डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन : तरीका, सावधानी, साइड इफ़ेक्ट

पिछले पोस्ट में हमने रक्त से शुगर की मात्रा कम करने और कंट्रोल करने के लिए टिप्स बताये थे जिसमे मुख्य तौर पर सही खानपान और व्यायाम तथा योग के बारे में बताया था | इस पोस्ट में हम Insulin Dependent Diabetes में प्रयोग होने वाले इंसुलिन पेन के उपयोग से सम्बंधित जानकारी देंगे जिसमे यह बताया जायेगा की इंसुलिन कितने प्रकार के होते हैं ? यह कैसे बनते है ? इसकी आवश्यकता क्यों है ? इसको कैसे लगाना चाहिए ? इसको लगाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ? इसकी ज्यादा मात्रा से क्या समस्या हो सकती हैं? इसके क्या साइड इफ़ेक्ट होते हैं? और अंत में Diabetes के उपचार में काम आने वाली गोलियों के बारे में भी जानेगें |

यदि आपको Insulin निर्भर मधुमेह हो गया है, तो फिर ज्यादातर मामलो में जीवन भर Insulin लेते रहना पड़ता है, आपकी जरूरत के अनुसार हो सकता है की आपकी इंसुलिन की मात्रा को शायद कम या ज्यादा करना पड़े। यह बहुत-सी चीजों पर निर्भर होता है, जैसे आप कितने अस्वस्थ हैं या जब आपने इंसुलिन लेना शुरू किया था, उस समय आप जितना घूम-फिर सकते थे उसके मुकाबले अब आप उतना कर सकते हैं या नहीं। यदि आपको बिना इंसुलिन निर्भर Diabetes हो तो आपका डॉक्टर शुरू में आपका इलाज गोलियों से ही करने की कोशिश करेंगे अगर गोलियों से आपके खून से ग्लूकोज़ (शक्कर) मात्रा पर नियंत्रण न हो सके, तो आपका डॉक्टर आपको इंसुलिन का सेवन करवाते है । Diabetes के ज्यादातर रोगियों को एक बार Insulin लेना शुरू करने के बाद यह हमेशा लेनी पड़ती है।

इंसुलिन के प्रकार :

  • शीघ्र प्रभाव वाली (एनेलॉग) इंसुलिन : जैसे लिस्प्रो और नोवोरैपिड । इस प्रकार की इंसुलिन का खाना खाने से 5 मिनट पहले Injection लगाया जाता है, जिसका असर दो से लेकर पांच घंटों तक रहता है। इसका प्रयोग ज्यादा समय तक असर पाने के लिए किया जाता है।
  • कम समय तक असर करने वाली इंसुलिन : इसे खाना खाने से 15-30 मिनट पहले लेते हैं और इसका असर 2 से लेकर छः घंटों तक रहता है। इसका प्रयोग ज्यादा समय प्रभावशाली रहने वाली इंसुलिन के साथ किया जाता है।
  • मध्यम और दीर्घकालिक प्रभाव वाली इंसुलिन का असर कई घंटों तक रहता है। इस प्रकार की इंसुलिन का असर अलग-अलग समयों तक रहता है, इसलिए आपका डॉक्टर आपको बताएगा कि आपके लिए कौन से प्रकार की इंसुलिन सही है। इनका प्रयोग ज्यादातर कम समय के लिए असरकारक इंसुलिनों के साथ किया जाता है।
  • लंबे समय तक असर दिखाने वाली इंसुलिन का प्रयोग आमतौर पर हर रोज एक बार किया जाता हैं क्योंकि इसका असर लम्बे समय तक रहता है। इसका प्रयोग कम समय वाली इंसुलिन के साथ किया जाता है। इसका निर्णय आपका डॉक्टर करेगा कि आपकी आवश्यकता के अनुसार किस-किस प्रकार की इंसुलिन को मिलाकर प्रयोग करना चाहिए और वही आपको बताएगा कि आपको दिन के अलग-अलग समयों पर कितनी मात्रा में इंसुलिन लेनी होगी।

इंसुलिन पेन (Insulin pens) के उपयोग की विधि :

इन जगहों का उपयोग किया जा सकता है : –

  • ऊपरी बांहों का पिछला भाग
  • पेट (नाभि के आसपास)
  • जांघों का अगला और बगल का भाग
  • कमर के ऊपर की पीठ
  • और नितम्ब (Buttocks) पर

इंसुलिन इंजेक्शन लेने से पहले इन बातों ख्याल रखें :

  • पिछले इंजेक्शनों से 1 इंच (54 से.मी.) दूर रहें।
  • अपनी नाभि या जख्मों से 2 इंच (08 से.मी.) दूर रहें।
  • उन जगहों का उपयोग न करें जिनमें खरोंच, लाल त्वचा या एलर्जी और सूजन हो।
  • शरीर पर इंजेक्शन अलग-अलग जगह पर लगायें |
  • इंजेक्शन की एक्सपायरी तिथि को जरुर चैक कर लें |
  • ज्यादा ठंडी इंसुलिन का प्रयोग ना करें इसे समान्य तापमान होने पर ही प्रयोग करें |
  • सबसे पहले त्वचा को अल्कोहल पैड से साफ करें।
  • अल्कोहल को हवा से सूखने दें।
  • पेन से ढक्कन हटाएं।
  • अब आप पेन में इंसुलिन देख सकते हैं।
  • यदि आप धुंधले इंसुलिन का उपयोग कर रहे हैं, तो इंसुलिन को मिलाने के लिए पेन को अपने हाथों के बीच धीरे-धीरे हिलाएं।
  • पेन के उस सिरे को साफ करने के लिए अल्कोहल का उपयोग करें, जहां सुई घूमती है।
  • सुई के ढक्कन को हटा दें।
  • सुई को पेन पर कस दें। यह अच्छी तरह लगी होनी चाहिए। पर यह बहुत अधिक सख्त नही होनी चाहिए।

इंसुलिन पेन से हवा निकालने के लिए :

  • सुई से ढक्कन हटा लें।
  • खुराक के डायल को 2 यूनिट पर करें। या जितनी यूनिट लेनी हैं सेट करें |
  • पेन को इस तरह पकड़ें जिससे कि सुई हवा में ऊपर की तरफ हो ।
  • हवा को हटाने के लिए पेन के सिरे को धकेलें।
  • सुई की नोक पर इंसुलिन की एक बूंद देखें। आपको यह काम तब तक दोहराना होगा, जब तक आपको सुई पर बूंद दिखाई नहीं दे जाती।
  • इंसुलिन की अपनी खुराक निर्धारित करने के लिए डायल को घड़ी की दिशा में तब तक घुमाएं जब तक आपको अपनी इंसुलिन खुराक की संख्या दिखाई न दे जाए।

इंसुलिन इंजेक्शन लगाने का तरीका :

insulin injection lagane ka tarika side effects- इंसुलिन इंजेक्शन : लगाने का तरीका, सावधानी और साइड इफ़ेक्ट

इंसुलिन इंजेक्शन : लगाने का तरीका

  • जगह की त्वचा पर चिकोटी काटें और एक हाथ से पकड़ें।
  • सुई को तेज़ गति से त्वचा में सीधे डाल दें। सुई पूरी तरह से आपकी त्वचा में होनी चाहिए।
  • अपने अंगूठे का उपयोग करते हुए पेन के सिरे को तब तक धीरे-धीरे धकेलें, जब तक पूरी इंसुलिन अंदर न पहुंच जाए।
  • यह सुनिश्चित करें कि इंसुलिन धकेलने से पहले सुई पूरी तरह से त्वचा में हो।
  • त्वचा की चिकोटी को अब छोड़ दें।
  • सुई को बाहर खींच लें। उस जगह पर अपनी उंगली एक मिनट तक रखें |
  • सुईं को सीधी 90 डिग्री के कोण से बाहर निकाल लें और उस जगह पर अपनी ऊँगली एक मिनट तक रखें। रगड़े नहीं |
  • पेन से सूई हटा लें। इसे अपने सुई फेंकने वाले डस्ट बिन में फेंक दें।
  • अगर आप सिरिंज का इस्तमाल करते हैं तो डिस्पोसेबल सिरिंज का ही इस्तमाल करें
  • अपने इंसुलिन पेन पर फिर से ढक्कन चढ़ा दें।

इंसुलिन और नई रिसर्च :

  • फिलहाल इंसुलिन को सिर्फ इंजेक्शन के जरिए ही शरीर में पहुंचाया जाता है। शोधकर्ता अब मुंह से सेवन कर सकने वाली इंसुलिन तैयार करने में लगे हैं क्योंकि सर्वे से पता चला है कि बहुत सारे लोग इंजेक्शन लेने से डरते हैं।
  • जल्द ही डाइबिटीज़ से पीड़ित लोगों को बार-बार इंसुलिन का इंजेक्शन नहीं लेना होगा और इसके बजाय गोली खाने से ही काम चल जाया करेगा।
  • इन्सुलिन कैसे बनता है ? आमतौर पर इंसुलिन दो जानवरों की “Pancreases” से लेकर बनाई जाती है जो भारत में पहले से ही काफी विवादित मुद्दा रहा है ।
  • भारत में कुछ समुदाय के लोगों को ये इंसुलिन मजबूरी में लेनी पड़ रही थी क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी हैं और ज्यादातर लोग मांस नहीं खाते हैं । अब एक भारतीय दवा कंपनी ने मधुमेह यानी डाइबिटीज़ के मरीजों के लिए एक इंसुलिन बनाई है जिसके बारे में यह दावा कर रही है कि यह एशिया की पहली शाकाहारी इंसुलिन है। इस इंसुलिन का निर्माण न सिर्फ कंपनी के लिए, भारत के लिए भी एक तकनीकी उपलब्धि है। कंपनी का दावा है कि यह इंसुलिन खमीर यानी यीस्ट से बनाई जाती है।हालाँकि इसकी जाँच होना बाकि हैं |

इंसुलिन की ज्यादा मात्रा से खतरा और साइड इफ़ेक्ट :

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि डाइबिटीज़ पर नियंत्रण रखने वाली इंसुलिन की सामान्य से ज्यादा मात्रा किसी व्यक्ति के लिए पैंक्रियाज के कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है।
  • अमरीका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान ने नए शोध में पाया है कि डाइबिटीज़ में ली जाने वाली इंसुलिन और हार्मोन को रोकने के लिए बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • लगातार इंजेक्शन लेने से त्वचा पर संक्रमन और एलर्जी हो सकती है |
  • खान-पान की स्वस्थ आदतें और संतुलित रहन-सहन से पैंक्रियाज के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • डाइबिटीज़ में लंबे समय तक दवाइयों को लेना मजबूरी है, नहीं तो मधुमेह और परेशान कर सकता है। इसके अलावा इसकी मात्रा कम करने से भी फर्क नहीं पड़ता है। यह भी पढ़ें – शुगर कम करने के उपाय -Diabetes Control Tips

मधुमेह का गोलियों से इलाज :

गोलियां आपके Diabetes को ठीक नहीं करेंगी। गोलियों से सिर्फ आपके खून में ग्लूकोज़ की मात्रा पर कंट्रोल करना संभव होता है। साथ ही आपको Diabetes के लिए बताया गया भोजन और सही डाइट चार्ट के अनुसार अपना खान पान चुनना चाहिए और व्यायाम भी करते रहना चाहिए, क्योंकि इनसे आपकी गोलियां ज्यादा असरकारक होंगी हैं। देखें यह पोस्ट – डायबिटीज डाइट चार्ट- मधुमेह आहार तालिका

  • यदि आप अपने Diabetes के इलाज के लिए गोलियां लेते हैं, तो संभव है। इनकी मात्रा समय-समय पर बदली जाए। आपके लिए यह आवश्यक है कि आप अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलते रहें और जांचते रहें कि क्या आप जितनी मात्रा में गोलियां ले रहे हैं, वह आपके लिए ठीक है या नहीं। शुगर लेवल टेस्ट के लिए वे शायद आपके पेशाब और खून की जांच भी करें, ताकि वे यह जान सकें कि आपके मधुमेह को ठीक से कंट्रोल करने में कितनी कामयाबी मिली हैं | यह भी पढ़ें – डायबिटीज के उपचार के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे
  • Diabetes के इलाज की गोलियां कई प्रकार की होती हैं, जो अलग- अलग तरीकों से काम करती हैं : सल्फोनिल्यूरियाज़ से आपके पैंक्रियाज़ में ज्यादा इंसुलिन बनता है। ज्यादातर वे लोग इसका सेवन करते हैं जिनका वजन ज्यादा नहीं होता। इन गोलियों के कारण यह हो सकता है की साइड इफ़ेक्ट के चलते आपको उलटी ,जी मिचलाने और त्वचा पर खुजली, लाल दाने की समस्या पैदा हो जाये |
  • परंतु ज्यादातर मामलो में ये सभी साइड इफ़ेक्ट कुछ समय बाद समाप्त हो जाती है। इनका एक और असर ये होता है कि आपके खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत कम हो सकती है | हाइपोग्लाइसीमिया– इन गोलियों से आपका वजन बढ़ सकता है।
  • बिगुआनाइड्स (मेटफेर्मिन) से शरीर में नया ग्लूकोज़ बनना बंद हो जाता है और आपके शरीर की इंसुलिन बेहतर काम करती है। इस गोली से आपको मतली हो सकती है और बार-बार टॉयलेट जाना पड़ सकता है। बेहतर होगा कि आप ये गोली भोजन के साथ लें।
  • आपका डॉक्टर आपके Kidney and liver की जांच करेगा, क्योंकि ये गोलियां उन पर असर डाल सकती हैं। प्रेडियल ग्लूकोज़ रेगुलेटर्ज़ (रपाग्लिनाइड और नेटेग्लिनाइड) की शीघ्र असर वाली होती हैं। लेकिन इनका असर उनसे कम रहता है। इनका सेवन भोजन के समयों पर किया जाता है। शायद इनसे आपको मतली होने लगे और त्वचा पर खुजली हो।
  • इन गोलियों के कारण सिर में दर्द ही सकता है और ये शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ को जमा रखती हैं।
  • एकरबोज़ की गोलियों का कार्य होता है स्टार्च वाले भोजन जैसे चपाती, चावल, डबल रोटी आदि के खून में प्रवेश के द्वारा पैदा होने वाली कैलोरी की गति को कम करना होता है । पढ़ें यह भी – डायबिटीज में क्या खाए और क्या नहीं-31 टिप्स
  • जैसे-जैसे विज्ञान व टेक्नालॉजी के क्षेत्र में प्रगति हो रही है, वैसे-वैसे ऐशो आराम के साधनों में भी वृद्धि हो रही है। इसलिए लोग शारीरिक श्रम से कतराने लगे हैं। व्यायाम की कमी और आज की आपाधापी भरी तनावपूर्ण जिंदगी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर मधुमेह और ह्रदय रोग जैसी बीमारियों काफी प्रहार किया है। इसी तरह खानपान की गलत आदतों के कारण भी लोग पुराने समय की तुलना में अब कहीं ज्यादा बीमार रहने लगे हैं। लेकिन आप इस स्थिति को बदलकर आप स्वास्थ्य निवारक देखभाल Preventive Health Care Tips लेकर लंबी उम्र तक स्वस्थ व सदाबहार बने रह सकते हैं, बशर्ते कि आप अनुशासन के साथ स्वास्थ्य सम्बंधी इन सुझावों पर अमल करें। क्योंकि रोगों से बचाव ही इसका सबसे बेहतर इलाज हैं |

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Comments

  1. By Samir Bhardwaj

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