एनीमिया (रक्ताल्पता) का घरेलू तथा आयुर्वेदिक इलाज के उपाय

एनीमिया (रक्ताल्पता या खून की कमी ) जब शरीर में रक्त का अधिक अभाव होता है तो एनीमिया का रोग होता है इसके कई कारण होते है। खून की ज्यादा कमी में रोगी कुछ भी काम करने में असमर्थ हो जाता है। इस रोग के उपचार में ज्यादा देर करने से जानलेवा स्थिति बन जाती है। इस रोग में लाल रक्त कणों की संख्या एवं हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, अकसर इस रोग में भूख कम हो जाती है। तेजी से कमजोरी बढती जाती है। कोई काम करने की इच्छा नहीं होती। सीढ़ियां चढ़ने में भी घबराहट होने लगती है। कई बार पैरो में सूजन भी दिखाई देने लगता है | चेहरा पीला या सफेद दिखने लगता है। रोगी दस कदम भी चलने में कष्ट का अनुभव करता है। हाँफने लगता है। आँखों की पलकों के नीचे (अन्दर के भागों में) रक्तवाहिनी नाड़ी की लालिमा कम हो जाती है जिससे वह सफेद दिखने लगता है।

एनीमिया के कारण

अनियमित रूप से भोजन करने पर और भोजन में तेल, मिर्च, गर्म मसालों व अम्ल रस से बने खाद्य-पदार्थों का अधिक सेवन करने से पाचन क्रिया खराब होने से एनीमिया की उत्पत्ति होती है। यह रोग स्त्रियों में अधिक होता है | कुछ स्त्रियाँ घर, बाहर अधिक शारीरिक श्रम करती हैं, लेकिन उन्हें पौष्टिक भोजन नहीं मिल पाता इसलिए वे एनीमिया से पीड़ित होती हैं। इसके अन्य कारणों में किसी दुर्घटना से चोट लगने पर अधिक रक्त निकल जाने से रक्ताल्पता हो सकती है। स्त्रियों को ऋतुस्राव की खराबी के कारण, अधिक रक्तस्राव होने से एनीमिया की विकृति होती है। अधिक कब्ज से भूख कम हो जाती है। ऐसे में शारीरिक कमजोरी बढ़ने से रक्त की कमी होने पर एनीमिया की उत्पत्ति होती है। अधिक दिनों तक टी.बी, टायफाइड, अर्श रोग, अतिसार में अधिक रक्त बहने से भी एनीमिया हो सकता है। गर्भावस्था में स्त्रियां भी इस रोग से ग्रस्त होती हैं।

एनीमिया के घरेलू उपचार

एनीमिया (रक्ताल्पता) का घरेलू तथा आयुर्वेदिक इलाज के उपाय anemia ka gharelu ayurvedic upchar

एनीमिया के घरेलू उपचार

  • आँवले का चूर्ण 3 से 6 माशे की मात्रा में शहद के साथ नियमित रूप से सुबह-शाम दें। यह पेट की क्रिया को ठीक करके निश्चित रूप से एनीमिया को दूर करता है।
  • गिलोय का स्वरस 20 से 30 ग्राम की मात्रा में शहद एवं गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शरीर के लिए अच्छा रसायन प्रमाणित होता है। रक्त विकार दूर होकर शुद्ध रक्त का निर्माण होता है।
  • मुलहठी का चूर्ण 4 -4 ग्राम सुबह-शाम शक्कर एवं घी के साथ चाटकर ऊपर से दूध पीने से रक्त की वृद्धि होती है।
  • चित्रक की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर, पीसकर रखें। इस चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा में सेवन करने से खून की कमी की बिमारी ठीक होती है। इसे पानी के साथ सेवन करें।
  • प्रतिदिन 200 ग्राम टमाटर काटकर उसमें सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण डालकर खाने से बहुत लाभ होता है। खून की कमी होने पर टमाटर का सूप भी अधिक फायदेमंद है।
  • आंवले या सेब का मुरब्बा खाने और दूध पीने से बहुत लाभ होता है।
  • बेल के ताजे पत्तों का रस 5 ग्राम में थोड़ा-सा काली मिर्च का पाउडर डालकर पीने से पाचन क्रिया तेज होने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है। यह भी जरुर पढ़ें – खून की कमी: कारण, लक्षण और उपाय
  • गन्ने के 200 ग्राम ताजे रस में, आंवलों का रस 5 ग्राम और शहद 10 ग्राम मिलाकर पीने से एनीमिया में बहुत लाभ होता है।

एनीमिया का आयुर्वेदिक इलाज

  • मधु मण्डूर भस्म 1 से 6 रत्ती सुबह-शाम पीपल चूर्ण और शहद के साथ लेने से अच्छा लाभ होता है।
  • मण्डूर पर्पटी 1 से 3 रत्ती शहद या दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से एनीमिया दूर होता है।
  • नवायस मण्डूर एवं नवायस लौह 1 माशा सुबह-शाम शहद या छाछ के साथ लेने से रक्त भी खून की कमी दूर होती है।
  • धात्रयरिष्ट 10 से 25 ग्राम की मात्रा में समभाग पानी मिलाकर भोजन के बाद दिन और रात सेवन करने से एनीमिया दूर होता है।
  • मण्डूराघरिष्ट सवा से ढाई तोला बराबर जल के साथ सुबह-शाम देने से एनीमिया ठीक होता है।
  • लोहासव सवा से ढ़ाई तोला समभाग जल के साथ सुबह-शाम देने से या भोजन के बाद दिन रात देने से रक्तहीनता दूर हो जाती है।
  • नोट– इन औषधियों की मात्रा एवं सेवन विधि के लिए किसी स्थानीय आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

एनीमिया में भोजन का भी रखें ख्याल

  • शरीर में एनीमिया रोग के कारण को जानने के बाद उसे ठीक करने के लिए उपचार करवाना चाहिए। भोजन में पौष्टिक खाद्यों की मात्रा बढ़ाकर एनीमिया का इलाज किया जा सकता है। प्रतिदिन सलाद के रूप में खीरा, ककड़ी, प्याज, चुकंदर, नीबू का रस, मूली, गाजर का सेवन करने से खाने के प्रति अरुचि ठीक होने के साथ अधिक भूख लगती है। इन सब्जियों का रस पीने से शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है।
  • अंगूरों को सुबह-शाम 100 ग्राम मात्रा में सेवन करने से एनीमिया ठीक होता है। दिल की तेज धड़कन भी सामान्य होती है।
  • एनीमिया के रोगी को प्रतिदिन पालक, बथुआ, मेथी, आदि की सब्जी इस्तेमाल करनी चाहिए। गाजर व् चुकंदर तथा अनार का जूस भी लाभकारी है |

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