जानिए क्या है ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी तथा डोमेस्टिक ट्रैवलर्स बीमा पॉलिसी

Overseas Mediclaim Policy – क्या आप अपने परिवार के साथ कनाडा, पैरिस या किसी अन्य दूसरे देश में घूमने की योजना बना रहे हैं? और इस बात से चिंतित है की विदेश में स्वास्थ्य से जुडी किसी अमेर्जेंसी हो जाने पर मदद के लिए किस से संपर्क करेंगे तो आपकी ऐसी ही समस्या के समाधान के लिए बीमा कम्पनियों ने ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी को बनाया है ताकि आप तनाव मुक्त होकर अपनी यात्रा का पूरा मजा उठायें |

क्या है ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी ?

Overseas and Domestic Mediclaim Policy hindi जानिए क्या है ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी तथा डोमेस्टिक ट्रैवलर्स बीमा पॉलिसी

ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी

विदेश में घूमने फिरने के दौरान यदि किसी कारणवश हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़े तो उस खर्चे से निपटने के लिए भी स्वस्थ्य बीमा उपलब्ध है इस तरह के बीमे को ‘ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी’ के नाम से जाना जाता है। इसके अंतर्गत मुख्यतः वैयक्तिक दुर्घटना, मुत्यु, विकलांगता, अस्पताल में भरती कराने का खर्च और यदि दुर्भाग्य से मृत्यु हो जाती है, तब शव को भारत में लाने का खर्च, सामान का खो जाना, यात्रा के दौरान में सामान मिलने में हो रही देरी, पासपोर्ट का खो जाना तथा तृतीय पक्ष उत्तरदायित्व (Third Party Liability Insurance) को शामिल किया जाता है।

यात्रा बीमा (Traveler Insurance) पॉलिसी के दो प्रकार हैं :

  • Overseas Mediclaim Policy (किसी दूसरे देश में घूमने-फिरने के दौरान )
  • Domestic Travelers Policy (यदि आप अपने ही देश में घूमने-फिरने निकले है तो )

ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी के लाभ तथा मुख्य बिंदु  :

  • पॉलिसी खरीदने से पहले यह अवश्य जाँच लें कि आपकी पर्यटन कंपनी ने इस प्रकार की बीमा पॉलिसी पहले से ली हुई है या नहीं ? कभी-कभी ग्लोबल क्रेडिट कार्ड के साथ ही यह पॉलिसी फ्री में या कम खर्चे में दे दी जाती है |
  • ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी के दो प्रकार हैं। पहले प्रकार में सिर्फ दुर्घटना होने पर ही होनेवाले डॉक्टरी खर्चे के लिए बीमा मिलता है। दूसरे प्रकार के बीमे में यदि दुर्घटना की वजह से उपभोक्ता को कोई बीमारी हो जाती है, तब पूरे डॉक्टरी खर्चे में बीमा का लाभ मिलता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत भी मरीज को कम-से-कम 24 घंटे तक अस्पताल में भरती होना जरूरी है।
  • ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी में उपभोक्ता की उम्र की सीमा 6 महीने से 70 साल तक ही निर्धारित की गई है। 70 की उम्र से अधिक व्यक्ति को डॉक्टरी जाँच तथा मेडिकल इतिहास देखकर बीमे की किश्त में बढ़ोतरी करने के बाद ही पॉलिसी दी जाती है।
  • व्यापारिक तथा कामकाज, नौकरी, पर्यटन तथा उच्च शिक्षा कारणों से विदेश जानेवाले लोगों को यह पॉलिसी दी जाती है।
  • 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए, अमेरिका-कनाडा जाने से पहले खून तथा पेशाब की जाँच करवाना जरुरी है। इसके साथ ही ई.सी.जी. रिपोर्ट भी आवश्यक है।
  • अन्य देशों में जानेवाले भारतीयों की उम्र सीमा 60 वर्ष रखी गई है यानी 60 वर्ष की उम्र के बाद डॉक्टरी जाँच की रिपोर्ट दिखाना जरुरी है। तथा विदेशी यात्रा 60 दिनों से अधिक समय के लिए होना भी आवश्यक है।
  • यह पॉलिसी स्टैंडर्ड तौर पर 180 दिनों के लिए दी जाती है। यदि यात्रा के दौरान सेहत अच्छी है, तब इसे आगे 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। इस बीमा पॉलिसी की किश्त यात्रा की मियाद, व्यक्ति की उम्र तथा यात्रा किये जाने देश पर निर्भर करती है।
  • बढ़ती उम्र तथा यात्रा के बढ़ते दिनों के साथ बीमे की किश्त भी बढ़ती है।
  • अमेरिका तथा कनाडा में डॉक्टरी खर्च बहुत अधिक रखा गया है, इसलिए इन देशों में जाने के लिए बीमे की किश्त भी बहुत बड़ी होती है। ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी के अंतर्गत डिडक्टिबल क्लॉज होता है, जो आमतौर पर 100 अमेरिकी डॉलर के बराबर होता है, इसलिए सभी दावे के साथ 100 अमेरिकी डॉलर का बोझ बीमेदार को उठाना पड़ता है। बाकी खर्चा बीमा कंपनी देती है।
  • यदि यात्री का सामान खो जाता है, तब बीमा कंपनी पहले से तय की गई रकम हर्जाने के तौर पर देती है। इस प्रकार की घटना घटित होने पर, जिस विमान से सामान खो गया है, उस विमान कंपनी से लिखित रूप में लेटर लेना जरूरी है। यदि आपका सामान खोए हुए 12 घंटे से अधिक समय बीत गया है, तब आपातकालीन मदद के लिए 100 अमेरिकन डॉलर का दावा किया जा सकता है। इस दावे के साथ विमान कंपनी की ओर से सामान न मिलने का सबूत लिखित रूप में जोड़ना जरुरी है।
  • यदि पासपोर्ट खो जाता है, तब उसकी डुप्लीकेट कॉपी लेने के लिए उस पर आनेवाला खर्च बीमा कंपनी देती है। तीसरे पक्ष के उत्तरदायित्व के रूप में यदि गलती से तीसरे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है अथवा अंग भंग, सांपत्तिक का नुकसान होती है, तब दो लाख अमेरिकन डॉलर तक के नुकसान की भरपाई दी जाती है।
  • ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी में, पॉलिसी खरीदने से पहले मौजूद रोगों-बीमारियों को पॉलिसी का फायदा नहीं मिलता है। इसके साथ ही आत्महत्या, नशीले पदार्थों का सेवन, गर्भावस्था, एड्स, बिना पासपोर्ट के विदेश में यात्रा, जोखिम वाले खेल खेलते समय हो जानेवाली दुर्घटना, कोई अपराधिक काम आदि किसी भी बात में बीमा संरक्षण नहीं मिलता है ।
  • यदि यात्रा के ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी को खरीदने के समय बताई गई तय सीमा में ही यात्रा की जाए, तब यात्रा बीमा किश्त में छूट मिलती है। प्रवास के दौरान जरूरत पड़ने पर समय को बढ़ाने की सुविधा भी इस पॉलिसी में है। जब हम यह पॉलिसी खरीदते हैं, उसी समय हम जिस जगह (देश) में जानेवाले हैं, वहाँ की ‘टोल-फ्री’ सेवा का नंबर अवश्य अपने पास लिखकर रखें, क्योंकि दावे के समय इसकी जरूरत पड़ती है।
  • यदि किन्हीं कारणों से यात्रा रद्द होती है, तब प्रोसेसिंग फीस काटकर बची बीमे की किश्त की रकम वापस मिल जाती है। ठीक इसी तरह यदि प्रवास का समय घट जाता है और आप जल्दी लौट आते हैं, तब बचे समय के लिए बीमे की किश्त की रकम वापस भी मिल सकती है। इस काम के लिए सारे सबूत तथा दस्तावेज बीमा कंपनी के पास जमा करने पड़ते हैं।

डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पॉलिसी

  • ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी की तरह देश के अंदर यात्रा करने के दौरान स्वास्थ्य बीमे को डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पॉलिसी कहा जाता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत भी दुर्घटना, अस्पताल में भरती, सामान का खोना, लाइबिलिटी आदि प्रकार की भरपाई मिलती है।

किसी कारण वश बार-बार यात्रा करने वालों के लिए यात्रा बीमा पॉलिसी

  • इस पॉलिसी को ‘फ्रीक्वेंट ट्रैवलर्स पॉलिसी’ भी कहा जाता है। जिस कंपनी में कार्यरत अफसरों को हमेशा देश अथवा विदेश में कंपनी के लिए प्रवास करना पड़ता है, वह कंपनी इस पॉलिसी को खरीदती है। पार्टनरशिप फर्म भी इस पॉलिसी को जिसको की पर्यटन करना पड़ता है खरीद सकती है। यह पॉलिसी ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी की तरह ही है। फर्क इतना ही है कि कोई इच्छुक कंपनी अथवा साझाफार्म अपने नाम पर एक वर्ष के लिए एक ही बार इसे खरीद सकती है।

तो देखा आपने, कैसे देसी विदेशी यात्राओं के दौरान ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी तथा डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पॉलिसी आपके सच्चे साथी की भूमिका निभाता है |

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