माइग्रेन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए-Diet in Migraine

माइग्रेन यानि आधे सिर के दर्द से ज्यादातर स्त्रियाँ अधिक प्रभावित होती हैं | इस बीमारी में सिर के दाहिने या बाएं आधे भाग में बेचैन कर देने वाला दर्द होता है, इसीलिए इसे आधासीसी भी कहते हैं। सूर्य के बढ़ने के साथ-साथ दर्द बढ़ने के कारण इसे सूर्यावर्त भी कहते हैं। दर्द दोपहर में तेजी के साथ और सूर्य ढलने के साथ-साथ कम होता चला जाता है तथा यह दर्द 2 घंटे से लेकर 72 घंटे तक बना रहा सकता है। जैसा की हम हमेशा कहते हैं की किसी भो रोग में दवा के उपचार के साथ-साथ उचित खानपान की की भी बहुत अहम् भूमिका होती है उस रोग से जल्दी छुटकारा दिलाने में इसलिए इस पोस्ट में हम इस विषय पर जानेगे की माइग्रेन के मरीजो को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए |  इससे अगले लेख में हम इस बीमारी में आराम पाने तथा उपचार के लिए घरेलू तथा आयुर्वेदिक उपाय जानेगे | पर सबसे पहले इसके प्रमुख कारण तथा लक्षणों को संक्षेप में जाने लेते हैं |

माइग्रेन होने के प्रमुख कारण :

माइग्रेन सिरदर्द का ही एक प्रकार है, जो आधे सिर में होता है। बहुत सरल भाषा में कहें तो हमारी रक्त वाहिनियों में खून के कभी धीमे तो कभी तेज बहने के कारण यह दर्द होता है। खून के बहाव का धीमा या तेज होना रक्त वाहिनियों के सिकुड़ने के कारण होता है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों में खिंचाव, कसाव व उनका अधिक फूलना, एड्रीनल हार्मोन का स्राव कम होना, रक्त में सेरोटिनिन नामक रसायन के स्तर में असामान्यता, महिलाओं में मासिक धर्म के पूर्व व बाद में होने वाले हार्मोन के परिवर्तन, अत्यंत भावुक, संवेदनशील प्रवृत्ति होना, शारीरिक और मानसिक तनाव, थकावट, तेज धूप में अधिक देर रहना, चिंता करना, नींद कम लेना, मौसम में बदलाव, अपच की शिकायत एवं वंशानुगत आदि कई कारण होते हैं।

माइग्रेन के लक्षण :

  • माइग्रेन को ‘थ्रॉबिंग पेन इन हेडक’ भी कहा जाता है। इसमें ऐसा लगता है जैसे सिर पर हथौड़े पड़ रहे हैं।
  • माइग्रेनमें सिर के आधे भाग दाहिने या बाएं भाग में सुबह से दर्द होना, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, कनपटी में चुभने वाला दर्द शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ते जाना |
  • शोरगुल, प्रकाश, रोशनी, हिलने-डुलने में दर्द और भी अधिक बढ़ना, जी मिचलाहट, उलटी होने के बाद या नींद आने से दर्द में आराम मिलना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।

माइग्रेन में क्या खाना चाहिए  

migraine me kya khaye diet aur parhej माइग्रेन में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए - Diet in Migraine

Migraine and Diet

  • माइग्रेन की बीमारी में दही, चावल और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम के भोजन में सेवन करें।
  • सूरज निकलने से पहले गर्म दूध के साथ शुद्ध घी की जलेबी या रबड़ी खाएं।
  • नीबू का रस, चीनी और शहद मिलाकर बनी शिकंजी भोजन के बाद पिएं।
  • माइग्रेनमें भोजन के पहले सुबह-शाम एक कप की मात्रा में अंगूर का रस पिएं।
  • माइग्रेनहोने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें, यदि शरीर में पानी की कमी रहती है तो यह माइग्रेन या सिरदर्द का एक कारण बन सकता है। अगर किसी व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या रहती है तो कम-से-कम नौ कप और एक पुरुष को कम-से-कम 13 कप पानी एक दिन में जरूर पीना चाहिए। इसके साथ में हर्बल चाय, बिना मलाई का दूध जैसे पेय भी लें। हां, शरीर को पानी देने के चक्कर में सोडा और भरपूर चीनी वाले डिंक, मीठे की चाय या कॉफी और रेडी मेड जूस आदि से दूर रहें, क्योंकि इनमें बहुत ज्यादा कैलोरी और शुगर होती है, जो कहीं न कहीं माइग्रेन को बढ़ावा देने का काम करती है। इसके अलावा फलों से भी पानी की कमी को दूर किया जा सकता है।
  • कई फलों में पानी की कमी पूरी करने के अलावा वह चमत्कारी तत्व मैग्नीशियम भी पाया जाता है, जिसके माइग्रेन में लाभ का जिक्र आपको आगे पढ़ने को मिलेगा। सेब, अंगूर, कीवी, आडू जैसे फल इसके उदाहरण हैं। नारियल पानी भी अच्छा विकल्प है।
  • अच्छा वाला फैट माइग्रेन या सिर के दर्द की संख्या, अवधि और दर्द की तेजी को कम करती है। यह फैट सूजन और दर्द की विरोधी होती है। अच्छा फैट यानी ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और मोनोअनसेचुरेटिड फैट।
  • मांसाहारी के लिए : यदि आप मांसाहारी हैं तो अच्छा फैट को ताजा सामन मछली से लें । मैक्केरेल और ट्राउट मछली में भी यह भरपूर होता है। मछली के मामले में विशेषज्ञ माइग्रेन की स्थिति में हफ्ते में कम से कम दो बार मछली खाने की सलाह देते हैं।
  • शाकाहारी के लिए : आप शाकाहारी हैं तो जैतून के तेल, नट्स (बादाम, अखरोट, मूंगफली आदि), अलसी और इसके तेल, कद्दू के बीज, सरसों, सफेद सरसों के तेल से फैट हासिल करें।
  • एक पदार्थ होता है राइबोफ्लेविन। इसे विटामिन बी-2 भी कहा जाता है। कई अध्ययनों में यह पता चला है कि जो लोग माइग्रेन से पीड़ित होते हैं, उनके शरीर में कुछ ऐसी जेनेटिक गड़बड़ होती है, जिससे उनके शरीर की कोशिकाएं रिजर्व ऊर्जा को बरकरार नहीं रख पाती हैं। इस मूल ऊर्जा की कमी ही माइग्रेन का कारण बनती है। राइबोफ्लेविन हमें इन पदार्थों से मिलता है – अनाज : जैसे ओट्स यानी जौ और अन्य अनाजों का दलिया या होल ग्रेन ब्रेड। सब्जियां : मशरूम, ब्रोकोली, पालक और मटर में होता है।
  • यदि आप भोजन से विटामिन बी-2 प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं तो “Riboflavin supplement” ले सकते हैं। विशेषज्ञ एक दिन में इसकी 400 मिलीग्राम मात्रा की सिफारिश करते हैं।
  • कई अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों में माइग्रेन या सिरदर्द की समस्या होती है, उनमें मैग्नीशियम का स्तर काफी कम पाया गया है। माइग्रेन का संबंध हार्मोन से भी पाया गया है। एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण ही माइग्रेन की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है। इस दौरान महिलाओं में इस हार्मोन की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति से उबरने में मैग्नीशियम बहुत मदद करता है। मैग्नीशियम निम्नलिखित पदार्थों में अच्छी मात्रा में पाया जाता है- सब्जी : पालक, आलू और कद्दू में। बीज : रामदाना, चौलाई, कद्दू, सूरजमुखी के बीज में | अनाज : ब्राउन राइस, क्विनोआ और साबुत अनाजों में। साबुत अनाज में ओटमील और अनाजों का सामान्य आटा, चोकर आते हैं। साबुत अनाजों में मौजूद फाइबर भी ब्लड शुगर के स्तर को संतुलन में रखकर सिरदर्द से छुटकारा दिलाते है | फल : केला, सेब, संतरा, अंगूर, कीवी, आडू में। नट्स : बादाम में।
  • विटामिन बी-6 के धनी पदार्थों के लेने से माइग्रेन और सभी प्रकार के सिरदर्द की समस्या में लाभ मिलता है। इसके लिए आप इन चीजो के सेवन पर जोर दें – अनाज : चावल और गेहूं का चोकर (ब्राउन राइस और होल व्हीट ब्रेड में भी) में। मसाले : तुलसी, हल्दी, मार्जारम यानी कुठरा, अजवायन, तेजपत्ता, सूखा टैरोगॉन यानी नागदौना, कच्चे लहसुन में। नट्स : पिस्ता, मूंगफली और पहाड़ी बादाम (हेजलनट) में। मांस : जंतु के लिवर में, तूना-सामन-कॉड मछलियों के मांस में | बीज : सूरजमुखी और तिल के बीज में। तरल पदार्थ : गन्ने के शीरे और ज्वार के सिरप में। सब्जी छिलका समेत आलू, पालक, शिमला मिर्च, हरी मटर, ब्रोकोली, एस्परगस, शलगम, रतालु में। फल : केले में।

माइग्रेन में क्या नहीं खाना चाहिए : परहेज  

  • भारी, गरिष्ठ, मिर्च-मसालेदार चीजें न खाएं।
  • तेल या घी में तली, अधिक तीखी, नमकीन, खटाई युक्त चीजें भी न खाएं।
  • कैफीन (कॉफी, चाय में) : जहां तक सिरदर्द का मामला है तो कैफीन की प्रकृति थोड़ी विरोधाभासी है। यह सिरदर्द को बढ़ा सकती है, मगर इसकी नियंत्रित मात्रा लेने से फायदा भी होते देखा गया है। पर अधिक कड़क चाय, कॉफी का अधिक सेवन बिलकुल न करें |
  • अचार, चटनी : इसमें मौजूद पदार्थ माइग्रेन को बढ़ावा देते हैं।
  • सूखे फल : सूखे फलों में सल्फाइट होता है, जो सिरदर्द के मामले में नुकसान करता है।
  • खट्टे फल : खट्टे फलों में टाइरामाइन और हिस्टेमाइन जैसे तत्व होते हैं, जिनका मेल माइग्रेन में नुकसान कर सकता है।
  • पिज्जा के क्रस्ट में मौजूद यीस्ट माइग्रेनमें परेशान कर सकता है। यीस्ट में मौजूद कॉमेरिन नाम का तत्व सिर के लिए समस्या पैदा करता है। यह भी पढ़ें – सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपाय
  • कुरकुरे नमकीन बिस्कुट : इनमें यीस्ट की मौजूदगी गड़बड़ी करती है।
  • प्रोसेस मीट, सुअर का मांस और हॉट डॉग्स : इनमें टाइरामाइन और प्रिजर्वेटिव होते हैं, जो सिर की परेशानी बढ़ाते हैं।
  • बर्गर, कुकीज, भटूरे गोल गप्पे आदि से भी परहेज रखें |
  • खट्टी क्रीम : इसमें चोलाइन नाम का तत्व होता है, जो माइग्रेनकी परेशानी बढ़ा सकता है।
  • फुल क्रीम दूध, पनीर : फुल क्रीम दूध में मौजूद चोलाइन और केसिन जैसे तत्व माइग्रेनमें सिरदर्द को बढ़ा सकते हैं।
  • इसी तरह पनीर भी सिरदर्द की स्थिति में ठीक नहीं है।
  • शराब, सिगरेट या अन्य सभी प्रकार की नशीली चीजो का सेवन भी माइग्रेन के मरीज को नहीं करना चाहिए |
  • चॉकलेट : फिलाइलइथाइलेमाइन, टैनिन और कैफीन जैसे पदार्थ चॉकलेट को सिरदर्द की समस्या में हानिकारक बनाते हैं।
  • प्रोसेस फूड में मौजूद एमएसजी : ज्यादातर प्रोसेस फूड ( जैसे नमकीन, स्नैक्स, चिप्स, सॉस, सूप और कई डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों में) में एमएसजी का इस्तेमाल होता है। एमएसजी का मतलब है मोनोसोडियम ग्लूटैमेट। एमएसजी में मौजूद ग्लूटैमेट माइग्रेन को बढ़ावा देने का काम करता है।

सवाल : कौन-कौन से भोज्य पदार्थ माइग्रेन का दर्द पैदा करने में दोषी पाए गए हैं?

जवाब : भोज्य पदार्थों और माइग्रेन के बीच का यह संबंध बहुत कुछ व्यक्तिगत होता है। सबसे गहरा संबंध उन डिब्बाबंद उत्पादों के साथ देखा गया है जिनमें फूड प्रीजर्वेटिव के रूप में टार्टराजीन, नाइट्रेट या नाइट्राइट डले होते हैं। पूरे पके हुए केले, सिरके में बनी चीजें, सिट्रस फल, बेकरी का खमीर, चाइनीज फूड, रेड मीट, चॉकलेट, चीज, शैरी और रेड वाइन भी तकलीफ पहुंचाने वाले भोज्य पदार्थों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर हैं।

सवाल : चाइनीज फूड खाने से कुछ लोगों को सिर में दर्द क्यों हो जाता है?

जवाब : चाइनीज फूड में अक्सर मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) सॉस मिली होती है। कई रोगियों में यही एमएसजी माइग्रेन के लिए उत्प्रेरक साबित होता है। शरीर में इस के पहुंचने पर मस्तिष्क की धमनियों में अचानक फैलाव पैदा हो जाता है। नतीजतन उनके साथ चल रही तंत्रिकाओं पर दबाव आ जाता है और सिर में माइग्रेन का तूफानी दर्द उठ खड़ा होता है।

सवाल : माइग्रेन से बचने के लिए क्या-क्या उपाय लाभकारी साबित हो सकते हैं?

जवाब : इस बात पर ध्यान दें कि माइग्रेन किन स्थितियों में पैदा होता है। उपवास, टिमटिमाती रोशनी, शोर, टेंशन, थकान, तेज धूप में देर तक रहने और कुछ भोजन जैसे चाईनीज फूड, सिरके में बनी चीजें, अधिक पका हुआ केला और संतरा माइग्रेन को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। कोई कारण पकड़ में आए, तो उससे परहेज बरतें।

सवाल : क्या माइग्रेन में व्रत-उपवास करना स्वास्थ्यवर्धक है?

जवाब : नहीं, अगर मिर्गी, माइग्रेन, गाउट या डायबिटीज हो, तो व्रत-उपवास से बचना चाहिए। उपवास से शरीर में आए जैव रासायनिक परिवर्तनों से मिर्गी और माइग्रेन का दौरा उत्प्रेरित हो सकता है, यूरिक एसिड बढ़ने से गाउट बिगड़ सकता है और डायबिटीज में ब्लड शुगर का संतुलन खराब हो सकता है।

सवाल : माइग्रेन बार-बार परेशान करे तो क्या उपाय करने चाहिए?

जवाब : किसी न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेकर नियम से माइग्रेन-रोधी दवा लें। बहुत संभव है, दवा से माइग्रेन के दौरे थम जाएं। 6-8 महीनों तक नियमित दवा लेने पर इस बात की 60-65 प्रतिशत संभावना होती है कि माइग्रेन के दौरे होने बिल्कुल बंद हो जाएं। जिन 35-40 प्रतिशत रोगियों का रोग पूरी तरह नहीं मिटता, उनमें भी दर्द की तीव्रता, अटैक की कुल अवधि और बार-बार दर्द उठने की प्रवृति पहले के मुकाबले घट जाती है।

सवाल : माइग्रेन होने पर घर पर क्या उपचार किया जा सकता है?

जवाब : जैसे ही दर्द शुरू हो वैसे ही, पेरासिटामोल, निमूलिड या ब्रुफेन जैसी कोई दर्द-निवारक दवा ले लें। शांत भाव से बिस्तर पर लेट जाएं, सिर पर पट्टी बांध लें, कमरे में अंधेरा कर लें और आराम करें। महीने में चार बार से अधिक दर्द उठे तो डॉक्टरी सलाह से माइग्रेन-निरोधक दवा शुरू कर दें। आप चाहे तो ये (माइ-ग्रेन के घरेलू इलाज के उपाय) भी आजमा सकते हैं यह अधिक फायदेमंद हैं क्योंकि इनके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते है |

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