जी मिचलाने, मतली तथा सफर के दौरान उल्टी रोकने के लिए नींबू नुस्खे

कई लोगों को घूमने का शौक तो बहुत होता है पर अक्सर उन्हें यात्रा के दौरान जी मिचलाना, उल्टी के डर से कहीं घूमने फिरने में डरते हैं। वहीं, कई लोगों को पहाड़ों पर घूमने के दौरान उल्टी की समस्या होने लगती है। लेकिन अब आपको इस समस्या से परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि नींबू आपकी इस बीमारी को दूर करने में काफी फायदेमंद होता है। सफर के दौरान जी मिचलाने पर अदरक की गोलियां या फिर अदरक की चाय का भी सेवन कर सकते हैं । इससे आपको उल्टी नहीं होगी। अगर हो सके तो नींबू, अदरक, सेंधा नमक यात्रा में अपने साथ ही रखें। अगर घबराहट हो तो इसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहें। नींबू एक असरदार औषधि है। इसमें मौजूद सिट्रिक ऐसिड उल्टी और जी मिचलाने की समस्या को रोकता है।

नींबू से उल्टी रोकने के उपाय

जी मिचलाने, मतली तथा सफर के दौरान उल्टी रोकने के लिए नींबू के नुस्खे Nimbu se safar ki ulti rokne ke upay

नींबू Lemon

  • नींबू बीच से काटकर उसमें सेंधा नमक, काली मिर्च पीसकर नींबू में भर दें। फिर उसे आग पर हल्का सा गरम करके चूसें।
  • नींबू का रस एक चम्मच, पानी एक चम्मच और ग्लूकोज एक चम्मच मिलाकर एक-एक घण्टे से लें। उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी।
  • आधा कप पानी में 15 बूंद नींबू का रस, भुना-पिसा हुआ जीरा, पिसी हुई एक छोटी इलायची मिलाकर हर आधे घण्टे बाद पियें। उल्टी होना बन्द हो जायेगी।
  • एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस तथा थोड़ा-सा शहद मिलाकर लें। उल्टी बन्द होगी और भूख भी लगेगी।
  • पर्वतारोहण-ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने वालों के लिए नींबू का सेवन लाभदायक है। नींबू पानी पीकर पहाड़ी पर चढ़ें, चलें, अपनी यात्रा शुरू करें। चढ़ते समय नींबू पानी पीते रहें। ऑक्सीजन की कमी होने, साँस लेने में कठिनाई होने पर नींबू पानी पियें। नींबू पानी मीठा, फीका, नमकीन इच्छा और स्वादानुसार पियें।
  • उल्टी या जी मिचलाना शुरू होते ही नींबू का सेवन करना चाहिए। इससे उल्टी नहीं होती। नींबू में चीनी और कालीमिर्च, दोनों भरकर चूसने से भी उल्टी बन्द हो जाती है।
  • थोड़ा-थोड़ा शहद चाटने से भी उल्टियां रुक जाती हैं।
  • इलायची के दानों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ खाने से घबराहट दूर होती है और उल्टी भी नहीं होती है।
  • पित्त बढने से होने वाली उल्टी में एक गिलास गन्ने के ताजे रस में दो चम्मच शहद घोलकर पीते रहना लाभकारी है।
  • जायफल को पानी में घिसकर लेप बनाएं और उसे पानी में घोलकर पीने से जी मिचलाना बन्द होता है।
  • गर्भावस्था की उल्टी (Morning Sickness)- (1) 100 ग्राम कच्चा जीरा, 30 ग्राम सेंधा नमक पीसकर नींबू के रस में तर कर लें, ये रस में डूबे रहें, इनको भीगते रहने दें। रोजाना एक बार स्टील की चम्मच से इसे हिला दें। सूख जाने पर आधा चम्मच प्रतिदिन तीन बार चबायें। गर्भावस्था में होने वाली उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी।
  • ठण्डे पानी में नींबू निचोड़कर पीने से गर्भावस्था की उल्टी में लाभ होता है। शिशुओं की उल्टी-(1) नींबू के रस की पाँच बूंद तीन चम्मच पानी में मिलाकर पिलायें, शिशु दूध नहीं उलटेगा। दस्त के घरेलू उपचार -Diarrhea Treatment 30 Tips
  • नींबू के छिलके सुखाकर, जलाकर राख बना लें। चौथाई चम्मच राख, आधा चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है।
  • दो छोटी इलायची पीसकर नींबू की फाँक में भरकर चूसने से उल्टी बन्द हो जाती है।
  • चौथाई कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर मिला लें। इसकी एक चम्मच हर पन्द्रह मिनट बाद पियें। उल्टी बन्द हो जायेगी।
  • सेंधा नमक, हरा धनिया पर आधा नींबू निचोड़कर, चटनी बना लें। जब तक उल्टी हो, बार-बार आधा चम्मच चाटते रहें।
  • शिशु दूध पीने के बाद उल्टी करता हो तो दूध पिलाने के कुछ देर बाद तीन बूंद नींबू का रस एक चम्मच पानी में मिलाकर पिलायें।
  • उल्टियाँ लगातार होती रहें, दवा देने पर भी बन्द नहीं हों तो नींबू के आठ बीज पीसकर तीन चम्मच पानी में घोलकर, छानकर आधा-आधा घण्टे के अन्तर से तीन बार पिलायें। उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी। उल्टी बन्द हो जाये तो आगे नहीं पिलायें।
  • गर्भवती स्त्रियों को सुबह नींबू का रस पानी में मिलाकर पिलाने से जी मिचलाने की समस्या से राहत मिलती है। भोजन की पाचन क्रिया सरलता से होती है।
  • एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़े और स्वादानुसार पिसी हुई मिश्री या शक्कर डालकर पीने से लू का प्रभाव कम हो जायेगा। गर्मी से घुटन-गर्मी की तपन से जी मिचलाना महसूस होने पर नींबू की शिकंजी पीने से दिमाग तरोताजा हो जाता है।
  • नींबू का शर्बत– एक गिलास ठण्डे पानी में हल्की आंच पर गर्म किया हुआ नींबू और शक्कर मिलाने से नींबू का शर्बत बन जाता है। यह पाचक, मतली और उलटी को दूर करने वाला होता है।
  • एसिडिटी-(1) नींबू एसिड का नाश करने वाला है। नींबू का रस गर्म पानी में डालकर शाम को पीने से अम्लपित नष्ट हो जाता है। मात्रा-एक कप गर्म पानी, एक चम्मच नींबू का रस एक-एक घण्टे से तीन बार लें।
  • नींबू, सोंठ, कालीमिर्च, अदरक सब थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर चटनी बनाकर चाटें।
  • यूरिक अम्ल-वात रोग को उत्पन्न करने वाली यूरिक एसिड नींबू से खत्म हो जाता है। यूरिक अम्ल को खत्म करने के लिए सुबह सवेरे खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस तथा आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर पियें। पेशाब के द्वारा शरीर में व्याप्त सारा एसिड निकल जायेगा।
  • व्याकुलता-धूप में घूमने, अधिक श्रम करने से व्याकुलता हो तो ठण्डे पानी में नींबू निचोड़कर पियें।
  • कड़वा स्वाद-(1) रोगी प्राय: कहते हैं कि मुँह का स्वाद कड़वा रहता है, स्वाद खराब रहता है, जिससे खाना अच्छा नहीं लगता। नींबू की फाँक पर कालीमिर्च, काला नमक डालकर तवे पर सेंककर चूसने से मुँह में कड़वेपन का स्वाद अच्छा हो जाने से भोजन के प्रति रुचि बढ़ती है।
  • 5 कली लहसुन, आधा नींबू, जरा-सी अदरक, हरा धनिया या पोदीना, काला नमक, जीरा सबकी चटनी बनाकर भोजन के साथ खाने से भोजन के प्रति रुचि बढ़ती है।
  • गंदे पानी कसे होने वाले रोगों से बचाव- गंदा पानी पीने से दस्त, टाइफाइड, पेट के रोग हो जाते हैं। यदि साफ़ शुद्ध पानी नहीं मिले, नदी, तालाब में इकट्ठा किया हुआ पानी हो तो पानी में नींबू निचोड़कर पियें। पानी में नींबू निचोड़कर पीने से पानी के रोग, गन्दगी आदि से होने वाले रोगों से बचाव होता है।
  • उल्टी होने पर हींग को पानी में घोलकर पेट पर हल्की-हल्की मालिश करें इससे भी जी मिचलाने से राहत मिलेगी ।
  • उल्टी होने पर कागजी नींबू को जलाकर उसकी एक चुटकी राख में शहद मिलाकर चाटने पर काफी राहत मिलती है।

अन्य सम्बंधित पोस्ट

Leave a Reply