज पतंजलि आयुर्वेद   

  • दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य गिलोयघन वटी – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

  • दिव्य चन्दनासव – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

 (Urolythiasis/ Stone in Bladder) पथरी, किडनी स्टोन का इलाज पतंजलि आयुर्वेद   

  • दिव्य अश्मरीहर क्वाथ – 300 ग्राम

1 चम्मच औषधि को 400 मिली पानी में पकाएं और जब 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात: सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य अश्मरीहर रस – 50 ग्राम

1-1 ग्राम औषधि को अश्मरीहर क्वाथ के साथ सेवन कराएं।

  • दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम

1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें। नोट पत्थरचट्टे का पत्ता रोज प्रात: खाली पेट चबाकर खाए।

किडनी, वृक्क की निष्क्रियता (CRF) एवं किडनी रोग का इलाज पतंजलि आयुर्वेद   

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम
  • दिव्य वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम
  • नीम छाल – 5
  • पीपल छाल 5

सभी औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5–7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।

  • दिव्य गिलोयघन वटी – 60 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं खाली पेट सुखोष्ण (गुनगुने) जल से सेवन करें।

  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 1 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् -10 ग्राम
  • दिव्य हजरुल यहूद भस्म – 10 ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 20 ग्राम
  • दिव्य शवेत पर्पष्टी – 5 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभा वटी – 60 ग्राम
  • दिव्य वृक्कदोषहर वटी – 60 ग्राम

1–1 गोली दिन में 2-3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे – घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें। नोट- उच्चरक्तचाप होने की स्थिति में मुक्तावटी की 1-1 या 2-2 गोली प्रात: एवं सायं खाली पेट पानी या काढ़े से लें।

नपुंसकता, शुक्राल्पता (Oligospermia , fertility ) नामर्दी का इलाज पतंजलि आयुर्वेद   

  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 1-3 ग्राम
  • दिव्य त्रिवंगा भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य अभ्रकं भस्म – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य सिद्ध मकरध्वज – 2 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य शिलाजीत सत् – 20 ग्राम

2-2- बूँद दूध में मिलाकर सेवन करें।

  • दिव्य यौवनामृत वटी – 5 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी- 40 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद दूध से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य शतावरी चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य श्वेतमूसली चूर्ण – 100 ग्राम

1- 1 चम्मच चूर्ण को प्रात: एवं सायं भोजन के बाद गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

शुक्राल्पता में उपरोक्त औषधियों के साथ

  • कौंच, बीज – 250 ग्राम
  • सफेद गुञ्जा – 250 ग्राम

कौंच बीज तथा सफेद गुज्जा को कुटकर 1-1 चम्मच की मात्रा में प्रात: एवं सायं । दूध के साथ सेवन करने पर शुक्राणुओं की वृद्धि तथा शरीर का पोषण होता है। (कौंच बीज तथा सफेद गुञ्जा का प्रयोग शोधन के पश्चात् ही करना चाहिए । इसका शोधन दोला यन्त्र विधि से किया जाता है। बीजों को 1 पोटली में लटकाकर 4 ली दूध में पकाएं, जब पकते-पकते दूध गाढ़ा हो जाए तो पोटली को निकालकर, छिलका उतारकर बीजों को पीसकर कर सुरक्षित रख लें।

नोट– यदि यौन दुर्बलता अधिक हो तो उपरोक्त औषधियों के साथ यौवन गोल्ड कैप्सूल की 2-2 गोली प्रात: एवं सायं सेवन करने से विशेष लाभ होता है।

शुक्राणुहीनता, पुरुष बांझपन ( Azoospermia ) का इलाज पतंजलि आयुर्वेद

  • दिव्य हीरक भस्म – 300 ग्राम
  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 2-3 ग्राम
  • दिव्य सिद्धमकरध्वज – 2–3 ग्राम

निम्न द्रव्यों को उपरोक्त पुड़िया में मिलाकर सेवन करें।

प्रमेह तथा शुक्रमेह, धातु गिरना  और सफेद पानी का इलाज पतंजलि आयुर्वेद   

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम
  • दिव्य वृक्कदोषहर क्वाथ – 200 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य गिलोयघन वटी – 60 ग्राम

2-2 गोली उपरोक्त क्वाथ से सेवन करें।

  • दिव्य आंवला चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य वंगभस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पंचामृत – 5 ग्राम
  • दिव्य हजरुल यहूद भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 20 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 1-1 चम्मच प्रात:, नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन वटी – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद जल से सेवन करें। अन्य व्याधिष्य

थैलेसीमिया (Thalessemia) का इलाज पतंजलि आयुर्वेद  

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 300 ग्राम

1 चम्मच औषध को 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य कुमारकल्याण रस – 1-2 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 5 ग्राम
  • दिव्य कहरवा पिष्टी – 5 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 5 ग्राम
  • दिव्य गिलोयसत् – 10 ग्राम
  • दिव्य प्रवालपंचामृत – 5 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुल – 40 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 20 ग्राम

1–1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य धृतकुमारी स्वरस – 10 मिली
  • दिव्य गिलोय स्वरस – 10 मिली

इसमें (उपरोक्त दोनों स्वरसों में) गेंहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर प्रात: एवं सायं खाली पेट सेवन करें।

Reference – इस पोस्ट में बताई गई पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की सारी जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई 2016 का 25 वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | इसे बताने का औचित्य सिर्फ आपको इस बारे में जागरूक बनाना है की पतंजलि आयुर्वेद संस्थान किस-किस बीमारी के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करता है और इनका कैसे सेवन किया जाता है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.

अन्य सम्बंधित पोस्ट 

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *