पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ -सफेद दाग, सोरायसिस, मुहांसे

जानिए त्वचा रोगों के उपचार के लिए बाबा रामदेव की  उपलब्ध पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ के बारे में | साथ ही यह जानिए की इन औषधियों का सेवन कैसे करें और क्या परहेज रखें | इस लेख में निम्नलिखित बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बताई गई है |

  • सफेद दाग/ शिवत्र (Leucoderma/ Vitiligo)
  • सोरायसिस /सिरोसिस और एक्जिमा
  • मुहांसे
  • शीतपित्तया पित्ती /अर्टिकरिया (Urticaria)
  • स्क्लेरोडर्मा (Scleroderma)
  • मल्टीपल स्कलोरोसिस

शिवत्र, सफेद दाग (Leucoderma/ Vitiligo) के इलाज हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

Patanjali ayurvedic ilaj safed daag ekjima psoriasis Scleroderma पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ - सफेद दाग, सोरायसिस , मुहांसे , अर्टिकरिया

पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 20 ग्राम
  • दिव्य शुद्ध बाकुची चूर्ण – 50 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य महामजिजष्ठारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

श्वित्रध्न लेप-निम्ब पत्र स्वरस, गोबरस्वरस तथा गोमूत्र को मिश्रित कर लेप लगाएं, यदि लेप लगाने के बाद जलन हो या फफोले हों तो तुरन्त जल से धो डालें।

दिव्य कायाकल्य तैल – 100 मिली प्रभावित स्थान पर लगाएं।

यह भी अवश्य पढ़ें – सफेद दाग होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

सोयरायसिस और एक्जिमा के इलाज हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  • गंधकं रसायन – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 20 ग्राम
  • दिव्य रसामाणिक्य – 2 ग्राम
  • दिव्य ताल सिन्दूर – 1 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु – 60 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम
  • दिव्य निम्ब घनवटी – 60 ग्राम

1-1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य महामजिजष्ठारिष्ट – 450 मिली
  • दिव्य खदिरारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच (2-2 चम्मच दोनों में से) औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं साय भोजन के बाद सेवन करें।

  • दिव्य कायाकल्य तैल – 100 मिली

प्रभावित स्थान पर लगाएं। निम्ब तैल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

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युवान पिडिका / कील-मुहांसे के इलाज हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य कायाकल्प वटी – 40 ग्राम

2-2 गोली प्रात: एवं सायं खाली पेट जल से सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु- 40 ग्राम
  • दिव्य निम्ब घनवटी – 40 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 40 ग्राम

1-1 गोली प्रात: व सायं खाली पेट जल से सेवन करें।

  • दिव्य खदिरारिष्ट – 450 मिली

4 चम्मच औषधियों में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

  • दिव्य कान्ति लेप- आवश्यकतानुसार पानी में व गुलाब जल में अथवा गाय के कच्चे दूध में लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं, 2 या 3 घण्टे बाद चेहरे को धो डालें। एलोवेरा जैल का प्रयोग चेहरे पर करें। नोट:- जिन्हें कब्ज रहता ही वे दिव्य त्रिफला चूर्ण अथवा दिव्य उदरकल्प चूर्ण का प्रयोग करें।
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शीतपित्त या पित्ती (Urticaria/अर्टिकरिया के इलाज हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य कायाकल्प वटी – 40 ग्राम

2-2 गोली प्रात: व सायं खाली पेट जल से सेवन करें।

  • दिव्य नीम घनवटी – 60 ग्राम
  • दिव्य गिलोयघन वटी – 60 ग्राम

2–2 गोली प्रात: व सायं भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य हरिद्राखण्ड – 200 ग्राम

आधा-आधा चम्मच भोजन के बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य नारियल तैल – 250 ग्राम
  • देशी कपूर – 25 ग्राम दोनों को मिलाकर प्रभावित स्थान पर प्रयोग करें।

स्क्लेरोडर्मा (Scleroderma) की चिकित्सा हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य सर्वकल्प क्वाथ – 100 ग्राम
  • दिव्य कायाकल्प क्वाथ – 200 ग्राम

दोनों औषधियों को मिलाकर 1 चम्मच (लगभग 5-7 ग्राम) की मात्रा में लेकर 400 मिली पानी में पकाएं। 100 मिली शेष रहने पर प्रात: एवं सायं छानकर खाली पेट पिएं।

  • दिव्य गिलोयघन वटी – 40 ग्राम

1–1 गोली दिन में दो बार उपर दिए गए काढ़े के साथ सेवन करें।

  • दिव्य रसमाणिक्य – 3 ग्राम
  • दिव्य रसराज रस – 1 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम
  • दिव्य मुक्ता पिष्टी – 2 ग्राम
  • दिव्य कायाकल्प वटी – 20 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़ियां बनाएं। प्रात: एवं सायं भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद/मलाई से सेवन करें।

  • दिव्य कैशोर गुग्गुलु- 60 ग्राम
  • दिव्य आरोग्यवर्धिनी वटी – 4O ग्राम
  • दिव्य पुनर्नवादि मण्डूर – 40 ग्राम

1–1 गोली दिन में 2 बार प्रात: नाश्ते एवं साय-भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य खदिरारिष्ट – 450 मिली
  • दिव्य महामंजिष्ठादि क्वाथ – 450 मिली

4 चम्मच औषध में 4 चम्मच पानी मिलाकर प्रात: एवं सायं भोजन के बाद सेवन करें।

  • दिव्य कायाकल्प तेल – 100 मिली प्रभावित स्थान पर लगाएं।

मल्टीपल स्कलोरोसिस की चिकित्सा हेतु पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ

  • दिव्य एकांगवीर रस – 5 ग्राम
  • दिव्य महावातविध्वंसन रस – 5 ग्राम
  • दिव्य बृहत् वातचिन्तामणि रस – 2 ग्राम
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
  • दिव्य गिलोय सत् – 10 ग्राम

सभी औषधियों को मिलाकर 60 पुड़िया बनाएं। प्रात: नाश्ते एवं रात्रि-भोजन से आधा घण्टा पहले जल/शहद से सेवन करें।

  • दिव्य मेधा वटी – 60 ग्राम
  • दिव्य चन्द्रप्रभावटी – 60 ग्राम
  • दिव्य त्र्योदशांग गुग्गुल – 60 ग्राम
  • दिव्य शिलाजीत रसायन – 40 ग्राम

1-1 गोली दिन में 3 बार प्रात: नाश्ते, दोपहर-भोजन एवं सायं भोजन के आधे घण्टे बाद गुनगुने जल से सेवन करें।

  • दिव्य आरोग्य वटी – 60 ग्राम

1-1 गोली प्रात: एवं सायं खाली पेट गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

  • दिव्य अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम

2–2 ग्राम भोजन के बाद दूध से सेवन करें।

Reference – इस पोस्ट में बताई गई पतंजलि आयुर्वेद दवाओ की सारी जानकारी बाबा रामदेव जी के दिव्य आश्रम प्रकाशन की पुस्तक (आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित “औषधि दर्शन”, मई 2016 का 25 वें संस्करण से ली गई है)

Disclaimer – यह जानकारी केवल आपके ज्ञान वर्धन और जागरूकता के लिए है | इसे बताने का औचित्य सिर्फ आपको इस बारे में जागरूक बनाना है की पतंजलि आयुर्वेद संस्थान किस-किस बीमारी के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करता है और इनका कैसे सेवन किया जाता है | बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए | Never Take Medicines without Consulting the Doctor.

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