हृदय रोग में भोजन : कौन-कौन से फल और सब्जियां खाएं

हृदय रोग में भोजन का सही चुनाव इस रोग को रोकने में काफी महत्त्वपूर्ण होता है | हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और हृदय रोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए यहां हम इन तीनों समस्याओं को कम करने वाले भोज्य पदार्थों की चर्चा करेंगे। मोटापा और डायबिटीज की समस्या भी इन्हीं रोगों से जुड़ी होती है, इसलिए इस अध्याय में दिए गए ज्यादातर पदार्थ मोटापे और डायबिटीज में भी फायदा पहुंचाते हैं, लेकिन फिर भी कुछ भोज्य पदार्थ ऐसे हैं, जिन्हें हम हृदय रोग में तो खा सकते हैं, मगर यदि डायबिटीज है तो नहीं खा सकते। इसीलिए डायबिटीज में खाये जा सकने वाले फलो और सब्जियों को हमने इस पोस्ट डायबिटीज में क्या खाए और क्या नहीं में पहले ही बता दिया है।

हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या से बचने के लिए और यदि ये समस्याएं हो जाएं तो इन्हें कम करने या इनसे छुटकारा पाने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ हमें निम्नलिखित भोज्य पदार्थ विशेष रूप से खाने की सलाह देते हैं |

इस पोस्ट में हृदय रोग में कौन-कौन से फल,अनाज और सब्जियां खाने चाहिए और क्यों ? यह विस्तारपूर्वक कारणों और उदाहरणों के साथ बताया गया है | अगर आप संक्षेप में जानना चाहते है तो आपकी सुविधा के लिए नीचे इन सभी फलों और सब्जियों के नाम दे दिए गए हैं | इन फलो और सब्जियों को कब और कैसे खाना चाहिए ? और नुस्खो की जानकारी के लिए पूरा पोस्ट पढ़ें |

हृदय रोग मरीजो को अनाजो में  गेहूं की घास, ओट्स, ब्राउन राइस, गेहूं का अंकुर, और मक्का खाने चाहिए

हृदय रोग मरीजो को सब्जियों में  गाजर, फलीदार सब्जी, शकरकंद, टमाटर, कद्दू, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकोली, फूलगोभी, लौकी, शतावरी, मशरूम, शिमला मिर्च, चुकंदर, लहसुन, और प्याज खाने चाहिए

हृदय रोग मरीजो को फलों में : सेब, केला, स्ट्रॉबेरी, बेरी, संतरे, खरबूजा, तरबूज, अनार, अंगूर, नाशपाती, नींबू, पपीता, कीवी, आडू, खुबानी, चेरी, अनानास, मौसमी, लीची, अमरूद और आम खाने चाहिए |

हृदय रोग में भोजन: अनाज

Vegetables fruits good for the heart patient हृदय रोग में भोजन : कौन-कौन से फल और सब्जियां खाएं

हृदय रोग में भोजन

  • गेहूं की घास (ज्वारे) है बहुत ही लाभकारी : प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञों के अनुसार हृदय रोगों में गेहूं की घास का रस बहुत लाभकारी है। इसके लिए घर में आठ-दस गमलों का इंतजाम करें। इसके बाद एक मुट्टी गेहूं भिगो दें। फिर इन्हें गमलों में बो दें। गमलों को छाया में ही रखें। बोए हुए अनाज के दानों को आठ-दस इंच ऊंचाई तक उगने दें। इसके बाद इस घास को उखाड़ लें और कुचलकर रस तैयार करें। रोजाना खाली पेट करीब आधा गिलास पीएं। घास की निरंतर उपलब्धता के लिए जैसे ही घास उगे, नए दाने बोते जाएं।
  • ओट्स के फाइबर देख भाग जाता है बुरा कोलेस्ट्रॉल : ओट्स में मुख्य रूप से जौ और अन्य अनाजों के दलिया आते हैं। हमें उपलब्ध सभी अनाजों के बीच ओट्स में सबसे ज्यादा घुलनशील फाइबर होते हैं, जिससे ये बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। बुरे कोलेस्ट्रॉल के कम होने का मतलब है दिल की बीमारी के खतरे का काम होना। इसलिए नाश्ते में ओटमील या दलिये का सेवन जरूर करें।
  • दिल को साफ रखता है ब्राउन राइस का सेलेनियम : भूरे चावल सफेद चावल का अपरिष्कृत (अनरिफाइंड) रूप होते हैं। ब्राउन राइस में मौजूद सेलेनियम तत्व हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की समस्या कम करता है।
  • हृदय रोग में भोजन : हृदय रोग का खतरा कम करता है गेहूं का अंकुर (व्हीट जर्म) : इसे पोषक तत्वों का गोदाम भी कहा जाता है। इसमें वसा नाममात्र की होती है और कोलेस्ट्रॉल होता ही नहीं है। यह फोलिक एसिड का सर्वश्रेष्ठ भंडार है। फोलिक एसिड दिल की बीमारी का खतरा टालने का काम करता है। फोलिक एसिड का निर्माण मनुष्य ने किया है। यह एक प्रकार का विटामिन है, जो कोशिकाओं के विकास और सुचारू मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी होता है। यह कार्डियो वेस्कुलर डिजीज यानी दिल की बीमारियों को रोकने का काम करता है।
  • पकाने पर भी कम नहीं होते मक्का के गुण : मक्का या भुट्टे में कैरोटिनॉयड होता है। कैरोटिनॉयड दिल की बीमारी के खतरे को कम करता है, इसलिए मक्का को भी भोजन में शामिल करना चाहिए। मक्का की खास बात यह है कि पकाने के बावजूद इसकी एंटी ऑक्सीडेंट वैल्यू कम नहीं होती।

हृदय रोग में भोजन : सब्जियां

  • हृदय रोग में भोजन : दिल को मजबूत बनाता है गाजर का कैरोटिनॉयड : गाजर खून को साफ करती है और इसमें मौजूद कैरोटिनॉयड दिल के रोग को शरीर के पास नहीं आने देते। गाजर में बीटा कैरोटीन के अलावा अल्फा कैरोटीन भी पाया जाता है। गाजर में मौजूद घुलनशील फाइबर बाइल एसिड के साथ मिलकर कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटाते हैं। गाजर के फायदे और 20 बेहतरीन औषधीय गुण |
  • दिल को पसंद हैं सेम और अन्य फलीदार सब्जी : इनमें भरपूर घुलनशील फाइबर होते हैं। इनमें फोलेट, मैग्नीशियम, आयरन, पोटेशियम जैसे तत्व भी होते हैं। ये सभी बुरे कोलेस्ट्राल, ट्राइग्लाइसिराइड्स और ब्लड प्रेशर को घटाने का काम करते हैं, जिससे दिल की समस्याओं में कमी आती है। ये खास तौर से कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा काफी कम कर देते हैं। नुस्खा : काले चने उबालकर उनमें सेंधा नमक मिलाकर खाने से हृदय रोग में लाभ होता है। दिल की बीमारी से बचाव के उपाय-Heart Disease Prevention
  • हृदय रोग में भोजन : दिल के लिए राहत का दूसरा नाम शकरकंद : डायटरी फाइबर होने के कारण तो शकरकंद दिल के लिए अच्छा है ही, इसके अलावा इसका विटामिन बी-6 रक्त वाहिनियों की कठोरता को कम करने में बहुत सहायक है। इसमें भरपूर पोटेशियम भी है, जिससे यह ब्लड प्रेशर को घटाता है। इसका पोटेशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन भी कायम करता है, जिससे ब्लड प्रेशर तो नियंत्रण में रहता ही है, दिल की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त रहती है। इसमें मौजूद विटामिन डी न केवल दिल को स्वस्थ रखता है, बल्कि हमारा मूड भी ठीक रखता है। खास बात : शकरकंद में मैग्नीशियम भी अच्छी मात्रा में होता है। मैग्नीशियम शरीर को तनाव, दबाव से राहत देता है। यह रक्त और धमनियों के लिए भी अच्छा है।
  • टमाटर के पास हैं दिल की रक्षा के सटीक हथियार : विटामिन सी और ए होने से टमाटर हमारी कोशिकाओं के दुश्मन फ्री रेडिकल्स से लड़ता हैं। फ्री रेडिकल्स से लड़ने का मतलब है ऑक्सीडेशन का विरोध करना। ऑक्सीडेशन से शरीर को अन्य नुकसान के अलावा धमनियां भी सख्त होने लगती हैं। टमाटर धमनियों को सख्त होने से रोकता है, जिससे धमनियों से संबंधित रोग दूर रहते हैं। टमाटर को शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल भी नापसंद है। विशेषज्ञों ने पोटेशियम, नियासिन, फोलेट और विटामिन बी-6 को दिल के रोगों के मामले में बहुत ही अच्छा बताया है और कितनी अच्छी बात है कि ये चारों एक साथ ही टमाटर में मौजूद हैं।
  • हृदय रोग में भोजन : दिल के काम की हर चीज है कद्दू में : कद्दू में भरपूर फाइबर, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन आदि की मौजूदगी होती है। इसमें मौजूद तत्व फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। कद्दू में केले से भी ज्यादा मैग्नीशियम होता है। कद्दू कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। यह एसिडिटी और उससे उत्पन्न बहुत सारी परेशानियों का अंत करता है।
  • पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां हैं बहुत कारगर : पालक में मौजूद डायटरी फाइबर, विटामिन सी, ई, बीटा कैरोटीन, सेलेनियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज आदि न सिर्फ ब्लड प्रेशर को घटाते हैं, बल्कि दिल के रोग का खतरा भी कम करते हैं। पालक में फोलेट भी मौजूद है, जो स्वयं में तो दिल के लिए अच्छा है ही, साथ ही यह विटामिन बी-6 और बीटेन के साथ मिलकर दिल के लिए खतरनाक अमीनो एसिड होमोसिस्टीन के सीरम स्तर को भी कम करता है।
  • फूलगोभी: फूलगोभी में ब्रोकोली वाला विशेष तत्व सल्फोराफेन तो होता ही है, इसी के साथ यह विटामिन सी और मैग्नीशियम के लिए जानी जाती है। ये दोनों ही एंटी ऑक्सीडेंट के गुण रखते हैं।
  • हृदय रोग में भोजन : दिल की राहत के लिए लौकी का सेवन करें : लौकी प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और मिनरल से भरपूर होती है। यह दिल के लिए इसलिए अच्छी है, क्योंकि यह शरीर में तनाव को कम करती है। यह शरीर में एसिडिटी को दूर करती है। इसका सेवन अच्छी नींद के लिए भी बढ़िया माना जाता है। यह दिल से जुड़े एंजाइना के दर्द में बहुत राहत देती है। लौकी यह दिल के लिए टॉनिक की तरह है, इसलिए दिल के मरीजों को लौकी का जूस, लौकी का रायता, लौकी की सब्जी का सेवन करना चाहिए। ध्यान रहे कि लौकी का जूस निकालने के बाद यदि अस्वाभाविक रूप से कड़वा लगता है तो इसे न पीएं। कड़वा होने पर यह जहरीला हो सकता है। वास्तव में लौकी और उसके परिवार की अन्य सब्जियों (करेला, कद्दू आदि) में कुछ जहरीले तत्व भी होते हैं, इसलिए पहले घूंट भरकर देखें। ज्यादा कड़वा लगे तो न पीएं। नुकसान की आशंका को पूरी तरह से दूर करने के लिए लौकी की सब्जी, लौकी का रायता भी अच्छा विकल्प है। ह्रदय रोग में लौकी के बेहतरीन फायदे
  • सख्त होती धमनियों पर ब्रोकोली लगाती है ब्रेक : लोहा, विटामिन ए और सी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, क्रोमियम, एंटी ऑक्सीडेंट, फाइटोकेमिल्स जैसी चीजें एक साथ होने से यह हर प्रकार से बड़े काम की चीज है।
  • दिल को जो चाहिए, वह सब शतावरी (Asparagus) में है : इस सब्जी में दिल के रोग से शरीर को दूर रखने वाला तत्व फोलेट तो है ही, साथ ही सोडियम, कोलेस्ट्रॉल और फैट बिल्कुल भी नहीं है यानी बेहद कम कैलोरी।
  • हृदय रोग में भोजन : रोग से लड़ने में मग्न रहने वाली चीज है मशरूम : मशरूम में मौजूद कई प्रकार के विटामिन बी मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखते हैं, जिससे दिल दुरुस्त रहता है। इनमें एक खास तत्व सेलेनियम होता है, जो दिल के लिए अच्छा माना जाता है। मशरूम के दो तत्व मैटेक और शीटेक कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम करते हैं। इसका पोटेशियम हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक की आशंका धूमिल करता है। मशरूम में विटामिन डी का भंडार होता है, जिससे हड्डियों को तो फायदा है ही, साथ ही मूड भी सही रहता है। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
  • शिमला मिर्च के संग अच्छा धड़कता है दिल : विटामिन ए, ई, बी और सी से भरपूर, मगर कैलोरी में बहुत कम यानी सख्त रोग प्रतिरोधी और दिल के लिए बढ़िया। शिमला मिर्च में एक खास तत्व होता है, जिसे कैप्सेइसिन कहा जाता है। इसकी विशेषता है कि यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और रक्त वाहिनियों को फैलाकर ब्लड सकुलेशन को नियंत्रित करता है। इसी के साथ यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे दिल की सेहत ठीक रहती है।
  • चुकंदर के साथ बेकाबू नहीं हो सकता ब्लड प्रेशर : इसमें आयरन, विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं। हाई ब्लड प्रेशर को काबू में करने के लिए चुकदर बहुत काम की चीज है। यह खून को साफ करता है और उसमें हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। इसके रस में नाइट्रेट होता है, जो रक्त के दबाव को कम करता है यानी दिल की बीमारी में यह फायदेमंद है। चुकंदर के फायदे तथा 32 बेहतरीन औषधीय गुण
  • हृदय रोग में भोजन : लहसुन से बहुत खुश रहती हैं रक्त वाहिनियां : लहसुन गजब का एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी बायोटिक पदार्थ है। यह दिल का दोस्त है। कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करने में लहसुन बड़े काम की चीज है। एंटी क्लॉटिंग (रक्त को गाढ़ा होने और जमने से रोकना) प्रॉपर्टी होने के कारण लहसुन खून को पतला भी करता है। इससे शरीर में रक्त वाहिनियों में रक्त का थक्का नहीं बन पाता। उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारी धमनियां अपनी खिंचाव-क्षमता खोने लगती हैं। लहसुन इस नुकसान को भी कम करता है। इसके अलावा ऑक्सीडेशन की वजह से धमनियों के सख्त होने की प्रक्रिया को भी लहसुन में मौजूद सल्फर कपाउंड रोकता है। यदि यह आशंका हो कि हृदय में जल्द दर्द शुरू हो सकता है तो लहसुन की चार कलियां चबाकर खा जाएं।
  • हृदय रोग में भोजन : प्याज में दिल के लिए प्यार-ही-प्यार है : भारत में छठी शताब्दी में ही पता लग गया था कि प्याज दिल के लिए बहुत अच्छी चीज है। बाद में आधुनिक विशेषज्ञों ने न सिर्फ प्राचीन बातों की पुष्टि की, बल्कि यह भी बताया है कि प्याज में काफी मात्रा में विटामिन सी के अलावा एंटी ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करते है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाते हैं। प्याज हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करती है और रक्त का थक्का बनने से भी रोकती है। ध्यान रहे कि कच्ची प्याज ही दिल के लिए ज्यादा अच्छी है। आग में पकने के बाद इसके अनेक अच्छे गुण नष्ट हो जाते हैं। दिल के रोगी क्या न खाएं, परहेज

हृदय रोग में भोजन : फल

  • सेब के सामने सख्त धमनी भी हो जाती है मुलायम: सेब को दिल की सबसे चहेती कोरोनरी आर्टरी (धमनी) का अच्छा मित्र माना जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। यह पेक्टिन नाम के फाइबर का घर है, जो हमें स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए दिल के रोग से बचने के लिए हमें सेब को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
  • हृदय रोग में भोजन : दिल के लिए बेजोड़ है केला : खाने की जिस चीज में नमक (सोडियम) कम हो और पोटेशियम भरपूर हो, वह चीज हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा कम कर देती है। केला ऐसी ही चीज है, जिसमें नमक कम है और पोटेशियम खूब है। केला फाइबर से भी भरपूर है और विशेषज्ञ कहते हैं कि जहां फाइबर है, वहां दिल की बीमारी का खतरा कम है। केले में विटामिंस भी होते हैं, जो होमोसिस्टीन नाम के अमीनो एसिड को तोड़ने और उसे कमजोर करने का काम करते हैं। इससे दिल का रोग शरीर से दूर रहता है। खास बात : होमोसिस्टीन एक ऐसा अमीनो एसिड है, जिसका स्तर यदि शरीर में बढ़ जाए तो दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
  • बेरी भी चाहती हैं कि दिल अच्छी तरह धड़के : स्ट्रॉबेरी और अन्य सभी बेरी को शरीर में दिल का बीमार होना पसंद नहीं है। इसका कारण है इनमें मौजूद फाइबर और फोलेट। फाइबर कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करते हैं, जबकि फोलेट कार्डियो वेस्कुलर बीमारियों का खतरा कम करता है। ये मीठी होती हैं, इसलिए विशेषज्ञ इनके जूस के बजाय फल को ही खाने की सलाह देते हैं, क्योंकि जूस में ज्यादा शुगर आ जाती है और शरीर को फाइबर नहीं मिल पाते। खास बात : फाइबर (रेशे) पौधों में पाए जाने वाले वे पदार्थ हैं, जो पाचन-क्रिया के दौरान पचने का विरोध करते हैं। अघुलनशील फाइबर पाचन तंत्र में पचते नहीं हैं, हां उनके छोटे टुकड़े जरूर हो सकते हैं। फाइबर दिल के मामले में सबसे बड़ा काम यह करते हैं कि ये कोलेस्ट्रॉल को अपने साथ बहाकर ले जाते हैं, जिसके फलस्वरूप ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल को धमनियों में जमने का मौका भी नहीं मिलता ।
  • दिल की रक्षा के लिए पूरी फौज है संतरे के पास : संतरे में विटामिन सी, ए, एंटी ऑक्सीडेंट, डायटरी फाइबर, फ्लेवोनॉयड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम जैसे तत्व होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार संतरे में करीब 170 फोटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। फ्लेवोनॉयड की संख्या करीब 60 होती है। इस वजह से यह शरीर में सूजन, जलन, अल्सर, गांठ, कोशिकाओं के क्षय और दिल के दुश्मनों के खिलाफ शानदार ढंग से काम करता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। संतरा रक्त को शुद्ध भी करता है।
  • हृदय रोग में भोजन : खून के थक्के से बचने के लिए खरा है खरबूजा : खरबूजे में विटामिन ए, बीटा कैरोटीन और विटामिन सी भरपूर होता है। विटामिन सी का भंडार होने से यह एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है। इसमें एडिनोसाइन नाम का पदार्थ होता है, जो खून को पतला करता है। साथ ही इसमें फोलेट भी होते हैं यानी दिल के लिए उत्तम पदार्थ। इसमें पोटेशियम होने की वजह से दिमाग में खूब ऑक्सीजन जाती है, जिससे तनाव दूर करने में मदद मिलती है। खरबूजे के बीज भी प्रोटीन, फाइबर और विटामिन से भरपूर हैं।
  • हृदय रोग में भोजन : तरबूज में टमाटर से भी ज्यादा लाइकोपेन : तरबूज का मिजाज क्षारीय होता है, जिससे यह हमें एसिडिटी से बचाता है। एंटी ऑक्सीडेंट लाइकोपेन के भंडार में यह टमाटर को भी पीछे छोड़ देता है। दिल के संबंध में लाइकोपेन की विशेषता हम टमाटर के प्रसंग में पढ़ ही चुके हैं। तरबूज में साइटूलाइन नामक तत्व होता है, जो रक्त वाहिनियों को फैलाने का काम करता है, जिससे रक्त का प्रवाह सुचारू होता है। इसमें पोटेशियम भी है, जिसके दिल संबंधी फायदे हम पहले ही पढ़ चुके हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और इसमें कोलेस्ट्रॉल तो बिल्कुल नहीं होता है।
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  • केवल अनार में ही है दिल का एक खास दोस्त : अनार में भरपूर फाइटोकेमिकल्स, फ्लेवेनॉयड और पॉलीफिनोल (एंटी आक्सीडेंट) होते हैं, जो हमें हृदय रोगों के खतरे से बचाते हैं। एकमात्र अनार में प्यूनिकएलेजिस पदार्थ पाया जाता है। यह इसकी एंटी ऑक्सीडेंट वैल्यू को बाकी पदार्थों के मुकाबले बढ़ा देता है। प्यूनिकएलेजिंस कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करके दिल और रक्त वाहिनियों के रास्ते की रुकावटों को हटा देता है। दिल के रोगियों के लिए इसकी खास तौर से सिफारिश की जाती है।
  • हृदय रोग में भोजन : दिल के अच्छे मित्रों में से एक है अंगूर : अंगूर में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन ए, बी-6 और सी होता है ही आयरन, कैल्शियम, सेलेनियम, फास्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व भी होते हैं। खास बात 1 : कहा जाता है कि फ्रांस के लोग तैलीय और मिर्च-मसालेयुक्त भोजन करने के बावजूद इसलिए हृदय रोग का कम शिकार बनते हैं, क्योंकि वे अंगूर खाना नहीं छोड़ते। खास बात यदि दिल में दर्द महसूस हो तो आधा कप अंगूर का रस पी जाएं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे फौरी लाभ मिलेगा ।
  • दिल के रोगों की नाशक नाशपाती : नाशपाती में फाइबर, विटामिन बी, सी, ई और कॉपर, पोटेशियम का भंडार होता है, जिससे यह पूरे शरीर के साथ ही दिल के लिए भी बहुत लाभकारी है। नाशपाती में नाम का फाइबर आम से भी ज्यादा होता है, जिससे यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। विटामिन सी और कॉपर होने से यह कोशिक दुश्मन फ्री रेडिकल्स से लड़ता है।
  • हृदय रोग में भोजन : रक्त वाहिनियों की दीवार का रक्षक है नींबू : यह एक एंटी ऑक्सीडेंट है, इसलिए फ्री रेडिकल्स से शरीर को दिल की बीमारी से बचाता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और ब्लड प्रेशर को कम करता है। नींबू में विटामिन पी (बायोफ्लेविनॉयड्स) पाया जाता है। यह विटामिन रक्त व को मजबूत बनाने का काम करता है। इससे शरीर के अंदर ब्लड हैमरेज (वाहिनी के फटने से रक्त निकलना) का खतरा कम हो जाता है। पृथ्वी पर मौजूद सभी भोज्य पदार्थों के बीच नींबू एकमात्र ऐसा भोज्य पदार्थ है, जो ए आयनिक है। इसका अर्थ है एक ऐसा आयन, जिसमें निगेटिव चार्ज है। इसे छोड़ बाकी सभी भोज्य पदार्थ कैट आयनिक (पॉजीटिव चार्ज वाले आयन) हैं। एन आयनिक होने से नींबू का महत्व बहुत बढ़ जात है। इसके शरीर में जाने से एन आयन और कैट आयन में रि-एक्शन होता है, जिससे सभी कोशिकाओं क ऊर्जा मिल जाती है ।
  • हृदय रोग में भोजन : कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीडेशन रोकता है पपीता : पपीते में विटामिन सी, बी और बीटा कैरोटीन तथा होते हैं। पपीता उन सभी चीजों को पचाने में मदद करता है, जो एक शरीर ग्रहण करता है, इस शरीर स्वस्थ और मजबूत रहता है। पपीता कोलेस्ट्रॉल को ऑक्सीडाइज्ड नहीं होने देता, धमनिय रहती हैं और व्यक्ति हृदय रोग से बचा रहता है। नुस्खा : पपीते के पते को पानी में उबालकर और फिर पानी को छानकर नित्य पीने से बहुत लाभ होता है |
  • कीवी कम करता है हृदय रोग का खतरा : अध्ययन बताते हैं कि कीवी रक्त का थक्का बनने से रोकता है। साथ ही इसमें विटामिन ई भी होता है, इसलिए यह हृदय रोग का खतरा कम करता है। इसका फोटोन्यूट्रिएंट डीएनए की मरम्मत करने के कारण शानदार एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है। इसका फोलिक एसिड खून में लाल रक्त कणिकाएं बनाता है और विटामिन सी शरीर को रोग प्रतिरोधक बनाता है। कीवी में मौजूद मैग्नीशियम, पोटेशियम जैसे तत्व भी दिल के लिए बढ़िया होते हैं।
  • आडू की आदत है दिल को मजबूत करना : आडू में आयरन, जिंक, मैग्नीशियम, मैगनीज, कैल्शियम, सल्फर और विटामिन ए, बी, सी तथा ई जैसे तत्व होते हैं। आडू दिल की मांसपेशियों को मजबूत करके और खून का बहाव सही करके दिल को तमाम बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है।
  • हृदय रोग में भोजन : बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है खुबानी : इस फल में भी एंटी ऑक्सीडेंट और डायटरी फाइबर भरपूर होते हैं। ताजा और सूखे, दोनों रूप में यह लाभकारी है। अगर बे-मौसम खा रहे हैं तो इनमें सल्फर डाई ऑक्साइड हो सकता है, जो नुकसान करते हैं, इसलिए यदि मौसम नहीं है तो सूखे खुबानी खाएं। इसका विटामिन सी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसमें मौजूद पोटेशियम और सोडियम शरीर में कोशिकाओं को जरूरी तत्व सप्लाई करने वाले इलेक्ट्रोलाइट का स्तर सही रखते हैं। नुस्खा : खुबानी के रस को चार चम्मच पानी में डालकर रोज पीने से रोगी को बहुत लाभ होता है।
  • फैट, कोलेस्ट्रॉल को चांस नहीं देती चेरी : चेरी कुदरत के सबसे ताकतवर एंटी इन्फ्लेमेटरी (सूजन, शोथ के खिलाफ काम करने वाले ) सिपाही हैं। ये शरीर में मौजूद वसा और कोलेस्ट्रॉल के खिलाफ भी लड़ते हैं। ये दिल के लिए भी बढ़िया हैं। खास बात यह है कि चेरी में मेलाटोनिन हार्मोन भी पाया जाता है |
  • हृदय रोग में भोजन : कोलेस्ट्रॉल का कद नहीं बढ़ने देता: आम में करीब सात एंटी ऑक्सीडेंट और अन्य जरूरी एंजाइम होते हैं। विटामिन सी और भरपूर फाइबर होने से आम कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। यह एसिडिटी का दुश्मन है और शरीर में क्षारीयता को आम मजबूत करता है। विटामिन सी होने से आम रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। खास बात : अनानास, मौसमी, लीची और अमरूद भी दिल के बहुत अच्छे दोस्त हैं। जो भी फल उपलब्ध हो, उसका आधा कप रस रोज पीएं।

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