अलसी के बेहतरीन औषधीय गुण तथा फायदे – Health Benefits of Flaxseeds

अलसी (flax seed) कई रोगों की रामबाण दवा है, अलसी के नियमित सेवन से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए इसे जीने की राह अथवा लाइफ लाइन तक कहा गया है। यह हमें अनेक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। चरक संहिता में इसे कीटाणुनाशक माना गया है। अलसी में पाये जाने वाले मुख्य पौष्टिक तत्व ओमेगा-3 वसा अम्ल (फैटी एसिड), एल्फा लिनोलेनिक एसिड, लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर सबसे अधिक हैं। अलसी ओमेगा 3 वसा अम्ल का धरती पर सबसे बड़ा स्रोत है। शाकाहारी व्यक्तियों के लिए इसका अलसी से अच्छा कोई स्रोत नहीं है जबकि माँसाहारी व्यक्तियों को यह तत्व मछली से मिल जाता है। अगर आप स्वस्थ व निरोगी रहना चाहते हैं तो रोजाना कम से कम 2 चम्मच अलसी को अपने आहार में जरुर शामिल करें | अलसी में विटामिन बी समूह, सेलेनियम, कैल्शियम, मैगनीशियम, कॉपर, जिंक, पोटेशियम, फोलेट, लाइकोपीन, ल्यूटिन, जियाजेथिन आदि तत्व पाये जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) ने अलसी को ‘सुपर स्टार फूड” घोषित किया है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने स्वास्थ्य पर शोध कर कई पुस्तकें लिखी तथा अलसी के चमत्कारी गुणों को पहचाना और अपनी एक पुस्तक में अलसी के गुणों पर विस्तार से लिखा है |

अलसी एक चमत्कारी आहार है। यह स्वास्थ्यवर्धक, सौन्दर्यवर्धक और आयुवर्धक है। यह हमारे शरीर के विभिन्न अंगों, विशेषतौर पर मस्तिष्क, स्नायुतन्त्र व आँखों के विकास व उनके ठीक से संचालन में महत्त्वपूर्ण योगदान करती है।

अलसी के सेवन से कुछ महीने में ही जिंदगी में आश्चर्यजनक बदलाव आता देखा गया है। शरीर अपार शक्ति, उत्साह का संचार, शरीर में चुस्ती, फुर्ती, आत्मविश्वास भर जाता है। पिछले कुछ समय से अलसी के बारे में पत्रिकाओं, अखबारों, इंटरनेट, टी. वी. आदि पर चर्चा हो रही है। शहरों में अलसी के व्यंजन, रोस्टेड अलसी, बिस्कुट, ब्रेड आदि उपलब्ध हैं।

गुणकारी अलसी में ओमेगा-3 के अलावा दूसरा महत्त्वपूर्ण पौष्टिक तत्व लिगनेन होता है। अलसी में लिगनेन तत्व अन्य खाद्यान्नों से कई सौ गुना ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। लिगनेन जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, एन्टी फंगल और कैंसर रोधी होता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। साथ ही यह शक्तिशाली एन्टी ऑक्सीडेंट भी है।

ओमेगा फेटी एसिड क्यों है जरुरी – हमारे शरीर के ठीक प्रकार से संचालन के लिए ओमेगा-3 व ओमेगा 6 दोनों बराबर यानि 1-1 अनुपात में होना चाहिये। ओमेगा-3 अच्छा तत्व है तो ओमेगा-6 खराब तत्व है। ओमेगा-6 की मात्रा बढ़ने से शरीर में इन्फ्ले मेशन (सूजन) फैलता है तो ओमेगा 3 इन्फ्लेमेशन (सूजन) दूर करता है, मरहम लगाता है। ओमेगा-6 हमें मानसिक तनाव, सिरदर्द, डिप्रेशन, माइग्रेन, अनिद्रा आदि का शिकार बनाता है तो ओमेगा 3 मन को प्रसन्न रखता है, गुस्से को दूर करता है, स्मरण शक्ति व बुद्धिमत्ता बढ़ाता है। ओमेगा 6 उम्र कम करता है तो ओमेगा-3 उम्र बढ़ाता है। ओमेगा-6 शरीर में रोग पैदा करते हैं तो ओमेगा-3 रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। अलसी के तेल में अल्फा लिनोलेनिक एसिड (A.L.A.) नामक ओमेगा 3 वसा अम्ल होता है। A.L.A. हमारे शरीर में नहीं बन सकते, इसलिए इनको भोजन द्वारा लेना बहुत आवश्यक है। पिछले कुछ दशकों से हमारे भोजन में ओमेगा-6 की मात्रा बढ़ती जा रही है और ओमेगा 3 की कमी होती जा रही है। मल्टीनेशनल कम्पनियों द्वारा बेचे जा रहे फास्ट फूड व जंक फूड ओमेगा-6 से भरपूर होते हैं। बाजार में उपलब्ध सभी रिफाइण्ड तेल भी ओमेगा-6 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। शोध से पता चला है कि हमारे भोजन में ओमेगा-3 बहुत कम और ओमेगा-6 प्रचुर मात्रा में होने से अनुपात बिगड़ रहा है। जिसकी वजह से उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा आदि जैसे रोग तेज़ी से बढ़े है | इस आर्टिकल में हम अलसी के गुणों की चर्चा करेंगे इससे अगले आर्टिकल में अलसी के घरेलू नुस्खे बतायेंगे जिनसे कई रोगों का उपचार किया जाता है तथा रोगों से बचाव भी होता है |

अलसी के बेहतरीन औषधीय गुण

alsi ke fayde aushadhi gun labh अलसी के बेहतरीन औषधीय गुण तथा फायदे

अलसी खाने के फायदे

  • अलसी ऊर्जा, स्फूर्ति व जीवटता (Vitality) प्रदान करती है।
  • तनाव के क्षणों में शांत व स्थिर बनाए रखने में सहायक है।
  • कैंसर रोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाती है।
  • हृदय सम्बन्धी रोगों के खतरों को कम करती है।
  • रक्तशर्करा (Blood Sugar) और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करती है।
  • जोड़ों का कड़ापन कम करती है। अतः गठिया, ऑस्टियोपोरासिस (हड्डियों का कमजोर एवं खोखला होना) इत्यादि रोगों में इसका तेल लाभप्रद है।
  • यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करती है।
  • त्वचा को स्वस्थ बनाए रखती है एवं त्वचा का सूखापन दूर करती है।
  • सफेद दाग, खुजली, मुँहासे, एग्जिमा, सोराइसिस आदि से बचाती है।
  • अलसी के सेवन से बालों व नाखून में वृद्धि होती है तथा वह स्वस्थ व चमकदार बनते है।
  • इसका नियमित सेवन महिलाओं में रजोनिवृत्ति सम्बन्धी परेशानियों से राहत प्रदान करता है।
  • अलसी के सेवन से मासिक धर्म के दौरान ऐंठन कम कम होती है जिससे यह गर्भाशय (Uterus) को स्वस्थ रखता है।
  • अलसी के सेवन से त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर कम दिखता है।
  • अलसी का सेवन भोजन से पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है।
  • इसके फाइबर (Dietary Fiber) पाचन को आसान बनाते हैं। इस कारण वजन नियन्त्रित करने में अलसी के गुण महत्त्वपूर्ण है।
  • अलसी चयापचय की दर को बढ़ाती है एवं पेट को स्वस्थ रखती है।
  • प्राकृतिक रेचक गुण होने से यह पेट को साफ रखती है। अतः कब्ज, बवासीर, भंगदर इत्यादि रोगों में अलसी के सेवन से विशेष लाभ मिलता है।
  • अलसी के तेल से एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा सोचने-समझने की शक्ति बढती है। नियमित रूप से अलसी के तेल के सेवन से मस्तिष्क सम्बन्धी कोई विकार नहीं होता है।
  • जलने या घाव की अवस्था में इसको दूध में उबालकर लेप करने से तथा तेल की मालिश करने से आराम मिलता है।
  • डायबिटीज के रोगी को ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन युक्त अलसी के 30 मिलीग्राम तेल में 80-100 मिली लीटर दही या पनीर को अच्छी तरह फेंटकर फलो व मेवों के साथ लेना चाहिए। अलसी के दही या पनीर वाले व्यंजन को ‘ओम खण्ड’ कहा जाता हैं।
  • अलसी गुर्दे के ऊतकों को नई ऊर्जा देती है।
  • अलसी में कार्बोहाइट्रेड अधिक होता है तथा शक्कर की मात्रा न्यूनतम होती है।
  • कमजोरी में, बच्चों व छात्रों के स्वास्थ्य के लिए ‘नीलमधु’ आदर्श व स्वास्थ्य वर्द्धक उपयोगी व्यजंन है। अलसी (नील पुष्पी) और शहद से बना स्वास्थ्यवर्द्धक एवं स्वादिष्ट व्यंजन को नीलमधु कहते हैं।
  • जब बच्चे की लम्बाई बढ़ने की उम्र हो तब उसे अलसी का सेवन करवायें। अलसी लम्बाई बढ़ाने में सहायक है।
  • एलर्जी, गाउट, ऑस्टियोपोरासिस आदि रोगों को दूर करने में अलसी के गुण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
  • ऑटोइम्यून सिस्टम से जुड़े हुए रोग और सूजन लाने वाले रोगों में अलसी के उपयोग से चमत्कारी फायदे मिलते हैं।
  • अलसी को लहसुन के रस में पकाकर उसे कान में डालने से कान की सूजन मिटती है।
  • अलसी के बीजों को ठण्डे पानी में पीसकर लेप करने से सिर दर्द में लाभ मिलता है।
  • अलसी के बीजों को ईसबगोल के साथ पीसकर लगाने से जोड़ों के दर्द में बहुत लाभ होता है।
  • अलसी का तेल अर्श (बवासीर) रोगी को पेट साफ करने के लिए दिया जाता है।
  • अलसी के तेल का धुआँ कफ दूर करता है |
  • जानिए अलसी के 41 घरेलू नुस्खे जो कई रोगों का करे उपचार
  • अलसी में तेल की मात्रा अधिक होने से इसके क्वाथ का उपयोग बस्ति (एनिमा) में होता है।
  • श्लैष्मिक कलाओं (Mucous Membrane) के जलन में अलसी का फाण्ट बहुत फायदेमंद है। (पानी को उबालकर उसमें अलसी चूर्ण डालकर गैस बन्द कर दें, फिर कुछ समय बाद उसे छान लें। इस तरह तैयार पेय, अलसी का‘फाण्ट’ कहलाता है।)
  • इसके फूल हृदय रोग में प्रयोग किये जाते हैं। अलसी के फूलो का पेस्ट बनाकर 3 से 5 ग्राम सेवन करें।
  • वात प्रधान, वातरक्त (गठिया बाई) में दर्द को दूर करने के लिए अलसी को दूध में पीसकर लेप करें।
  • रक्तचाप—अलसी रक्तचाप को संतुलित व नियन्त्रित रखती है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल वृद्धि से बचा जा सकता है। अलसी हमारे रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (D.L. Cholesterol) की मात्रा को बढ़ाती है। ट्राइग्लिसराइड्स व खराब कोलेस्ट्रॉल (L.D.L. Cholesterol) की मात्रा को कम करती है। अलसी दिल की धमनियों में खून के थक्के बनने से रोकती है तथा धमनियों में जमे कोलेस्ट्रॉल को साफ करती है। अलसी में अल्फालिनोलेनिक एसिड (Alpha-Linolenic Acid) होने के कारण हृदय घातक व ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों के लिए यह ढाल का काम करती है। अलसी सेवन करने वालों को दिल की बीमारियों के कारण अकस्मात मृत्यु नहीं होती। हृदयाघात से सुरक्षा मिलती है। यह हृदयगति को नियन्त्रित रखती है और वेन्टीकुलर एरिया से होने वाली मृत्युदर को बहुत कम करती है।
  • मोटापा—अलसी से मोटे शरीर वाले व्यक्ति को बहुत फायदा होता है। अलसी में फाइबर (रेशा) की प्रचुरता के कारण इसके सेवन से पेट लम्बे समय तक भरा रहता है। देर तक भूख नहीं लगती। इसमें रेशा ज्यादा होने से पानी ज्यादा पीना पड़ता है इसलिए पानी पीने से पेट भरा रहता है। यह वजन भी कम करता है क्योंकि बुनियादी चयापचय दर (BMR) बढ़ाता है, वसा कम करता है, खाने की इच्छा को कम करता है।
  • कब्ज–27% रेशा युक्त अलसी कब्ज के लिए ईसबगोल से ज्यादा अच्छी दवा है। इसके रेशे घुलनशील व अघुलनशील दोनों तरह के होते हैं। यह पेट की सफाई का प्राकृतिक आहार है। कब्ज में आँतों के लिए चिकनाई (तेलियावन) (Lubrication) का काम करती है। अलसी के काढ़े का एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। पेट के रोगों में इसका तेल पिलाया जाता है। कब्ज होने पर अलसी के सेवन से पहले दिन ही राहत मिल जाती है।
  • अलसी पेशाब अधिक लाती है इसके कारण प्रमेह रोग में बहुत गुणकारी होती है।
  • प्लूरिसी रोग में जब पसलियों में दर्द होता है तो अलसी का लेप करने से दर्द खत्म हो जाता है।

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