मिश्री के फायदे तथा 20 बेहतरीन औषधीय गुण

मिश्री को मिसरी या रॉक शुगर भी कहा जाता है। दरअसल, चीनी के जमे हुए कण को ही मिश्री कहते हैं। बाज़ारों में गन्ने के रस से बना यह उत्पाद चीनी की तुलना में बड़े टुकड़ों में मिलता है। अपनी इच्छानुसार चौकोर कटी हुई या पत्थर, किसी भी आकार की मिसरी आप ले सकते हैं क्योंकि मिसरी का कोई भी आकार चीनी से तो बेहतर विकल्प ही होता है। इसके सेवन से आपका गला खुशगवार, साफ और खराश  रहित रहेगा। सूखी खाँसी या गले की किचकिचाहट हटाने में भी मिसरी बेजोड़ औषधि है |

ताड़ मिसरी : ताड़ के रस से बना यह प्राकृतिक शर्करा भी मिसरी के नाम से जाना जाता है। भूरे रंग का और टुकड़ों में मिलने वाली यह मिसरी बोतलों में बन्द आती है। ताड़ मिसरी के इस्तेमाल करने से खाँसी, नजला या जुकाम दूर हो जाता है सुस्ती व थकान को दूर कर शरीर में नयी उर्जा पैदा कर देती है और इसे लगातार लेते रहने से शरीर स्वस्थ रहता है।

मिश्री के औषधीय गुण तथा घरेलू नुस्खे

misri ke gun fayde labh bataye मिश्री के फायदे तथा बेहतरीन औषधीय गुण

मिश्री

  • अगर आपकी याददाश्त कमज़ोर हो तो आज ही से सौंफ का सेवन शुरू कर दीजिये, ये न सिर्फ आपके दिमाग को मज़बूत करेगी बल्कि आँखों की रौशनी बढ़ाने में भी फायदेमंद साबित होगी।
  • समान मात्रा में मिश्री को सौंफ के चूर्ण में स्वादानुसार इलायची का चूर्ण मिलाकर दोनों समय दूध के साथ दो-दो चम्मच सेवन करने से आँखों की कमजोरी के कारण होने वाला सिरदर्द ठीक हो जाता है।
  • सिरदर्द कब्ज़ के कारण सिरदर्द हो तो ईसबगोल दो चम्मच छ: घण्टे आधा गिलास पानी में भिगो दें, इतनी ही मिश्री का पाउडर बनाकर भीगी हुई ईसबगोल में मिलाकर पियें तो पेट साफ हो जाता है तथा कब्ज़ के कारण रहने वाले सिरदर्द से आराम मिल जाता है।
  • छोटे बच्‍चों को भी सर्दी से खांसी होने पर मिश्री को पानी में मिलाकर पिलाने से आराम मिलेगा।
  • मिश्री में मिठास और ठंडक दोनों गुण होते हैं। तेज गर्मी में मिसरी का प्रयोग चीनी की जगह किसी शरबत आदि को बनाने में करना चाहिए । एक गिलास पानी में मिसरी को मिलाकर पीने से शरीर को गर्मी से राहत मिलने के साथ ही ऊर्जा भी मिलती है।
  • गर्म दूध में केसर और मिश्री मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति और स्फूर्ति आती है। साथ ही शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्र भी बढ़ती है जिससे त्‍वचा में चमक आती है। यह दूध यौन कमजोरी दूर करने वाला भी होता है।
  • मक्खन और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से हाथ-पैरों की जलन दूर होती है। दोनों ही चीजो की तासीर ठंडी होती है। इसलिए प्रसाद के तौर पर भी माखन-मिश्री दी जाती है।
  • खाना खाने के बाद खाने के बाद सौंफ और मिश्री खानी चाहिए क्योंकि एक तो इससे मुंह से लहसून और मसालों की महक दूर होती है और दूसरा पाचनशक्ति भी बढती है और खाना जल्दी हज़म जाता है |
  • बादाम की गिरी व मिश्री समान मात्रा में, स्वादानुसार इलायची के साथ पीसकर रोजाना सुबह के समय 3-3 चम्मच सेवन करने से पुराने से पुराना सिरदर्द, जो मानसिक तनाव आदि के कारण होता है, ठीक हो जाता है।
  • सिरदर्द जो सूर्य के साथ बढ़ता-घटता है, शुरू होने से पहले 20 ग्राम पिसी हुई मिश्री 20 ग्राम मावे में मिलाकर खायें। सिरदर्द नहीं होगा।
  • मुंह के छालों को ठीक करने पर मिसरी और इलाचयी कम मात्रा में पीसकर डालें, लाभ होगा।
  • जोड़ों के दर्द में पिसी हुई अश्वगंध और मिसरी एक समान मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम गर्म दूध से फंकी से लें जल्दी ही आराम मिलेगा ।
  • टॉन्सिलाइटिस–मिश्री, छोटी इलायची और मक्खन समान मात्रा में पीसकर मिलाकर रोजाना दो बार खाने से लाभ होता है।
  • साइनोसाइटिस वाले मरीज का सिर भी बहुत दु:खता है, ऐसे में 15 पत्ते तुलसी के, 10 कालीमिर्च, 11 छोटे-छोटे मिश्री के टुकड़े व 5 ग्राम अदरक को एक गिलास पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर छानकर सुबह खाली पेट गर्म-गर्म पी लें। इसे पीने के एक घण्टे बाद तक कुछ नहीं खायें । सौंफ के फायदे तथा बेहतरीन औषधीय गुण
  • नकसीर– मिसरी पानी में घोलकर इसे सूंघे इससे नकसीर बन्द हो जायेगी।
  • मासिक धर्म में अधिक रक्त आने की बीमारी में मिश्री और मुलहठी समान मात्रा में पीसकर आधा-आधा चम्मच तीन बार ठण्डे पानी से फंकी लें। मासिक धर्म में अधिक रक्त गिरना बन्द हो जाता है। यदि गर्भपात से सम्बन्धित रक्तस्राव हो रहा हो तो वह भी बन्द हो जाता है। रज:स्राव होने के बाद भी लम्बे समय तक इसे सेवन करते रहने से दुबारा यह बीमारी नहीं होगी। गर्भपात की प्रवृत्ति वाली स्त्रियाँ इसे लम्बे समय तक लेती रहें तो हानि नहीं होगी। परंतु याद रहे, की मधुमेह के रोगी को मिश्री का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • रक्तस्रावी बवासीर–नागकेशर, मिसरी और मक्खन समान मात्रा में पीसकर एकएक चम्मच सुबह-शाम खाकर ऊपर से गर्म दूध पियें। लाभ होगा। बवासीर के साथ हृदय रोग भी हो तो यह प्रयोग नहीं करें।
  • गर्भावस्था में उलटी की इच्छा बनी रहना या उलटी होना बना रहता है। इसके साथ सिरदर्द भी हो सकता है। इस दौरान भोजन हलका करना चाहिए। इसके साथ ही इन सब समस्याओ के उपचार हेतु ये उपाय आजमाने चाहिए :-
  • जायफल को चावल की मांड के साथ घिसें, इसमें मिश्री और नींबू का रस मिलाकर पिलाएं। इससे उलटी की इच्छा समाप्त होती है। और उलटी हो रही हो तो वह भी रुक जाती है। यह उपाय गर्भवती स्त्री के लिए किसी भी प्रकार से नुकसानदायक नहीं होता है। बल्कि दवाओ के सेवन से स्त्री और उसके होने वाले बच्चे को साइड इफ़ेक्ट का सामना जरुर करना पड़ सकता है |
  • मिश्री दस ग्राम, छोटी इलायची के दाने पांच ग्राम, मुलहठी पांच ग्राम तथा पिपरमेंट आधा ग्राम, गुलाब जल के साथ खरल करके, गोलियां बना लें। एक-एक गोली मुंह में रखकर चूसें। उलटी, उबकाई, भोजन के प्रति अरुचि में ये फायदेमंद नुस्खा है। गिरी और मिश्री समान भाग लेकर पीसकर छोटी गोलियां बना लें। इनसे गर्भवती महिला के दिल मिचलाने जैसे विकार दूर होते हैं।

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