हाइपोग्लीमिया में भोजन : खून में शुगर की कमी के मरीजो का डाइट चार्ट

खून में शुगर की कमी का कारण है शर्करा के चयापचय की क्रिया में गड़बड़ी। यह एक ऐसी अवस्था है, जिसमें अग्न्याशय (पाचक ग्रंथि) द्वारा ज्यादा मात्रा में इंसुलिन का निर्माण होता है, जिसकी वजह से रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) की मात्रा कम हो जाती है। रक्त में शर्करा की कमी की शिकायत को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘हाइपोग्लीमिया’ कहते हैं। हाइपोग्लीमिया की शिकायत कई बार स्वस्थ लोगों को भी हो सकती है, खासतौर पर कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन करने के कुछ घंटों बाद | कुछ कमजोर बच्चों के जीवन के कुछ शुरुवाती दिनों में तो इसकी शिकायत आमतौर पर देखी जाती है। इसलिए स्वस्थ बने रहने के लिए हाइपोग्लीमिया में भोजन का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए |

ब्लड में शुगर लेवल 70 mg/dl या इससे कम हो जाने को लो ब्लड शुगर या हायपोग्लायसीमिया कहा जाता है | हाइपोग्लीमिया एक गंभीर शिकायत है। इसमें दिमाग ठीक तरह से काम नहीं करता, जब ग्लूकोज की मात्रा खून में बहुत कम हो जाती है। शरीर के अन्य भागों की तरह दिमाग को भी पोषण हमारे भोजन से मिलता है; लेकिन दिमाग सिर्फ कार्बोहाइड्रेट से बनी शुगर को ही ग्रहण करता है। शरीर के अन्य हिस्सों की तरह दिमाग ऊर्जा के लिए ग्लूकोज स्टोर नहीं कर पाता है इसलिए उसे लगातार रक्त से ऊर्जा की आवश्यकता होती है। हाइपोग्लीमिया की समस्या यदि बार-बार हो तो इससे स्थायी मानसिक परिवर्तन भी हो सकता है। लक्षण – दो भोजनों के बीच मीठी चीजों को बार-बार खाने की इच्छा होना इसका पहला लक्षण है। जब रक्त में शुगर की मात्रा गिर जाती है तो बहुत पसीना आता है, धड़कन बढ़ जाती है, नर्वसनेस होती है, थकान होती है और सिर में दर्द होता है। अगर कई घंटों तक लगातार इस रोग के मरीज को भोजन नहीं दिया जाए तो वे तनावग्रस्त हो जाते हैं। अगर तुरंत उपचार के उपाय नहीं किए जाएँ तो मरीज को या तो बहुत नींद आएगी या फिर वह अचेत हो जाएगा।

हाइपोग्लीमिया में भोजन : हाइपोग्लीमिया में क्या खाना चाहिए

रक्त में शर्करा की कमी हाइपोग्लीमिया में भोजन : खून में शुगर की कमी के मरीजो का डाइट चार्ट

हाइपोग्लीमिया में डाइट

  • आमतौर पर हाइपोग्लीमिया में भोजन के लिए उच्च प्रोटीनयुक्त भोजन खाने की सलाह दी जाती है, जो कि सही नहीं है। इससे अस्थायी रूप से स्थिति पर नियंत्रण तो पाया जा सकता है, लेकिन कई मामलों में यह हानिकारक है। लगातार अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन के सेवन से हृदय रोग की शिकायत हो सकती है, गाँठों में दर्द हो सकता है, गुरदे खराब हो सकते हैं और कैंसर भी हो सकता है।
  • हाइपोग्लीमिया में भोजन को तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है-
  • ) अनाज, बीज और फली
  • ) सब्जियाँ तथा
  • ) फल, दूध व दूध से बनी चीजें और वनस्पति तेल।
  • हाइपोग्लीमिया में भोजन के रूप में अनाज, बीज और फलियों की मात्रा अधिक होनी चाहिए। बीज और फलियों को कच्ची अवस्था में ही, जबकि अनाज को पकाकर खाना चाहिए।
  • पके हुए अनाज धीरे-धीरे पचते हैं और खाने के छह से आठ घंटे बाद ये रक्त को ग्लूकोज और पोषण देते रहते हैं। इससे रक्त में शुगर की मात्रा लंबे समय तक बनी रहेगी।
  • हाइपोग्लीमिया में भोजन लेते समय मरीज को दिन भर में तीन या चार बार खाने की अपेक्षा छह से आठ बार थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए।
  • ब्लड में शुगर की मात्रा कम होने पर हर 3 घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाएं। अगर आप किसी कहीं व्यस्त हैं तो आप बिस्कुट या कुछ हल्का- फुल्का खा सकते हैं। कहीं दूर जाने पर अपने साथ खाना जरूर रखें। ज्यादातर घर का बना हुआ खाना ही खाएं।
  • दो भोजनों के बीच कच्ची फलियों, सूरजमुखी या कद्दू के बीज खाना और दूध, मट्ठा या फलों का जूस पीना हाइपोग्लीमिया में भोजन चार्ट में शामिल करना फायदेमंद रहेगा।
  • सारे परिष्कृत खाद्य पदार्थ, सफेद शर्करा, सफेद आटा और इनसे बनी चीजों को भोजन से पूरी तरह निकाल दें। शराब और कोल्ड ड्रिंक से बचें। नमक कम-से कम खाएँ, क्योंकि इसकी अधिकता से रक्त में पोटैशियम की मात्रा बढ़ती है, जिससे चीनी की मात्रा में कमी होती है।
  • हाइपोग्लीमिया में जो सब्जियाँ खाई जा सकती हैं, उनके नाम हैं- चुकन्दर, गाजर, खीरा, एग प्लांट, मटर, मूली, टमाटर, पालक, बींस और बेक किए आलू, मशरूम, प्याज, बैंगन, टमाटर, ब्रसेल्स |
  • हाइपोग्लीमिया में भोजन के रूप में आप उबले अंडे, ब्राउन ब्रेड, जामुन, शहद, और दलिया, अखरोट आदि का भी सेवन कर सकते है |
  • दालचीनी (cinnamon) का सेवन जरुर करें |
  • इन फलो का सेवन कम मात्रा में करें- सेब, नाशपाती, बेरी, अनन्नास और खट्टे फल |
  • कम रक्त शर्करा की स्थिति में विटामिन ‘सी’, ‘ई’ और ‘बी’ कॉम्प्लेक्स फायदेमंद होता है। विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ से ग्लोकोज चयापचय ठीक रहती है।
  • पैंटाथेनिक अम्ल और विटामिन ‘बी’ से एड्रीनल्स बनते हैं, जो आमतौर पर इस रोग से पीड़ित मरीज में खप जाते हैं। विटामिन ‘ई’ की मदद से मांसपेशियों और तंतुओं में ग्लाइकोजेन संचित हो पाता है। इस बीमारी के मरीज को विटामिन ‘सी’ की बड़ी मात्रा यानी 2,000 से 5,000 मिलीग्राम, ‘बी’ 50 मिलीग्राम और विटामिन ‘ई’ 1,600 आई.यू. प्रतिदिन लेनी चाहिए।
  • कम शुगर वाले मरीजों के लिए उचित आराम के साथ-साथ मन का शांत होना भी जरुरी है। नसों के तनाव और अन्य तनावों को ध्यान अथवा योग के माध्यम से दूर करना चाहिए। वक्रासन, भुजंगासन, सर्वांगासन और शवासन जैसे यौगिक आसनों से इस बीमारी में फायदा होता है। यह भी पढ़ें – हाइपोग्लाइसीमिया क्या है, उपचार, कारण तथा शुगर लेवल कम होने पर बचाव के टिप्स

हाइपोग्लीमिया में भोजन तालिका

  • सुबह जागने पर- एक गिलास ताजे फल का रस। मीठे रसों में पानी मिला कर पीना चाहिए।
  • सवेरे के नाश्ते में फलियाँ, बीज, फल और मट्ठा।
  • नाश्ते और दिन के भोजन के बीच में फल, फलों का रस या टमाटर का रस।
  • दिन का भोजन तेल में पके अनाज, सब्जियों का सलाद, साथ में दही, गेहूँ की दो चपातियाँ और मक्खन।
  • दोपहर बाद एक गिलास सब्जी या फलों का रस या फलियों से बना कोई स्नैक।
  • रात का भोजन सब्जियों का कच्चा सलाद, साथ में पकी हुई सब्जी, एक या दो स्लाइस, अनाज से बना ब्रेड, पनीर और मट्ठा आदि हाइपोग्लीमिया में भोजन करते समय शामिल करें
  • सोने से पहले एक गिलास दूध या छाछ।

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