जानिए एच.आई.वी एड्स कैसे होता है, कारण

एड्स की जानकारी :- एड्स दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी बन चुकी है। शहर और यहाँ तक कि गाँव भी रोग से अछूते नहीं बचे हैं। दुनिया में रोजाना लगभग 16 हजार व्यक्ति एड्स संक्रमण के शिकार बन रहे हैं। आज दुनिया में साढ़े चार करोड़ से अधिक और भारत में पच्चीस लाख के ऊपर एड्स रोगी और एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति मौजूद हैं, और सन् 2020 तक भारत में दो करोड़ के ऊपर व्यक्तियों के संक्रमित होने की संभावना व्यक्त की गई है। कहने का मतलब यह है कि AIDS तेज गति से अपने पाँव पसार रहा है। इसलिए इस बीमारी के बारे में जानना बहुत आवश्यक है। एड्स एक ऐसा महारोग है, जिसका न तो बचाव के लिए कोई इंजेक्शन उपलब्ध है और न ही समुचित प्रभावी इलाज। एड्स जैसे लाइलाज रोग से बचने में केवल रोग की पूरी जानकारी ही एक अच्छा विकल्प है। लेकिन समस्या यह है की भारत में इस जानलेवा रोग के फैलने के 25 वर्षों बाद भी आम लोगों को रोग की पूरी तरह जानकारी नहीं है। वे इसे महज आम यौन रोग समझकर इस पर बात करने से भी कतराते हैं।

इस पोस्ट में हम जानेगे -एड्स की बीमारी का इतिहास, एड्स क्या है, एड्स कैसे होता है, तथा AIDS के वायरस आखिर शरीर में ऐसा क्या करते है जिससे मरीज की जान चली जाती है और इतनी विकसित आधुनिक चिकित्सा प्रणाली भी इस जानलेवा रोग के सामने क्यों लाचार है |

एड्स क्या है और किन कारणों से होता है :

एड्स की जानकारी और होने के कारण : HIV AIDS kya hai karan

HIV AIDS

एड्स कब दुनिया के सामने आया – वैसे तो एड्स ’70 के दशक से ही अफ्रीका एवं अमेरिका में मौजूद रहा है, लेकिन रोग की पूरी दुनिया को जानकारी तब हुई जब सन् 1981 में अमेरिका के एक अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित पाँच समलैंगिक यौन आदतों वाले मरीज भरती किए गए। जब उन पर महँगी-महँगी दवाइयों का भी कोई असर नहीं हुआ तो चिकित्सा वैज्ञानिक ने उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता की जाँच की और वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उन रोगियों की रोगों से लड़ने की शक्ति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। फिर विस्तृत छानबीन और खोज के बाद वैज्ञानिक ने इस रोग को एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम यानी (AIDS) नाम दिया और इस रोग को पैदा करने वाले अति सूक्ष्म विषाणु को हयूमेन इम्यूनो डेफिसिएंसी वाइरस या संक्षेप में एच.आई.वी. H.I.V नाम दिया गया, एड्स दो वायरस के कारण होता है, HIV1 और HIV2

एड्स कया है?

एड्स का वायरस इंसान जान खुद नहीं लेता है बल्कि यह शरीर को इतना कमजोर बना देता है की वो किसी भी बीमारी से नहीं लड़ पाता और अंत में किसी अन्य बीमारी के कारण रोगी की मौत हो जाती है | जैसे किसी पेड़ की जड़ो में दीमक लग जाती है और अंत में हवा के वेग से सूख कर धरती पर गिर जाता है |

एड्स वाइरस या विषाणु से पैदा होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। जिससे कई तरह के ठीक न होने वाले बीमारी के लक्षण तथा कई जानलेवा रोग, जैसे न्यूमोनिया, टी. बी, त्वचा कैंसर इत्यादि हो जाते हैं। इसलिए AIDS केवल एक रोग न होकर कई बीमारियों का समूह है। अब सवाल उठता है कि एड्स में रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट कैसे होती है?

एड्स कैसे शरीर की रोगों से लड़ने वाली कुदरती ताकत को खत्म कर देता है ?

रोग प्रतिरोधक का काम शरीर में उपस्थित कुछ विशेष तरह की रक्त कोशिकाएँ जिन्हें टी-4 और टी-8 कहते है इनको AIDS का विषाणु टी-4 नामक कोशिकाओं पर आक्रमण उनके भीतर अपनी संख्या बढ़ाता है और उन्हें नष्ट करता जाता है। इस तरह टी-4 कोशिकाएँ नष्ट होने के कारण रोग प्रतिरोधक प्रणाली धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। फिर रोगी के शरीर में कई तरह के अन्य विषाणु जमा होने लगते हैं फिर ये विषाणु और नए-नए रोग पैदा करते हैं। जिन्हें अवसरवादी रोग कहा जाता है। आखिर में रोगी की मृत्यु इन्हीं अवसरवादी रोगों के कारण हो जाती है।

एड्स किन कारणों से होता है ? 11 प्रमुख कारण

एड्स एक संक्रामक रोग तो है, लेकिन छूत की बीमारी नहीं है इसका मतलब यह हुआ की यह मरीज के साथ खाना खाने, छूने, उसके खाँसने आदि से नहीं होता। यद्यपि H.I.V AIDS का विषाणु रोगी के रक्त के साथ-साथ उसकी लार, मल-मूत्र एवं वीर्य में भी होते हैं, लेकिन रोगी के आसपास रहने से यह रोग नहीं लगता। एड्स कीट पतंगों, मच्छर, जूं, खटमल के काटने व मक्खी आदि से भी नहीं फैलता है। रोग फैलने के लिए एच.आई.वी. युक्त खून या वीर्य का स्वस्थ व्यक्ति के खून से सीधा संपर्क आवश्यक है। मुख्य तौर पर इन पाँच माध्यमों से एड्स विषाणु का संक्रमण हो सकता है और इन्हीं माध्यमों से कई और यौन रोग भी होते हैं |

  • प्राकृतिक और अप्राकृतिक यौन सम्बंधो द्वारा-भारत में इस माध्यम से रोग सबसे अधिक फैलता है। हमारे यहाँ यौन संपकों द्वारा रोग फैलने का प्रतिशत 80 से 85 तक है। वेश्यावृत्ति इसका मुख्य कारण है। एक से अधिक साथियों से अमर्यादित यौन संपर्क रखने वालों एवं समलिंगी यौन आदतों वाले रोगियों को एड्स होने की सबसे ज्यादा संभावनाएँ होती हैं। याद रखें- एड्स की बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ किसी भी प्रकार का किया गया सेक्स स्वस्थ व्यक्ति को भी एड्स का मरीज बना देता है इसमें किसी प्रकार की शंका नहीं होनी चाहिए | यहाँ तक की कंडोम को प्रयोग करके किया गया सेक्स भी सौ फीसदी बचाव की गारंटी नहीं है |
  • इंजेक्शनों द्वारा नशीली दवाइयाँ लेने से -भारत में लगभग 3 प्रतिशत रोगी नशीली दवाइयों के कारण संक्रमित हुए हैं। विशेषकर मणिपुर में 18 से 30 वर्ष के हजारों युवाओं में एड्स ऐसे माध्यमों से खूब फैल रहा है। ये नशेबाज सूइयों को बगैर उबाले सामूहिक रूप से खून की नसों में सीधे प्रवेश कराते हैं। इस कारण यदि समूह में एक भी नशेबाज को AIDS संक्रमण हुआ तो वह अन्य साथियों में भी हो जाता है। यह भी पढ़ें – एचआईवी के लक्षण और 4 मुख्य स्टेज
  • एड्स से दूषित रक्त या रक्त उत्पादों द्वारा- देश में इस तरह से एड्स फैलने का प्रतिशत लगभग 5 प्रतिशत है। अभी भी बहुत से अवैध रक्त बैंकों द्वारा दूषित खून बेचा जा रहा है, इसलिए इस माध्यम से भी रोग फैलने का खतरा भी बना हुआ है। देश में लगभग पंद्रह हजार से ऊपर रक्त दाता एच.आई.वी. से संक्रमित पाए गए हैं। इस तरह व्यावसायिक रक्तदाताओं से भी रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। यदि किसी रोगी को एड्स विषाणु युक्त रक्त चढ़ा दिया जाए, तो उसे संक्रमण की संभावना सो फीसदी रहती है।
  • एड्स बीमारी से ग्रस्त माताओं द्वारा बच्चों में- इस माध्यम द्वारा रोग होने का प्रतिशत भारत में 5 प्रतिशत है, लेकिन भविष्य में जैसे-जैसे एड्सग्रस्त महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी, नवजात शिशुओं में भी एच.आई.वी. की बीमारी बढ़ती जाएगी। यदि माँ एड्स विषाणुओं से संक्रमित होती है तो उसके नवजात शिशु में संक्रमण की संभावना लगभग 40 प्रतिशत होती है। स्तनपान से भी बच्चा संक्रमित हो सकता है | सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपाय 
  • अन्य साधनों से- लगभग 6 प्रतिशत मामलों में अन्य साधनों से रोग फैलता है, जैसे डायलॉसिस, अस्पतालों में डिलीवरी के दौरान दूषित सूइयों का इस्तेमाल करना। जाने डायबिटीज़ के 13 शुरुआती लक्षण
  • भारत में एड्स विषाणुग्रस्त 200 से ऊपर रोगी केवल दूषित डायलॉसिस के कारण संक्रमण के शिकार बन चुके हैं।
  • इसके अलावा सही जीवाणु रहित प्रक्रियाओं के अभाव में नाइयों के उस्तरे, टैटू मशीन (गोदना मशीनों), लडकियों के नाक व कान छेदने के लिये काम आने वाली दूषित औजार या मशीन से भी रोग के फैलने की पूरी संभावना होती है।
  • ठीक ऐसे ही किसी ऑपरेशन के दौरान अगर दूषित सर्जिकल औजार का प्रयोग यदि मरीज पर किया गया है तो भी यह रोग हो सकता है | मानसिक रोग के लक्षण, कारण और प्रकार
  • यदि किसी एड्स के रोगी को चोट लगी हो और उस चोट के संपर्क में स्वस्थ व्यक्ति की चोट या खुला घाव आ जाये तो भी एड्स हो सकता है | हालाँकि इस प्रकार के हालात बनने की संभावना लगभग ना के बराबर है ये सिर्फ आपको समझाने के लिए बताया गया एक उदाहरण है | यह भी पढ़ें – मानसिक तनाव के कारण और लक्षण
  • कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य देने वाले व्यक्ति में यदि एड्स संक्रमण है तो उत्पन्न होने वाले बच्चों को यह संक्रमण हो सकता है।
  • इसी प्रकार मुंह के लार्वा से एड्स के संक्रमण की कई स्वास्थ्य संस्थाए दावा करती है| मतलब चुंबन लेने से भी एड्स के वायरस फैलने का दावा कई मेडिकल पत्रिकाए करती है पर इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है |

अगले पोस्ट में हम AIDS के प्रमुख लक्षणों, इस बीमारी से बचाव के लिए जानकारी देंगे |

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