दिव्य मधुकल्प वटी और दिव्य मधुनाशिनी वटी के लाभ : पतंजलि आयुर्वेद

इस लेख में नीचे दी गई बिमारियों के इलाज हेतू पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन की जानकारी दी गयी है | साथ ही यह भी बताया गया है की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें | डायबिटीज उपचार के लिए मशहूर दिव्य मधुकल्प वटी के सेवन की जानकारी भी दी गई है | इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |

  • मधुमेह
  • (Muscular Dystrophy)
  • पुराने घाव के इलाज के लिए
  • (Parkinson) पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन
  • आंत्रवृद्धि (Hernia) के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन
  • मोतियाबिन्द, ग्लूकोमा
  • कान का बहना और कान का रूक जाने का इलाज
  • कर्णनाद, कान मे सीटी बजना (Timmitus)

डायबिटीज (मधुमेह) के इलाज के लिए दिव्य मधुकल्प वटी

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पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

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  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 2 ग्राम
  • दिव्य अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य स्वर्णमाक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 20 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्तापिष्टी – 4 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य मधुनाशिनी वटी – 120 गोली

2-2 गोली प्रात: व सायं खाली पेट चबाकर जल से सेवन करें।

  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य गिलोयघन वटी – 40 ग्राम

1–1 गोली दिन में 2 बार भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य मधुकल्प वटी – 60 ग्राम

2-2 गोली दिन में 2 बार भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें। दिव्य शिलाजित सत् 1-1 दूध से लें। नोट-करज्ज बीज चूर्ण को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में प्रात: एवं सायं भोजन से पहले सेवन करने से विशेष लाभ होता है।

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 (Muscular Dystrophy) इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य एकांगवीर रस – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवालपिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोयसत् – 10 ग्राम
  • दिव्य स्वर्ण माक्षिक भस्म – 5 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 2 ग्राम
  • दिव्य रसराज रस- 1 ग्राम
  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस – 1 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 90 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु – 40 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन 40 ग्राम

1-1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम

2-2 ग्राम प्रात: दोपहर एवं सायं भोजन के बाद दूध से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगंधारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें। नोट- 20 मिली गेंहूँ के ज्वारे के रस में 20 मिली गिलोय का रस मिलाकर प्रात: एवं सायं खाली पेट पिएं।

 पुराने घाव के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य कायाकल्प क्वाथ – 100 ग्राम
  • दिव्य दशमूल क्वाथ – 100 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।

  • दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्यं गिलोय सत् – 20 ग्राम
  • दिव्य रसामाणिक्य – 2 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

रोग की जीर्णअवस्था में 1-2 ग्राम स्वर्ण वसन्तमालती रस उपरोक्त पुड़िया में मिला लें |

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी — 40 ग्राम
  • दिव्य नीमघन वटी – 40 ग्राम

1-1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते एवं सायं -भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें। नोट-त्रिफला क्वाथ या पंचवल्कल क्वाथ से प्रक्षालन करने पर विशेष लाभ मिलता है। जात्यादि तैल का स्थानिक प्रयोग करें।

 (Parkinson) पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य मेधा कवाथ – 300 ग्राम

1 चम्मच औषध को 400 मिली पानी में पकाएं और 100 मिली शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पियें।

  • दिव्य एकांगवीर रस- 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 4 ग्राम
  • दिव्य वसन्तकुसुमाकर रस -1 ग्राम
  • दिव्य स्वर्ण माक्षिक – 5 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी- 10 ग्राम
  • दिव्य रसराज रस – 1 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य मकरध्वज – 2 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य मेधावटी — 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य त्रयोदशांग गुग्गुलु – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

आंत्रवृद्धि (Hernia) के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 300 ग्राम

1 चम्मच औषध को 400 मिली पानी में पकाएं और 100 ग्राम शेष रहने पर छानकर प्रात:, सायं खाली पेट पिएं।

  • दिव्य त्रिकटु चूर्ण – 25 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गोदन्ती भस्म – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य कांचनार गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य वृद्धिवाधिका वटी – 40 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

मोतियाबिन्द, ग्लूकोमा के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य आमलकी रसायन – 200 ग्राम
  • दिव्य सप्तामृत लौह – 20 ग्राम
  • दिव्य मुक्ताशुक्ति- 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 1-1 चम्मच भोजन से पहले जल अथवा शहद से लें। दिव्य दृष्टि आई ड्राप 1-1 बूंद दोनों आँखों में डालें।

  • दिव्य महात्रिफला धृत – 200 ग्राम

1- 1 चम्मच भोजन के बाद दूध से लें।

कान का बहना और कान का रूक जाने के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य सारिवादि वटी – 20 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन – 40 ग्राम
  • दिव्य त्रिफला गुग्गुलु – 40 ग्राम

1–1 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य सारस्वतारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

  • दिव्य कायाकल्प तैल – 100 मिली प्रभावित स्थान पर लगाएं। नोट-चिकित्सकीय निरीक्षण में कर्णधूपन करने से विशेष लाभ होता है। 2-2 बूंद सुदर्शन पत्र-स्वरस को कान में डालने से कान का बहना रूक जाता है। 2-2 बूंद तुलसी पत्र-स्वरस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। पत्थरचट्टा के पीले पत्र का स्वरस निकालकर गुनगुना करके 1-1 बूंद कान में डालने से कान बहना और कान दर्द में विशेष लाभ होता है।

कर्णनाद, कान मे सीटी बजना (Timmitus) के इलाज के लिए पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन

  • दिव्य विषतिन्दुक वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 40 ग्राम
  • दिव्य सारिवादि वटी – 20 ग्राम

1-1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगन्धा चूर्ण – 100 ग्राम
  • दिव्य वातारि चूर्ण – 100 ग्राम

खाने से आधा घंटा पहले आधा-आधा चम्मच प्रात: एवं सायं गुनगुने पानी से लें।

Reference – इस पोस्ट में बताई गई पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की सारी जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई 2016 का 25 वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए |

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