अनियमित दिल की धड़कन तथा दिल की तेज धड़कन के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

दिल का मुख्य काम शरीर के हर अंग तक खून पहुँचाना होता है। चाहे आप बीमार हों, आराम कर रहे हों, तेजी से दौड़ रहे हों या कोई भी काम कर रहे हों आपके दिल की प्रत्येक धड़कन के साथ रक्त महा धमनी में पहुँचता रहता है। इससे शरीर के अंग-प्रत्यंग को पोषक तत्व तथा ऑक्सीजन पहुँचते रहते हैं। अपनी आवश्यकता के अनुसार हर अंग को रक्त की अधिक या कम जरूरत पड़ती है। अधिक मेहनत करने पर जब आपको दस गुना अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, तब आपका दिल तुरंत अपनी धड़कनों को तेज कर ऑक्सीजन की सही मात्रा उपलब्ध करा देता है। अपने छोटे आकार तथा हलके वजन के बावजूद इस दिल को कितना अधिक काम करना पड़ता है यह जानकर आप हैरान हो जायेंगे। दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है। इस तरह एक वर्ष में दिल करीब 3 करोड़ 70 लाख बार 60 वर्ष की औसतन उम्र  तक एक दिल 220 करोड़ बार धड़कता है कई बार विभिन्न कारणों से जब ह्रदय पर दबाव बढ़ता है तो अनियमित दिल की धड़कन की समस्या पैदा हो जाती है। सामान्य अवस्था में दिल अपनी एक समान गति से धड़कता रहता है, लेकिन यही धड़कन तेज बुखार, अधिक गर्मी, भय, ख़ुशी, व्यायाम, दौड़, मानसिक तनाव, गुस्सा आदि के समय दोगुनी या चौगुनी तक बढ़ जाती है। इसी प्रकार लो बी.पी, कमजोरी, व्रत में दिल की धड़कन घट जाती है।

इसी प्रकार अनियमित दिल की धड़कन के कई अन्य कारण भी हैं जिनको हम आगे बतायेंगे | तो आइये जानते है अनियमित दिल की धड़कन के मुख्य कारण तथा इसके घरेलू उपचार, लेकिन ये नुस्खे केवल उन लोगो के लिए है जिन्हें ह्रदय की कोई बीमारी पहले से ना हो यदि आप ह्रदय रोगी या मधुमेह से पीड़ित है तो दिल की धड़कन अनियमित हो जाने पर अपने डॉक्टर से ही सलाह लेकर उपचार शुरू करवाएं |

अनियमित दिल की धड़कन के कारण

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तेज़ दिल की धड़कन होने के कारण

  • अनियमित दिल की धड़कन होने के अनेक कारण हो सकते हैं। जो व्यक्ति अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान नहीं देते, अधिक खाते-पीते हैं या अल्प मात्रा में भोजन करते हैं, अधिक पौष्टिक भोजन करने वाले जब बिल्कुल शारीरिक श्रम नहीं करते या फिर शारीरिक क्षमता से अधिक परिश्रम करते हैं तो उनके दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
  • आजकल की दौडभाग भरी जिंदगी में अनियमित भोजन, भोजन में अधिक मिर्च-मसालों और अम्लीय रसों से बने खाद्य-पदार्थों का शामिल होना, अधिक घी, मक्खन से बने पकवानों के सेवन से दिल रोगों की उत्पत्ति के साथ दिल की धड़कन भी बढ़ने लगती है। कई ह्रदय रोगों में भी अनियमित दिल की धड़कन हो जाती है।
  • अनियमित दिल की धड़कन के कारणों में ये भी शामिल है – मानसिक तनाव, घबराहट, धुम्रपान एल्कोहल का सेवन, चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन, आरामतलब जीवन, अधिक वजन आदि |
  • संक्रामक रोगों से पीड़ित होने पर भी अनियमित दिल की धड़कन हो सकती है। रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया की बीमारी भी दिल की धड़कन बढ़ने के कारण हो सकता है |
  • स्त्रियां प्रसव के बाद शारीरिक रूप से अधिक कमजोर हो जाती हैं तो उनके दिल की धड़कन बढ़ जाती है। दिल की धड़कन थोड़ी सी मेहनत करने पर तेज़ हो जाती है। सीढ़ियों पर चढ़ते हुए धड़कन तेज़ हो जाती है। शरीर पसीने से भीग जाता है। आँखों के आगे अंधेरा छाने लगता है और रोगी बैठकर आराम करने की कोशिश करता है।
  • बहुत तेज गर्मी खासतौर से लू लगने से भी दिल की धडकन असामान्य हो जाती है, दरअसल मानव शरीर आमतौर पर लगभग 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट के तापमान को बनाए रखता है। तापमान के थोड़ा भी अधिक बढ़ने पर पसीना निकालकर और रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसेल्स) को डाइलेट करके शरीर अपने आपको ठंडा रखने की कोशिश करता है, लेकिन जब पसीना शरीर को ठंडा नहीं कर पाता है और रक्त वाहिका के आकार बढ़ने के कारण दिल की धड़कन तेज हो होकर अनियमित दिल की धड़कन की समस्या हो जाती है |

अनियमित दिल की धड़कन का इलाज

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तेज दिल की धड़कन का उपचार

  • अनार के ताजे पत्तों को 10 ग्राम मात्रा में पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर, उस पानी को छानकर रोजाना सुबह-शाम पीने से अनियमित दिल की धड़कन की बीमारी में बहुत लाभ होता है।
  • अनार का रस 100 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम पीने से तेज़ धड़कन की समस्या होने पर बहुत लाभ होता है।
  • गाजर का रस 200 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन पीने से दिल की कमजोरी दूर होती है जो अनियमित दिल की धड़कन जैसी बिमारियों से ह्रदय की रक्षा करती है।
  • धनिए के 3 ग्राम चूर्ण में 3 ग्राम मिसरी का चूर्ण मिलाकर ताजे जल से सेवन करने पर अनियमित दिल की धड़कन की समस्या में राहत मिलती है।
  • शहतूत का शर्बत बनाकर पीने से दिल की तेज़ दिल की धड़कन सामान्य होती है।
  • बरगद के कोमल हरे पत्तों को 10 ग्राम मात्रा में पीसकर 150 ग्राम जल में मिलाकर, छानकर थोड़ी-सी मिसरी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से अनियमित दिल की धड़कन सामान्य होती है।
  • फालसे 30 ग्राम, काली मिर्च के पांच दानों का चूर्ण और स्वाद के अनुसार सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से तेज़ धड़कन की विकृति खत्म होती है।
  • गर्मियों में फालसे का शर्बत सुबह-शाम पीने से तेज़ धड़कन और गर्मी से मुक्ति मिलती है।
  • ताजी ब्राह्मी का 20 ग्राम रस, 5 ग्राम शहद मिलाकर रोजाना सेवन करने से दिल की कमजोरी दूर होने से तीव्र धड़कन की समस्या का निवारण होता है।
  • आंवला, बहेड़ा, हरड़ और शुष्क ब्राह्मी को 20-20 ग्राम मिलाकर, काली मिर्च 5 ग्राम मिलाकर पीसकर चूर्ण बनाकर इसमें 50 ग्राम मिसरी पीसकर मिला लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण सुबह, 5 ग्राम चूर्ण शाम को गाय के दूध या पानी से सेवन करने से दिल की कमजोरी दूर होती है तथा अनियमित दिल की धड़कन सामान्य होती है।
  • नींबू का रस 15 ग्राम जल में मिलाकर पीने से दिल की जलन और तेज धड़कन में बहुत लाभ होता है। नीबू की शिकंजी बनाकर पीने से भी लाभ होता है।
  • अंगूर खाने से घबराहट दूर हो जाती है। यदि दिल बहुत धड़कता हो तो गुलाब के चूर्ण में बराबर मिश्री मिला लें। एक-एक चम्मच की मात्रा में इस चूर्ण का गाय के दूध से सेवन करें या गुलाब के चूर्ण व धनिया के चूर्ण में बराबर मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच गाय के दूध से दिन में दो बार सेवन करें |
  • अनार के कोमल पत्तों को पीसकर प्रात:सायं पीने से दिल की धड़कन कम होती है। गर्मी के दिनों में कुछ लोगों को घबराहट और बेचैनी महसूस होती है। उस दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ऐसे में गुलाब के फूलो को सुबह धोकर चबाकर खाने से आराम मिलता है ।
  • पके बेलपत्र का गूदा मलाई में मिलाकर रोज खाते रहिये। दिल को ताकत मिलेगी । बेलपत्र का दस ग्राम रस निकालकर गाय के घी में मिलाकर पी जाएँ। एक बार में पूरा आराम न आये तो दो घण्टे बाद एक और मात्रा ले लें। अनियमित दिल की धड़कन
  • सेब का शर्बत भी दिल की घबराहट को दूर करके अनियमित दिल की धड़कन को सामान्य बनाता है। बीज निकालकर 100 ग्राम सेब के टुकड़े काट लें और दो सौ ग्राम रस पानी में उबालें। थोड़ी ही देर में सेब के टुकड़े गल जायेंगे। दो सौ ग्राम मिश्री की चाशनी बना लें और पच्चीस ग्राम नींब निचोड़ दें। इस चाशनी में उबले हुए सेब पानी सहित डाल दें। शर्बत बनाकर पी लें और टुकड़े अलग से खा लें। दिल बैठता हुआ-सा लगे तो यह शर्बत पी लें।
  • सूखे आँवले (यदि ताजा हों तो उन्हें थोड़ा कूट लें, ताकि उनके टुकड़े से हो जायें और फिर छाया में सुखा लें) का चूर्ण करके उसमें बराबर की मिश्री मिलाकर एक साफ सूखी चौड़े मुँह की बोतल में भरकर रख दें। रोजाना इस चूर्ण की एक छोटी चम्मच भर मात्रा सुबह खली पेट तथा रात को सोने से पहले ताजा पानी से लेते रहें। इस साधारण से प्रयोग से अनियमित दिल की धड़कन सामान्य होती है और ह्रदय को शक्ति मिलती है तथा हाई ब्लड प्रेशर में भी काफी फायदा पहुँचता है।
  • पपीता भारी प्रोटीनों को जल्दी पचाने में मदद करता है। दिल के मरीजों के लिये यह खासतौर से फायदेमंद है। इसके अतिरिक्त प्याज, पिस्ता धनिया आदि का सेवन भी लाभकारी होगा | यह पढ़ें – हृदय रोग में भोजन : कौन-कौन से फल और सब्जियां खाएं
  • पौष्टिक आहार और औषधियों के सेवन से शारीरिक शक्ति को विकसित करके दिल की धड़कन को सामान्य अवस्था में लाया जा सकता है। सुबह और शाम को किसी पार्क में या नदी के किनारे घूमने के लिए जाने से भी बहुत लाभ होता है। शुद्ध हवा (ऑक्सीजन) के शरीर में पहुंचने से शक्ति और स्फूर्ति विकसित होने से अनियमित दिल की धड़कन सामान्य होती है।

अनियमित दिल की धड़कन के लिए आयुर्वेदिक उपाय

  • अर्जुन की छाल का चूर्ण 3 ग्राम, गाय का घी और मिसरी 10-10 ग्राम मिलाकर सेवन करने से अनियमित दिल की धड़कन समस्या ठीक होती है।
  • अर्जुन की छाल 500 ग्राम को पीसकर उसमें 125 ग्राम छोटी इलायची 20 ग्राम को मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से तेज धड़कन और घबराहट दूर होती है।
  • असगंध और बहेड़ा दोनों को पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर हल्के गर्म पानी से सेवन करने पर दिल की तेज़ धड़कन और कमजोरी ठीक होती है।
  • अर्जुन की छाल का चूर्ण 10 ग्राम को 500 ग्राम दूध में उबालकर खोया बना लें। उस खोये के वजन के बराबर मिसरी का चूरा मिलाकर, प्रतिदिन 10 ग्राम खोया खाकर दूध पीने से दिल की तेज़ धड़कन सामान्य होती है।

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