मधुमेह के लक्षण : पुरुषों तथा महिलाओं में पूर्व मधुमेह, डायबिटीज के संकेत

भारत को मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। इस बीमारी को कई नामो से जाना जाता है जैसे -शुगर डायबिटीज, चीनी रोग, मीठा मूत्र आदि | खानपान की खराबी और शारीरिक मेहनत की कमी की वजह से  पिछले दशक में मधुमेह के रोगियों की संख्या दुनिया के हर देश में बढ़ी है। भारत में इसका प्रभाव सबसे अधिक हुआ है | जीवन-शैली में अनियमितता मधुमेह का सबसे बड़ा कारण है। दस साल पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र 40 साल थी, जो अब घटकर 25 से 30 साल हो चुकी है। 15 साल के बाद ही बड़ी संख्या में लोगों को मधुमेह का रोग होने लगा है। कम उम्र में इस बीमारी के होने का सीधा मतलब है कि 40 की उम्र आते-आते ही बीमारी के कई साइड इफ़ेक्ट को झेलना पड़ता है। डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी को मधुमेह के लक्षण शुरुवात में नहीं दिखते लेकिन रक्त में ग्लूकोज का बढ़ता हुआ स्तर शरीर के भीतरी अंगो तथा हृदय व किडनी आदि को भी खराब कर देता है इसलिए इसे “धीमी मौत और साइलेंट किलर “ भी कहते हैं। यह एक लंबे समय तक चलने वाला रोग है लगभग जीवन भर लिए यह बीमारी हो जाती है इसके रोगी प्राय: 30 -40 वर्ष तक इस रोग के साथ जीवित रहते हैं । यदि रोगी अपनी ब्लड ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रखे तथा पूरी देखभाल करे तो रोग उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है । वैसे मधुमेह रोगियों के लिए तो नियमित खानपान ही रोग को काफी हद तक संभाल लेता है किंतु व्यायाम ,तनाव प्रबंधन, योग तथा रोग की पूरी जानकारी के साथ रोग का निदान और भी आसान हो जाता है । यदि इस रोग से संबंधित इन बातों पर पूरा ध्यान दिया जाए तो रोगी को दवाओं का सेवन भी नहीं करना पड़ता है । इस विषय को लेकर हमने हर संभव जानकारी को आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है तथा आगे भी करते रहेंगे |

मधुमेह के लक्षण : शुगर बढ़ने के लक्षण : डायबिटीज के लक्षण और निदान

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मधुमेह के लक्षण

इस रोग की सबसे अजीब बात यह है कि कई बार मधुमेह तो हो जाता है, मगर इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। अंदर ही अंदर शरीर को काफी नुकसान पहुँचाने के बाद मधुमेह के लक्षण दिखाई देते है | फिर भी इस आर्टिकल में हमने मधुमेह के उन सब लक्षणों को बताने का प्रयास किया है जो इस बीमारी के शिकार लोगो अक्सर होते है, अगर किसी व्यक्ति को नीचे लिखे हुए लक्षणों में से कोई भी लक्षण लंबे समय तक है, तो उसको मधुमेह की जांच जरुर करवा लेनी चाहिए।

  • मधुमेह के लक्षण में बार-बार पेशाब करना भी रोगी होने का संकेत होता है | रात में 2 से 4 बार तक रोगी पेशाब करने के लिए उठता है |
  • बार-बार पानी पीने का मन करना। पानी पी लेने के बाद जल्दी ही गला, होंठ सूखने लगना। फिर पानी पीने की इच्छा हो जाती है।
  • सामान्य व्यक्ति से अधिक भूख लगना। भूख ऐसी लगना कि इसका सहन कर पाना कठिन हो जाता है।
  • पेट भर भोजन कर लेना और जब भूख लगे, तभी खा लेना। फिर भी शरीर का वज़न घटता जाता है और कमजोरी बनी रहती है यह भी मधुमेह के लक्षण में शामिल होता है |
  • जिसे मधुमेह का रोग हो, उस व्यक्ति का घाव आसानी से नहीं भरता। इसमें स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा घाव भरने में अधिक समय लगता है। कोई चोट लग जाए या जूतों ने काट लिया है और जख्म आसानी से भरता नहीं है |
  • ऐसा व्यक्ति दिनों दिन कमजोरी महसूस करने लगता है।
  • मसूड़ों में अकसर दर्द रहता है |
  • पैरो की पिंडलियों में दर्द बना रहता है तथा टांगे बेजान सी महसूस होती है |
  • जिसकी नज़र तेज़ी से कमजोर होने लगे तथा आंखों के सामने धुंधलका छाने लगे, उसे भी मधुमेह होने की संभावना हो सकती है।
  • आँखों की कमजोरी की वजह से बार-बार चश्मे का नंबर बदलवाने की जरुरत महसूस होना |
  • यदि किसी का ब्लड प्रेशर अधिक रहे तथा छाती में दर्द हो, तो उसे भी चेक करवाना चाहिए।
  • शरीर के किसी भाग में अधिक खुजली महसूस हो, तो यह भी मधुमेह के लक्षण में शामिल है।
  • वजन अचानक से ही बहुत बढ़ने या घटने लगता है |
  • स्किन या चर्म से संक्रमित बीमारी, त्वचा का सूखापन, लाल चकत्ते उभरना |
  • शरीर के अंदरवाले हिस्सों (जननांगों), जांघों और पेशाब की जगह पर खुजली होना |
  • स्त्रियों में बार-बार गर्भपात होना भी मधुमेह के लक्षणों में शामिल है |
  • हाथ-पैरों में सनसनाहट, चुभन होना |
  • फोड़े-फुसियों का होना |
  • इन सब संकेतो के अतिरिक्त मानसिक रूप से थके-थके रहना, चक्कर आना, चिडचिडा स्वभाव हो जाना, कुछ काम न करने की इच्छा होना तथा गुस्सा अधिक आना भी मधुमेह के लक्षण हो सकते है |
  • ईस्‍ट संक्रमण- छोटी बच्‍चियों में ईस्‍ट संक्रमण भी हो सकता है। यहां तक कि जो शिशु डायपर पहनते हैं उन्‍हें भी ईस्‍ट की वजह से घाव हो सकते हैं।
  • आम तौर पर मधुमेह के लक्षण सामने नहीं आते है पर किसी दुर्घटनाग्रस्त होने पर खून चेक होता है, तब इस रोग के होने का पता चलता है। किसी प्रकार की भी डॉक्टरी जांच में, रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य से काफी अधिक सामने आने पर मधुमेह के होने की पुष्टि हो जाती है।

आखिर मधुमेह रोग है क्या ?

डायबिटीज पूरी तरह से लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई बीमारी है। एलोपैथिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार हमारे खाने निकली ग्लूकोज की सामान्य मात्रा 100 मि.ली. रक्त में 70 से 120 मि.ग्रा. की मानी जाती है।) के स्तर को बनार रखने में अम्नाशय ग्रंथि (जिसे पैंक्रियाज कहा जाता है) के द्वारा अंत:स्रावी रस इंसुलिन की मुख्य भूमिका है। यह विशेष ग्रंथि पेट के बाएं भाग में स्थित है। हम जो भी भोजन लेते हैं और उस आहार के पाचन के बाद जैसे ही रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है, तब इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अग्नाशय से इंसुलिन का स्राव बढ़ने लगता है। इंसुलिन के प्रभाव से ग्लूकोज हजम होकर शरीर में ऊर्जा के रूप में बदल जाता है। यदि रक्त में अधिक ग्लूकोज मिल जाता है, तो लीवर उसे ग्लाइकोजिन के रूप में भंडार कर लेता है। यह ग्लाइकोजिन उस समय काम में आता है, जब दो भोजनों के बीच अधिक अंतर आ गया हो, उपवास या ज्यादा मेहनत के कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर घटने लगता है, तब यह एकत्रित ग्लाइकोजिन फिर से ग्लूकोज के रूप में परिवर्तित होकर रक्त में अपने सामान्य स्तर को बनाए रखता है। ग्लूकोज का पाचन शरीर में न होने के कारण शरीर भी गलने लगता है। शरीर में पहले से जमा प्रोटीन वसा के भंडार भी ग्लूकोज के रूप में परिवर्तित होकर मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाते हैं। इसकी वजह से शरीर दिनोंदिन खराब होता जाता है और अनेक बीमारियाँ (जैसे-स्नायु विकृति, संक्रमण, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, गुर्दो के विकार, यौन समस्याएं और आँखों की बीमारियाँ आदि) शरीर में होने लगती हैं।

डायबिटीज को आसान भाषा में समझने के लिए आप इसको कुछ यूँ समझे की- शुगर को पचाने के लिए शरीर में इन्सुलिन कुदरती तौर पैदा होता है लेकिन मधुमेह से पीड़ित मरीज में इन्सुलिन या तो बहुत कम निकलता है या बिलकुल ही निकलना बंद हो जाता है जिससे शुगर सारे शरीर में जगह-जगह जमने लगती है और सभी अंगो को एक-एक करके खराब करने लगती है | यहाँ शुगर का अर्थ केवल चीनी नहीं है शुगर लगभग सभी खाने पीने की चीजों में पहले से ही मौजूद होती है, तकरीबन सभी फलों, सब्जियों, नॉन वेज में यह कम या अधिक मात्रा में कुदरती तौर पर मौजूद होती ही है इसलिए आप चाहकर भी इसके सेवन से नहीं बच सकते है, क्योंकि आप भोजन तो नहीं छोड़ सकते हैं ना |

थोड़े बहुत मधुमेह के लक्षण दिखाई दें तो शरीर की नियमित जांच करें तथा निम्नलिखित में से कोई भी संकेत मिलने पर डॉक्टर से संपर्क करें :

  • त्वचा का रंग, चमक या मोटाई में परिवर्तन।
  • कीटाणु-संक्रमण के शुरुवाती लक्षण जैसे कि लालीपन, सूजन, फोड़ा या छूने से त्वचा गरम हो।
  • योनि या गुदा-मार्ग, बगलों या स्तनों के नीचे तथा उंगुलियों के बीच खुजलाहट हो, जिससे फफूंदी संक्रमण की संभावना का संकेत मिलता हो |

ऐसे व्यक्ति को मधुमेह होने का अधिक खतरा है, यदि :

  • वह ऐसे परिवार से है, जिसमें अन्य लोगों को मधुमेह हुआ है।
  • उसका वजन सामान्य से अधिक है।
  • उसकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है।
  • जो अधिक मेहनत नहीं करता हो अर्थात आराम तलब जीवन जीने वाले व्यक्ति ।
  • गर्भावस्था के दौरान मधुमेह (गर्भावधि मधुमेह) हुआ था अथवा उसके शिशु का वजन, जन्म के समय 9 पाउंड अथवा 4 किलोग्राम या इससे अधिक था।

पूर्व मधुमेह के लक्षण ( प्री-डाइबिटीज़ )

यह उस दशा को कहते हैं जब खून में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, मगर इतना ऊंचा भी नहीं कि उसे मधुमेह कहा जा सके। अगर किसी व्यक्ति को प्री-डाइबिटीज़ है, तो वह व्यक्ति बिना इंसुलिन निर्भर डाइबिटीज़ और इससे जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं, जैसे कि दिल की बीमारी, स्ट्रोक, अंधापन, गुर्दो की खराबी और नसों की खराबी होने की अधिक संभावना है। इस मधुमेह के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और शुरुवाती मधुमेह के लक्षण जैसे साफ़ दिखाई नहीं देते है। कई लोगों में कोई भी लक्षण नजर नहीं आते है। अधिकतर लोगों में रोग का पता खून का ग्लूकोज़ जांचने पर ही होता है। यह रोग उन लोगों में अधिक पाया जाता है, जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है या जो 40 साल से ऊपर हैं, जिनका वज़न अधिक होता है |

  • थकान लगना।
  • बार-बार पेशाब आना।
  • लगातार प्यास लगी रहना।
  • अस्पष्ट दृष्टि।
  • अधिक पसीना आना |
  • त्वचा या जननांगों में खुजली होना।
  • घाव भरने में बहुत देर लगना ।
  • हाथ या पैरों में जड़ता या झुनझुनाहट होना भी पूर्व मधुमेह के लक्षण है।
  • टाइप-1 डायबिटीज में बार-बार बहुत मात्रा में पेशाब आता है और बार-बार प्यास लगती है। भूख भी अधिक लगती है, फिर भी वजन घटता जाता है। शरीर कमजोर हो जाता है। इसके साथ-साथ कई अस्पष्ट लक्षण भी दिख सकते हैं जैसे, हर समय थके-थके रहना, कमजोरी महसूस करना, स्वभाव के विपरीत बात-बात पर खीझना, अंगों का सुन्न पड़ जाना, हाथों-पैरों में सूइयाँ-सी चलना, पिंडलियों का दर्द करना, बार-बार फोड़े-फुसियाँ होना, त्वचा, जननांग और मूत्रीय प्रणाली में बार-बार इंफेक्शन होना, दृष्टि का कमजोर हो जाना और नींद-सी छाई रहना। पूर्व मधुमेह के लक्षण दिखाई देने पर ब्लड शुगर की जाँच करवा लेना अच्छा रहता है।
  • अधेड़ उम्र में पहुँचने के बाद पहली बार टी.बी. होने पर भी डायबिटीज की जाँच कर लेना जरूरी है। यह भीतर छुपी डायबिटीज का लक्षण हो सकता है। यह भी पढ़ें – टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के कारण, लक्षण
  • टाइप-2 डायबिटीज के अधिकतर मामलों में रोग का पता देर से चलता है । रोग भीतर ही भीतर शुरू हो चुका होता है, पर मधुमेह के लक्षण प्रकट नहीं होते। उसका पता अचानक ही, खून या मूत्र की जाँच होने पर चलता है। कुछ लोगों में रोग बहुत सालों तक पहचान में नहीं आता और उसके कारण शरीर के बड़े अंग-जैसे, हृदय, गुर्दे, आँखें रोगी बन जाते हैं, तब जाकर डायबिटीज का पता लगता है।

मधुमेह के लक्षण दिखाई देने के बाद इसकी जाँच कैसे करवाएँ

  • आप यदि अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं, तो 30 की उम्र पार कर लेने के बाद हर वर्ष नियम से अपनी डॉक्टरी जाँच जरूर कराएँ। यह स्क्रीनिंग कुछ खास स्थितियों में विशेष रूप से जरूरी है
  • परिवार के दूसरे सदस्यों, जैसे माता-पिता, भाई-बहन में डायबिटीज होने पर मोटापा होने पर पहले गर्भावस्था के समय ब्लड शुगर बढ़ने पर। बच्चों में डायबिटीज होने के लक्षण, कारण, बचाव तथा सावधानियों की जानकारी
  • ब्लड प्रेशर बढ़ने पर या अधिक कोलेस्टेरॉल होने पर | या फिर ऊपर बताए गए मधुमेह के लक्षण दिखाई देने पर जाँच करवाएं |
  • डायबिटीज की जाँच का सबसे विश्वसनीय तरीका ब्लड शुगर की जाँच है। इसकी कई विधियाँ हैं। किसी भी विधि से यदि उपवास की अवस्था में (फास्टिंग या खाली पेट) ब्लड शुगर 126 mg/dl और भोजन या 75 ग्राम ग्लूकोज़ लेने के दो घंटे बाद (पोस्ट-प्रेडियल या पीपी) ब्लड शुगर 200 mg/dl से अधिक मिले, तो डायबिटीज की पुष्टि हो जाती है। | यदि किसी समय बिना तैयारी के ही ब्लड शुगर की जॉच हो और ब्लड शुगर 200 mg/dl से अधिक मिले, तब भी डायबिटीज की शंका हो जाती है। ऐसे में खाली पेट (फास्टिंग) और 75 ग्राम ग्लूकोज़ लेने के दो घंटे बाद ब्लड शुगर की जाँच की जाती है। यह टेस्ट ओरल ग्लूकोज़ टालरेंस टेस्ट (ओ.जी.टी.टी.) है।
  • मधुमेह की जाँच कराने से पहले बाकी दिनों की ही तरह खाएँ-पीएँ और कामकाज करें। इस चक्कर में न रहें कि टेस्ट से पहले परहेज कर लिया जाए।
  • वैसे तो पुरुषों और महिलाओं में मधुमेह के लक्षण लगभग समान ही होते है फिर भी कुछ ऐसे लक्षण होते है जो केवल महिलाओं में ही दिखाई देते है |

डायबिटीज की जाँच होने के बाद जब इसकी पुष्टि हो जाती है तब अधिकतर मरीज सदमे में आ जाते है जो स्वाभाविक भी है, लेकिन इस रोग पर विजय पाना इतना कठिन काम भी नहीं है आपको केवल तीन चीजो का पालन करना है सही भोजन, समय पर दवा का सेवन, थोडा सा व्यायाम और मधुमेह बीमारी को काबू करने के लिए सटीक जानकारी | हम आपकी मदद केवल जानकारी के मुद्दे पर ही कर सकते है इसलिए हमने मधुमेह के रोगियों के खानपान, व्यायाम, योगासन, इन्सुलिन लगाने की विधि तथा और कई कई विषयों पर सटीक जानकारी देने का भरपूर प्रयास किया है | इस बीमारी में मरीज स्वयं ही अपना डॉक्टर होता है आपके डॉक्टर के हाथ में मुश्किल से इसका 30 प्रतिशत इलाज ही है बाकी 70 फीसदी इलाज आपको अपने आप ही करना है | [ Tags. Early Common Diabetes Symptoms, signs in men women, pre diabetic mellitus signs, sugar disease ]

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