जटामांसी हर्ब के फायदे तथा 24 बेहतरीन औषधीय गुण जो कई रोगों को करे दूर

आयुर्वेद में जटामांसी का प्रयोग अनेक बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है खासतौर पर बालों से जुडी समस्याओं के निवारण के लिए | यह औषधि दिमाग तेज करने में रामबाण उपाय है यह याद रखने की क्षमता बढ़ती है साथ ही यह तनाव, हिस्टीरिया, मिर्गी, नाडी का धीमी गति से चलना, मन बेचैन होना आदि समस्याओ को दूर करने में भी बहुत लाभकारी होती है | जटामांसी कोई फल या सब्जी नहीं बल्कि एक हर्ब (जड़ी-बूटी ) है। इसका जमीन से बाहर का पत्तों वाला हिस्सा औषधि नहीं है। धरती के नीचे वाला हिस्सा ही केवल औषधि के काम आता है। जटामांसी की खास मोटाई नहीं होती, यह मात्र उँगली जितनी मोटी होती है तथा इसका रंग भूरा होता है इसे बालछड़ भी कहते है। इस पर अनेक छोटे-छोटे बालों की तरह जड़े भी होती हैं। इससे हर समय एक मीठी सुगंध निकलती रहती है। यह धीमी-धीमी सुगंध बहुत अच्छी लगती है। यह हर्ब हिमालय क्षेत्र में काफी अधिक पाई जाती है। गंगा तटवर्ती क्षेत्र जो पश्चिम बंगाल में आता है, वहाँ भी जटामांसी जड़ी-बूटी पाई जाती है। जटामांसी हर्ब की खोज बहुत पहले ही हो गई थी इसको सर्पगंधा से भी बहुत पहले ढूंढ़ निकाला गया था। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में भी जटामांसी का वर्णन मिलता है। तथा इसके महत्त्व को उसमें दर्शाया गया है। बाबर ने जिन हस्तलिखित ग्रंथों की रचना की, उनमें भी जटामांसी का वर्णन मिलता है। जटामासी को ही भूतजटा तथा तपस्वी नाम भी दिए गए हैं। इसका जिक्र फार्मकोपिया-औषधि विज्ञान में भी पाया गया है। यह एक युरोपीय ग्रंथ है, जिसका नाम हिप्पोक्रेट है। अतः यह बहुत पुरानी हर्ब है। भले ही इस के नाम से आम आदमी जानकार न हो, मगर वैद्य-हकीम इसका खूब प्रयोग करते रहे हैं।

जटामांसी के गुण और फायदे

जटामांसी हर्ब के फायदे तथा 24 बेहतरीन औषधीय गुण जो कई रोगों को करे दूर jatamansi churan tel ke labh gun fayde

जटामांसी जड़ी बूटी

  • यह रोधक है, स्वाद में मीठी तथा कटु है। जटामांसी का उपयोग वात, पित्त तथा कफ के शमन के लिए किया जाता है।
  • जटामांसी हर्ब का उपयोग दिमाग को तेज करने के लिए भी किया जाता है, इसके लिए इस हर्ब को पीसकर एक चम्मच एक कप दूध में लेना चाहिए |
  • यह हर्ब बालों को चमकदार, और काले बनाए रखने के लिए भी काम आती है। जटामांसी की जड़ों को नारियल के तेल के साथ उबालकर ठंडा होने के बाद इसे रोजाना रात को सोने से पहले इससे सिर की मालिश करें इससे असमय बालों का सफेद होना और झड़ना रुक जाता है |
  • यह अच्छी, गहरी, मीठी नींद लाने में सक्षम है। सोने से 1 घंटा पहले 1 चम्मच जटामांसी की जड़ का पाउडर ताजा पानी से ले। इससे गहरी नींद आएगी |
  • मुंह में छालों की समस्या होने पर जटामांसी के टुकड़े मुंह में रखकर चूसते रहने से मुंह की जलन और दर्द कम होता है।
  • यदि रक्त दूषित हो गया हो तो उसे इस हर्ब से शुद्ध किया जाता है।
  • यह कुष्ठ रोग का निवारण करती है।
  • इसका काढ़ा पीने से आँखों की रौशनी बढती है बाल काले होते है |
  • यदि हाथ पैर कांपते हो तो जटामासी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोज सेवनकरें |
  • यह त्वचा को कोमल बनाने का काम करती है। जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकरइसे चेहरे पर लगायें त्वचा खिल उठेगी |
  • कई प्रकार के त्वचा रोग इससे ठीक हो जाते हैं।
  • जटामांसी अनिद्रा को दूर कर, नींद लाती है।
  • यदि उच्च रक्त चाप हो जाए तो उसे सामान्य कर देती है। जिसका दिल घबराता हो, मन अशांत रहता हो तथा भय बना रहता हो, उसके हृदय को बल देकर स्थायी बना देती है।
  • यह शरीर के किसी भी अंग के दर्द को ठीक करने में सक्षम है।
  • यदि कोई व्यक्ति स्नायु दुर्बलता से परेशान चल रहा हो, तो उसे इसका सेवन करना चाहिए यह शक्ति का संचार करती है।
  • उन्माद रोग में : यदि किसी को उन्माद रोग हो जाए तो वह जटामांसी के बारीक चूर्ण को ब्राह्मी के रस के साथ ले। उससे काफी जल्दी लाभ होगा।  मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के उपाय- Stress Management
  • जटामांसी के पाउडर से मंजन की तरह दांतों को साफ किया जाये तो दांतों के दर्द, मसूढ़ों का दर्द आदि से छुटकारा मिलता है |
  • शरीर में कंही पर भी सूजन और दर्द हो तो जटामांसी पाउडर का लेप करें।
  • यदि बाल उड़ गये हो तो इसे पीसकर, पानी में मिलाकर, इसका पेस्ट तैयार कर, सिर के गंजे भाग पर लेप करते हैं। इससे बाल आने लगते हैं। यह उपचार काफी समय तक जारी रखा जाता है, मगर फ़ायदा अवश्य होता है।
  • रक्तचाप के लिए : रक्तचाप को सामान्य रखने के लिए जटामासी का बारीक चूर्ण शहद या मिसरी से लें। जटामासी की मात्रा छोटी आधी चम्मच काफी है।
  • जटामांसी 150 ग्राम तथा सूखी हुई शंखपुष्पी 250 ग्राम लेकर दोनों को पीसकर पाउडर बनाकर किसी बोतल में रख लें, अब 3-5 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लें। इससे हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलेगा ।
  • वात रोग :4 भाग जटामांसी के चूर्ण के साथ 1-1 भाग दालचीनी, सीतलचीनी, सौंफ और सोंठ का चूर्ण तथा 8 भाग मिश्री पीसकर मिला दें। सुबह शाम इसकी 3-6 माशा की मात्रा देने से वातविकार दूर होते है।
  • हृदय रोग : जटामासी का नियमित प्रयोग करने से हृदय रोगों को भी लाभ मिलता है। अतः दिल के मरीजो के लिए यह एक उपयोगी जड़ी-बूटी है, इसका लाभ उठाना चाहिए।  हाई ब्लड प्रेशर कम करने के उपाय- हाई बीपी के कारण लक्षण
  • अधिक परिश्रमी व्यक्ति के लिए : यदि कोई व्यक्ति अधिक काम करता है। या उसे अपनी शक्ति से अधिक काम करना पड़ता है और वह थककर चूर-चूर हो जाता है। थकावट उसे सोने नहीं देती व वह करवटें बदलता रहता है तो उसे जटामांसी हर्ब खानी चाहिए। उसकी थकावट दूर होगी व उसे नींद आ जाएगी। थकावट में आदमी सो नहीं सकता हो, उसे चक्कर आते हों। उसकी स्नायु दुर्बलता हो गई हो तो जटामांसी हर्ब उसमें शक्ति का संचार कर, उसे सामान्य करके आराम की नींद ला देगी। यह भी पढ़ें – शारीरिक थकान के कारण और दूर करने के उपाय

जटामांसी का उपयोग कैसे करें :

  • जटामांसी का उपयोग चूर्ण के रूप में किया जाता है तथा इसका काढ़ा बनाकर भी इसका प्रयोग किया जाता है।

जटामांसी का काढ़ा बनाने की विधि

  • जटामांसी का काढ़ा बनाने के लिए मिट्टी का एक बर्तन लेकर उसमें एक गिलास पानी डालें। उस पानी में चार टुकड़े जटामांसी के डालकर उबालें तथा तब तक उबलने दें जब तक पानी की मात्रा आधी न रह जाए। इसे उतारकर, ठंडा करके छान लें। यही काढ़ा है।

जटामांसी के सेवन की मात्रा का ख्याल अवश्य रखें क्योंकि यह एक हर्ब है, नहीं तो आपको इसके साइड इफ़ेक्ट का सामना भी करना पड़ सकता है | इसलिए बताई गई मात्रा में ही इसका प्रयोग करें जो इसके पाउडर के डिब्बे पर पहले से ही लिखा होता है |

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