जीरा के औषधीय गुण, फायदे तथा जीरे की तासीर – Cumin Seeds Benefits

जीरा रसोई में दैनिक उपयोग में आने वाला एक बहुत पोपुलर और सुगंधित मसाला है। आयुर्वेदिक औषधि विज्ञान में भी जीरे को महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है अपने देश में यह सब जगह पैदा होता है। इसके पौधे एक-डेढ़ फीट तक ऊंचे होते हैं जो अत्यंत मनमोहक सुगंध लिए होते हैं। यह दो प्रकार का होता है- 1. सफेद जीरा, 2. काला जीरा। इसके अतिरिक्त जीरा एक प्रकार का और भी होता है, जिसको कलौंजी जीरा के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार तीनों प्रकार के जीरे गुणों के मामले में लगभग एक समान ही होते है | जीरा की तासीर ठंडी होती है |

सफेद जीरे का प्रयोग रसोई में दाल-सब्जियों को छौंकने तथा मसाले के रूप में और काले जीरे का विशेषकर आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसकी भी दो वेरायटी होती है, ओथमी जीरा और शंख जीरा। ये दोनों प्रकार के जीरे साधारण जीरे से एकदम अलग होते हैं। औथमी जीरे को ईसबगोल के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सत्व निकलता है। इसको धातु-पौष्टिक माना जाता है तथा कब्ज के रोगी को दूध में सेवन कराया जाता है। शंखजीरा वनस्पति नहीं है। सफेद जीरा की अपेक्षा काला जीरा महंगा होता है और इसी कारण से इसमें कई सस्ती प्रजातियों की मिलावट की जाती हैं। ऊपर दे दिखने में जीरे के पौधे सौंफ के समान होते हैं। इसमें सफेद रंग के फूल लगते हैं, जो पकने पर बीजो के रूप में बदल जाते हैं। इसी को जीरे के रूप में उपयोग किया जाता है |

जीरा के रासायनिक गुण

  • सफेद जीरा में अजवायन की तरह एक उड़नशील तेल, खनिज द्रव्य और विटामिन पाए जाते हैं। काले जीरे में भी उड़नशील तेल पाया जाता है, जिसके कारण इसकी महक बहुत तेज़ होती है।

जीरे के औषधीय गुण तथा घरेलू नुस्खे

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जीरा

  • पाचन शक्तिवर्द्धक– सोंठ, जीरा, छोटी पीपल, कालीमिर्च और सेंधा नमक प्रत्येक समान भाग लेकर पीसकर और बारीक कपड़े से छानकर इस पाउडर को खाना खाने के बाद 1-1 चम्मच (3 से 5 ग्राम) ताजा पानी के साथ सेवन करने से भोजन शीघ्र ही पचता है तथा बदहजमी नहीं होती है ।
  • जीरा 2 चम्मच लेकर 1 गिलास (200 मि.ली.) पानी में उबालकर (काढ़ा बनाकर) उसके बाद ठंडा करके और छानकर आधा-आधा कप की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से बदहजमी दूर होकर भोजन जल्दी पचता है।
  • गर्मी के मौसम की बात की जाए जो जीरा आपकी लिए सेहत के ज्यादा फायदेमंद होता है। इस मौसम में आप जीरे का सेवन छाछ या दही के साथ कर सकती है।
  • अम्लपित्त (एसिडिटी) – धनिया व जीरे का चूर्ण चीनी के साथ सेवन करने से अम्ल-पित्त के कारण खाना खाने के बाद होने वाली छाती में जलन शांत होती है।
  • अफारा (पेट फूलना) -जीरा और सेंधा नमक समान भाग लेकर नींबू के रस में 7 दिन तक भिगोकर रखें, उसके बाद उसे सुखाकर पाउडर बनाकर रख लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम सेवन करने से अफारा मिटता है तथा पाचन शक्ति भी तेज़ होती है।
  • मसूढ़ों की सूजन व दर्द – भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक समान भाग लेकर तथा बारीक पीसकर और कपड़छान करके मसूढ़ों पर हल्के-हल्के लगाने से मसूढ़ों की सूजन/मसूढ़े फूलना, टीस व दर्द होना आदि कष्ट दूर होते हैं।
  • जीरे की स्वास्थ्यवर्द्धक चाय – बारीक पिसा हुआ जीरा पाउडर 3 ग्राम (आधा चम्मच) लेकर 100 ग्राम खौलते हुए पानी में डालकर ढक दें। 5 मिनट के बाद उसमें दूध और चीनी (इच्छानुसार) डालकर सुबह-शाम चाय की तरह सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
  • चेहरे की सुंदरता बढ़ाने में भी जीरा है बेजोड़ – जीरे को पानी में उबालकर उस पानी से मुख धोने से कुछ ही दिनों में इस प्रयोग को निरंतर करने से मुंह की झाइयां, चकत्ते, मुंहासों के दाग आदि दूर होकर चेहरा साफ़ हो जाता है ।
  • शिशु को दूध पिलाने वाली स्त्रियों में दूध की कमी हो तो सफेद जीरा पीसकर समान भाग पिसी हुई शक्कर या मिश्री मिलाकर 10-10 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार सुबह-शाम सेवन करके ऊपर से दुग्धपान करने से यह कमी दूर करने में मदद मिलती है।
  • जीरे को घी में भूनकर, भुने हुए आटे के लड्डुओं में डालकर प्रसूता स्त्री (जच्चा) को खिलाने से स्तनों में दुग्ध वृद्धि होती है।
  • जीरे को भूनकर खाने से मुंह की बदबू से भी छुटकारा मिलता है।
  • मुंह के अंदर के रोग – जीरा 5 ग्राम लेकर व पीसकर पानी में मिला लें। इस पानी में चंदन घिसकर इलायची के दाने और फुलाई हुई फिटकरी का चूर्ण 24-24 ग्राम पीसकर मिला लें। इस पानी से कुल्ला करने से मुंह के सभी रोगों में लाभ होता है।
  • गर्भावस्था में जी मिचलाना व उलटी होना- 3 ग्राम जीरे को 3 ग्राम नींबू के रस में भिगोकर 3 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से जी मिचलाना बंद हो जाता है।
  • जुकाम होने पर काले जीरे को जलाकर उसका धुआं सूंघने से बंद नाक खुलती है |
  • जीरा 5 ग्राम को तवे पर भूनकर फिर पीसकर दही या दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से अतिसार/पतले दस्तों में लाभ होता है।
  • बच्चों के दस्तों की शिकायत में जीरे को भूनकर और पीसकर 500 मि.ग्रा. मात्रा में लेकर 1 चम्मच पानी में घोलकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से लाभ होता हैं |
  • संग्रहणी की बीमारी में जीरा भुना हुआ, कच्ची और पकी (भुनी) हुई सौंफ समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में 2-3 घंटे के अंतर से ताजा पानी के साथ सेवन करने से मरोड़ के साथ पतले दस्त होना दूर हो जाते हैं।
  • उदर कृमि – जीरा 15 ग्राम लेकर 400 ग्राम पानी में उबालकर जब 100 ग्राम पानी शेष रह जाये तब इसे छानकर रोगी को सेवन कराने से पेट के कृमि खत्म जाते हैं।
  • कई बार मकड़ी काट लेती है, ऐसे हालात में सोंठ और जीरा को पानी के साथ पीसकर उस स्थान पर लगायें जहाँ मकड़ी ने काटा है ।
  • पेशाब आने में रुकावट होने पर या जलन होने पर काले जीरे को उबालकर उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करने से यह कष्ट दूर होता है।
  • पामा-खुजली के उपचार हेतु -जीरा 40 ग्राम और सिंदूर 20 ग्राम लेकर 320 ग्राम सरसों के तेल में मिलाकर पका लें। इसको लगाने से खुजली दूर होती है।
  • शीतपित्त (अर्टिकेरिया) -जीरे को पानी में उबालकर उस पानी से नहाने से पित्ती रोग दूर होता है। यह प्रयोग खुजली होने पर भी लाभकारी है।

बुखार में भी जीरा है बहुत फायदेमंद

  • कच्चा जीरा बारीक पीस-छानकर समान मात्रा में पुराना गुड़ मिलाकर मटर के आकार की गोलियां बना लें, यह 2-2 गोलियां प्रतिदिन तीन बार 1 गिलास ताजा पानी के साथ सेवन करने से पुराना बुखार, रुक-रुककर आने वाला बुखार, बुखार के बाद आने वाली कमजोरी दूर होती है |
  • एक चम्मच कच्चा (बिना सेंका हुआ) जीरा लेकर बारीक पीसकर इससे तिगुनी मात्रा में पुराना गुड़ इसमें मिलाकर इसकी तीन गोलियां बनाकर रख लें। निश्चित समय पर ठंड लगकर आने वाले मलेरिया बुखार के आने से पहले 1-1 घंटे के अंतराल से 1-1 गोली निरंतर कुछ दिन सेवन करते रहने से मलेरिया बुखार में आराम हो जाता है।
  • जीरे को गाय के दूध में पकाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शक्कर के साथ सेवन करने से पुराना बुखार मिटता है तथा रोगी की कमजोरी/दुर्बलता दूर होती है।
  • बुखार के बाद अक्सर होंठों पर फुसियां हो जाती हैं, इन फुसियों पर जीरा पानी में पीसकर लेप लगाने से पूरी तरह आराम होता है।
  • दांतों का दर्द – काले जीरे के काढ़े से कुल्लियां करने से दांतों का दर्द दूर होता है।
  • पथरी की समस्या में जीरा और चीनी समान मात्रा में लेकर व पीसकर 1-1 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन करने से पथरी रोग में बहुत लाभ होता हैं।

जीरे के बीजों की सेवन करने की मात्रा 10 से 20 ग्रेन तक है। जीरा की तासीर ठंडी (शीतल) है। यदि शरीर में गर्मी बढ़ गई हो तो जीरे का सेवन करने से शरीर की गर्मी खत्म होती है। इस सम्बंध में एक कहावत मशहूर है कि, ठंडी के लिए जीरा और गर्मी के लिए हीरा। तो अगर आप अपने शरीर को बीमारियों से बचाकर रखना चाहते हैं तो आप अपने खाने में जीरे का सेवन करना शुरू कर दें। जीरे के इस्तेमाल से आप स्वस्थ रह सकती है।

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