हींग का उपयोग तथा हींग के औषधीय गुणों के फायदे

हींग (Asafoetida) कोई फल या फूल नहीं होता है,यह तो पेड़ के तने से निकली हुई एक गोंद होती है। इसका पेड़ 5 से 9 फीट ऊंचा होता है। इसके पत्ते 1 से 2 फीट लम्बे होते हैं। हींग का प्रयोग भोजन को स्वादिष्ट व सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन हींग केवल एक मसाला ही नहीं बल्कि एक उत्तम औषधि भी है। हींग पेट की बीमारियों में तो रामबाण औषधि मानी जाती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार हींग रक्त को साफ भी करती है तथा यह गर्म तासीर वाली औषधि है। हींग का तेल उड़नशील पदार्थ है जो सेवन करने के बाद जल्दी ही शरीर से जज्ब हो जाता है। हींग का तेल वात नाशक होता है। हींग का इस्तमाल आप फर्स्ट ऐड (प्राथमिक चिकित्सा ) के रूप में कई रोगों के लिए कर सकते है |

औषधि के रूप में हींग को 100 मिलीग्राम में 500 मिलीग्राम तक शरीर के बराबर व उम्र के अनुसार लिया जाना चाहिए। हींग का तेल आधी बूँद से तीन बूँद तक प्रयोग में लाया जा सकता है। इसे लोग प्रायः बताशे में रखकर खाते हैं।

हींग के औषधीय गुण तथा हींग का उपयोग घरेलू इलाज में 

हींग का उपयोग तथा हींग के औषधीय गुणों के फायदे hing ke fayde aur nuksan gharelu upay

हींग के बेहतरीन औषधीय

  • यदि पेट में गैस बन रही हो तो दाल या सब्जी में हींग का छौंक जरुर लगाएं।
  • यदि अफारे की स्थिति पैदा हो गई हो तो हींग भूनकर उसमें काला नमक मिलाकर पीस कर गुनगुने पानी से सेवन करें, अफारा जरुर ठीक हो जाएगा।
  • यदि कब्ज की शिकायत हो तो हींग के चूर्ण में थोड़ा-सा मीठा सोडा मिलाकर फांक लें, जल्दी ही लाभ होगा।
  • यदि खाना हजम न हो रहा हो तो थोड़ी-सी हींग, सेंधा नमक व जीरे के साथ पीसकर गुनगुने पानी के साथ फांक लें, खाना हजम हो जाएगा। इसके लिए हींग 200 मिलीग्राम, सेंधा नमक 500 मिलीग्राम तथा जीरा 1 ग्राम लेकर पीसें।
  • पेट में अपच की शिकायत रहती हो तो एक छोटा चम्मच हिंगवाष्टक चूर्ण घी व पके चावल के साथ सेवन करें, अपच दूर हो जाएगी।
  • हिंगवाष्टक चूर्ण वैसे तो बाजार में मिल जाता है फिर भी आप चाहें तो इस प्रकार से अपने आप भी बना सकते हैं: –
  • हिंग्वाष्टक चूर्ण बनाने के लिए सोंठ, मिर्च (काली), पीपल, अजवायन, सेंधा नमक, सफेद जीरा व काला जीरा प्रत्येक बीस ग्राम लें। इनको बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और कपड़े में से छान लें। इसके बाद घी में भुनी हींग का चूर्ण 5 भाग लेकर इस चूर्ण में अच्छी तरह से मिला लें तथा एक साफ व ढक्कनदार शीशी में भर कर रख लें। इस चूर्ण को तीन-तीन ग्राम की मात्रा में गरम पानी के साथ प्रयोग करें। बच्चों के लिए 1 से 2 ग्राम तक ही काफी है। यदि पेट दर्द, बदहजमी होकर दस्त हो तो इसकी इस मात्रा के साथ 500 मिलीग्राम शंख भस्म और मिला लें।
  • हिस्टीरिया के दौरे से बेहोश रोगी को हींग सुंघाने से वह जल्दी ही होश में आ जाता है। यदि उसे थोड़ी-सी हींग खिला दी जाए तो वह जल्दी ही सामान्यावस्था में आ जाता है।
  • कई बार बुखार में शरीर ठंडा पड़कर ‘सन्निपात’ की स्थिति बन जाती है। पानी में घिसकर हाथ-पैरों पर हींग की मालिश ‘सन्निपात’ में फायदा होता है।
  • हींग को भूनकर ही काम में लाना अच्छा रहता है क्योंकि कच्ची हींग उलटी का कारण भी बन सकती हैं।
  • इस बात का ख्याल रखें की आप नकली/अशुद्ध हींग का प्रयोग न करें। नकली हींग बनाने वाले व्यवसायी हींग में कंकड़, बालू, मिट्टी, गोदंती, गोंद, पत्थर का चूरा, आटा आदि मिला देते हैं। ऐसी मिलावटी हींग के उपयोग से उल्टा नुकसान ही होगा ।
  • दाद -हींग को गन्ने के रस से बने सिरके के साथ पीसकर सुबह-शाम दिन में 2 बार दाद पर लेप करने से कुछ ही दिनों में दाद गायब हो जाता है।
  • कांटा/कांच आदि चुभ जाना। – यदि कांटा/कांच आदि चुभ जाने पर हींग का घोल उस स्थान पर भर देने से कुछ समय बाद कांटा अपने आप बाहर आ जाता है।
  • निम्न रक्तचाप -लो ब्लड प्रेशर के मरीजो के लिए हींग का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • हींग कब्ज को ठीक करके आंतों की क्रियाशीलता को बढाती है।
  • हींग के सेवन से सीने में दर्द, श्वास रोग, आंतों के कीड़े, कफ और आंतों के रोग ठीक होते हैं।
  • पक्षाघात (पैरालायसिस) में भी हींग से बनाई गई दवाइयों का प्रयोग किया जाता है।
  • हींग में एक बहुत गुणकारी उड़नशील तेल होता है। इस तेल के प्रभाव से साँस की नलिका (एअर पाइप) में जमा कफ पिघलकर निकल जाता है। तेज़ खांसी ठीक करने के लिए यह तेल उपयोगी होता है।
  • यदि पेटदर्द गैस रुकने से हो तो 2 ग्राम हींग आधा लीटर पानी में उबालें। जब चौथाई जल शेष रहे, तब रोगी को गर्म-गर्म (गुनगुना) सेवन कराने से लाभ होता है।
  • पेचिश/प्रवाहिका (डिसेंट्री) -जरा-सी हींग को ताजा (जो खट्टा न हो) दही में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  • घुटनों का दर्द -हींग को पानी में बारीक पीसकर लेप करने से घुटनों का दर्द में भी आराम मिलता है।
  • दांतदर्द – कीड़ा लगे खोखले दांत/दाढ़ में थोड़ी-सी हींग भर देने से दांत/दाढ़ का दर्द दूर हो जाता है। प्रयोग करने से पहले हींग को गर्म कर लेना चाहिए।
  • थोड़ी-सी हींग लेकर पानी में उबालकर कुल्ले करने से दांतों का दर्द तुरंत दूर होता है।
  • सिरदर्द – सर्दी लगने के कारण होने वाले सिरदर्द में गर्म पानी में हींग घोलकर माथे पर लेप करने से दर्द ठीक हो जाता है।
  • आधासीसी/आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) – हींग को पानी में घोलकर, नाक से उसकी बूंदें डालने और सूंघने से आधासीसी में लाभ होता है। यह प्रयोग सूर्योदय से पहले करें।
  • गला बैठना -हींग को उबले हुए जल में घोलकर गरारे करने से यह समस्या दूर होती है।
  • कान का दर्द – हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल को छानकर इस तेल की बूंदें कान में डालने से कान दर्द से राहत मिलती है।
  • हींग को तिल के तेल में खूब देर तक अच्छी तरह से पका लें तथा छानकर किसी साफ शीशी में सुरक्षित रख लें। इस तेल की 1-2 बूंद सुबह-शाम निरंतर लाभ न होने तक कान में डालें तथा साफ-स्वच्छ रुई की फुरहरी से कान को साफ रखें।
  • शारीरिक शक्ति बढ़ाने या कमजोरी दूर करने के लिए भुनी हींग, पीपर, सोंठ तथा कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। प्रतिदिन सुबह-शाम चौथाई चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें।
  • मासिक धर्म की समस्याओ में हींग का सेवन करने से स्त्रियों के गर्भाशय का संकुचन होता है और मासिक धर्म खुलकर आता है। इसके अतिरिक्त इससे स्त्रियों का पेट दर्द भी दूर होता है।
  • प्रसूता स्त्री का सिर चकराना – घी में सेंकी हुई हींग देशी घी/गाय का घी के साथ सेवन करने से प्रसूता स्त्री को आने वाले चक्कर (सिर चकराना) और दर्द (लेबरपेन्स) मिटते हैं।
  • मासिक धर्म कम मात्रा में आना -ऋतुस्राव कम मात्रा में आने की समस्या में हींग को पानी के साथ सेवन करने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है।

हींग और शहद के फायदे

  • पेटदर्द -पेटदर्द, गैस, डकार आने के कष्ट में हींग को गर्म पानी में घोलकर नाभि के आस-पास लेप करने और घी में भुनी हुई हींग शहद में मिलाकर अथवा अन्य किसी सब्जी या फल के साथ सेवन करने से लाभ होता है |
  • जुकाम की शुरुआत में अगर आपको कफ बने तो इसका सेवन संक्रमण को तुरंत खत्म कर देता है। इसके लिए आधा चम्मच हींग के पाउडर में औधा चम्मच सोंठ (सूखा अदरक) का पाउडर मिलाएं और इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर इसका दिन में थोड़ी-छोड़ी देर पर सेवन करें।
  • अगर कफ जकड़ गया है या फिर सूखी खांसी हो रही है, इसके लिए आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच हींग और एक चम्मच शहद मिलाएं। फिर दिन में तीन इसका सेवन करें। इससे गले की खराश में भी आराम ‌मिलेगा।

हिंग का अर्क (होम्योपैथिक दवा, Asafoetida Mother Tincture) के उपयोग

  • यह एक होम्योपैथिक औषधि है, जो हींग द्वारा बनाई गई है और बाजार में उपलब्ध है। इसके प्रयोग से मुख्यतः नीचे लिखे लाभ होते हैं |
  • 10 बूंद मूल अर्क 1 चम्मच साफ-स्वच्छ पानी में मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द, बदहजमी गैस ठीक होती है।
  • विषैले दंश : बिच्छू, ततैया, मधु मक्खी आदि के काटने पर काटे गए अंग पर लगाने से दर्द और सूजन दूर होते हैं।
  • मलेरिया से सुरक्षा – जिन जगहों पर मलेरिया फैला हो वहां भोजन के साथ हींग का सेवन करने से आंतों को लाभ होता है तथा मलेरिया से भी सुरक्षा होती है।
  • टायफाइड में अफारा होने पर -टायफाइड/मोतीझरा बुखार में रोगी को अफारे (पेट फूलने) की समस्या होने पर हींग को नौसादर और हीरा बोल के साथ सेवन कराना लाभकारी है।

हींग के नुकसान तथा सावधानियां

  • हींग को लम्बे समय तक प्रतिदिन सेवन न करें। जिन स्त्रियों को मासिक स्राव/माहवारी अधिक हो उन्हें तो हींग का सेवन बंद कर देना चाहिए ।
  • गर्भवती स्त्रियां इसका सेवन कम ही करें। पित्त प्रकृति/गर्म तासीर के लोग हींग को केवल औषधि/दवा के तौर पर ही सेवन करें।
  • दूध पीने वाले शिशु को यदि गर्मी की समस्या है हो तो ऐसी स्त्रियों को हींग का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अधिक समय तक हींग सेवन करने से कमजोरी आती है, छाती में जलन होती है, मूत्र मार्ग में जलन होती है |
  • अधिक हींग के सेवन से पेशाब और पसीने से बदबू आने लगती है। हींग मस्तिष्क (दिमाग) को और गर्म प्रकृति/मिजाज के लोगों के लिए हानिकर है। इसके अतिरिक्त हींग लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगो के लिए भी हानिकारक है।

अन्य सम्बंधित लेख 

Leave a Reply