नाखूनों के फंगस इंफेक्शन से बचाव की जानकारी

शरीर के सौंदर्य के लिए हाथ-पैरों का सुंदर दिखना जरुरी है, लेकिन उनके आकर्षण के लिए नाखूनों को भी रोग रहित, गुलाबी और चमकीला होना चाहिए। बदरंग, मुड़े-तुड़े अथवा कटे-फटे नाखून देखने में तो भद्दे लगते ही हैं, साथ ही इनसे पूरे हाथ अथवा पैर की सुंदरता चौपट हो जाती है। इसलिए इन्हें कई रोगों जैसे नाखूनों का फंगस इंफेक्शन चोट, दबाव आदि से बचाना जरूरी है। नाखूनों में यदि एक बार रोग घर कर जाए तो इलाज के बावजूद उनके ठीक होने में समय लगता है। कई बार ऐसा भी होता है कि शरीर में किसी बीमारी की वजह से भी नाखून विकृत हो जाते हैं। तब उस बीमारी का इलाज आवश्यक हो जाता है। कुछ त्वचा रोगों में भी नाखुन बदशक्ल हो जाते हैं। इसके अलावा कभी-कभी चोट लगने से भी नाखून का रंग और आकार बदल जाता है। घर का कामकाज करनेवाली महिलाओं को नाखूनों का फंगस इंफेक्शन होने की ज्यादा आशंका होती है। कपड़े वगैरह धोते समय हाथ गीले रहने के कारण नाखूनों की सतह मुलायम और कमजोर हो जाती है, जिसके कारण रोग का संक्रमण हो सकता है। इसलिए घरेलू महिलाओं को अपने नाखूनों की देखभाल की विशेष आवश्यकता होती है। नाखूनों की विकृति, बदरंगता अथवा फंगस होने के तीन प्रमुख कारण होते हैं |

  • नाखूनों का संक्रमण (इंफेक्शन),
  • त्वचा रोग एवं अन्य शारीरिक बीमारियाँ,
  • चोट, रगड़ अथवा दबाव।

नाखूनों का फंगस इंफेक्शन

नाखूनों के फंगस इंफेक्शन से बचाव की जानकारी nail fungal infection se bachav karan

नाखूनों का फंगस से बचाव

नाखूनों पर हमला करनेवाले रोगाणुओं को फंगस कहते हैं। ये कई तरह के होते हैं। अधिकतर मामलों में फंगस द्वारा ही नाखूनों को हानि पहुँचाई जाती है। नाखूनों का फंगस इंफेक्शन दो प्रकार का होता है-पैरोनाइकिया और नाखूनों का दाद (रिंगवर्म)।

पैरोनाइकिया 

इस रोग को पैदा करनेवाला फंगस नाखूनों की ठीक से सफाई न होने के कारण लग सकता है। इस तरह का इंफेक्शन गृहणियों को अकसर हो जाता है। कारण यह है कि कपड़े साफ करने के दौरान नाखून गीले तो रहते ही हैं, साथ ही उनमें साबुन, डिटर्जेंट इत्यादि लगता रहता है, जिससे नाखून की ऊपरी सतह, जिसे ‘क्यूटिकल’ कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है और किसी-किसी स्थान पर वह कट भी जाती है, जिसकी वजह से रोग उत्पन्न करने वाले फंगस का प्रवेश आसान हो जाता है। कभी-कभी चोट के द्वारा नाखून टूटने से भी नाखूनों का फंगस इंफेक्शन हो जाता है। इस रोग में नाखूनों के चारों तरफ के ऊतकों में सूजन आ जाती है। यह कुछ महीनों से लेकर वर्षों तक भी रह सकती है। सूजन के साथ दर्द भी होता है और कई बार नाखूनों के अंदरूनी भाग में मवाद पड़ जाती है। इस स्थिति में इलाज न होने पर हालत ज्यादा तकलीफदेह बन सकती है। इस रोग में नाखूनों का आकार बिगड़ जाता है, रंग बदलने और चमक रहित होने के कारण वे भद्दे दिखते हैं। पैरोनाइकिया का इलाज पूरी तौर पर संभव है और इंफेक्शन लगने के तुरंत बाद योग्य चिकित्सक से इलाज करवाना चाहिए।

नाखूनों का दाद

यह इंफेक्शन भी फंगस द्वारा होता है। यह संक्रमण सामान्यतः पैरों के अँगूठों के नाखूनों में घर करता है। लेकिन यह सभी मामलों में जरूरी नहीं है। यह हाथपैर की उँगलियों के नाखूनों में भी हो सकता है। फंगस नाखूनों की अंदरूनी सतह पर बढ़ते हैं और धीरे-धीरे नाखून का रंग मटमैला सा, खुरदरा, अपारदर्शी और भुरभुरा हो जाता है। भुरभुरा होने के कारण उसका आगे का भाग टूटकर अलग हो जाता है। इस रोग का इलाज भी संभव है। खाने एवं लगानेवाली दवाएँ अच्छा असर दिखलाती हैं।

त्वचा रोग एवं अन्य बीमारियाँ

यह नाखूनों को बदरंग और बदशक्ल बनानेवाला दूसरा कारण है। एक्जिमा जब उँगली के ऊपरी हिस्से तक यह पहुँच जाता है, तो नाखून मोटा हो जाता है और उसका रंग बदल जाता है, लेकिन सोरियासिस और लाइकेन प्लेनस नामक त्वचा रोगों में ही अधिकतर नाखून प्रभावित होते हैं। इनसे नाख़ून खराब होते  है और वे बदशक्ल हो जाते हैं। इनके अलावा, शरीर में आयरन की कमी के कारण होने वाली खून की कमी से भी हाथों की उँगलियों के नाखूनों का आकार बिगड़ जाता है। बच्चों को होने वोले खसरा रोग में भी नाखून प्रभावित होते हैं। शरीर की कुछ बीमारियों में हाथ अथवा पैर में खून का प्रवाह कम हो जाता है। इनके कारण भी नाखूनों के फंगस इन्फेक्शन से बचाव की ताकत में कमी आती है।

“रेनॉड’ नामक बीमारी में रक्त का संचार कम होने के कारण नाखून उँगली की त्वचा को छोड़ देते हैं। रक्त वाहिकाएँ सँकरी हो जाने से हाथ-पैरों के लिए खून की आपूर्ति कम हो जाती है। इस कारण भी नाखूनों में फंगस की विकृति आती है, लेकिन इस तरह के रोग कम देखने में आते हैं।

कई बार पत्थर, हथौड़ा या अन्य किसी चीज से चोट लगने पर नाखूनों की भीतरी कोशिकाएँ, जिन्हें मेट्रिक्स कहते हैं, क्षतिग्रस्त होती हैं, जिनके कारण नाखूनों का रंग बदलता है, साथ ही उनका विकास भी असामान्य हो जाता है। यही वजह होती है कि चोटवाला हिस्सा मोटा और उभरा हुआ दिखता है। हलकी चोटवाले हिस्से में नाखून कुछ महीनों बाद अपने सामान्य आकार में आ जाता है, लेकिन गहरी चोट होने पर असामान्यता स्थायी हो जाती है।

नाखूनों को हमेशा खुरचते रहने अथवा दाँतों से काटते रहने से भी उनको हानि पहुँचती है। बार-बार पैडीक्योर या मैनीक्योर करने से भी नाखूनों में फंगस इंफेक्शन का खतरा रहता है। टाइट जूते पहनने से नाखूनों का सामान्य विकास नहीं होता। वे आगे बढ़ने के बजाय नीचे की ओर मुड़ जाते हैं। यही स्थिति कई बार पैर की उँगलियों में दर्द और फंगस का कारण बनती है।

नाखूनों के फंगस और इंफेक्शन से बचाव के उपाय

शरीर के अन्य अंगों की तरह नाखूनों की सुरक्षा भी आवश्यक है। इसके लिए नीचे कुछ उपयोगी सुझाव और सावधानियाँ बतलाई जा रही हैं :-

  • ज्यादा समय तक अथवा बार-बार पानी एवं डिटरजेंट, साबुन, धुलाई पाउडर के संपर्क से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे छूत का खतरा रहता है। कपड़े, बरतन आदि धोने के बाद हाथों को साफ, सूखे कपड़े से पोंछकर हलकी आँच या धूप दिखा दें, जिससे नाखून की नमी दूर हो सके।
  • बार-बार नेल पॉलिश और नेल पॉलिश रिमूवर के प्रयोग से भी नाखूनों को हानि पहुँचती है, क्योंकि इनमें उपस्थित रासायनिक पदार्थ नाखूनों की कड़ी सतह को कमजोर कर देता है। अतः पॉलिश और रिमूवर का इस्तेमाल बहुत कम करना चाहिए।
  • आकार का बनाए रखने के लिए चुस्त जूते-मौजे न पहनें, वरना ये तकलीफदेह साबित हो सकते हैं।
  • एंटिफंगल स्प्रे या पाउडर का उपयोग नियमित रूप से करें|
  • नाखूनों की पेडीक्योरिंग और मैनीक्योरिंग में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इनमें नाखूनों को काटा जाता है और दबाव भी दिया जाता है। इस कारण नाखूनों की सतह फटने या छिलने से इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
  • पैर के नाखूनों को दाँतों से कुतरने, परस्पर रगड़ने से भी नाखून कट-फट सकते हैं और संक्रमण लग सकता है।
  • क्युटिकल को काटना नहीं चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है; अगर आप क्युटिकल को निकालेंगे, तो वह स्थान चौड़ा खुल जाएगा और कोई भी चीज उसके अंदर घुस जाएगी। क्युटिकल को काटने से नाखूनों की दूसरी समस्या भी हो जाती है, जैसे—सफेद धब्बे पड़ना या सफेद लाइनें आदि |
  • बारिश के सीजन में अक्सर सड़क पर चलते हुए रास्ते में कीचड़ और गंदा पानी मिलता है। ऐसे में हो सकता है आप छाता लेकर चल रहे हों, लेकिन पैरों के संपर्क में आने वाली गंदगी त्वचा और नाखून में संक्रमण और एलर्जी पैदा कर सकती हैं।
  • नाखूनों को टूटने से बचाने के लिए उन्हें ब्लेड से न काटकर सिर्फ नेलकटर और फाइलर का इस्तेमाल करें। नाखूनों को मुँह से कभी भी नहीं काटना चाहिए। इससे फंगस संक्रमण फैलता है।
  • ऐसे नेल पॉलिश या सौंदर्य प्रसाधन का प्रयोग न करें, जिससे त्वचा को एलर्जी हो |
  • रक्ताल्पता, मधुमेह एवं अन्य शारीरिक बीमारियों की जाँच समय-समय पर करवाते रहना चाहिए। मधुमेह के रोगियों को नाखुनों का फंगस इंफेक्शन बार-बार होता है। अतएव उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें रक्त में शर्करा की मात्रा पर नियंत्रण रखना चाहिए। नाखूनों को चोट से भी बचाएँ।

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