2 साल से 4 साल तक बच्चों को कब्ज के घरेलू इलाज तथा कारण

बच्चों को कब्ज होना एक आम समस्या है। माता पिता बच्चे को सालो साल एक से दूसरे डॉक्टर के पास दिखाते रहते हैं पर कब्ज वैसी ही रहती है क्योंकि वो बच्चो में कब्ज होने के कारणों को नहीं जानते है । खराब जीवन-शैली के कारण यह समस्या छोटे बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। कब्ज के कारण ज्यादा गैस बनना, बदहजमी, भूख न लगना, पेट दर्द व कब्ज जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

कब्ज से हमारा मतलब है, पोटी का सख्त आना, जिसे निकालने में परेशानी या दर्द हो।

सामान्यत: एक साल तक की उम्र के बच्चों को कब्ज नहीं होती है। पर इनमें पोटी करने के प्रकार काफी अलग हो सकते हैं | कुछ शिशु दिन में केवल एक बार मल त्यागते हैं तो कुछ दूध पीने के बाद हर बार थोड़ा-थोड़ा मल त्यागते हैं। यहाँ तक कि 7 दिन में एक बार पोटी करना भी सामान्य है, रोग नहीं है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चे का वजन बढ़ रहा हो और पेट फूलना या उलटी जैसे बीमारी के लक्ष्ण न हों। एक वर्ष की उम्र के बाद खान-पान में परिवर्तन, Toilet Training (टॉयलेट ट्रेनिंग) और बच्चे का चलना-फिरना, खेलना व स्कूल जाना कई ऐसे बदलाव ले आता है, जोकि बच्चे को कब्ज की ओर ले जाते हैं। आइए जानते हैं कि कौन कौन से कारण बच्चों में कब्ज को लाता हैं या बढ़ाता है। सबसे पहले इन करणों को समझना कब्ज ठीक करने के लिए जरूरी है |

बच्चों को कब्ज के होने के कारण तथा इलाज 

2 साल से 4 साल तक बच्चों को कब्ज के घरेलू इलाज

  • मल त्यागने की पहली इच्छा को अनदेखा करना—बच्चे छह महीने से एक साल की उम्र के बीच मल त्यागने को इच्छानुसार रोकने का सामर्थ्य पा लेते हैं। प्राकृतिक तौर पर जब मल त्यागने की पहली इच्छा होती है, उसे काबू कर मल न त्यागने से मल शरीर के भीतर रह जाता है। इस प्रकार शरीर में ज्यादा समय से पड़े हुए मल में से शरीर पानी सोख लेता है और उसकी सख्त डली बन जाती हैं। यदि इसी प्रकार मल शरीर में रुकता रहे तो यह डली और अधिक सख्त व बड़ी हो जाती है। यह बाहर निकलते समय दर्द करती है। इस दर्द के कारण बच्चा मल को भीतर ही रोकने का प्रयास करता है और कब्ज की समस्या बढती जाती है।
  • यूरोपियन स्टाइल के लैट्रिन के प्रयोग से Puborectalis Sphieten कस जाता है और मल निकलने का मार्ग रुक जाता है। भारतीय स्टाइल के लैट्रिन के प्रयोग से Puborectalis अवरोधक ढीला हो जाता है और मल सीधा निकल जाता है। इसलिए बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए यदि हो सके तो भारतीय सटाइल की लेट्रिन पॉट का प्रयोग करवाएं |
  • शुरुआत में बच्चा मल को कई कारणों से रोक सकता है, जैसे कि— खेल या अन्य गतिविधि में व्यस्त होना।
  • स्कूल में शौचालय जाने की अनुमति न मिलना।
  • स्कूल में शौचालय के इस्तेमाल में हिचकना। बाद में मल त्यागते समय होने वाला दर्द, मल त्यागने में अनिच्छा का मुख्य कारण बन जाता है।
  • दिनभर में मल त्यागने के लिए समय की कमी—घर में रह रहे बच्चों को शौच जाने के लिए समय की कमी नहीं होती, पर आजकल छोटे-छोटे 2-3 साल उम्र के बच्चे Play School (प्ले स्कूल) जाने लगते हैं। अकसर स्कूल के लिए तैयार होने वाले बच्चों के पास शौच के लिए समय का अभाव रहता है। माता-पिता का अधिक समय उन्हें कपड़े पहनाने, दूध पिलाने या नाश्ता कराने व बस पकड़ने या समय पर स्कूल छोड़ने की जल्दी में निकल जाता है। शौच में पर्याप्त समय बच्चे का बैठ पाना मुश्किल होता है। ऐसे कम समय में या तो बच्चा शौच जाता ही नहीं या फिर थोडा सा मल करके आ जाता है, पर पेट ठीक से साफ नहीं होता। इससे भी माता-पिता धोखे में रहते हैं कि बच्चे को रोज मल या शौच हो रहा है। उनका ध्यान इस और तब जाता है, जब सख्त मल से बच्चे को दर्द होने लगता है।
  • माता-पिता द्वारा छोटी उम्र के बच्चों पर Toilet Training का ज्यादा दबाव बनाने से भी बच्चा मल को अंदर रोकने लगता है। स्कूल से सहयोग लें कि बच्चे को शौच के लिए जाने दें और उसकी निजता (Privacy) का भी ध्यान रखें। इससे बच्चा स्कूल में मल नहीं रोकेगा।

बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए कुछ सुझाव

बच्चों के भोजन में दूध की अधिकता व फाइबर (फल, सब्जियाँ) की कमी भी कब्ज का एक मुख्य कारण है। उपाय : यदि कब्ज केवल कुछ ही दिन की है तो ये उपाय ही कारगर रहेंगे। पर यदि कब्ज का रोग पुराना है तो इन उपायों के साथ डॉक्टरी सलाह जरूर लें। डॉ. को खास तौर पर मल त्यागते समय यदि दर्द होता हो, तो जरूर बताएँ। साथ ही कब्ज से परेशान बच्चो की आँतों में रुकावट, जैसे Herchsprung disease व Thyroid थायरॉयड हार्मोन की कमी के बारे में विशेषज्ञ डॉक्टर से जाँच करवा सकते हैं। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं के साथ ये टिप्स भी बहुत फायदेमंद होते हैं |

  • समय दें: बच्चे को रोज 15-20 मिनिट के लिए दिन में दो बार शौच के लिए बिठाएँ। मुख्यतः बच्चे को नाश्ते व शाम/रात का खाना खाने के एक घंटे के भीतर बिठाएँ। इस समय Gestrocohi Relheq Actiuity की वजह से आँतों में हो रही हलचल मल त्यागने में अति लाभदायक होती है। शुरू-शुरू में चाहे मल न भी निकले, इस प्रकार बैठने की दिनचर्या बनाए रखने से यह मल निकलने लगेगा। अबः बच्चे को रोज बिठाएँ। बिठाने में जबरदस्ती न करें, समझा-बुझाकर बिठाएँ। इस समय बच्चे को गाने या कहानी सुनाकर या बिठाए रख सकते हैं।
  • ठीक मुद्रा : बच्चे को भारतीय स्टाइल की लैट्रिन पर बैठाएँ। यदि बच्चे के हिसाब से यह बड़ी हो तो अखबार इत्यादि बिछाकर दो ईंटों पर बैठाएँ। इस प्रकार बैठने से बच्चे का पेट ठीक से दबकर खाली होगा और वह पैरों से जमीन पर जोर लगाकर मल निकाल पाएगा। European Style Pot या Potty Chairs बच्चों के लिए इन्हीं कारणों से बच्चों में कब्ज बनाते हैं।
  • किसी प्रकार की Toilet Training फिलहाल छोड़ दें। बच्चे को मल त्यागने के लिए प्रोत्साहित करें। गुस्से, डाँट या दबाव से यह न करवाएँ।
  • दूध देना कम करें। पूरे दिन (24 hrs.) में आधे लीटर से ज्यादा दूध न दें।
  • पानी भरपूर मात्रा में पिलायें |
  • फल जैसे पपीता, संतरा, कीनू, सेब इत्यादि दें। खाने में हरी पत्तेदार सब्जियाँ दें।
  • फल-सब्जियों का सेवन पूरे परिवार को बढ़ाना चाहिए, तभी बच्चे भी इन्हें खायेंगे वरना बच्चा कुछ समय में फिर से चीजें खायेगा जो परिवार के बाकी लोग खा रहें है |
  • मूंगफली, ड्राईफ्रूट्स-काजू, पिस्ता, बादाम, Popcorn इत्यादि दें। ये सब 4 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को दे सकते हैं।
  • मैदे से बनी चीजे जैसे मैगी, पास्ता, ब्रेड, बर्गर, पिज़्ज़ा, नूडल्स जैसी चीजे खाने में बिलकुल नहीं देना चाहिए |

घरेलू इलाज के लिए कुछ उपाय  

  • कैस्टर ऑयल यानि अरंडी का तेल बच्चों को कब्ज से छुटकारा दिलवाने के लिए एक अच्छा उपाय है अरंडी का तेल बहुत गाढ़ा होता है और इसमें तेज गंध होती है, इसलिए लोग इसे अन्य तरल के साथ मिलाकर इसका सेवन करते हैं। फलों के रस या दूध के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है। एक गिलास दूध के साथ एक चम्मच तेल मिलाएं और कब्ज होने पर अपने बच्चे को दें। हालांकि, अरंडी के तेल का सुझाव उन बच्चों के लिए दिया जाता है, जो 2 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। इसके अलावा, इसे बड़ी सावधानी के साथ और केवल चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि भले ही यह कब्ज का इलाज करता है पर फिर भी इससे मतली और उल्टी हो सकती है।
  • बच्चों को दूध के साथ शहद प्रतिदिन पिलाने से उनकी कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।
  • 6 महीने से अधिक उम्र के बच्‍चों में कब्‍ज से राहत दिलाने में टमाटर भी बहुत फायदेमंद होते हैं। आप टमाटर का रस दे सकती हैं। एक छोटे टमाटर को एक कप पानी में उबाल लें और इसे ठंडा कर के छानने के बाद इस रस की शिशु को रोज तीन से चार चम्‍मच पिलाएं।
  • बच्चों का कब्ज एक चम्मच अंगूर का रस पिलाने से छोटे बच्चों में कब्ज की समस्या ठीक होती है |
  • बच्चों में कब्ज के लिए जैतून का तेल एक प्राकृतिक उपचार है। इसका सेवन करने का सही तरीका इसे थोड़े संतरे के रस के साथ मिलाकर पीना है। एक चौथाई कप तेल में एक चौथाई कप संतरे का रस मिलाएं और इसे बच्चे को पिलायें |
  • बच्चों को कब्ज से छुटकारा दिलाने के लिए रात में गुनगुने दूध के साथ इसबघोल (फाइबर) दे सकते हैं। इससे मल नरम आएगा।

चूँकि कब्ज सिर्फ एक कारण से नहीं होता, इसलिए इसके इलाज में भी अनेक कारणों का उपाय साथ-साथ करना होगा।

child constipation causes, symptoms and home remedies for treatment.

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